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क्या रामायण का उत्तर कांड प्रक्षिप्त है….??


क्या राम ने सीता का त्याग किया था?शुद्र तपस्वी शम्बुक वध क्यों??प्रभु श्री राम के सन्दर्भ में कुछ भ्रांतियां अर्थात गलत बाते फैलाई गयी हैं उनका तार्किक निवारण..कृपया अपना कुछ मिनट दे कर इसे समझे जिससे आप धर्मद्रोहियों के झांसे न फसने पाएंगे..
भ्रान्ति: क्या श्रीराम जी शूद्र विरोधी थे? क्या उन्होने शंबूक का वध किया था ? क्या उन्होने गर्भवती सीता को छोड़ दिया था? क्या उनका या उनके भाइयों का लवकुश से युद्ध हुआ था? क्या सीता जी धरती मे समा गई थी??


निवारण: आजकल 2 पुस्तकें रामायण के नाम से जानी जाती है……..
1.वाल्मीकि रामायण 2.तुलसीदास जी की रामचरित मानस। इसमे से वाल्मीकि रामायण श्रीराम जी के समय मे लिखी गई है। आजकल प्राप्त वाल्मीकि रामायण मे 7 काण्ड (Chapter) हैं। अंतिम काण्ड उत्तर काण्ड है।
तपस्वी शंबूक का वध , लवकुश से युद्ध तथा गर्भवती माता सीता जी का त्याग दोनों इसी काण्ड मे आते है। परंतु सच्चाई यह है कि महर्षि वाल्मीकि ने जो रामायण लिखी थी उसमे 6 काण्ड ही थे। सातवा उत्तर काण्ड बाद मे (17 वी -18 वी शताब्दी मे ) मिलाया गया है। क्योकि उत्तर काण्ड महर्षि वाल्मीकि जी की रचना नहीं है इसलिए श्रीराम जी को तपस्वी शम्बूक का हत्यारा नहीं कहा जा सकता..ऐसा भ्रम फैलाया गया की श्री राम शम्बूक को पुष्पक विमान से ढूंढ कर उसका वध करते हैं जबकि
श्री राम का पुष्पक विमान लेकर शम्बूक को खोजना एक और असत्य कथन हैं क्यूंकि पुष्पक विमान तो श्री राम जी ने अयोध्या वापिस आते ही उसके असली स्वामी कुबेर को लौटा दिया था-सन्दर्भ- युद्ध कांड 127/62
प्रभु श्री राम को गर्भवती स्त्री माता सीता जी के त्याग का अपराधी भी नहीं कहा जा सकता. अतः सनातन धर्म के आदर्श मर्यादा पुरूषोंत्तम श्रीराम जी को बदनाम करने के लिए किसी दुष्ट ने ये उत्तर काण्ड बाद में मिलाया है.

इसके निम्नलिखित प्रमाण हैं।


1- “THE ILIAD OF THE EAST” “दी इलियड ऑफ दी ईस्ट” रामायण का इंगलिश मे संक्षिप्त अनुवाद है जो FREDERIKA RICHARDSON ने किया था। इसे MACMILLAN AND CO ने 1870 मे प्रकाशित किया था। इसमे केवल पहले 6 काण्डों का ही विवरण है। यदि इस अनुवादक के सामने उत्तरकाण्ड होता तो क्या वह उत्तरकाण्ड का अनुवाद न करता।


2 RALPH T. H. GRIFFITH ने 1874 में रामायण का इंगलिश मे अनुवाद किया है। इसे लंदन मे TRUBNER AND CO ने तथा भारत मे बनारस मे Lazarus And Co ने छापा था। इसमे भी पहले 6 भागों का अनुवाद है। युद्धकाण्ड के अंत मे अनुवादक उत्तरकांड के विषय मे लिखता हैं –
The Ramayan ends epically complete, with the triumphant return of Rama and his rescued queen to Ayodhya and his consecration and coronation in the capital of his forefathers. Even if the story were not complete, the conclusion of the last canto of the sixth Book evidently the work of a later hand than Valmiki’s, which speaks of Rama’s glorious and happy reign and promises blessings to those who read and hear the Ramayan, would be sufficient to show that, when these verses were added, the poem was considered to be finished.
अर्थात एक महाकाव्य के रूप मे रामयण विजयी राम की अपनी रानी को बचाने और अपने पूर्वजो की राजधानी मे राज्याभिषेक के साथ पूरी हो जाती है। छठे अध्याय के अंतिम खंड मे वाल्मीकि राम के गौरवशाली और खुशाहाल शासन की बात करते हैं और उनके लिए आशीर्वचन कहते हैं जो रामायण को पढ़ते और सुनते हैं। इससे यह निश्चित हो जाता है कि महाकाव्य यहाँ समाप्त हो जाता है। उत्तरकाण्ड बाद की रचना है जो किसी दूसरे द्वारा लिखी गई है।


3 – वाल्मीकि रामायण की संस्कृत में 3 टीका मिलती है. उसमे से सबसे मुख्य तथा पुरानी टीका श्री गोविन्दराज जी की है. गोविन्दराज जी ने अपना व् अपने गुरु का परिचय बालकाण्ड में रामयण के आरम्भ में तथा युद्ध काण्ड के अंत में दिया है. बिच में कहीं पर ही अपना परिचय नहीं दिया है. यदि गोविन्दराज जी के सामने उत्तर काण्ड होता तो वह अपना परिचय युद्ध काण्ड ने न देकर उत्तर काण्ड में देते.


4-सन 1900 के आसपास तक जो भी गोविन्दराज की टीका सहित वाल्मीकि रामायण छपी है उनमे उत्तरकाण्ड की टीका नहीं है. परन्तु 1930 के संस्करण में गोविन्दराज की उत्तर काण्ड पर टीका मिलती है.उसके उत्तर काण्ड पर जो टीका दी गई है वह पिछले 6 काण्डों की टीका से बिलकुल अलग है और उत्तर काण्ड को रामायण का हिस्सा दिखाने के लिए बनाई है.


5 भारत में वाल्मीकि रामायण को आधार बना कर कई प्रादेशिक भाषाओं में रामायण लिखी गई है. जैसे कम्ब रामायण (तमिल में), रंगनाथ तेलुगु (तेलुगु में), तोरवे रामायण (कन्नड़ में) तथा तुलसीदास जी की रामचरित मानस (अवधि में). अब हम क्रम से इन पर विचार करते हैं.
1]- कम्ब रामायण – इसका रचना काल लगभग बारहवी शताब्दी है. संस्कृत से भिन्न उपलब्ध भाषाओ में यह सबसे पुरानी रामायण है. इसके लेखक महाकवि कम्बन है. इसकी मूल भाषा तमिल है. अब तक इसके हिन्दी में (पहला अनुवाद 1962में बिहार राजभाषा परिषद् ) कई अनुवाद हो चुके है. इसमें भी बालकाण्ड से लेकर युद्धकाण्ड तक 6 ही काण्ड है. यह भी भगवान् श्रीराम जी के राज्य अभिषेक व् श्री राम जी द्वारा दरबार में सभी के लिए प्रशंसा वचन के साथ पूरी होती है. यह बहुत अधिक वाल्मीकि रामायण से मिलती है. यदि महाकवि कम्बन जी के सामने वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह इसका वर्णन जरुर करते. परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे.


[2] रंगनाथ रामायण – इसका रचना काल लगभग 1380 इस्वी है. इसकी भाषा तेलुगु है परन्तु अब इसका हिंदी में अनुवाद (1961 में बिहार राजभाषा परिषद द्वारा) चुका है. यह रामायण श्रीराम जी के राज्य अभिषेक व् दरबार के दृश्य के साथ पूरी हो जाती है . इसमें बालकाण्ड से लेकर युद्ध काण्ड तक 6 काण्ड है. यदि इसके रचियता के सामने उपलब्ध वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह अवश्य ही उसका उल्लेख करते परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे. *


[3]- तोरवे रामायण – इसका रचना काल लगभग 1500 इस्वी है. इसकी मूल भाषा कन्नड़ है परन्तु अब इसका हिंदी में अनुवाद चुका है. इसके लेखक तोरवे नरहरी जी है. यह रामायण श्रीराम जी के राज्य अभिषेक, सुग्रीव आदि को विदा करना, रामराज्य में सुख शान्ति, दरबार के दृश्य तथा रामायण पढने के लाभ के वर्णन के साथ पूरी हो जाती है . इसमें बालकाण्ड से लेकर युद्ध काण्ड तक 6 काण्ड है. यदि इसके रचियता के सामने उपलब्ध वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह अवश्य ही उसका उल्लेख करते परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे.
कृपया इसे आप सभी से किसी न किसी माध्यम से साझा जरुर करें जिससे धर्मद्रोहियों और भ्रांतियों का उत्तर मिल सके..
जय श्री राम

आशुतोष नाथ तिवारी

राम पर लिखना कठिन हैं….

पहले उसे छला गया । फिर वो वन चला गया ।।
एक वचन की लाज रखने । भाई के सर ताज रखने।।
माँ की ममता छोड़ कर । सारे बंधन तोड़ कर।।
राम पर लिखना कठिन है ।।


न थी लालसा वैभव की । न थी सत्ता की पिपासा ।। रखा ठोकर पर सिंहासन । और दी
पिता को दिलासा ।।
जानते थे वे प्रभु है । और वैभव सारे लघु है।।
सोचो तुम तनिक ये । अवतार लेकर मानव में ।।
आम रहना कितना कठिन है । राम पर लिखना कठिन है ।।

सूखा सकते थे वे सागर। फिर भी उन्होंने हाथ जोड़े।।
जीत लेते लंका को । फिर भी वानर साथ जोड़े।।

राम हो जब दुख ही देखो । सोच कर तुम ख़ुद ही देखो।।
पास हो जब सारी शक्ति। और जिसकी होती हो भक्ति।।
काम करना कितना कठिन है। राम पर लिखना कठिन है ।।
राम पर लिखना कठिन है ।।

Anshu Pathak

पराया हमें वो बताने लगे हैं

इशारे से सब कुछ जताने लगे हैं
मुझे अपना अब वो बनाने लगे हैं।

उठाया है मैने जिन्हें ज़िन्दगी भर,
वही आज मुझको गिराने लगे हैं।

बताते थे ख़ुद कभी यार जो कल
वही आज मुझको बेगाने लगे हैं।

रहेंगे सदा साथ कहते थे जो कल
वही आँख मुझसे चुराने लगे हैं।

न रखते थे नज़रों से ओझल कभी जो
वही आज मुझको भुलाने लगे हैं।

बनाया था हमने जिसे दिल से अपना,
पराया हमें वो बताने लगे हैं।

बसाया था हमने जिसे अपने दिल में,
वही आज नश्तर चुभाने लगे हैं।

अनुज शुक्ल
VMW Team

फुलवाम शहीदों को नमन –अपना वतन चाहिए


न सोहरत न दौलत मुझे अपना वतन चाहिए |
फलता फूलता और मुझे खिलता चमन चाहिए |
न हो दुश्मन कोई न हो अड़चन कोई |
मर सकूँ मै वास्ते वतन तिरंगा कफन चाहिए |
खून शहीदो सींचकर हरा किया गुलशन |
शहीद होने न दे भारत ऐसा नव रतन चाहिए |
अपनी धरती की मिट्टी माथे लगायेंगे हम |
सह सके वार दुश्मन फ़ौलादी बदन चाहिए |
न हो पतझड़ कभी और बहारे मुस्कुराए सदा |
हरी धरती मे बहती गंगा बाँकपन चाहिए |
बढ़े भाईचारा यंहा लोग सारे मिलके रहे |
देश तेरा न मेरा सबका ऐसा मन चाहीए |
न हिन्दू मुस्लिम कोई सब बनके भाई रहे |
न हो दंगा कही देश शांति औ अमन चाहिए |
मै रहूँ न रहूँ हिन्द जिंदाबाद रहे |
शान तिरंगा रहे भारती हिन्द नमन चाहिए |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )-
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
मोब।/व्हात्सप्प्स -9955509286

Propose Day – हमको तुमसे प्यार बहुत है

एक तुम्हारा होना पूरे घर को पावन कर देता है
मन मथुरा काशी बसती है दिल को मधुवन कर देता है
तेरी छुवन से रोम रोम भी जैसे संदल हो जाता है
पानी कब पानी रहता है ये गंगाजल हो जाता है!!

मेरे जीने की खातिर बस इतना सा आधार बहुत है
हमको तुमसे प्यार बहुत है…!!

उजियारा दस्तक देता है और अंधेरा छँट जाता है
नाम तुम्हारा लेते लेते सफर हमारा कट जाता है
पास अगर तुम होती हों तो जैसे सब अच्छा रहता है
साथ तुम्हारे जीवन जी लूं बस इतना ये मन कहता है!!

हाथ पकड़ कर साथ चलूँ मैं इतना सा अधिकार बहुत है
हमको तुमसे प्यार बहुत है…!!

तुम बिन खुशियाँ व्यर्थ है सारी त्योहारों मे बात नही है
चौराहों पर दीप जलें है पर चमकीली रात नही है
भीड़ बहुत है लोग बहुत हैं फिर भी सूनापन लगता है
सूने सूने हम अंदर से सूना घर आंगन लगता है!!

बिना तुम्हारे जीवन जीना लगता अब बेकार बहुत है
हमको तुमसे प्यार बहुत है…!!

कुलदीप सिंह नवाब

पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही सही मायने में श्राद्ध है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

श्राद्ध का अर्थ है, श्रद्धा से जो कुछ दिया जाय

(श्रद्धया दीयते यत् तत् श्राद्धम)

शास्त्रों में मनुष्य के लिए कुल 3 ऋण बतलाए गए हैं-

1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण।

ये तीन प्रकार के ऋण बतलाए गए हैं। इनमें श्राद्ध द्वारा पितृ ऋण उतारना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्य और सुख-सौभाग्यादि की वृद्धि के अनेक यत्न या प्रयास किए, उनके ऋण से मुक्त न होने पर मनुष्य जन्म ग्रहण करना निरर्थक माना जाता है। श्राद्ध से तात्पर्य हमारे मृत पूर्वजों व संबंधियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट करना है। 
दिवंगत व्यक्तियों की मृत्यु तिथियों के अनुसार इस पक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन तिथियों में हमारे पितृगण इस पृथ्वी पर अपने-अपने परिवार के बीच आते हैं। श्राद्ध करने से हमारे पितृगण प्रसन्न होते हैं और हमारा सौभाग्य बढ़ता है। 
शुक्रवार, 13 सिंतबर को और शनिवार, 14 सितंबर को भादौ मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर भाद्रपद मास खत्म हो जाएगा। 15 सितंबर से आश्विन मास शुरू होगा। इस मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है। इन दिनों में पितरों के लिए शुभ काम किए जाते हैं। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि पर होती है, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। 
पुराण में 12 तरह के श्राद्ध बताए गए हैं जो की इस प्रकार है – 
नित्य श्राद्ध – पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं। 
नैमित्तिक श्राद्ध – माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है। 
काम्य श्राद्ध – यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 
वृद्धि श्राद्ध – सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है। 
सपिंडन श्राद्ध – यह श्राद्ध मृत व्यक्तियों को 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है। 
पार्वण श्राद्ध – इस श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है। 
गोष्ठी श्राद्ध – जो श्राद्ध परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं उसे गोष्ठी श्राद्ध कहा जाता है। 
शुद्धयर्थ श्राद्ध – पितृपक्ष में किया जाने वाले यह श्राद्ध परिवार की शुद्धता के लिए किया जाता है। 
कर्मांग श्राद्ध – किसी संस्कार के मौके पर किया जाने वाले श्राद्ध कर्मांग श्राद्ध कहलाता है। 
तीर्थ श्राद्ध – किसी तीर्थ पर किये जाने वाला श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
यात्रार्थ श्राद्ध – जो श्राद्ध यात्रा की सफलता के लिए किया जाता है उसे याश्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
पुष्टयर्थ श्राद्ध – जो श्राद्ध आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाते हो इसे पुष्टयर्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
अखिल भारतीय विद्वत महासभा के प्रवक्ता आचार्य पं शरदचन्द्र मिश्र बताते है की श्राद्ध कर्म मे कुछ ध्यान देने योग्य बातें भी है जिसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है – 
1. श्राद्ध में दौहित्र (कन्या का पुत्र),कुतप काल (दिन के 15 मुहुर्त में आठवां मुहुर्त),और तिल को अत्यन्त पवित्र माना जाता है । 
2. श्राद्ध पक्ष के लिए शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष, पूर्वाह्न की अपेक्षा अपराह्न श्रेष्ठ माना जाता है । 
3. पूर्वाह्न मे ,शुक्ल पक्ष में, रात्रि में, युग्म दिनों में तथा अपने जन्म दिन पर कभी श्राद्ध नही करना चाहिए । 
4. रात्रि में राक्षसी समय माना जाता है अतः रात्रि में श्राद्ध कर्म नही करना चाहिए । 
5. चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करना अशुभ रहता है, जिनकी स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई है, उनका श्राद्ध दूसरे दिन यानि अमावस्या को करना चाहिए, वैसे जो पितृ शस्त्र से मारे गये हैं वे चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं । 
6. चाहें श्राद्ध पक्ष हो या न हो, किसी तीर्थस्थल पर पहुंचते ही सर्वप्रथम स्नान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए । 
7. दोनो संध्यायों के समय श्राद्ध नही करना चाहिए । 
8. दिन के आठवें मुहूर्त (कुतप बेला) में पितरों के लिए दिया गया दान अक्षय होता है ।मध्याह्न काल, चांदी, कुश, गौ, तिल, नेपाल कम्बल और दौहित्र, खंगपात्र- –ये आठ कुतप माने गये है । 
9. दूसरे की भूमि में श्राद्ध नही करना चाहिए ।वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ एवं मन्दिर, ये दूसरे की भूमि नही माने जाते, क्योंकि इन पर किसी का स्वामित्व नही माना जाता है । 
10. श्राद्ध गुप्त रूप से करना चाहिए, प्रदर्शन न करें । 
11. देव कर्म में (यदि चाहें तो) ब्राह्मण की परीक्षा न करें, लेकिन पितृकर्म में यत्नपूर्वक ब्राह्मण की परीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि श्राद्ध में पितरों की तृप्ति तो ब्राह्मणों द्वारा ही होती है । 
12. श्राद्ध में ब्राह्मण को नियन्त्रित करना आवश्यक है जो विना ब्राह्मण के श्राद्ध करता है उसके घर में पितर भोजन नही करते, शाप देकर लौट जाते है ।ब्राह्मणहीन श्राद्ध से मनुष्य महापाप होता है । 
13. यदि श्राद्ध का भोजन करने वाले एक हजार ब्राह्मणों के सम्मुख एक भी योगी हो, तो वह यजमान के सहित सभी ब्राह्मणों का उद्धार कर देता है । 
14. श्राद्ध में जौ, काॅगुनी (टंगुनहिया),गेंहू, धान, तिल, मटर, कचनार, और सरसो का प्रयोग श्रेष्ठ रहता है ।तिल की मात्रा अधिक होने से श्राद्ध अक्षय हो जाता है ।वास्तव में तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करता है ।कुश राक्षसों से बचाता है । 
15. वेदज्ञ एक ब्राह्मण ही यदि श्राद्ध पर भोजन करे तो दस लाख अज्ञानी ब्राह्मणों करवाने के बराबर फल मिलता है । 
16. गुरू, नाना, मामा,भानजा? ससुर, दौहित्र, जामाता, बान्धव, ॠत्विज, एवं यज्ञ कर्ता इन दस को श्राद्ध में अवश्य भोजन कराना चाहिए । 
17. जो काम, क्रोध, अथवा भय के कारण- -पांच कोश (16 किलोमीटर) के भीतर रहने वाले जमाता, बहन तथा भानजे को भोजन नही कराता है एवं दूसरे को भोजन कराया, वहाॅ उसके पितरों के साथ देवता भी अन्न ग्रहण नही करते है । 
18. भानजा तथा भाई- बन्धु मूर्ख भी हो तो भी उसकी अनदेखी नही करनी चाहिए । 
19. जो एक श्राद्ध के अवसर पर आये अतिथि का सत्कार नही करते, उनका यह श्राद्ध का सम्पूर्ण फल नष्ट हो जाता है । 
20. श्राद्ध कर्म में सिर्फ गाय का दूध, दही, घी, काम में लेना चाहिए, परन्तु एक बात ध्यान रहे कि गाय को बच्चा हुए दस दिन से अधिक हो चुका हो । 
21. श्राद्ध कर्म में मित्रों को बुलाकर श्राद्धान्न को मित्रता बढ़ाने का साधन बनाना श्राद्ध के अच्छे फल को नष्ट करता है । स्वर्ण, चाॅदी और ताम्बे के पात्र पितरों को प्रिय है श्राद्ध में चाॅदी का उपयोग, दर्शन और दान पुण्यदायक तो है ही, राक्षसों का नाश करने वाला भी माना जाता है । चाॅदी भगवान शिव के नेत्रों से उत्पन्न होने के कारण पितरों को प्रिय है । 
22. पितरों के लिए चाॅदी के पात्र में सिर्फ जल ही दिया जाय तो वह अक्षय तृप्तिकारक होता है ।पितरों के लिए अर्घ्य, पिण्ड और भोजन के पात्र भी यदि चाॅदी के हों तो और भी श्रेष्ठ माना गया है । 
23. श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाते समय परोसने के बर्तन दोनो हाथों से पकड़ कर लाने चाहिए, एक हाथ से लाया अन्नपात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन लेते है । 
24. ब्राह्मणों को भोजन मौन रहकर और व्यंजनों की प्रशंसा किये वगैर करना चाहिए, क्योंकि पितर तब तक ही भोजन ग्रहण करते हैं जब तक ब्राह्मण मौन होकर भोजन ग्रहण करते है । 
अगर किसी को अपने परिजन की मृत्यु की तिथि सही-सही मालूम ना हो तो इसका श्राद्ध अमावस्या तिथि को किया जाना चाहिए। 
ऐसा विश्वास है कि श्राद्ध से प्रसन्न होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को आयु, धन, विद्या, सुख-संपत्ति आदि प्रदान करते हैं। पितरों के पूजन से मनुष्य को आयु, पुत्र, यश-कीर्ति, लक्ष्मी आदि की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। 

Mobile Addiction – Track & Control

तकनीक के इस दौर में हम दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहते हैं, लेकिन क्या हम इसको आदत भी बनाना चाहते हैं? घर से लेकर ऑफिस तक हमारे हाथ में स्मार्टफोन खेल रहा होता है या ये कहें कि हम उसके हाथ खेले जा रहे होते ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि कहीं आप स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर अपना समय तो बर्बाद नहीं कर रहे हैं? एक रिपोर्ट कहती है कि 80 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स सुबह जागने के 15 से 20 मिनट के भीतर अपने फोन को चेक करते हैं तथा एक दिन मे औसतन 3-4 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करते है वहीं दिन भर मे लगभग 150 बार अपने मोबाइल को अनलॉक करते है। वैसे तो फोन पर टेक्स्टिंग, इंटरनेट सर्फिंग, ईमेल भेजने, एप्लिकेशन को यूज करने और गेम्स खेलने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसमें जरूरत से ज्यादा उपयोग आपकी सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। 

सबसे पहले आप अपने स्मार्ट फोन में YourHour – Phone Addiction Tracker & Controller एप्लिकेशन डाउनलोड करें (लिंक- shorturl.at/bvwH8) आप इस एप्लिकेशन से देखेगे की आप कितना मोबाइल उपयोग करते है , कौन सा एप्प कितनी देर इस्तेमाल करते है फिर आप उस को कम कर सकते है । फिर भी आप इस लत को कम नहीं कर पा रहें है तो ये तरीके अपनाए – 
1. जिस जेब व पर्स के पॉकेट में आप फोन रखते हैं या रखती हैं, उसकी जगह कुछ दिन बदल दें, इससे वह तुरंत आपके हाथों में आने से बचेगा और हो सकता है कि इस बीच आप किसी और काम में व्यस्त हो जाएं। 
2. स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार आपका ध्यान फोन की नोटिफिकेशन बीप बजने पर नहीं जाएगा। यदि किसी को आपसे कोई जरूरी काम होगा तो वह आपको सीधे कॉल कर लेगा। 
3. दिन के कुछ घंटे आप अपना डाटा ऑफ़ रखें यानी कि इंटरनेट बंद रखें। इससे आपका मन बार-बार फोन देखने के लिए नहीं ललचाएगा और बैटरी की भी बचत होगी।

4. अपने फोन को चेक करने का समय निश्चित करें, उसी दौरान आप सभी अपडेट्स देख लें, बार-बार देखने से भी आपके काम की ज्यादा अपडेट्स आ जाएगी, ऐसा तो होने से रहा 
5. पक्का मन बना लें कि सुबह उठते ही कुछ घंटे फोन से दूर रहेंगे और रात को सोने के कुछ घंटे पहले ही फोन को दूर रख देंगे। 
6. जब आप फोन से थोड़ी दूरी बनाकर चलेंगे तो स्वत: ही आपका मन दूसरे पसंदीदा कामों में लगने लगेगा, साथ ही आप कई अन्य तरह की परेशानियों से भी बच जाएंगे।

एम के पाण्डेय निल्को

मोटिवेशनल कहानी

एक लड़का था जो एक ऑफ़िस मैं 8 घंटे की डूटी करता 9 – 5 की। मगर रोज 8 बजे  office पहुँच जाता और देर रात तक काम करता रहता। 

एक दिन एक साथी ने पूछा, क्यूँ ? इतना काम करते हो ? कोई ओवर टाइम तो मिलता नहीं। 
वो बोला 8 घंटे डूटी तो सैलरी के लिया करता हूँ , बाक़ी के घंटे तरक़्क़ी, काम की बारीकी को सीखने और आगे बढ़ने के लिए करता हूँ।
काम घड़ी देख के मत करो । जब तक जिम्मेदारी पूरी ना हो तब तक करो। 
शुभ दिन
एम के पाण्डेय निल्को
Managing Worker – VMW Team 
| Research Scholar | छुट्टा आलोचक |
कलम, कैमरा और कम्प्यूटर | http://www.vmwteam.in

तुलसीदास जयंती पर होगा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान, भजन संध्या और पौधारोपण

जयपुर , सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान द्वारा दिनांक 7 अगस्त 2019 को गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी । इस दौरान सोनाबाड़ी स्थित हनुमान मंदिर पर भजन संध्या और पौधारोपण किया जाएगा तथा साथ जी समाज वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान भी करेगा । सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान के अध्यक्ष श्री बलराम मिश्र ने बताया की राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त कर चुके डॉ रामकिशोर शुक्ल भगवान राम और उनके अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास पर व्याखान देगे । समाज के महासचिव श्री ओ पी त्रिपाठी ने बताया की इन सब के साथ मधुर संगीतमय वाणी मे सुन्दरकाण्ड का भी आयोजन किया जाएगा तथा सभी रामभक्त इसका रस स्वादन करेंगे।

मोदीजी को बधाई

मोदीजी को बधाई
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     बहस बहुत बधाई .लोक सभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के लिए .  वैसे मोदी को समर्थन करने के नाते इस देश की बहुसंख्यक जनता को बहुत गालियाँ , अपशब्द सुनने पड़े हैं. चोचलेबाज विपक्षियों के . अंधभक्त कहकर अपमानित किया गया . सच्चे हिन्दुस्तानियों को देशभक्ति के लिए विपक्षी जलील करते रहे . और सभी मोदी के गुणों की समर्थक जनता मौन-मुखर दोनों तरह से सहती रही है । एक महिला नेता  आपको थप्पड़ (प्रजातंत्र का )  मारने की कहकर सरेआम हिंसक और असंसदीय हुई थी । अब जनता ने सबको एक साथ जवाब दे दिया है ।  “चौकीदार चोर है” कहनेवाले की बोलती बंद करदी है ।  आप के हर कार्य पर सही का ठप्पा लगाया है इसलिए बधाई ।

.               पुलवामा काण्ड पर घेरने की साजिश करने वाले , पाकिस्तान के भरोसे मोदी को हराने की साजिश करने वाले , जनता को भ्रम मे डालने की कोशिश करने वालों को जनता ने घेरे मे रख दिया है ।रफाल पर जनता  को बर्गलाने की साजिश विपक्ष के काम नहीं आयी . जनता ने अंततः मोदी पर भरोसा किया ।

         देश के विखण्डन , भेदभाव पूर्णव्यवहार, और सरकार को चलने मे जगह-जगह रोड़ा अटका कर जनता के बीच झूठ फैला कर येनकेनप्रकारेण सत्ता पर काबिज होने के लिए  सेना, मान. सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और ईवीएम  को दोष देने वालों की जनता ने एक न चलने दी .
आगे के लिए यह सभी के लिए लेसन हैं । जातिवाद वर्गवाद की दीवार तोड़कर जनता ने मोदी को अपनाया है ।अत: आगामी पाँच वर्षों के लिए पुनः एक सक्षम सरकार  को ध्यान में रखकर मोदी जी को कोटिश: बधाइयाँ । 
शुभमस्तु ।

                     —  —  –हरि शरण ओझा ।

शैक्षणिक उपलब्धि का नया चलन 500/500

मेरी जानकारी मे पहले ऐसा नहीं था । अब शिक्षा बोर्डों मे पूर्णांक 500/500 देकर या इसके आस-पास अंक देकर पास करने का कम्पटीशन शुरू हो गया है । यह शिक्षा के बाजारीकरण का नया रूप है । हो सकता है कि ऐसा रिजल्ट देने वाले बोर्ड इसे अपनी भी उपलब्धि मानकर इतरा रहे ह़ों ।जबकि मेरी दृष्टि में यह  सम्बन्धित शिक्षा बोर्डों की पराजय है। पेपरसेटर और माडरेटर का सेट किया हुआ अवैज्ञानिक पेपर का प्रतिफल है या फिर शैक्षणिक प्रक्रिया में ग्यान और विषयवस्तु को केवल पूर्णांक पा लेने के हिसाब से ही निहित करके रखने का दोष है जो शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्ध्यांतों से मेल नहीं खाता । शिक्षा व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया है न कि ग्यान की पूर्णता का सर्टिफिकेट देकर इसे सीज करने की प्रक्रिया ।इसी लिए शैक्षणिक परफेक्शन तय करने या परफेक्शन मे एक या दो अंक काट लेने को लेकर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है ।

         बोर्ड और जनसामान्य इन्हें बधाइयाँ देता है जिसके वे हकदार हैं । लेकिन एनसीईआरटी नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा मे इनमें से बहुत कम शायदही बच्चे चयनित हो पाते हैं । सर्वे करके देख ले तो यह बिडंम्बना समझ मे आ जायेगी और शिक्षा का मापदण्ड भी समझ मे आ जायेगा । धन्य हैं परफेक्ट पाठ्यक्रम, परफेक्ट शिक्षण, परफेक्ट पेपरसेटिंग, परफेक्ट उत्तरलिखने वाला और परफेक्ट यानि पूरे 500/500 देने वाला या परफेक्ट मे से एकाध अंक काट लेने वाला । मेरी समझ से अगर यह सब कार्य एक ही व्यक्ति करे और वह अपने को परफेक्ट मानता हो तभी सम्भव है ,अन्यथा नहीं । क्योंकि हर लेवेल पर एरर की संभावना है । यह शिक्षा प्रक्रिया की प्रकृति मे है ।

              बोर्ड मे परफेक्ट अंक लाकर विद्यार्थी और अभिभावक खुश तो बहुत होंगे , अचम्भित भी । मेहनत के अनुसार वे इस उपलब्धि पर बधाई के पात्र हैं । लेकिन जाने अनजाने एक भारी तनाव दबाव उन पर आ गया है अपनी परफेक्ट वाली पोजीशन मेन्टेन करने का । सभी जानते हैं कि पूर्ण अंक पाने के बाद कुछ पाना शेष नहीं रहता । अतः इस बिंदु पर आगे बढ़ने की              अभिप्रेरणा( मोटिवेशन) काम नहीं करती बल्कि तनाव-दबाव को मैनैज करने की काउन्सेल़िग जरूरी होती है
और असफल होने पर विघटन भी हो सकता है । अतः एक सिस्टम की खामी से उन्हें अनावश्क तनाव-दबाव मिल गया है जिसकी जिम्मेदारी कोई बोर्ड नहीं लेगा । और यह भी हो सकता है वही बोर्ड आगे भिन्न मूल्यांकन प्रस्तुत करके अपना पल्ला झाड़ लेगा  । कुलमिलाकर, मूल्यांकन की यह परंपरा मेधावी विद्यार्थियों पर पूर्णांक लाने का अनावश्यक बोझ लादती है । शिक्षा शास्त्रियों को इस पर चिन्तन करके निराकरण प्रस्तुत करना चाहिए । शुभमस्तु ।
                           —  —  —    हरि शरण ओझा ।

499/500 अंक पाने वाले मेधावी कितने विशिष्ट हैं !

भारतवर्ष मेधा की खान है । आदि गुरु शंकराचार्य ,स्वामी विवेकानंद ,वीरबालक अभिमन्यु के नाम से सभी परिचित हैं । आज कल कई ऐसे बच्चे टीवी पर दिखाये जाते हैं जो असाधारण जानकारियाँ प्रस्तुत कर सबको चकित कर देते है । लेकिन इनकी अद्भूत क्षमता जन्म से संभवतः माता पिता के द्वारा वंशानुगत रूप से प्राप्त हुई । किसी विद्यालय या शिक्षा बोर्ड के कोर्स  पर आधारित नहीं पायी जाती । ये अतिविशिष्ट होते है जो विद्यालय या शिक्षा बोर्डों से हरदम ऊपर रहे ।

             अब 499/500 या 498/500 अंक प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को किस कोटि मे रखा जाय ? इस घटना को पूर्णता का कौन सा नाम दिया जाय ? आश्चर्य होता है कि किसी एक को भी 500/500 क्यों नहीं मिला ?  फिर भी , मै 499 या 498 को  परफेक्ट कहना चाहता हूँ । इसका सीधा अर्थ यह होता है कि प्रश्नपत्र निर्माता, माडरेटर , परीक्षक यानी उत्तरपुस्तिकाओ़ का मूल्यांकन कर्ता और परीक्षार्थी अर्थात मेधावी  ये सभी एक ही  हैं । तभी तो पूरे पूरे अंक मिले । यह शैक्षिक दृष्टि से कितना महत्व रखता है , यह तो शिक्षा शास्त्री ही बेहतर जानेंगे लेकिन एक बात निश्चित है कि एक साथ 75 से अधिक बच्चों का लगभग परफेक्ट हो जाना यह बताता है कि पाठ्यक्रम, शिक्षण, प्रश्नपत्र निर्माण , उनका उत्तर और मूल्यांकन सबकुछ घिसा-पिटा हो गया है । बस्तुनिष्ठता के चक्कर मे सृजनात्मकता नदारत । पूरे अंक मिलने के बाद इन्होंने बोर्ड को पीछे छोड़ दिया है , वाकई सभी बधाई के पात्र हैं ।

                  लिखित परीक्षा प्रणाली की खामियों की चर्चा बहुत की जाती है । इसलिए प्रेक्टिकल और प्रोजेक्ट आदि को लागू किया जाता है ताकि हमारे बच्चे कार्यात्मक दृष्टि से अधिक से अधिक सक्षम हों । लेकिन लिखित में प्राप्त पूर्ण अंकों को पूर्ण सफलता का आधार कोई नहीं मानता , और यहीं पर परीक्षा पद्धति और प्राप्तांकों की विश्वसनीयता वैधता घटने लगती है ।और आगे चलकर बहुतों के लिए यह मृगमरीचिका सिद्ध होने लगती है । इस बात से सभी बच्चों को अवगत कराते रहना सभी का दायित्व है । अच्छा तो तब हो जब हमारी परीक्षा पद्धति वास्तविक मेधा और प्रगतिशील क्षमता की पहचान करे न कि केवल पूर्ण अंक लाने और देने को ही अपना लक्ष्य बना ले ।  मेधावी बच्चों को शुभकामनाओं सहित । शुभमस्तु ।
                             —  —  — हरि शरण ओझा ।

नीचों का गठबंधन है

सारे  कौरव  हुए  इकट्ठे, नीचों  का  गठबंधन है
सूपनखा की नाक कटी है, चोरों के घर कृन्दन है

पड़ी है पीछे सीबीआई जगह कहाँ अब जाने को
मिल कर एक हुए हैं गीदड़ अपनी लाज बचाने को

मफलर वाला गिरगिट आया अपनी शान दिखायेगा
टोंटी चोर बुआ को लाया वो भी गाल बजायेगा

संविधान की रक्षा करने आया है एक  नौवीं फेल
जिसके अब्बा खाकर चारा भुगत रहे वर्षों से जेल

राफेल वाला पप्पू आया, दिखा रहा है अपना जोश 
खुद बेचारा बेल पे बाहर कोई दिलाये इसको होश

वो अब्दुल्ला जिसका जीवन गीत पाक के गाते गुजरा
उसको भी अब ये लगता है देश पे सच में आया खतरा

कई और छुटभैये नेता जिनकी कहीं नहीं है पूछ
चोरों के संग सीना ताने ऐंठ रहे है अपनी मूछ

कहे समीक्षा राष्ट्र विरोधी ख्वाबों की ताबीर नहीं
बंगाल हमारा सूपनखा के अब्बा की जागीर नहीं

एक साथ हैं गिद्ध और गीदड़,कुत्ते,और बिलाब सभी
एक  शेर  को  घेरेंगे  क्या नीच  निक्कमे घाघ  कभी

संविधान खतरे में होता जब भी इनकी पोल खुले
सच तो ये है डर है इनको कहीं न इनके झोल खुले

सीधी सच्ची बात है कि ये तभी तो मिलकर खायेंगे
जब  ये  चोर उचक्के मिलकर खुद सरकार बनायेंगे

देख  रहे  सब  भारतवासी इन सब झूठे मक्कारों को
उन्निस में सबक सिखाएंगे इन लोकतंत्र हत्यारों को

समीक्षा सिंह जादौन

क्या प्रेम में शारीरीक संबंध जरूरी होता है? 

प्रेम में शारीरिक संबंध जरुरी है…क्योंकि शरीर की यादाश्त होती हैं…जिस प्रकार एक नव्जन्मा शिशु भी अपनी अपनी मां का स्पर्श पहचानता हैं…चाहे आंखे बन्द हो पर वह मां की गोद अौर हाथो को पहचानता है..जबकि उसका मस्तिस्क इतना विकसित नहीं होता..ये शरीर की यादाश्त हैं…प्रेम में भी यही होता हैं…हम आन्खे बन्द करके स्पर्श करके अपने साथी को पहचान सकते हैं…. आज प्रेम की हालत यह है कि 25 साल का होने से पहले, आप 25 साथी बदल चुके होते हैं – इसकी कीमत लोग चुका रहे हैं – अमेरिका की 10 फीसदी जनसंख्या डिप्रेशन या अवसाद की दवाओं पर निर्भर है। उसकी एक बड़ी वजह यह है कि उनमें स्थिरता की कमी होती है क्योंकि उनका शरीर भ्रमित होता है।

बहुत ज्यादा अंतरंगता की कीमत हर जगह चुकानी पड़ती है – जब तक कि आप यह नहीं जानते कि इस शरीर को खुद से एक दूरी पर कैसे रखें। जिसने यह दूरी बनानी सीख ली, वॊ दुनिया जीत लेता है… ऐसे इंसान का ऐसी चीजों की ओर कोई झुकाव नहीं होता। वह शरीर की सीमाओं और विवशताओं से मजबूर नहीं होता – वह अपने शरीर को एक साधन या उपकरण की तरह इस्तेमाल करता है। वरना, अंतरंगता को कम से कम तक रखना सबसे अच्छा होता है। इसलिए हमने कहा कि एक के लिए एक, जब तक कि उनमें से किसी एक की मृत्यु नहीं होती और दूसरा पुनर्विवाह नहीं कर सकता….

आपके शरीर की याददाश्त की तुलना में आपके दिमाग की याददाश्त बहुत कम है। अगर आप किसी चीज या किसी इंसान को एक बार छू लें, तो आपका दिमाग भूल सकता है मगर शरीर में वह हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है। जब लोग एक-दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो मन उसे भूल सकता है, मगर शरीर कभी नहीं भूलेगा। अगर आप तलाक लेते हैं, तो चाहे आप अपने साथी से कितनी भी नफरत करते हों, फिर भी आपको पीड़ा होगी क्योंकि शारीरिक याददाश्त कभी नहीं खो सकती

चाहे आप थोड़ी देर तक किसी का हाथ पर्याप्त अंतरंगता से पकड़ें, आपका शरीर कभी उसे नहीं भूल पाएगा

हथेलियां और आपके तलवे बहुत प्रभावशाली रिसेप्टर यानी ग्राहक हैं। जब भी आप किसी ऐसे इंसान को देखते हैं, जिसके साथ आप जुड़ना नहीं चाहते, तो सिर्फ ‘नमस्कार’ करें क्योंकि जब आप दोनों हाथों को साथ लाते हैं (या अपने पैर के दोनों अंगूठों को साथ लाते हैं), तो यह शरीर को याददाश्त ग्रहण करने से रोक देता है।

इसका मकसद शारीरिक याददाश्त को कम से कम रखना है, नहीं तो आपको अनुभव के एक भिन्न स्तर पर ले जाना मुश्किल हो जाएगा। जो लोग भोगविलास में अत्यधिक लीन होते हैं, उनके चेहरे पर एक खास मुस्कुराहट होती है, जिसमें एक धूर्तता भरी होती है, उसमें कोई खुशी नहीं होती। उससे छुटकारा पाने में बहुत मेहनत लगती है क्योंकि भौतिक याददाश्त आपको इस तरीके से उलझा देती है कि आपका दिमाग उसे समझ भी नहीं पाता। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर को जिन चीजों के संपर्क में लाते हैं, उनके प्रति जागरूक होना सीखें।

– प्रज्ञा पाठक

Google Self Driving Bike/ Cycle

गूगल ने आधुनिकता और तकनीक नया दिशा फिर से प्रदान किया है । ड्राइवरलेस कारों के बाद अब सेल्फ ड्राइविंग ​साइकिल /बाइक भी अब बाजार में आ गई है। अब आपकी साइकिल खुद-ब-खुद रोड पर चलेगी। गूगल ने इन्हें वल्र्ड प्रीमियम साइकलिंग सिटी के मौके पर एम्सटर्डम की गलियों में टेस्ट भी किया गया है। ये साइकिलें पॉवरफुल इलेक्ट्रिक मोटर से लैस हैं। सथ ही इनमें पिकअप फंक्शन भी दिया गया है जो साइकिल को किसी भी पोजीशन से पिकअप कर सकती है। अपने रोमांच को कई गुना बढ़ाने के लिए नीचे दिए गए सेल्फ ड्राइविंग बाइक/साइकिल किल्स के इस वीडियो को देखें।

हनुमान जी दलित और वंचित हैं

हनुमान जी को दलित कहने पर देश में सियासत शुरू हो गयी है। यूपी के सीएम योगी के बयान को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। योगी के हनुमान जी को दलित कहने पर लोगों ने अपनी -अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। हालांकि, सीएम योगी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हो रही है. ट्विटर, फेसबुक पर कई तरह के मेम्स बनाए जा रहे हैं. बता दें कि इससे पहले शहरों के नामों को लेकर भी योगी आदित्यनाथ विवादों में रहे हैं. सोशल मीडिया में इस बयान के हवाले से लोगों ने भाजपा और आदित्यनाथ पर जबर्दस्ती की जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया है. फेसबुक पर पोस्ट एक है, ‘जिन्हें कृष्ण में यादव और हनुमान में दलित नजर आते हैं, वो हमें हिंदूवादी नहीं, जातिवादी नजर आते हैं.’ वैसे भी भारतीय चुनाव ऐतिहासिक और मिथकीय किरदारों जैसे मुगल, टीपू सुल्तान, नेहरू, गांधी, भगवान राम, हनुमान और विकास आदि के बारे में जानने का बहुत ही अच्छा मौका होते हैं.

गंगा मइया की रक्षा के लिए अनशन पर बैठा एक संत अमर हो गया |

लंबे समय से मां गंगा की स्वच्छता और रक्षा की मांग कर रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल की गुरुवार को मौत हो गई। उन्‍हें स्वामी सानंद के नाम से जाना जाता था। स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से अनशन पर थे और उन्होंने 9 अक्टूबर को जल भी त्याग दिया था। उन्‍होंने ऋषिकेश में दोपहर एक बजे अंतिम सांस ली। वह 87 साल के थे। सानंद गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर प्रयासरत थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख चुके थे। 

जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।

गंगा समेत अन्य नदियों की सफाई को लेकर जीडी अग्रवाल ने पहली बार 2008 में हड़ताल की थी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जीवन समाप्त करने की धमकी भी दी। वे तब तक डटे रहे, जब तक सरकार नदी के प्रवाह पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रद्द करने पर सहमत न हुई।

जुलाई 2010 में तत्कालीन पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ बातचीत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। साथ ही, गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी भागीरथी में बांध नहीं बनाने पर सहमति भी जताई।

2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया।

अग्रवाल 2012 में पहली बार आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण को निराधार कहते हुए उन्होंने इसकी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। साथ ही, अन्य सदस्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके हर उपवास को गंभीरता से लिया गया।

10 जुलाई, 2018 को पुलिस ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जीडी अग्रवाल को जबरन उठा लिया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए। अग्रवाल ने इसके खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई, 2018 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि जीडी अग्रवाल से अगले 12 घंटे में बैठक करके उचित हल निकाला जाए। इसके बावजूद कुछ भी सार्थक परिणाम नहीं निकला।

सरकार ने वयोवृद्ध पर्यावरणविद को ऋषिकेष स्थित एम्स में हिरासत में ले लिया। यहां चिकित्सकों के जबरदस्ती करने पर भी उन्होंने भोजन नहीं किया। 9 अक्टूबर से जल भी त्याग दिया था। इस दौरान सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया, जिसे स्वामी सानंद ने अस्वीकार कर दिया था।

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