Tag Archives: Poeam

बापू तू क्यो सिर्फ RBI के नोटों पर दिख रहा ……..!


बापू तेरे देश मे
यह क्या हो रहा …..?
सिर्फ आरबीआई के नोटो पर
तू क्यों दिख रहा ……?
सरकारी विभागो मे भी
अब तू दीवारों की जगह
जेब मे ही रह रहा
यह क्या हो रहा …….?
बापू तेरे देश मे
महात्मा नहीं है कोई
सब भूल गए बाते तुम्हारी
जगाने वाला नहीं है कोई
आज इस जमाने मे
अपने को महात्मा जो कहता है
कर चमत्कार वह
अत्याचार ही करता है
सत्य एक है मार्ग कई
पर साथ नहीं कोई चलता है
एक दूसरे की टांग खीच रहे
“निल्को” को बस यही अखरता है
एक सच्चाई यह भी है की –
तुम्हारे नाम से जो चल रही
जितनी सरकारी परियोजनाए है
सब नेताओ की जेब भरने की
गोपनीय योजनाए है
बापू तेरे देश मे
यह क्या हो रहा ……?
लगता है की
सारा देश ही सो रहा ……!
एम के पाण्डेय “निल्को”
एक भगवा राष्ट्रवादी

आना हे राजनीति में तो……………….

आना हे राजनीति में तो आ जाओ चाकरी करके। 
रात दिन सेवा करनी हे हमारी, भगवान  समझ के!! 
हम कहे दिन में रात तो , कहना पड़ेगा रात !
अगर ना  कहा तो छोड़ देंगे , हम तुम्हारा साथ!! 
साथ देंगे सोगात तुम्हारे , घोटालो का हाथ !
सोने नही देंगे तुम्हे, दिन और रात !!
“डराते हुए:-………………..”
सी बी आई हे हमारी , बचके कहा तुम जाओगे?
रात दिन सिर्फ , तुम पछताओगे !!
कुछ ही दिनों में तुम, सलाखों के पीछे नजर आओगे 
जेल में सलाखे कितनी? , ये भी नही गिनवायेंगे!
सिर्फ वहा हम , कुछ गेहू और कुछ बाजरा  पिसवाएँगे 
और उसी गेहू को एक दिन, गरीबो को खिलवाएंगे 
“दबाव डालते हुए:-……..” 
उनको डराएँगे , धमकाएंगे ।
और सन्देश यह दिलवाएँगे
“अगर रहना हे यहाँ जमके , तो रहना पड़ेगा हमसे डर के “
“करना सिर्फ हुजूरी  , आगे ना बढ़ना “
“अगर बढाया कदम तो, महंगा पड़ सकता हे जीना “

एक बूँद -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’





ज्यों निकल कर बादलों की गोद से,
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी,
सोचने फिर-फिर यही जी में लगी,
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी?

देव मेरे भाग्य में क्या है बदा,
मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में?
या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी,
चू पडूँगी या कमल के फूल में?

बह गयी उस काल एक ऐसी हवा,
वह समुन्दर ओर आई अनमनी,
एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला,
वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।

लोग यों ही हैं झिझकते, सोचते,
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर,
किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें,
बूँद लौं कुछ और ही देता है कर

Congres’s Shivir in Jaipur


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अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा,………..

अटल बिहारी बाजपेयी जी 
Siddharth Hinduveer

अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा,………..

अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा, 
अन्यायी का चलता है अमन दुधारा, 
आंखो के आगे सत्य मिटा जाता है, 
भारत माता का शीश कटा जाता है !
      (1)    क्या पुनः देश टुकड़ो में बंट जाएगा ? 
           क्या सबका शोणित पानी बन जाएगा?
    कब तक दानव की  माया  चलने  देंगे  ? कब तक  भस्मासुर  को  हम  छलने  देंगे ?
कब   तक   जम्मू  को  हम  जलने  देंगे ? 
                          कब  तक  जुल्मो  की  मदिरा ठलने देंगे ?
चुपचाप  सहेंगे  कब  तक  लाठी  गोली ?  कब  तक  खेलेंगे  दुश्मन  खून  से  होली ?
प्रह्लाद-परीक्षा  की  बेला  अब आई ; होलिका  बनी  देखो  अब्दुल्ला शाही……………….!!!
(2)   माँ बहनो का अपमान सहेंगे कब तक ?…………………..?
माँ बहनो का अपमान सहेंगे कब तक? भोले पांडव चुपचाप रहेंगे कब तक ?
आखिर सहने की भी सीमा होती है, सागर के उर मे भी ज्वाला सोती है,
मलयानिल कभी बवंडर बन ही जाता,भोले शिव का तीसरा नेत्र खुल जाता,
(3)  जिनको जन धन से मोह , प्राण से ममता…………..
जिनको जन धन से मोह ,प्राण से ममता ;
वे दूर रहे अब पांचजन्य है बजता,
जो दुमुख,युद्ध कायर है,
रणभेरी सुनकर कंपित जिनके अंतर है,
वे दूर रहे चूड़िया पहन कर बेठें,
बहनें थूकें माताएँ कान उमेठें,……
जो मानसिंह के बल से सम्मुख आयें ,
फिर एक बार घर मे ही आग लगाएँ,
पर अन्यायी की लंका अब न रहेगी,
आने वाली सन्तानें यूं न कहेंगी ,
पुत्रों के रहते कटा जननी का माथा ,
चुप रहे देखते अन्यायों की गाथा,……
(4)   अब शोणित से इतिहास नया लिखना है……….
अब शोणित से इतिहास नया लिखना है, बलिपथ पर निर्भय पाँव आज रखना है,
आओ खंडित भारत के वासी आओ,कश्मीर बुलाता त्याग उदासी आओ,
लो सुनो शहीदो की पुकार आती है, अत्याचारी की सत्ता ठर्राती………….;
लो सुनो शहीदो की पुकार आती है, अत्याचारी की सत्ता ठर्राती,
उजड़े सुहाग की लाली तुम्हें बुलाती , अधजली चिता मतवाली तुम्हें बुलाती,
अस्थियाँ शहीदो की देती आमंत्रण, बलिवेदी पर कर दों सर्वस्व समर्पण,
कारागारों की दीवारों का न्योता, कैसी दुर्बलता अब कैसा समझौता,
हाथो मे लेकर प्राण चलो मतवालों,सीने मे लेकर आग चलो प्रणवालों,
जो कदम बढ़ा अब पीछे नहीं हटेगा, बच्चा बच्चा हंस हंस कर मरे मिटेगा,
बरसो के बाद आज बलि का दिन आया,अन्याय-न्याय का चिर संघर्षण छाया,
फिर एक बार दिल्ली की किस्मत जागी, जनता जागी अपमानित अस्मत जागी,
देखो दिल्ली की कीर्ति न कम हो जाये, कण कण पर फिर बलि की छाया छा जाये…………… 
ये  बाजपेयी जी की पंक्तिया हमारे VMW Team के सिद्धार्थ हिंदुवीर की तरफ से …….
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CWG, 2G, कोयला और न जाने कितने जी…..जा……जी

 

एक बार की बात है,
वोट देते ही पड़ गई लात है|
थोड़े देर सकपकाने के बाद,
बोले निल्को भाई
वोट देने का क्या यही परिणाम है ?
मैंने कहा भाई,
तुम तो बहुत कमात हो
लेकिन मनमोहन सब खाए जात है
फिर वोट कांग्रेस को देकर
क्या संदेश देत जात हो ।
मैंने कहा सही है भाई,
लेकिन यह मौन का
क्या राज है ?
अरे जनाब,
CWG,2G, कोयला
और न जाने
कितने जी…..जा……जी
तो इनके पास है।
खाने के वक्त बोलना नहीं चाहिए,
और पचाने के लिए विपक्ष को
जगाना नहीं चाहिए ।
इतने मे ही भाई नीलेश आए,
और बोले की
ये नोट मेरे पास
आया था,
देखने मे सफ़ेद पर अंदर से
काला था,
आप की बात सुनकर
समझ आया यह तो कांग्रेस का
छापा था,
गलती से यह मेरे पास
आया था ।

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मुसीबत में शरीफ़ों की शराफ़त

मुसीबत में शरीफ़ों की शराफ़त कम नहीं होती,
करो सोने के सौ टुकडे तो क़ीमत कम नहीं होती.
मुझे बचपन में ये सीख दी है मेरी मम्मी ने,
बुज़ुर्गों की दुआ लेने से इज्ज़त कभी कम नहीं होती.
जरूरतमंद को कभी देहलीज से ख़ाली ना लौटाओ,
भगवन के नाम पर देने से दौलत कम नहीं होती.
पकाई जाती है रोटी जो मेहनत के कमाई से,
हो जाए गर बासी तो भी लज्ज़त कम नहीं होती
याद करते है अपनी हर मुसीबत में जिन्हें हम
गुरु और प्रभु के सामने झुकने से गर्दन नीचे नहीं होती

जय हिंद … वन्देमातरम …..

गाँधीजी के बन्दर तीन

गाँधीजी के बन्दर तीन,
सीख हमें देते अनमोल।

बुरा दिखे तो दो मत ध्यान,
बुरी बात पर दो मत कान,
कभी न बोलो कड़वे बोल।

याद रखोगे यदि यह बात ,
कभी नहीं खाओगे मात,
कभी न होगे डाँवाडोल ।

गाँधीजी के बन्दर तीन,
सीख हमें देते अनमोल।  

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 निलेश पाण्डेय

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Martin’s Window

Nilesh Pandey
Here’ and old story
it seems so funny!
There was a window
in Martin’s tummy!
Actually by mistake
Martin was shot.
Right in the stomach
it bled a lot!
The wound slowly healed
and was covered by skin.
But the hole was still there
You could peep right in!
Oh ! what a chance
for doctors to study.
What happens to the food
Inside the body!
The story seems odd
But it is really true.
The secret of Martin’s stomach
helped us all- me and you!
Nilesh Pandey
Kendriya Vidyalaya No.4,
 Jaipur


It’s your Life

Life if like songs,

So sing is loud clear,

As we move along,

What’s important we keep near.

It’s turned we tack it another change,

And open up another door.

It’s up to as if we get up dance,

Or choose to sit on the floor.

Near the end of our life,

As we walk through our last days.

We will look back at the thing,

That helped light our way.

 –
Nilesh
Nilesh
Kendriya Vidyalaya No.4, jaipur

Cricket by Nilesh,VMW Team

                         Cricket
When there is toss.
God is Boos.
With india’s every run.
I have great fun.
When Sehwag makes a four.
Yeh Dil mange more.
When Yuvraj makes a six.
There is a risk.
When Kumble bowls a wide.
I have to move a side.
When Dhoin gets out.
I loudly shout.
When Sachin takes a bat.
All fielders run like rats.
When Dravid takes a catch.
All feel we are winning the match.
Nilesh Kumar Pandey
Kendriya Vidyalaya No.4,
Jaipur