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आपको सर्दी की शुभकामनांए

जाड़े की धूप

              टमाटर का सूप ।।

मूंगफली के दाने

            छुट्टी के बहाने ।।

तबीयत नरम

                पकौड़े गरम ।।

ठंडी हवा

               मुँह से धुँआ ।।

फटे हुए गाल

             सर्दी से बेहाल ।।

तन पर पड़े

                 ऊनी कपड़े ।।

दुबले भी लगते

                   मोटे तगड़े ।।

किटकिटाते दांत

             ठिठुरते ये हाथ ।।

जलता अलाव

              हाथों का सिकाव ।।

गुदगुदा बिछौना

                रजाई में सोना ।।

सुबह का होना

                सपनो में खोना ।।

स्वागत है सर्दियों का आना

आपको सर्दी की शुभकामनांए

अपनी संस्कृति को पहचाने ।

संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र रूप का नाम है, जो उस समाज के सोचने, विचारने, कार्य करने, खाने-पीने, बोलने, नृत्य, गायन, साहित्य, कला, वास्तु आदि में परिलक्षित होती है। संस्कृति का वर्तमान रूप किसी समाज के दीर्घ काल तक अपनायी गयी पद्धतियों का परिणाम होता है। संस्कृति जीवन की विधि है। जो भोजन हम खाते हैं, जो कपड़े पहनते हैं, जो भाषा बोलते हैं और जिस भगवान की पूजा करते हैं, ये सभी संस्कृति के पक्ष हैं। सरल शब्दों मे हम कह सकते हैं कि संस्कृति उस विधि का प्रतीक है जिसमें हम सोचते हैं और कार्य करते हैं। इसमें वे चीजें भी सम्मिलित हैं जो हमने एक समाज के सदस्य के नाते उत्तराधिकार में प्राप्त की हैं। एक सामाजिक वर्ग के सदस्य के रूप में मानवों की सभी उपलब्धियाँ संस्कृति कही जा सकती हैं। कला, संगीत, साहित्य, वास्तुविज्ञान, शिल्पकला, दर्शन, धर्म और विज्ञान सभी संस्कृति के पक्ष हैं। तथापि संस्कृति में रीतिरिवाज, परम्पराएँ, पर्व, जीने के तरीके, और जीवन के विभिन्न पक्षों पर व्यक्ति विशेष का अपना दृष्टिकोण भी सम्मिलित हैं।

इस प्रकार संस्कृति मानव जनित पर्यावरण से सम्बन्ध रखती है जिसमें सभी भौतिक और अभौतिक उत्पाद एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्रदान किये जाते हैं। सभी समाज-वैज्ञानिकों में एक सामान्य सहमति है कि संस्कृति में मनुष्यों द्वारा प्राप्त सभी आन्तरिक और बाह्य व्यवहारों के तरीके समाहित हैं। ये चिह्नों द्वारा भी स्थानान्तरित किए जा सकते हैं जिनमें मानवसमूहों की विशिष्ट उपलब्धियाँ भी समाहित हैं। इन्हें शिल्पकलाकृतियों द्वारा मूर्त रूप प्रदान किया जाता है। अतः संस्कृति का मूल केन्द्रबिन्दु उन सूक्ष्म विचारों में निहित है जो एक समूह में ऐतिहासिक रूप से उनसे सम्बद्ध मूल्यों सहित विवेचित होते रहे हैं। संस्कृति वह है जिसके माध्यम से लोग परस्पर सम्प्रेषण करते हैं, विचार करते हैं और जीवन के विषय में अपनी अभिवृत्तियों और ज्ञान को विकसित करते हैं।

संस्कृति हमारे जीने और सोचने की विधि में हमारी प्रकृति की अभिव्यक्त है। यह हमारे साहित्य में, धार्मिक कार्यों में, मनोरंजन और आनन्द प्राप्त करने के तरीकों में भी देखी जा सकती हैं। संस्कृति के दो भिन्न उप-विभाग होते हैं- भौतिक और अभौतिक। भौतिक संस्कृति उन विषयों से जुड़ी है जो हमारे जीवन के भौतिक पक्षों से सम्बद्ध हैं, जैसे हमारी वेशभूषा, भोजन, घरेलू सामान आदि। अभौतिक संस्कृति का सम्बध विचारों, आदर्शों, भावनाओं और विश्वासों से है।  

संस्कृति एक स्थान से दूसरे स्थान तथा एक देश से दूसरे देश में बदलती रहती है। इसका विकास एक स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय संदर्भ में विद्यमान ऐतिहासिक प्रक्रिया पर आध शरित होता है। उदाहरण के लिए हमारे अभिवादन की विधियों में, हमारे वस्त्रें में, खाने की आदतों में, सामाजिक और धार्मिक रीतिरिवाजों और मान्यताओं में परिचम से भिन्नता है। दूसरे शब्दों में, किसी भी देश के लोग अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परम्पराओं के द्वारा पहचाने जाते हैं।

सांस्कृतिक विकास एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सी बातें अपने पुरखों से सीखी है। समय के साथ उन्होंने अपने अनुभवों से उसमें और वृद्धि की। जो अनावश्यक था, उसको उन्होंने छोड़ दिया। हमने भी अपने पूर्वजों से बहुत कुछ सीखा। जैसे-जैसे समय बीतता है, हम उनमें नए विचार, नई भावनाएँ जोड़ते चले जाते हैं और इसी प्रकार जो हम उपयोगी नहीं समझते उसे छोड़ते जाते हैं। इस प्रकार संस्कृति एक पीढी से दूसरी पीढी तक हस्तान्तरिक होती जाती है।


ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये, खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा…
 दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !
तीन ऋण –
देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !
 चार युग –
सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !
 चार धाम –
द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !
चारपीठ –
शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !
चार वेद-
ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !
 चार आश्रम –
ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !
चार अंतःकरण –
मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !
पञ्च गव्य –
गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !
  पञ्च देव –
गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !
 पंच तत्त्व –
पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !
 छह दर्शन –
वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !
  सप्त ऋषि –
विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!
  सप्त पुरी –
अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची – विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !
  आठ योग –
यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !
 आठ लक्ष्मी –
आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !
 नव दुर्गा —
शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !
  दस दिशाएं –
पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !
  मुख्य ११ अवतार –
मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !
 बारह मास –
चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !
  बारह राशी –
मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !
 बारह ज्योतिर्लिंग –
सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !
 पंद्रह तिथियाँ –
प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !
 स्मृतियां –
मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !
**********************
इस  को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो।
सादर
एम के पाण्डेय निल्को

जय हो मंगलमय हो ।

“प्रभु “कहते” “है”

“होती” “आरती”, “बजते “शंख”                                 .     “पूजा” “में” “सब” “खोए” “है”❗

“मंदिर” “के” “बाहर” “तो” “देखो”,
          “भूखे” “बच्चे ” “सोए” “है “❗

“एक” “निवाला” “इनको” “देना”,
    “प्रसाद” “मुझे” “चढ” “जायेगा”❗

“मेरे” “दर” “पर” “माँगने” “वाले”                           .    “तुझे” “बिन” “माँगे” “सब” “मिल”  “जायेगा

प्रस्तुति
एम के पाण्डेय निल्को

इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये – मुनव्वर राना


इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये 

आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये


आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं 

आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये


ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों 

आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये


जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें 

टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये


अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे 

इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये

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महात्मा गांधी और भारतरत्न पं. लालबहादुर शास्त्री को नमन।

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लालबहादुर शास्त्री – सादा जीवन, उच्च विचार

आज भारत को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन है। सादा जीवन और उच्च विचार कहने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने यह दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल पा सकता है। शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। वह गांधी जी के विचारों और जीवनशैली से बेहद प्रेरित थे। उन्होने गांधी जी के असहयोग आंदोलन के समय देश सेवा का व्रत लिया था और देश की राजनीति में कूद पड़े थे। लाल बहादुर शास्त्री जाति से श्रीवास्तव थे। लेकिन उन्होने अपने नाम के साथ अपना उपनाम लगाना छोड़ दिया था क्योंकि वह जाति प्रथा के घोर विरोधी थे। उनके नाम के साथ जुड़ा ‘शास्त्री’ काशी विद्यापीठ द्वारा दी गई उपाधि है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होने 2 साल तक काम किया। उनका प्रधानमंत्रित्व काल 9जून 1964 से 11जनवरी 1966 तक रहा। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में देश में भीषण मंदी का दौर था। देश के कई हिस्सों में भयानक अकाल पड़ा था। उस समय शास्त्री जी ने देश के सभी लोगों को खाना मिल सके इसके लिए सभी देशवासियों से हफ्ते में 1 दिन व्रत रखने की अपील की थी। शास्त्री जी की मृत्यु यूएसएसआर के ताशकंद में हुई थी। शकंद की सरकार के मुताबिक शास्त्री जी की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी पर उनकी मौत का कारण हमेशा संदिग्ध रहा। उनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 में हुई थी। वे उस समय देश के प्रधानमंत्री थे। आज एक बार फिर से देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों की जरूरत है, क्योंकि आज देश को महंगाई ने अपने मकड़जाल में घेर रखा है और आम जनता के सामने दो जून की रोटी का प्रश्न है। ऐसे में अगर देश के लोग फिर से अपने लाल को याद करके आगे बढ़े तो निश्चित रूप से देश अपनी समस्या से मुक्ति पा लेगा। भारत मां के इस सपूत को वनइंडिया परिवार भी कोटि कोटि प्रणाम करता है।

एक रचना जो बेहद मुझे अच्छी लगी वो भी आप के सामने प्रस्तुत करता हूँ यह रचना मैंने http://mkushwansh.blogspot.ae/2015/10/blog-post.html  महेश जी के ब्लॉग से ली है ।

गंगा में तैरेते हुये पार करना 
और  उसमे निहित  बाल सुलभ  चेस्ठा   ने  
तुम्हें  महान बना दिया  
तुम्हारे मन मंदिर मे  था साफ सफ़फाक  हृदय  
कलम दवात से पट्टी  पर  लिखे  
मास्टर जी के शब्द  
तुम्हारे मन मे कहीं  दूर तक लिख गए 
मानो  सफ़ेद अक्षर  से लिखे हों  
जिन्हें  
तुमने तो आत्मसात कर लिया  
ये देश नहीं   समझ  पाया  
और समझा भी तो 
जानबूझकर अंजान बना रहा  
तुम्हारी खिलौने सी  कद- काठी ने 
हिमालय छुआ  
तुम्हारे विशाल हृदय  मे  छिपे  मर्म को  देश ने समझा  
तुममे अपना भविस्य  ढूढ़ा  
तुम्हें सरताज  बना दिया  
तुमने माँ का कर्ज चुकाया  
और दुश्मन को छठी  का दूध याद दिला दिया 
जय जवान -जय किसान 
तुम्हारी साफ सफ़फाक छवि  का  
आईना बन गया  
मगर  तुम  चले गए   
विदेसी  माटी  पर  चुपचाप  
बे-आवाज़       
और हम रो भी नही पाये      
हमने  आज तक वो आंशू  सँजो कर रखे हैं  
भारत माँ के सच्चे  लाल
इस देश में  
तुम्हें फिर आना होगा   
देश की माटी  का  कर्ज जो बाकी  है  
हमपर  
हमें ही चुकाना होगा
ईस्वर से विनम्र  विनती है  
भारत   माँ को एक बार फिर वो  बहादुर  बेटा लौटा   दे  
ताकी माँ के सपूत  धो सकें अपने पाप   
चुका सकें आंशुओं के कर्ज
और सच्चे अर्थों मे बहा सकें 
सदियों से सूखे आंशू
और ये माँ 
पा सके कोई मुकाम 
और हम  
इस भारत के लाल पर  
बहा सकें रुके आंशू  
अपनी धरती पर 
तुम्हारे जन्म दिन के दिन   

-कुशवंश 

मनन को मिलेगा नेशनल अवॉर्ड – अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान

जयपुर के रहने वाले मास्टर मनन सूद को उनकी इंटेलिजेंस और स्मार्टनेस के लिए वर्ष 2015 के राष्ट्रीय स्तर पर अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान के लिए चुना गया है। जयपुर के रूट्स पब्लिक स्कूल के प्रेप क्लास में पढ़ने वाले मनन को यह पुरस्कार उन्हें शॉर्प माइंड अच्छी याददाश्त के लिए नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को दिया जा रहा है। मनन सूद यूं तो आम बच्चों सा दिखता है, लेकिन उसकी खासियत तब सामने आती है, जब कठिन से कठिन सवालों का जवाब वह बिना देरी किए देने लगता है। प्रेप क्लास में पढ़ रहे मनन को राजस्थान और देश के अलावा विश्व के मानचित्र में महारथ है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है, उसकी उम्र भले ही अभी छोटी है, मगर विश्व के देशों की भौगोलिक सीमाएं, क्षेत्रफल व अन्य तमाम जानकारियां उसे जुबानी याद हैं। आपने सवाल किया नहीं कि जवाब तुरंत हाजिर। इसी के फलस्वरूप मनन को सारे एटलस, सौरमंडल, देश, विदेश की राजधानी व राजनीति की बहुत जानकारी है।


Happy Teachers Day

आज पाँच सितम्बर है यानी शिक्षक दिवस। आज हम सभी उन अध्यापकों, गुरुओं, आचार्यों, शिक्षकों, मास्टरों, टीचरों को बधाइयाँ देते हैं, याद करते हैं, जिन्होंने हमारे जीवन-दर्शन को कहीं न कहीं से प्रभावित किया। गुरू को इश्वर से अधिक महत्व प्राप्त है। गुरू का नाम ज़रूर बदला है, लेकिन हरेक के जीवन में कहीं न कहीं गुरू रूपी तत्व का समावेश ज़रूर है। ज़रूरी नहीं कि गुरू किसी गुरू के चोंगे में ही हो। प्रत्येक का गुरू अलग है। किसी के लिए माँ गुरू है, किसी के लिए पिता तो किसी के लिए मित्र। आज #VMW_Group भी ऐसे ही सभी गुरुओ को प्रणाम करता है ।

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

मुझे आरक्षण नहीं चाहिए

मैं ब्राह्मण हूँ और मुझे आरक्षण नहीं चाहिए क्योंकि :

1. मै निकम्मा और कामचोर नहीं हूँ मुझे अपनी मेहनत और काबिलियत पर पूरा भरोसा है ।

2. मेरा कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है और मै इस बात में विश्वास रखता हूँ की प्रतिभा के बल पर ही आगे बढ़ना चाहिए ।

3. मै चाहता हूँ की योग्य व्यक्ति को ही आगे बढ़ने का हक है और उसे उसका हक मिलना चाहिए । किसी का हक मार कर उसकी रोटी छीनने में मेरा विश्वास नहीं है।

4. मै देश की तरक्की में योगदान देना चाहता हूँ इसलिए देशद्रोहियों की तरह तोड़ फोड़ आगजनी जनहानि करके अपनी नाजायज मांग मनवाने में विश्वास नहीं रखता ।

5. मै खुद की समझ से काम करने में विश्वास रखता हूँ । कोई भी ऐरा गैरा मुझे धर्म और जाति के नाम पर उकसा दे ऐसा मुर्ख नहीं हूँ मै।

6. आरक्षण को मै जबरदस्ती मांगी गई भीख से अधिक कुछ नहीं समझता हूँ। इस तरह की खैरात लेकर मै अपने आप को सारी जिंदगी के लिए नाकाबिल नहीं बना सकता।

क्या आप भी अपने समुदाय से ये आशा रखते है ? क्या आप चाहेंगे की आपके योग्य बच्चे frustration में आकर कोई गलत कदम उठाये? यदि हाँ तो क्या हम इस धारणा को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे ?
सादर
एम के पाण्डेय निल्को
http://www.vmwteam.blogspot.in

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई |

सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के ‘0’ को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
जय हिन्द! जय भारत!
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स्वतंत्रता दिवस – आज हथकड़ी टूट गई है, नीच गुलामी छूट गई है –

आजादी के नए संघर्ष का वक्त हमने आजादी जनता के लिए प्राप्त की थी और नारा दिया था कि हम ऐसी व्यवस्था अपनाएंगे जो जनता की जनता द्वारा और जनता के लिए होगी, लेकिन आजादी के 68 साल बीतने के बाद अनुभव यह हो रहा हे कि हमारी सत्ता अंग्रेजी सत्ता के समान ही कुछ निहित स्वार्थी लोगों के हित चिंतन में सिमटकर रह गई है। क्या आजादी का संघर्ष इसीलिए किया गया था? युवाओं ने इसीलिए बलिदान दिया था कि अंग्रेजों के स्थान पर कुछ ‘स्वदेशी’ लोग सत्ता का उपयोग करें। सत्ता का हस्तानांतरण हुआ है, लेकिन उसके आचरण में बदलाव नहीं आया है। जब भी 15 अगस्त नजदीक आता है मुझे ये पंक्तियां बरबस याद आ जाती हैं-आज हथकड़ी टूट गई है, नीच गुलामी छूट गई है, उठो देश कल्याण करो अब, नवयुग का निर्माण करो सब।
क्या सचमुच हथकड़ी टूट गई है और गुलामी से छुटकारा मिल गया है? हमारी शक्ति किसके कल्याण में लग रही है और कौन से नवयुग का हम निर्माण कर रहे हैं। यदि कुछ चमचमाती सड़कें, सड़कों पर पहले की अपेक्षा सौ गुना अधिक दौड़ रहे वाहन, शहरों का निरंतर विस्तार, तकनीकी उपकरणों की भरमार और कर्ज के सहारे निर्वाह को नवयुग का कल्याण माना जाए तो हम सचमुच 15 अगस्त 1947 के बाद बहुत आगे बढ़ गए हैं, लेकिन जिन जीवन मूल्यों के लिए हमने आजादी की जंग लड़ी, क्या उस दिशा में कोई प्रगति हुई है? देश में बढ़ते एकाधिकारवादी आचरण ने सत्ता को इतना भ्रष्ट और निरंकुश कर दिया है कि उसकी चपेट में आकर सारा अवाम कराह रहा है। महात्मा गांधी का मानना था कि गांवों का विकास ही उत्थान का प्रतीक होगा। गांवों में जीवन मूल्य के बारे में अभी भी संवेदनशीलता है। हमने पंचायती राज व्यवस्था को तो अपनाया है, लेकिन गांवों को उजड़ते जाने से नहीं रोक पा रहे हैं। कृषि प्रधान देश में खेती करना सबसे हीन समझा जाने लगा है। शिक्षा के लिए अनेक आधुनिक ज्ञान वाले संस्थान जरूर स्थापित हो गए हैं, लेकिन वहां से ‘शिक्षित’ होकर निकलने वालों की पहचान किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में ऊंचा वेतन पाने के आधार पर हो रही है। स्वदेशी, स्वाभिमान और स्वावलंबन की भावना तिरोहित होती जा रही है। कर्ज जिसे आजकल ‘एड’ का नाम दे दिया गया है, एकमेव साधन बनकर रह गया है, जिसने हमें फिर गुलामी की तरफ धकेल दिया है। राजनीतिक आजादी तो मिली, लेकिन आत्मनिर्भरता के लिए प्रयास न होने के कारण हम आर्थिक रूप से गुलाम होते जा रहे हैं, जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में हुआ था। तब भी शासक तो स्वदेशी ही थे, लेकिन उनको चलना ईस्ट इंडिया कंपनी के अनुसार पड़ता था। आज हम भी अपने आर्थिक क्षेत्र को विश्व बैंक या विश्व मुद्रा कोष के पास गिरवी रख चुके हैं। जिन वस्तुओं की हमें जरूरत भी नहीं है उनको आयात करने की विवशता से हम बंधते जा रहे हैं। हमारी सीमाएं असुरक्षित हैं। 
हम यह जानते हैं कि किसके द्वारा और किस-किस प्रकार से असुरक्षा पैदा की जा रही है, लेकिन हम कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि उसके लिए किसी की रजामंदी जरूरी है। हमारा ध्यान केवल सत्ताधारी बने रहने तक सीमित हो गया है। उसे पाने के लिए समाज में संविधान के उपबंधों के अनुसार समान नागरिकता की भावना पैदा करने के बजाय हम वैसा ही उपाय करते जा रहे हैं जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था। उससे भी उसमें बढ़कर हम जातियों, उपजातियों आदि की पहचान उभारने में लगे हुए हैं। लालबहादुर शास्त्री ने संकट से उबरने के लिए सोमवार को अन्न न खाने की जो अपील की उससे कोई बहुत बड़ी बचत नहीं होने वाली थी, लेकिन लोगों ने उनकी बात मानी थी। आज क्या यह संभव है?

सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें

 एम के पाण्डेय निल्को

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असर आधुनिकता का

👗 कपड़े हो गए छोटे
🙈 लाज कहा से आए
🌾 अन्न हो गया हाइब्रिड
💪 ताकत कहा से आए
🌺 फूल हो गए प्लास्टिक के
😔 खुशबू कहा से आए
👩 चेहरा हो गया मेकअप का
👸 रूप कहाँ से आए
👨 शिक्षक हो गए टयुशन के
📚 विद्या कहाँ से आए
🍱 भोजन हो गए होटल के
✊ तंदरुस्ती कहाँ से आए
📺 प्रोग्राम हो गए केबल के
🙏 संस्कार कहाँ से आए
💵 आदमी हो गए पैसे के
🙉 दया कहाँ से आए
🏭 धंधे हो गए हायफाय
🎁 बरकत कहाँ से आए
👳 भक्ति करने वाले स्वार्थी हो गए
👤 भगवान कहाँ से आए
👫 मित्र हो गया व्हाट्सऐप के
💃🏃 मिलने कहाँ से आए
😂😂😪😥😰😂😂
सादर
एम के पाण्डेय निल्को

महत्वपूर्ण सूचना – कृपया ध्यान दे ….!

दोस्तो/पाठको आप का स्नेह मिलता रहे हमे और हम कुछ नया करते रहे ऐसी अभिलाषा और अपेक्षा रखते है, बताना चाहेगे की आज से हम ‘योगेश के युग’, ‘निशु के निशान’, ‘गजेंद्र का गोला’, ‘अभिषेक की अभिव्यक्ति’, ‘अनुज की अगड़ाई’, ‘नज़र और निशाना निल्को का’, ‘Whats App हँगामा’, और ‘मोहक की मार’, शीर्षक से कुछ अपनी अभिव्यक्ति, नज़रिया, सोच आप के सामने प्रस्तुत करेगे। उम्मीद है की यह VMW Team का नया, मज़ेदार, और अनोखा प्रयोग आप को रास आएगा । दोस्तों हमारा यह नया प्रयोग कैसा लगा पढ़कर बताईये, कृपया अपने भावपूर्ण कमेंट मेरे blog पर comment box में लिखिए और हमारा हौसला बढाए. कृपया अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा. आपकी राय हमे हमेशा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देती है और आपकी राय निश्चिंत ही हमारे लिए अमूल्य निधि है । मित्रों हम VMW Team ब्लॉग में लगातार कुछ ऐसा व्यापक बदलाव लाने की कोशिश में हैं जिससे कि यह आपकी अपेक्षाओं पर और भी खरा उतर सके। हम चाहते हैं कि इसमें आपकी भी सक्रिय भागीदारी हो। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।

सादर, सप्रेम
एम के पाण्डेय ‘निल्को’ 

एडमिन 

कारगिल युद्ध – विजय दिवस

किसी का चित्र नोटों पे
किसी का चिन्ह वोटो पे
शहीदों तुम ह्रदय में हो
तुम्हारा नाम होंठो पे …..

VMW Group सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन करता हैं।
जय हिन्द जय भारत

आज कारगिल युद्ध की वर्षगाठ है आप सभी को इस

विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
और हमारे जांबाज सैनिको और शहीद जवानों को शत शत नमन…


2015 Scripps Spelling Bee Crowns Two Winners…Again

स्पेलिंग बी प्रतियोगिता – लगातार आठवीं बार भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने जीती 

भारतीय मूल के अमेरिकी बच्चों ने वार्षिस्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बीप्रतियोगिता में अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए लगातार आठवें साल यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता जीत ली। इस कॉम्पिटीशन में वन्या शिवशंकर और गोकुल वेंकटाचलम संयुक्त रूप से विजेता चुने गए हैं। यह लगातार दूसरी बार है, जब भारतीयअमेरिकियों ने ऐसी साझा जीत हासिल की है। पिछले आठ साल से लगातार भारतीय मूल के बच्चे ये प्रतियोगिता जीतते आ रहे हैं। 2014 में भी इस प्रतियोगिता को दो भारतीय बच्चों श्रीराम हठवार और अन्सुन सुजॉय ने संयुक्त रूप से जीता था
14 वर्षीय गोकुल वेंकटचलम मिसूरी के सेंट लुई और 13 वर्षीय वन्या शिवशंकर कंसास की रहने वाली हैं। गोकुल और वन्या दोनों स्पेलिंग बी में पहले भी शामिल हो चुके हैं। वन्या 2010 और 2012 में इस प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल किया था। उनकी बहन काव्या 2009 की विजेता थी। वन्या ने यह पुरस्कार अपनी दिवंगत दादी को समर्पित करते हुए कहा, ऐसा लगता है मानो एक सपना सच हो गया हो। वन्या को अभिनय के अलावा टुबा और पियानो बजाने का शौक है और उसने हाल ही में मिड अमेरिका म्यूजिक एसोसिएशन की ओर से दिया जाने वाला उत्कृष्ट पियानोवादक एवं जैज़ पियानोवादक का पुरस्कार जीता है। वहीं, गोकुल 2012 में 10वें और 2013 में 19 स्थान पर थे। गोकुल ने कहा कि वह इस प्रतियोगिता के लिए पिछले कई वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहा है। उसका और स्पेलिंग का रिश्ता ठीक वैसा ही है, जैसा उसके आदर्श लीब्रोन जेम्स का बास्केटबॉल से है। बास्केटबॉल खेलने के अलावा गोकुल को संगीत पसंद है। जब वह संगीत नहीं सुन रहा होता तब उसे किताबें पढ़ना और अपनी पसंदीदा फिल्म एक्स मेन : डेज़ ऑफ फ्यूचर पास्टदेखना पसंद है। स्कूल में उसे गणित और अर्थशास्त्र विशेष तौर पर पसंद हैं। इस साल के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में 35 हजार डॉलर यानी करीब 22 लाख रुपए की नकद राशि दी गई। अंतिम चरण के 49 प्रतिभागियों में से 25 भारतीय मूल के अमेरिकी थे। अंतिम 10 प्रतिभागियों में सात भारतीयअमेरिकी थे।


पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मूल के अमेरिकियों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के समक्ष इस प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती पेश की है और अमेरिका में अयोजित होने वाली अधिकतर स्पेलिंग प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है।

One year of Narendra Modi Government

 आज से करीब एक साल पहले देश में हुए आम चुनावों में यहां की आवाम ने ऐसा फैसला सुनाया जो वाकई चौंकाने वाला था। भारतीय जनता ने एकजुट होकर सत्ता की बागडोर किसी एक पार्टी को या कहें कि एक इंसान को ही सौंप दी। वो शख्स कोई और नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे।

लोकसभा चुनावों में मोदी ने जिस तरह से अच्छे दिनके सपने जनता के सामने संजोए उससे जनता को उन पर अटूट विश्वास सा जग गया। इसीलिए तो देश में 1984 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब किसी एक पार्टी ने केंद्र में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इन चुनावों में मोदी फैक्टर ने जमकर अपना असर दिखाया।
यूपीए सरकार के दौरान हुई गलतियों, घोटालों और सरकार के उठाए गए कदमों को मोदी ने जमकर भुनाया। मोदी ने तत्कालीन मनमोहन सरकार को घोटालों की सरकारकह के संबोधित किया। इतना ही नहीं उन्होंने चुनावों में कांग्रेस मुक्त भारतका नारा दे दिया।
चाहे आम चुनावों के दौरान की बात हो या फिर सत्ता संभालने के बाद की स्थिति हो। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातों से लोगों के दिलों पर राज जरूर किया। उन्होंने लगभग सभी मुद्दों पर अपने बयानों से जनता के बीच जगह बनाई। जनता ने उनमें अपने नायक की छवि देखी।
शायद यही वजह थी कि लोकसभा चुनावों में उन्हें पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का मौका दिया। लेकिन जिस अंदाज में पीएम मोदी ने जनता के बीच अपनी बातें रखी सत्ता में आने के बाद ये सरकार उससे उलट काम करती दिखाई दी। शायद यही वजह थी कि धीरेधीरे ही सही लेकिन महज एक साल लोगों की धारणा बदलने लगी। आज परिस्थितियां बिल्कुल बदल चुकी हैं।
एक साल के भीतर आखिर ऐसा क्या हो गया कि जिस शख्स को देश की जनता ने भारीभरकम बहुमत से सत्ता दी। उससे भरोसा उठने सा लगा है। इसके पीछे वजह और कोई नहीं खुद प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की कार्यशैली है।
जिन मुद्दों की वजह से पीएम मोदी सत्ता में आए अब वो उन्हीं मुद्दों से पीछे हटने लगे। एक के बाद एक यूटर्न से जनता में उनकी छवि को गहरा धक्का लगा। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कटाक्ष से सामने आता है। जिसमें उन्होंने इस सरकार को सूटबूट की सरकार कह कर संबोधित करना शुरू किया है।
राहुल गांधी ने ना केवल मोदी सरकार को इस जुमले से घेरने की कोशिश की है। बल्कि उस सच्चाई को भी बताया है जिसे जनता भी समझने लगी है।
ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को ये समझने की जरूरत है कि जिस जनता ने उन्हें चुना है अगर जल्दी ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात बिगड़ भी सकते हैं। जनता का मोहभंग होने में समय नहीं लगता। इसलिए जरूरी यही है कि अब प्रधानमंत्री मोदी बातों और वादों की जगह कुछ ऐसा करें कि जनता को उन पर फिर से विश्वास कायम हो जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश की सत्ता संभाली तो उन्होंने किसानों के लेकर कई ऐलान किए। लेकिन उन दावों की पोल एक साल में ही खुल गई। इस दौरान में देश के अलगअलग हिस्सों में किसानों ने आत्महत्याएं की। एक अनुमान के मुताबिक देश में हर आधे घंटे में एक किसान आत्महत्या करता है। साल 2014 में भी आत्महत्या की दर में तेजी आई है।

इन सबके बीच केंद्रीय खुफिया विभाग ने हाल ही किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। जिसमें कहा गया था कि किसानों की आत्महत्या की वजह प्राकृतिक भी है और कृत्रिम भी। इसमें बारिश, ओलावृष्टि, सिंचाई की दिक्कतें, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक वजहें शामिल हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि आखिर किसानों की समस्या पर अंकुश कैसे और कब लगेगा? इन सबके बीच अब ये मोदी सरकार को सोचना है कि आखिर कैसे वो देश के अन्नदाताको बचाते हैं? आखिर वादों की जो फेहरिस्त चुनाव में नजर आई थी उसकी बानगी देखना बाकी है।




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वाह रे जमाने तेरी हद हो गई

वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी,
तेरी सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

पेट पर सुलाने वाली,
पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का,
माँ पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

माँ मॉजती बर्तन,
वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू ,
उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
तेरी कहाँ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

अरे जिसकी कोख में पला,
अब उसकी छाया बुरी लगती,
बैठ होण्डा पे महबूबा,
कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की,
वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

बेबस हुई माँ अब,
दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर,
तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत
हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
I love so much my mother…

मां तो जन्नत का फूल है,
प्यार करना उसका उसूल है ,
दुनिया की मोह्ब्बत फिजूल है ,
मां की हर दुआ कबूल है ,
मां को नाराज करना इंसान तेरी भूल है ,
मां के कदमो की मिट्टी जन्नत की धूल है ,
अगर अपनी मां से है प्यार तो
अपने दोस्तों को शेयर करे, कमेंट करे, लाइक करे वरना ,
ये मेसेज आपके लिये फिजूल है

(किसी मित्र के मेसेज से प्राप्त)

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

23 मार्च 1931 बलिदान दिवस

भारत की शान बढ़ाई है,
देकर अपनी कुर्बानी को।
है नाम उसी का भगत सिंह,
उसकी है नमन जवानी को।।

वो है महान माता जिसने,
ऐसे सपूत को जन्म दिया।
हम याद रखेंगे सदियों तक,
जिसने गोरों को तंग किया।।

मेरा रंग दे बसन्ती चोला,
जब किया तो गाके उमंग किया।
सच्चा जाबाज़ था भारत का,
जिसने आजीवन जंग किया।।

आज़ाद कराना है भारत,
ये बात कभी न वो भूला।
इक भगत मरा सौ आयेंगे,
ये कहकर ही फाँसी झूला।।

23 मार्च 1931 बलिदान दिवस पर भगत सिंह,सुखदेव व राजगुरु को कोटि कोटि प्रणाम।शत शत नमन….!!

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