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पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही सही मायने में श्राद्ध है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

श्राद्ध का अर्थ है, श्रद्धा से जो कुछ दिया जाय

(श्रद्धया दीयते यत् तत् श्राद्धम)

शास्त्रों में मनुष्य के लिए कुल 3 ऋण बतलाए गए हैं-

1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण।

ये तीन प्रकार के ऋण बतलाए गए हैं। इनमें श्राद्ध द्वारा पितृ ऋण उतारना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्य और सुख-सौभाग्यादि की वृद्धि के अनेक यत्न या प्रयास किए, उनके ऋण से मुक्त न होने पर मनुष्य जन्म ग्रहण करना निरर्थक माना जाता है। श्राद्ध से तात्पर्य हमारे मृत पूर्वजों व संबंधियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट करना है। 
दिवंगत व्यक्तियों की मृत्यु तिथियों के अनुसार इस पक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन तिथियों में हमारे पितृगण इस पृथ्वी पर अपने-अपने परिवार के बीच आते हैं। श्राद्ध करने से हमारे पितृगण प्रसन्न होते हैं और हमारा सौभाग्य बढ़ता है। 
शुक्रवार, 13 सिंतबर को और शनिवार, 14 सितंबर को भादौ मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर भाद्रपद मास खत्म हो जाएगा। 15 सितंबर से आश्विन मास शुरू होगा। इस मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है। इन दिनों में पितरों के लिए शुभ काम किए जाते हैं। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि पर होती है, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। 
पुराण में 12 तरह के श्राद्ध बताए गए हैं जो की इस प्रकार है – 
नित्य श्राद्ध – पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं। 
नैमित्तिक श्राद्ध – माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है। 
काम्य श्राद्ध – यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 
वृद्धि श्राद्ध – सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है। 
सपिंडन श्राद्ध – यह श्राद्ध मृत व्यक्तियों को 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है। 
पार्वण श्राद्ध – इस श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है। 
गोष्ठी श्राद्ध – जो श्राद्ध परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं उसे गोष्ठी श्राद्ध कहा जाता है। 
शुद्धयर्थ श्राद्ध – पितृपक्ष में किया जाने वाले यह श्राद्ध परिवार की शुद्धता के लिए किया जाता है। 
कर्मांग श्राद्ध – किसी संस्कार के मौके पर किया जाने वाले श्राद्ध कर्मांग श्राद्ध कहलाता है। 
तीर्थ श्राद्ध – किसी तीर्थ पर किये जाने वाला श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
यात्रार्थ श्राद्ध – जो श्राद्ध यात्रा की सफलता के लिए किया जाता है उसे याश्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
पुष्टयर्थ श्राद्ध – जो श्राद्ध आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाते हो इसे पुष्टयर्थ श्राद्ध कहा जाता है। 
अखिल भारतीय विद्वत महासभा के प्रवक्ता आचार्य पं शरदचन्द्र मिश्र बताते है की श्राद्ध कर्म मे कुछ ध्यान देने योग्य बातें भी है जिसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है – 
1. श्राद्ध में दौहित्र (कन्या का पुत्र),कुतप काल (दिन के 15 मुहुर्त में आठवां मुहुर्त),और तिल को अत्यन्त पवित्र माना जाता है । 
2. श्राद्ध पक्ष के लिए शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष, पूर्वाह्न की अपेक्षा अपराह्न श्रेष्ठ माना जाता है । 
3. पूर्वाह्न मे ,शुक्ल पक्ष में, रात्रि में, युग्म दिनों में तथा अपने जन्म दिन पर कभी श्राद्ध नही करना चाहिए । 
4. रात्रि में राक्षसी समय माना जाता है अतः रात्रि में श्राद्ध कर्म नही करना चाहिए । 
5. चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करना अशुभ रहता है, जिनकी स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई है, उनका श्राद्ध दूसरे दिन यानि अमावस्या को करना चाहिए, वैसे जो पितृ शस्त्र से मारे गये हैं वे चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं । 
6. चाहें श्राद्ध पक्ष हो या न हो, किसी तीर्थस्थल पर पहुंचते ही सर्वप्रथम स्नान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए । 
7. दोनो संध्यायों के समय श्राद्ध नही करना चाहिए । 
8. दिन के आठवें मुहूर्त (कुतप बेला) में पितरों के लिए दिया गया दान अक्षय होता है ।मध्याह्न काल, चांदी, कुश, गौ, तिल, नेपाल कम्बल और दौहित्र, खंगपात्र- –ये आठ कुतप माने गये है । 
9. दूसरे की भूमि में श्राद्ध नही करना चाहिए ।वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ एवं मन्दिर, ये दूसरे की भूमि नही माने जाते, क्योंकि इन पर किसी का स्वामित्व नही माना जाता है । 
10. श्राद्ध गुप्त रूप से करना चाहिए, प्रदर्शन न करें । 
11. देव कर्म में (यदि चाहें तो) ब्राह्मण की परीक्षा न करें, लेकिन पितृकर्म में यत्नपूर्वक ब्राह्मण की परीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि श्राद्ध में पितरों की तृप्ति तो ब्राह्मणों द्वारा ही होती है । 
12. श्राद्ध में ब्राह्मण को नियन्त्रित करना आवश्यक है जो विना ब्राह्मण के श्राद्ध करता है उसके घर में पितर भोजन नही करते, शाप देकर लौट जाते है ।ब्राह्मणहीन श्राद्ध से मनुष्य महापाप होता है । 
13. यदि श्राद्ध का भोजन करने वाले एक हजार ब्राह्मणों के सम्मुख एक भी योगी हो, तो वह यजमान के सहित सभी ब्राह्मणों का उद्धार कर देता है । 
14. श्राद्ध में जौ, काॅगुनी (टंगुनहिया),गेंहू, धान, तिल, मटर, कचनार, और सरसो का प्रयोग श्रेष्ठ रहता है ।तिल की मात्रा अधिक होने से श्राद्ध अक्षय हो जाता है ।वास्तव में तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करता है ।कुश राक्षसों से बचाता है । 
15. वेदज्ञ एक ब्राह्मण ही यदि श्राद्ध पर भोजन करे तो दस लाख अज्ञानी ब्राह्मणों करवाने के बराबर फल मिलता है । 
16. गुरू, नाना, मामा,भानजा? ससुर, दौहित्र, जामाता, बान्धव, ॠत्विज, एवं यज्ञ कर्ता इन दस को श्राद्ध में अवश्य भोजन कराना चाहिए । 
17. जो काम, क्रोध, अथवा भय के कारण- -पांच कोश (16 किलोमीटर) के भीतर रहने वाले जमाता, बहन तथा भानजे को भोजन नही कराता है एवं दूसरे को भोजन कराया, वहाॅ उसके पितरों के साथ देवता भी अन्न ग्रहण नही करते है । 
18. भानजा तथा भाई- बन्धु मूर्ख भी हो तो भी उसकी अनदेखी नही करनी चाहिए । 
19. जो एक श्राद्ध के अवसर पर आये अतिथि का सत्कार नही करते, उनका यह श्राद्ध का सम्पूर्ण फल नष्ट हो जाता है । 
20. श्राद्ध कर्म में सिर्फ गाय का दूध, दही, घी, काम में लेना चाहिए, परन्तु एक बात ध्यान रहे कि गाय को बच्चा हुए दस दिन से अधिक हो चुका हो । 
21. श्राद्ध कर्म में मित्रों को बुलाकर श्राद्धान्न को मित्रता बढ़ाने का साधन बनाना श्राद्ध के अच्छे फल को नष्ट करता है । स्वर्ण, चाॅदी और ताम्बे के पात्र पितरों को प्रिय है श्राद्ध में चाॅदी का उपयोग, दर्शन और दान पुण्यदायक तो है ही, राक्षसों का नाश करने वाला भी माना जाता है । चाॅदी भगवान शिव के नेत्रों से उत्पन्न होने के कारण पितरों को प्रिय है । 
22. पितरों के लिए चाॅदी के पात्र में सिर्फ जल ही दिया जाय तो वह अक्षय तृप्तिकारक होता है ।पितरों के लिए अर्घ्य, पिण्ड और भोजन के पात्र भी यदि चाॅदी के हों तो और भी श्रेष्ठ माना गया है । 
23. श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाते समय परोसने के बर्तन दोनो हाथों से पकड़ कर लाने चाहिए, एक हाथ से लाया अन्नपात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन लेते है । 
24. ब्राह्मणों को भोजन मौन रहकर और व्यंजनों की प्रशंसा किये वगैर करना चाहिए, क्योंकि पितर तब तक ही भोजन ग्रहण करते हैं जब तक ब्राह्मण मौन होकर भोजन ग्रहण करते है । 
अगर किसी को अपने परिजन की मृत्यु की तिथि सही-सही मालूम ना हो तो इसका श्राद्ध अमावस्या तिथि को किया जाना चाहिए। 
ऐसा विश्वास है कि श्राद्ध से प्रसन्न होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को आयु, धन, विद्या, सुख-संपत्ति आदि प्रदान करते हैं। पितरों के पूजन से मनुष्य को आयु, पुत्र, यश-कीर्ति, लक्ष्मी आदि की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। 

Mobile Addiction – Track & Control

तकनीक के इस दौर में हम दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहते हैं, लेकिन क्या हम इसको आदत भी बनाना चाहते हैं? घर से लेकर ऑफिस तक हमारे हाथ में स्मार्टफोन खेल रहा होता है या ये कहें कि हम उसके हाथ खेले जा रहे होते ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि कहीं आप स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर अपना समय तो बर्बाद नहीं कर रहे हैं? एक रिपोर्ट कहती है कि 80 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स सुबह जागने के 15 से 20 मिनट के भीतर अपने फोन को चेक करते हैं तथा एक दिन मे औसतन 3-4 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करते है वहीं दिन भर मे लगभग 150 बार अपने मोबाइल को अनलॉक करते है। वैसे तो फोन पर टेक्स्टिंग, इंटरनेट सर्फिंग, ईमेल भेजने, एप्लिकेशन को यूज करने और गेम्स खेलने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसमें जरूरत से ज्यादा उपयोग आपकी सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। 

सबसे पहले आप अपने स्मार्ट फोन में YourHour – Phone Addiction Tracker & Controller एप्लिकेशन डाउनलोड करें (लिंक- shorturl.at/bvwH8) आप इस एप्लिकेशन से देखेगे की आप कितना मोबाइल उपयोग करते है , कौन सा एप्प कितनी देर इस्तेमाल करते है फिर आप उस को कम कर सकते है । फिर भी आप इस लत को कम नहीं कर पा रहें है तो ये तरीके अपनाए – 
1. जिस जेब व पर्स के पॉकेट में आप फोन रखते हैं या रखती हैं, उसकी जगह कुछ दिन बदल दें, इससे वह तुरंत आपके हाथों में आने से बचेगा और हो सकता है कि इस बीच आप किसी और काम में व्यस्त हो जाएं। 
2. स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार आपका ध्यान फोन की नोटिफिकेशन बीप बजने पर नहीं जाएगा। यदि किसी को आपसे कोई जरूरी काम होगा तो वह आपको सीधे कॉल कर लेगा। 
3. दिन के कुछ घंटे आप अपना डाटा ऑफ़ रखें यानी कि इंटरनेट बंद रखें। इससे आपका मन बार-बार फोन देखने के लिए नहीं ललचाएगा और बैटरी की भी बचत होगी।

4. अपने फोन को चेक करने का समय निश्चित करें, उसी दौरान आप सभी अपडेट्स देख लें, बार-बार देखने से भी आपके काम की ज्यादा अपडेट्स आ जाएगी, ऐसा तो होने से रहा 
5. पक्का मन बना लें कि सुबह उठते ही कुछ घंटे फोन से दूर रहेंगे और रात को सोने के कुछ घंटे पहले ही फोन को दूर रख देंगे। 
6. जब आप फोन से थोड़ी दूरी बनाकर चलेंगे तो स्वत: ही आपका मन दूसरे पसंदीदा कामों में लगने लगेगा, साथ ही आप कई अन्य तरह की परेशानियों से भी बच जाएंगे।

एम के पाण्डेय निल्को

मोटिवेशनल कहानी

एक लड़का था जो एक ऑफ़िस मैं 8 घंटे की डूटी करता 9 – 5 की। मगर रोज 8 बजे  office पहुँच जाता और देर रात तक काम करता रहता। 

एक दिन एक साथी ने पूछा, क्यूँ ? इतना काम करते हो ? कोई ओवर टाइम तो मिलता नहीं। 
वो बोला 8 घंटे डूटी तो सैलरी के लिया करता हूँ , बाक़ी के घंटे तरक़्क़ी, काम की बारीकी को सीखने और आगे बढ़ने के लिए करता हूँ।
काम घड़ी देख के मत करो । जब तक जिम्मेदारी पूरी ना हो तब तक करो। 
शुभ दिन
एम के पाण्डेय निल्को
Managing Worker – VMW Team 
| Research Scholar | छुट्टा आलोचक |
कलम, कैमरा और कम्प्यूटर | http://www.vmwteam.in

तुलसीदास जयंती पर होगा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान, भजन संध्या और पौधारोपण

जयपुर , सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान द्वारा दिनांक 7 अगस्त 2019 को गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी । इस दौरान सोनाबाड़ी स्थित हनुमान मंदिर पर भजन संध्या और पौधारोपण किया जाएगा तथा साथ जी समाज वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान भी करेगा । सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान के अध्यक्ष श्री बलराम मिश्र ने बताया की राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त कर चुके डॉ रामकिशोर शुक्ल भगवान राम और उनके अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास पर व्याखान देगे । समाज के महासचिव श्री ओ पी त्रिपाठी ने बताया की इन सब के साथ मधुर संगीतमय वाणी मे सुन्दरकाण्ड का भी आयोजन किया जाएगा तथा सभी रामभक्त इसका रस स्वादन करेंगे।

मोदीजी को बधाई

मोदीजी को बधाई
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     बहस बहुत बधाई .लोक सभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के लिए .  वैसे मोदी को समर्थन करने के नाते इस देश की बहुसंख्यक जनता को बहुत गालियाँ , अपशब्द सुनने पड़े हैं. चोचलेबाज विपक्षियों के . अंधभक्त कहकर अपमानित किया गया . सच्चे हिन्दुस्तानियों को देशभक्ति के लिए विपक्षी जलील करते रहे . और सभी मोदी के गुणों की समर्थक जनता मौन-मुखर दोनों तरह से सहती रही है । एक महिला नेता  आपको थप्पड़ (प्रजातंत्र का )  मारने की कहकर सरेआम हिंसक और असंसदीय हुई थी । अब जनता ने सबको एक साथ जवाब दे दिया है ।  “चौकीदार चोर है” कहनेवाले की बोलती बंद करदी है ।  आप के हर कार्य पर सही का ठप्पा लगाया है इसलिए बधाई ।

.               पुलवामा काण्ड पर घेरने की साजिश करने वाले , पाकिस्तान के भरोसे मोदी को हराने की साजिश करने वाले , जनता को भ्रम मे डालने की कोशिश करने वालों को जनता ने घेरे मे रख दिया है ।रफाल पर जनता  को बर्गलाने की साजिश विपक्ष के काम नहीं आयी . जनता ने अंततः मोदी पर भरोसा किया ।

         देश के विखण्डन , भेदभाव पूर्णव्यवहार, और सरकार को चलने मे जगह-जगह रोड़ा अटका कर जनता के बीच झूठ फैला कर येनकेनप्रकारेण सत्ता पर काबिज होने के लिए  सेना, मान. सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और ईवीएम  को दोष देने वालों की जनता ने एक न चलने दी .
आगे के लिए यह सभी के लिए लेसन हैं । जातिवाद वर्गवाद की दीवार तोड़कर जनता ने मोदी को अपनाया है ।अत: आगामी पाँच वर्षों के लिए पुनः एक सक्षम सरकार  को ध्यान में रखकर मोदी जी को कोटिश: बधाइयाँ । 
शुभमस्तु ।

                     —  —  –हरि शरण ओझा ।

शैक्षणिक उपलब्धि का नया चलन 500/500

मेरी जानकारी मे पहले ऐसा नहीं था । अब शिक्षा बोर्डों मे पूर्णांक 500/500 देकर या इसके आस-पास अंक देकर पास करने का कम्पटीशन शुरू हो गया है । यह शिक्षा के बाजारीकरण का नया रूप है । हो सकता है कि ऐसा रिजल्ट देने वाले बोर्ड इसे अपनी भी उपलब्धि मानकर इतरा रहे ह़ों ।जबकि मेरी दृष्टि में यह  सम्बन्धित शिक्षा बोर्डों की पराजय है। पेपरसेटर और माडरेटर का सेट किया हुआ अवैज्ञानिक पेपर का प्रतिफल है या फिर शैक्षणिक प्रक्रिया में ग्यान और विषयवस्तु को केवल पूर्णांक पा लेने के हिसाब से ही निहित करके रखने का दोष है जो शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्ध्यांतों से मेल नहीं खाता । शिक्षा व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया है न कि ग्यान की पूर्णता का सर्टिफिकेट देकर इसे सीज करने की प्रक्रिया ।इसी लिए शैक्षणिक परफेक्शन तय करने या परफेक्शन मे एक या दो अंक काट लेने को लेकर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है ।

         बोर्ड और जनसामान्य इन्हें बधाइयाँ देता है जिसके वे हकदार हैं । लेकिन एनसीईआरटी नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा मे इनमें से बहुत कम शायदही बच्चे चयनित हो पाते हैं । सर्वे करके देख ले तो यह बिडंम्बना समझ मे आ जायेगी और शिक्षा का मापदण्ड भी समझ मे आ जायेगा । धन्य हैं परफेक्ट पाठ्यक्रम, परफेक्ट शिक्षण, परफेक्ट पेपरसेटिंग, परफेक्ट उत्तरलिखने वाला और परफेक्ट यानि पूरे 500/500 देने वाला या परफेक्ट मे से एकाध अंक काट लेने वाला । मेरी समझ से अगर यह सब कार्य एक ही व्यक्ति करे और वह अपने को परफेक्ट मानता हो तभी सम्भव है ,अन्यथा नहीं । क्योंकि हर लेवेल पर एरर की संभावना है । यह शिक्षा प्रक्रिया की प्रकृति मे है ।

              बोर्ड मे परफेक्ट अंक लाकर विद्यार्थी और अभिभावक खुश तो बहुत होंगे , अचम्भित भी । मेहनत के अनुसार वे इस उपलब्धि पर बधाई के पात्र हैं । लेकिन जाने अनजाने एक भारी तनाव दबाव उन पर आ गया है अपनी परफेक्ट वाली पोजीशन मेन्टेन करने का । सभी जानते हैं कि पूर्ण अंक पाने के बाद कुछ पाना शेष नहीं रहता । अतः इस बिंदु पर आगे बढ़ने की              अभिप्रेरणा( मोटिवेशन) काम नहीं करती बल्कि तनाव-दबाव को मैनैज करने की काउन्सेल़िग जरूरी होती है
और असफल होने पर विघटन भी हो सकता है । अतः एक सिस्टम की खामी से उन्हें अनावश्क तनाव-दबाव मिल गया है जिसकी जिम्मेदारी कोई बोर्ड नहीं लेगा । और यह भी हो सकता है वही बोर्ड आगे भिन्न मूल्यांकन प्रस्तुत करके अपना पल्ला झाड़ लेगा  । कुलमिलाकर, मूल्यांकन की यह परंपरा मेधावी विद्यार्थियों पर पूर्णांक लाने का अनावश्यक बोझ लादती है । शिक्षा शास्त्रियों को इस पर चिन्तन करके निराकरण प्रस्तुत करना चाहिए । शुभमस्तु ।
                           —  —  —    हरि शरण ओझा ।

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