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VMW Team – शून्य एक हक़ीकत –

शून्य एक हक़ीकत तो क़रीब क़रीब हर पढ़े लिखे व्यक्ति पर उजागर है कि अंकगणित की दुनिया के इस हीरो, जिसे अंग्रेजी में ज़ीरो कहा जाता है का जन्म भारत में हुआ था। शून्य दरअसल क्या है? शून्य के आकार पर गौर करें। गोलाकार मण्डल की आकृति यूँ ही नहीं है। उसके खोखलेपन, पोलेपन पर गौर करें। एक सरल रेखा के दोनों छोर एक निर्दिष्ट बिन्दु की ओर बढ़ाते जाइए और फिर उन्हें मिला दीजिए। यह बन गया शून्य। यह शून्य बना है संस्कृत की ‘शू’ धातु से जिसमें फूलने, फैलने, बढ़ने, चढ़ने, बढ़ोतरी, वृद्धि, उठान, उमड़न और स्फीति का भाव है। स्पष्ट है कि शू से बने शून्य में बाद में चाहे निर्वात, सूनापन, अर्थहीन, खोखला जैसे भाव उसकी आकृति की वजह से समाविष्ट हुए हों, मगर दाशमिक प्रणाली को जन्म देने वालों की निगाह में शून्य में दरअसल फूलने-फैलने, समृद्धि का आशय ही प्रमुख था। इसीलिए यह शून्य जिस भी अंक के साथ जुड़ जाता है, उसकी क्षमता को दस गुना बढ़ा देता है, अर्थात अपने गुण के अनुसार उसे फुला देता है। जब इसके आगे से अंक या इकाई गायब हो जाती है, तब यह सचमुच खोखलापन, निर्वात, शून्यता का बोध कराता है। शून्य के आकार में भी यही सारी विशेषताएँ समाहित हैं। गोलाकार, वलयाकार जिसमें लगातार विस्तार का, फैलने का, वृद्धि का बोध होता है। दरअसल शून्य ही समृद्धि और विस्तार का प्रतीक है।

https://youtu.be/D9NUxnrj-Es

यह महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के बचपन की घटना है। एक बार गणित की कक्षा में अध्यापक ने ब्लैकबोर्ड पर तीन केले बनाए और पूछा- यदि हमारे पास तीन केले हों और तीन विद्यार्थी, तो प्रत्येक विद्यार्थी के हिस्से में कितने केले आएंगे? एक बालक ने तपाक से जवाब दिया- प्रत्येक विद्यार्थी को एक-एक केला मिलेगा। अध्यापक ने कहा-बिल्कुल ठीक। अभी भाग देने की क्रिया को अध्यापक आगे समझाने ही जा रहे थे कि रामानुजन ने खड़े होकर सवाल किया-सर! यदि किसी भी बालक को कोई केला न बांटा जाए, तो क्या तब भी प्रत्येक बालक को एक केला मिलेगा? यह सुनते ही सारे के सारे विद्यार्थी हो-हो करके हंस पड़े।
उनमें से एक ने कहा-यह क्या मूर्खतापूर्ण सवाल है। इस बात पर अध्यापक ने मेज थपथपाई और बोले-इसमें हंसने की कोई बात नहीं है। मैं आपको बताऊंगा कि यह बालक क्या पूछना चाहता है। बच्चे शांत हो गए। वे कभी आश्चर्य से शिक्षक को देखते तो कभी रामानुजन को। अध्यापक ने कहा – यह बालक यह जानना चाहता है कि यदि शून्य को शून्य से विभाजित किया जाए, तो परिणाम क्या एक होगा?
आगे समझाते हुए अध्यापक ने बताया कि इसका उत्तर शून्य ही होगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह गणित का एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल था तथा अनेक गणितज्ञों का विचार था कि शून्य को शून्य से विभाजित करने पर उत्तर शून्य होगा, जबकि अन्य कई लोगों का विचार था कि उत्तर एक होगा। अंत में इस समस्या का निराकरण भारतीय वैज्ञानिक भास्कर ने किया। उन्होंने सिद्ध किया कि शून्य को शून्य से विभाजित करने पर परिणाम शून्य ही होगा न कि एक।

अंतरराष्ट्रीय कराटे मे पूर्वाञ्चल का प्रतिनिधितव करेगा मास्टर सिद्धेश

अंतरराष्ट्रीय कराटे मे खेलेगा, देवरिया का सिद्धेश
6 देशो के खिलाड़ी लेगे हिस्सा,पूर्वाञ्चल का प्रतिनिधितव करेगा मास्टर सिद्धेश
जयपुर में 22 जुलाई से 24 जुलाई तक होने वाली पहली अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में देवरिया का सिद्धेश भाग लेगा। प्रतियोगिता में 6 देशों की कराटे टीम भाग लेंगी। पूर्वाञ्चल से एक मात्र खिलाड़ी सिद्धेश है । इससे पहले मई मे भी राज्यस्त्रीय प्रतियोगिता मे सिल्वर मैडल के साथ सिद्धेश ने किया था देवरिया का नाम रौशन । इंडियनमार्शल आर्ट संस्थान के बैनर तले जयपुर में अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। शुक्रवार से आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में भारत सहित छह देश हिस्सा ले रहे हैं। 24 जुलाई तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में करीब 1100 बच्चे हिस्सा लेंगे। उद्घाटन भारतीय कॉमनवेल्थ चयनकर्ता अजय कुमार शेट्टी करेंगे। प्रतियोगिता में 5 से 18 साल तक के बच्चे हिस्सा लेंगे। पहले भारत के 19 राज्यों के खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता होगी। इसके आधार पर भारतीय टीम का चयन होगा। यह टीम श्रीलंका, बंगलादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान के खिलाड़ियों को चुनौती देगी। 
किस देश से कितने खिलाड़ी 
नेपाल45 
अफगानिस्तान 33 
बंगलादेश 07 
श्रीलंका 17 
भूटान 09 
भारत 24 

महात्मा गांधी और भारतरत्न पं. लालबहादुर शास्त्री को नमन।

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लालबहादुर शास्त्री – सादा जीवन, उच्च विचार

आज भारत को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन है। सादा जीवन और उच्च विचार कहने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने यह दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल पा सकता है। शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। वह गांधी जी के विचारों और जीवनशैली से बेहद प्रेरित थे। उन्होने गांधी जी के असहयोग आंदोलन के समय देश सेवा का व्रत लिया था और देश की राजनीति में कूद पड़े थे। लाल बहादुर शास्त्री जाति से श्रीवास्तव थे। लेकिन उन्होने अपने नाम के साथ अपना उपनाम लगाना छोड़ दिया था क्योंकि वह जाति प्रथा के घोर विरोधी थे। उनके नाम के साथ जुड़ा ‘शास्त्री’ काशी विद्यापीठ द्वारा दी गई उपाधि है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होने 2 साल तक काम किया। उनका प्रधानमंत्रित्व काल 9जून 1964 से 11जनवरी 1966 तक रहा। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में देश में भीषण मंदी का दौर था। देश के कई हिस्सों में भयानक अकाल पड़ा था। उस समय शास्त्री जी ने देश के सभी लोगों को खाना मिल सके इसके लिए सभी देशवासियों से हफ्ते में 1 दिन व्रत रखने की अपील की थी। शास्त्री जी की मृत्यु यूएसएसआर के ताशकंद में हुई थी। शकंद की सरकार के मुताबिक शास्त्री जी की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी पर उनकी मौत का कारण हमेशा संदिग्ध रहा। उनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 में हुई थी। वे उस समय देश के प्रधानमंत्री थे। आज एक बार फिर से देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों की जरूरत है, क्योंकि आज देश को महंगाई ने अपने मकड़जाल में घेर रखा है और आम जनता के सामने दो जून की रोटी का प्रश्न है। ऐसे में अगर देश के लोग फिर से अपने लाल को याद करके आगे बढ़े तो निश्चित रूप से देश अपनी समस्या से मुक्ति पा लेगा। भारत मां के इस सपूत को वनइंडिया परिवार भी कोटि कोटि प्रणाम करता है।

एक रचना जो बेहद मुझे अच्छी लगी वो भी आप के सामने प्रस्तुत करता हूँ यह रचना मैंने http://mkushwansh.blogspot.ae/2015/10/blog-post.html  महेश जी के ब्लॉग से ली है ।

गंगा में तैरेते हुये पार करना 
और  उसमे निहित  बाल सुलभ  चेस्ठा   ने  
तुम्हें  महान बना दिया  
तुम्हारे मन मंदिर मे  था साफ सफ़फाक  हृदय  
कलम दवात से पट्टी  पर  लिखे  
मास्टर जी के शब्द  
तुम्हारे मन मे कहीं  दूर तक लिख गए 
मानो  सफ़ेद अक्षर  से लिखे हों  
जिन्हें  
तुमने तो आत्मसात कर लिया  
ये देश नहीं   समझ  पाया  
और समझा भी तो 
जानबूझकर अंजान बना रहा  
तुम्हारी खिलौने सी  कद- काठी ने 
हिमालय छुआ  
तुम्हारे विशाल हृदय  मे  छिपे  मर्म को  देश ने समझा  
तुममे अपना भविस्य  ढूढ़ा  
तुम्हें सरताज  बना दिया  
तुमने माँ का कर्ज चुकाया  
और दुश्मन को छठी  का दूध याद दिला दिया 
जय जवान -जय किसान 
तुम्हारी साफ सफ़फाक छवि  का  
आईना बन गया  
मगर  तुम  चले गए   
विदेसी  माटी  पर  चुपचाप  
बे-आवाज़       
और हम रो भी नही पाये      
हमने  आज तक वो आंशू  सँजो कर रखे हैं  
भारत माँ के सच्चे  लाल
इस देश में  
तुम्हें फिर आना होगा   
देश की माटी  का  कर्ज जो बाकी  है  
हमपर  
हमें ही चुकाना होगा
ईस्वर से विनम्र  विनती है  
भारत   माँ को एक बार फिर वो  बहादुर  बेटा लौटा   दे  
ताकी माँ के सपूत  धो सकें अपने पाप   
चुका सकें आंशुओं के कर्ज
और सच्चे अर्थों मे बहा सकें 
सदियों से सूखे आंशू
और ये माँ 
पा सके कोई मुकाम 
और हम  
इस भारत के लाल पर  
बहा सकें रुके आंशू  
अपनी धरती पर 
तुम्हारे जन्म दिन के दिन   

-कुशवंश 

2015 Scripps Spelling Bee Crowns Two Winners…Again

स्पेलिंग बी प्रतियोगिता – लगातार आठवीं बार भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने जीती 

भारतीय मूल के अमेरिकी बच्चों ने वार्षिस्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बीप्रतियोगिता में अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए लगातार आठवें साल यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता जीत ली। इस कॉम्पिटीशन में वन्या शिवशंकर और गोकुल वेंकटाचलम संयुक्त रूप से विजेता चुने गए हैं। यह लगातार दूसरी बार है, जब भारतीयअमेरिकियों ने ऐसी साझा जीत हासिल की है। पिछले आठ साल से लगातार भारतीय मूल के बच्चे ये प्रतियोगिता जीतते आ रहे हैं। 2014 में भी इस प्रतियोगिता को दो भारतीय बच्चों श्रीराम हठवार और अन्सुन सुजॉय ने संयुक्त रूप से जीता था
14 वर्षीय गोकुल वेंकटचलम मिसूरी के सेंट लुई और 13 वर्षीय वन्या शिवशंकर कंसास की रहने वाली हैं। गोकुल और वन्या दोनों स्पेलिंग बी में पहले भी शामिल हो चुके हैं। वन्या 2010 और 2012 में इस प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल किया था। उनकी बहन काव्या 2009 की विजेता थी। वन्या ने यह पुरस्कार अपनी दिवंगत दादी को समर्पित करते हुए कहा, ऐसा लगता है मानो एक सपना सच हो गया हो। वन्या को अभिनय के अलावा टुबा और पियानो बजाने का शौक है और उसने हाल ही में मिड अमेरिका म्यूजिक एसोसिएशन की ओर से दिया जाने वाला उत्कृष्ट पियानोवादक एवं जैज़ पियानोवादक का पुरस्कार जीता है। वहीं, गोकुल 2012 में 10वें और 2013 में 19 स्थान पर थे। गोकुल ने कहा कि वह इस प्रतियोगिता के लिए पिछले कई वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहा है। उसका और स्पेलिंग का रिश्ता ठीक वैसा ही है, जैसा उसके आदर्श लीब्रोन जेम्स का बास्केटबॉल से है। बास्केटबॉल खेलने के अलावा गोकुल को संगीत पसंद है। जब वह संगीत नहीं सुन रहा होता तब उसे किताबें पढ़ना और अपनी पसंदीदा फिल्म एक्स मेन : डेज़ ऑफ फ्यूचर पास्टदेखना पसंद है। स्कूल में उसे गणित और अर्थशास्त्र विशेष तौर पर पसंद हैं। इस साल के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में 35 हजार डॉलर यानी करीब 22 लाख रुपए की नकद राशि दी गई। अंतिम चरण के 49 प्रतिभागियों में से 25 भारतीय मूल के अमेरिकी थे। अंतिम 10 प्रतिभागियों में सात भारतीयअमेरिकी थे।


पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मूल के अमेरिकियों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के समक्ष इस प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती पेश की है और अमेरिका में अयोजित होने वाली अधिकतर स्पेलिंग प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है।

8 March – महिला दिवस (International Women Day)

VMW Team इंटरनेशल महिला दिवस के अवसर पर विश्व की सभी महिलाओं को सलाम करता है। उनके सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान के लिए बधाई देता है।