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Mobile Addiction – Track & Control

तकनीक के इस दौर में हम दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहते हैं, लेकिन क्या हम इसको आदत भी बनाना चाहते हैं? घर से लेकर ऑफिस तक हमारे हाथ में स्मार्टफोन खेल रहा होता है या ये कहें कि हम उसके हाथ खेले जा रहे होते ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि कहीं आप स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर अपना समय तो बर्बाद नहीं कर रहे हैं? एक रिपोर्ट कहती है कि 80 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स सुबह जागने के 15 से 20 मिनट के भीतर अपने फोन को चेक करते हैं तथा एक दिन मे औसतन 3-4 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करते है वहीं दिन भर मे लगभग 150 बार अपने मोबाइल को अनलॉक करते है। वैसे तो फोन पर टेक्स्टिंग, इंटरनेट सर्फिंग, ईमेल भेजने, एप्लिकेशन को यूज करने और गेम्स खेलने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसमें जरूरत से ज्यादा उपयोग आपकी सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। 

सबसे पहले आप अपने स्मार्ट फोन में YourHour – Phone Addiction Tracker & Controller एप्लिकेशन डाउनलोड करें (लिंक- shorturl.at/bvwH8) आप इस एप्लिकेशन से देखेगे की आप कितना मोबाइल उपयोग करते है , कौन सा एप्प कितनी देर इस्तेमाल करते है फिर आप उस को कम कर सकते है । फिर भी आप इस लत को कम नहीं कर पा रहें है तो ये तरीके अपनाए – 
1. जिस जेब व पर्स के पॉकेट में आप फोन रखते हैं या रखती हैं, उसकी जगह कुछ दिन बदल दें, इससे वह तुरंत आपके हाथों में आने से बचेगा और हो सकता है कि इस बीच आप किसी और काम में व्यस्त हो जाएं। 
2. स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार आपका ध्यान फोन की नोटिफिकेशन बीप बजने पर नहीं जाएगा। यदि किसी को आपसे कोई जरूरी काम होगा तो वह आपको सीधे कॉल कर लेगा। 
3. दिन के कुछ घंटे आप अपना डाटा ऑफ़ रखें यानी कि इंटरनेट बंद रखें। इससे आपका मन बार-बार फोन देखने के लिए नहीं ललचाएगा और बैटरी की भी बचत होगी।

4. अपने फोन को चेक करने का समय निश्चित करें, उसी दौरान आप सभी अपडेट्स देख लें, बार-बार देखने से भी आपके काम की ज्यादा अपडेट्स आ जाएगी, ऐसा तो होने से रहा 
5. पक्का मन बना लें कि सुबह उठते ही कुछ घंटे फोन से दूर रहेंगे और रात को सोने के कुछ घंटे पहले ही फोन को दूर रख देंगे। 
6. जब आप फोन से थोड़ी दूरी बनाकर चलेंगे तो स्वत: ही आपका मन दूसरे पसंदीदा कामों में लगने लगेगा, साथ ही आप कई अन्य तरह की परेशानियों से भी बच जाएंगे।

एम के पाण्डेय निल्को

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई

जयपुर , गोपालपुरा बाइपास स्थित कृष्ण विहार हनुमान मंदिर में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे मंदिर परिसर में आम, जामुन, अशोक सहित कई छायादार और फलदार पौधे समाज के अध्यक्ष बलराम मिश्रा के निर्देश में रोपण किया गया ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवस्थान के चेयरमैन श्री आ डी शर्मा ने वरिष्ठजन  को स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया तथा गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर प्रकाश डाला ।

समारोह में डॉ राम किशोर शुक्ल, डॉ जय प्रकाश पाण्डेय , डॉ राजेंद्र मिश्र, डॉ अशोक तिवारी को उनके क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संचालक डॉ जयनारायण शुक्ल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए मानस के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से बताया कि किस तरह हम आजके भटके युवा वर्ग को सही मार्ग पर लाकर उसे सही संस्कार दे सकते हैं । महासचिव ओमप्रकाश तिवारी ने दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि जब से पाठ्यक्रमों से रामायण-गीता जैसे संस्कार देने वाले ग्रन्थों को धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर बाहर निकाल दिया गया तब से हमारे बालक-बालिकाएँ उन संस्कारों से वंचित होगए जिनका उनके जीवन में महत्व था । परिणाम हमारे सामने है । मानस का लक्ष्मण-परशुराम संवाद युवाओं में जान फूँक देता था । अपने अद्यक्षीय उद्बोधन में डॉ अशोक तिवारी ने इस बात पर विशेष बल दिया की युवावर्ग को राम चरित मानस जैसे ग्रन्थों का नियमित अध्ययन करना चाहिए ।

कार्यक्रम के अंत में सुरेन्द्र चौबे ने कहा की तुलसी के साध्य राम की भक्ति है, पर साधन है उनकी कविता, तुलसी कविता की परिभाषा देते हुए कहते हैं कि कविता वह है जो बुद्धिमानों को संतुष्ट करती है, आम आदमी का मनोरंजन करती है व तात्कालिक समस्याओं का समाधान करती है। उनका काव्य हमारे भीतरी और बाहरी तापों का शमन करने में सक्षम है।  यही कारण है कि वे सांस्कृतिक क्रांतिकारी माने जाते हैं तथा संगठन सचिव ए के पाण्डेय ने धन्यवाद उद्बोधन मे कहा की भारतीय समाज की अस्मिता का आधार शताब्दियों से राम चरित मानस रहा है और गोस्वामी तुलसीदास ने राम चरित्र मानस में हमारी अस्मिता को वाणी दी है। उपरोक्त अवसर पर श्री राम तिवारी, राजेश मिश्रा, सौरभ, विजय तिवारी, दुर्गा प्रसाद मिश्र, राकेश पाठक, ज्ञानेश्वर पाण्डेय, विनायक, विजय, मधुलेश, रवि, बबलू, सम्पत, नीलेश, सिद्धेश, हरी नारायण सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे ।

मोदीजी को बधाई

मोदीजी को बधाई
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     बहस बहुत बधाई .लोक सभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के लिए .  वैसे मोदी को समर्थन करने के नाते इस देश की बहुसंख्यक जनता को बहुत गालियाँ , अपशब्द सुनने पड़े हैं. चोचलेबाज विपक्षियों के . अंधभक्त कहकर अपमानित किया गया . सच्चे हिन्दुस्तानियों को देशभक्ति के लिए विपक्षी जलील करते रहे . और सभी मोदी के गुणों की समर्थक जनता मौन-मुखर दोनों तरह से सहती रही है । एक महिला नेता  आपको थप्पड़ (प्रजातंत्र का )  मारने की कहकर सरेआम हिंसक और असंसदीय हुई थी । अब जनता ने सबको एक साथ जवाब दे दिया है ।  “चौकीदार चोर है” कहनेवाले की बोलती बंद करदी है ।  आप के हर कार्य पर सही का ठप्पा लगाया है इसलिए बधाई ।

.               पुलवामा काण्ड पर घेरने की साजिश करने वाले , पाकिस्तान के भरोसे मोदी को हराने की साजिश करने वाले , जनता को भ्रम मे डालने की कोशिश करने वालों को जनता ने घेरे मे रख दिया है ।रफाल पर जनता  को बर्गलाने की साजिश विपक्ष के काम नहीं आयी . जनता ने अंततः मोदी पर भरोसा किया ।

         देश के विखण्डन , भेदभाव पूर्णव्यवहार, और सरकार को चलने मे जगह-जगह रोड़ा अटका कर जनता के बीच झूठ फैला कर येनकेनप्रकारेण सत्ता पर काबिज होने के लिए  सेना, मान. सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और ईवीएम  को दोष देने वालों की जनता ने एक न चलने दी .
आगे के लिए यह सभी के लिए लेसन हैं । जातिवाद वर्गवाद की दीवार तोड़कर जनता ने मोदी को अपनाया है ।अत: आगामी पाँच वर्षों के लिए पुनः एक सक्षम सरकार  को ध्यान में रखकर मोदी जी को कोटिश: बधाइयाँ । 
शुभमस्तु ।

                     —  —  –हरि शरण ओझा ।

499/500 अंक पाने वाले मेधावी कितने विशिष्ट हैं !

भारतवर्ष मेधा की खान है । आदि गुरु शंकराचार्य ,स्वामी विवेकानंद ,वीरबालक अभिमन्यु के नाम से सभी परिचित हैं । आज कल कई ऐसे बच्चे टीवी पर दिखाये जाते हैं जो असाधारण जानकारियाँ प्रस्तुत कर सबको चकित कर देते है । लेकिन इनकी अद्भूत क्षमता जन्म से संभवतः माता पिता के द्वारा वंशानुगत रूप से प्राप्त हुई । किसी विद्यालय या शिक्षा बोर्ड के कोर्स  पर आधारित नहीं पायी जाती । ये अतिविशिष्ट होते है जो विद्यालय या शिक्षा बोर्डों से हरदम ऊपर रहे ।

             अब 499/500 या 498/500 अंक प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को किस कोटि मे रखा जाय ? इस घटना को पूर्णता का कौन सा नाम दिया जाय ? आश्चर्य होता है कि किसी एक को भी 500/500 क्यों नहीं मिला ?  फिर भी , मै 499 या 498 को  परफेक्ट कहना चाहता हूँ । इसका सीधा अर्थ यह होता है कि प्रश्नपत्र निर्माता, माडरेटर , परीक्षक यानी उत्तरपुस्तिकाओ़ का मूल्यांकन कर्ता और परीक्षार्थी अर्थात मेधावी  ये सभी एक ही  हैं । तभी तो पूरे पूरे अंक मिले । यह शैक्षिक दृष्टि से कितना महत्व रखता है , यह तो शिक्षा शास्त्री ही बेहतर जानेंगे लेकिन एक बात निश्चित है कि एक साथ 75 से अधिक बच्चों का लगभग परफेक्ट हो जाना यह बताता है कि पाठ्यक्रम, शिक्षण, प्रश्नपत्र निर्माण , उनका उत्तर और मूल्यांकन सबकुछ घिसा-पिटा हो गया है । बस्तुनिष्ठता के चक्कर मे सृजनात्मकता नदारत । पूरे अंक मिलने के बाद इन्होंने बोर्ड को पीछे छोड़ दिया है , वाकई सभी बधाई के पात्र हैं ।

                  लिखित परीक्षा प्रणाली की खामियों की चर्चा बहुत की जाती है । इसलिए प्रेक्टिकल और प्रोजेक्ट आदि को लागू किया जाता है ताकि हमारे बच्चे कार्यात्मक दृष्टि से अधिक से अधिक सक्षम हों । लेकिन लिखित में प्राप्त पूर्ण अंकों को पूर्ण सफलता का आधार कोई नहीं मानता , और यहीं पर परीक्षा पद्धति और प्राप्तांकों की विश्वसनीयता वैधता घटने लगती है ।और आगे चलकर बहुतों के लिए यह मृगमरीचिका सिद्ध होने लगती है । इस बात से सभी बच्चों को अवगत कराते रहना सभी का दायित्व है । अच्छा तो तब हो जब हमारी परीक्षा पद्धति वास्तविक मेधा और प्रगतिशील क्षमता की पहचान करे न कि केवल पूर्ण अंक लाने और देने को ही अपना लक्ष्य बना ले ।  मेधावी बच्चों को शुभकामनाओं सहित । शुभमस्तु ।
                             —  —  — हरि शरण ओझा ।

गंगा मइया की रक्षा के लिए अनशन पर बैठा एक संत अमर हो गया |

लंबे समय से मां गंगा की स्वच्छता और रक्षा की मांग कर रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल की गुरुवार को मौत हो गई। उन्‍हें स्वामी सानंद के नाम से जाना जाता था। स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से अनशन पर थे और उन्होंने 9 अक्टूबर को जल भी त्याग दिया था। उन्‍होंने ऋषिकेश में दोपहर एक बजे अंतिम सांस ली। वह 87 साल के थे। सानंद गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर प्रयासरत थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख चुके थे। 

जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।

गंगा समेत अन्य नदियों की सफाई को लेकर जीडी अग्रवाल ने पहली बार 2008 में हड़ताल की थी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जीवन समाप्त करने की धमकी भी दी। वे तब तक डटे रहे, जब तक सरकार नदी के प्रवाह पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रद्द करने पर सहमत न हुई।

जुलाई 2010 में तत्कालीन पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ बातचीत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। साथ ही, गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी भागीरथी में बांध नहीं बनाने पर सहमति भी जताई।

2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया।

अग्रवाल 2012 में पहली बार आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण को निराधार कहते हुए उन्होंने इसकी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। साथ ही, अन्य सदस्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके हर उपवास को गंभीरता से लिया गया।

10 जुलाई, 2018 को पुलिस ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जीडी अग्रवाल को जबरन उठा लिया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए। अग्रवाल ने इसके खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई, 2018 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि जीडी अग्रवाल से अगले 12 घंटे में बैठक करके उचित हल निकाला जाए। इसके बावजूद कुछ भी सार्थक परिणाम नहीं निकला।

सरकार ने वयोवृद्ध पर्यावरणविद को ऋषिकेष स्थित एम्स में हिरासत में ले लिया। यहां चिकित्सकों के जबरदस्ती करने पर भी उन्होंने भोजन नहीं किया। 9 अक्टूबर से जल भी त्याग दिया था। इस दौरान सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया, जिसे स्वामी सानंद ने अस्वीकार कर दिया था।

भारत महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश


एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट में भारत को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है । 

इस सर्वे के अनुसार महिलाओं के मुद्दे पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया क्रमश: दूसरे और तीसरे सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर हैं । सात साल पहले इसी सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश बताया गया था।

दुनिया भर से केवल 548 जानकारों से 26 मार्च से 4 मई के बीच ऑनलाइन फोन और व्यक्तिगत तौर पर रायशुमारी की गई और बना दी गई एक ऐसा रिपोर्ट जिस पर विश्वास हो भी तो क्यो और कैसे ? 


जो फिरंगी आजतक एक आदर्श परिवार न बसा सके वो खुद के बनाए मापदंड के अनुसार भारत का सर्वे कर रहे है ? इस मुद्दे पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि भारत के बाद रखे गए देशों में महिलाओं को बोलने का हक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से सर्वे किया गया उनकी संख्या बहुत कम है। उनकी राय के आधार पर दुनिया की राय नहीं बनाई जा सकती। 

भारत से ज्यादा सुरक्षा जिन देशो में है इस सर्वे के मुताबिक , उनका नाम लिखुंगा तो हसते हसते पेट मे दर्द हो जाएगा । आज भी भारत की महिलाएं और देशो की महिलाओं की तुलना में बहुत सभ्य संस्कारी और सुरक्षित है हाँ कुछ अपवाद हो सकते है इससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता लेकिन इस तरह की रिपोर्ट तो बस पूर्व प्रायोजित ही है । महिलाएं ही नहीं किसी भी श्रेणी के लोगो के लिए भारत ही सबसे सुरक्षित देश है , इसके लिए कोई भी इतिहास का सहारा ले सकता है ।

एम के पाण्डेय निल्को

कौन है यह चोटीकटवा ? जानें पूरा सच…!

बीते कई दिनों से चर्चाओं में आए चोटी कटवा को लेकर हर कोई सच्चाई जानना चाहता है । हर कोई जानना चाहता है कि आखिर क्या है चोटी कटवा?  इसको लेकर बड़े-बड़े टीवी चैनलों से लेकर अखबारों और वेब मीडिया में भी सुर्खियां बनी हुई है । तो वही सरकार से लेकर पुलिस प्रशासन भी चोटी कटवा को लेकर हैरान है, और जानना चाहता है कि आखिर क्या है चोटी कटवा? सर्च करने पर पता चला कि राजस्थान से शुरू हुई चोटी कटवा की कहानी अब दिल्ली, गुडगांव, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अलग-अलग जगहों से भी आ रही हैं, समझ आया कि मसला मास हिस्टीरियाका है ।
राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू हुई चोटी कटवा की कहानी अब दिल्ली हरियाणा चंडीगढ़ पंजाब होते होते देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश जा पहुंची है। यहां के मथुरा, आगरा, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, देवरिया समेत कई शहर चोटी कटवा से दहशत जदां है । यहां के कई गांवों से चोटी कटवा नाम की अफवाह से सनसनी मची हुई है । इससे सबसे ज्यादा दहशत में महिलाएं हैं, और अपनी चोटी बचाने को लेकर हैरान हैं। क्योंकि उसकी किसी ना किसी पड़ोसी गांव में या पड़ोसी की चोटी कट गई है , और अब वह भी दहशत में है। सच तो यह है कि 2017 में भी हम ऐसे हैं कि हमारे बीच मास हिस्टीरिया फैलाना बहुत आसान है।  आप सोचिए कि कौन सा भूत ऐसे लोगों की चोटी काटते फिरेगा?  कैमरे के सामने आने के लिए क्या लोग ये नहीं कर सकते?  या फिर बस डर के मारे?  मैं नहीं कह रहा कि ऐसा ही है, पर ऐसा भी हो सकता है। यूजीन इनस्को (फ्रेंच लेखक) की किताब राइनोसोर्स  की कहानी याद आ गई, ऐसा होता है कि एक आदमी शहर में राइनोसोर्स बन जाता है, फिर दूसरा, फिर तीसरा, और धीरे-धीरे बाकी सब। ये चोटीकटवा की कहानी कुछ ऐसी ही लगती है. इसके कई तर्क हो सकते हैं,  पब्लिसिटी,  धार्मिक संवेदना फैलाना,  मास हिस्टीरिया फैलाना। कुछ भी हो सकता है, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम जरा सोचे कि कहीं हम सब राइनोसोर्स तो नहीं बन रहे?
अपने आसपास के माहौल में अफवाहों की चपेट में आकर लोग एक्यूट साइकोसिस (मेनिया) की जद में आकर मास हिस्टीरिया का शिकार हो रहे हैं। इसमें कोई अंजान डर एक से दूसरे में पहुंचकर अफवाहों को बढ़ावा देता है। मास हिस्टीरिया की उन जगहों पर होने की आशंका ज्यादा रहती है जहां परिवार या समाज में भावनात्मक तौर पर एक दूसरे से जुड़े होते हैं। इसमें पीड़ित को देखकर परिवार या अन्य आसपास के सदस्य खुद को उसी में ढालने की कोशिश करते हैं।  मास हिस्टीरिया एक सामान्य समस्या है। इसमें यदि एक बच्चा शिकायत करता है कि उसे पेट दर्द हो रहा है तो अन्य बच्चों को भी लगता है कि उनके साथ भी वैसा ही हो रहा है। जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं होता। हिस्टीरिया (Hysteria) की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। बहुधा ऐसा कहा जाता है, हिस्टीरिया अवचेतन अभिप्रेरणा का परिणाम है। अवचेतन अंतर्द्वंद्र से चिंता उत्पन्न होती है और यह चिंता विभिन्न शारीरिक, शरीरक्रिया संबंधी एवं मनोवैज्ञानिक लक्षणों में परिवर्तित हो जाती है। 

एम के पाण्डेय निल्को

शोध छात्र 


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