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आलू पर कविता नहीं होता

कृपया ध्यान दे …!
मधुलेश पाण्डेय निल्को की यह एक वयंगात्मक रचना है, इसका उद्देशय किसी तो ठेस पहुचाना बिलकुल नहीं है।
ये कविता पढ़ना माना एक जुर्म है, पर इस जुर्म में किसी का मुंह काला नहीं होता | (डोंट वरी)

यह एक करारा जवाब है जो कहते है की आलू पर कविता नहीं होता |

तो पढ़िये यह शीषर्कहीन रचना और अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें।
आख़िर फूट ही गया आलू बम
निकाल दिया है सबका दम
दिखा दिया की हम नहीं है कम
और फोड़ दिया अनोखा बम
जैसे ही ये बम फूटा
लगा जैसे कुछ टूटा
निकला वही खोटा
जो था सबसे छोटा
बात आलू की करता हूँ
नहीं किसी से डरता हूँ
निल्को जब मैं लिखता हूँ
व्यंगों की वर्षा करता हूँ
शीषर्कहीन ये सूक्तिया है
विष्णु ने भरी बची रिक्तिया है
आलू की जो शक्तिया है
कम पड़ी मेरी पंक्तिया है
ये ब्लैक स्टोन की जो पूजा है
नहीं इनसा कोई दूजा है
बिलावल ने भी अब ठाना है
सुनाना अपना ही ताना बाना है  
मधुलेश पाण्डेय निल्को
एक आलू सेवनकर्ता

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6 दिसम्बर शौर्य दिवस

नहीं चाहिए हिन्दुओं को ऐसी धर्मनिर्पेक्षता जो हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ कर व हिन्दुओं का खून बहाकर फलती फूलती है । आज इसी वजह से जागरूक हिन्दू इस धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपे हिन्दूविरोधियों को पहचान कर अपनी मातृभूमि भारत से इनकी सोच का नामोनिशान मिटाकर इस देश को धर्मनिर्पेक्षता द्वारा दिए गये इन जख्मों से मुक्त करने की कसम उठाने पर मजबूर हैं।
जय श्री राम…!

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

🚩🚩अयोध्या करती है आह्वान
ठाठ से कर मंदिर निर्माण
शिला की जगह लगा दे प्राण
बिठा दे वहाँ राम भगवान
हिंदू है तो हिंदुओं की आन मत जाने दे
राम लला पे कोई आंच मत आने दे
कायर विरोधियों को शोर मचाने दे
लक्ष्य का रख तू ध्यान
मंदिर बनाने का पुराना अनुबंध है
सब तेरे साथ पूरा पूरा प्रबंध है.
कारसेवकों के बलिदान की सौगंध है
बढ़ चल वीर जवान.
जिस दिन राम का भवन बन जाएगा
उस दिन भारत में राम राज आएगा
रामभक्तों का हृदय मुस्काएगा
खिल के कमल समान
अयोध्या करती है आह्वान
ठाठ से कर मंदिर निर्माण🚩🚩
      🚩🚩जय श्रीराम🚩🚩

ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

ए दोस्त ज़रा मुझ पर
रहमत की नज़र रखना
मै भी तुंहरा ही हूँ
इसकी तो खबर रखना 
मुझ जैसे डूबने वालों को
अब तेरा सहारा है
निल्को ने देख लिया सबको
अब तुझको पुकारा है 
कही डूब न जाऊ मैं
मेरा हाथ पकड़ रखना
तेरी ज़िंदगी के इतिहास में
मेरी भी एक कहानी लिखना 
प्रेम की गर न हो निशानी
ऐसी मीरा की क्या जो न हो दीवानी
ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा
जिसमे न हो तेरी मेरी कहानी

रंग तो इसका कुछ और चढ़ा होता
प्रेम का यदि व्याकरण तुमने पढ़ा होता
तुम्हारे साथ मिलकर मधुलेश
इक नया आचरण गढ़ा होता
अपनी तो क्या लिखू ए दोस्त
कुछ कम,कुछ गम और कुछ नम लिखते है
एक डायरी रखता हूँ दिल के अंदर
जिस पर सिर्फ़ और सिर्फ तुम्हारा नाम लिखते है
 एम के पाण्डेय निल्को
(युवा ब्लॉगर और कवि)

आखिर कब तक ढूँढेगा निल्को

बहुत याद आउगा 
जब छोड़ के जाउगा
चाहे लाख बुराई क्यू न हो
पर तुम जैसा दोस्त नहीं पाउगा

बहुत छेड़ता हूँ न मैं
परेशान भी करता हूँ न मैं
गुस्सा तुम होते हो मन ही मन
पर मनाता भी न हूँ मैं

क्यू सताते हो कुछ इस तरह
मिलते नहीं हो रोज की  तरह
आखिर कब तक ढूँढेगा निल्को
तुम्हे बीच इस शहर

कहती हो न की छोडो मुझको
अपनी बाहों में न लो मुझको
उस दिन आँसू न बहाना
जिसदिन छोड़ जाऊगा तुम सबको

बहुत ही अच्छा मैं तो नहीं
दिल से बच्चा मैं तो नहीं
पर एक बात तो कहूँगा ही
थोडा सा सच्चा मैं भी सही

एम के पाण्डेय निल्को 




कौन कहता है भारत भूखा मर रहा है?

लड़कियाँ भाव खा रही हैँ 
 लड़के धोखा खा रहे हैँ 
पुलिस रिश्वत खा रही है 
 नेता माल खा रहे हैँ 
किसान जहर खा रहे हैँ
 जवान गोली खा रहे हैँ 
कौन कहता है 
भारत भूखा मर रहा है?
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एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से सम्मानित किया जाएगा ।

निर्मला सेवानी जी 
एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से 10 अक्टूबर 2015 को दिल्ली के राष्ट्रीय सम्मेलन मे सम्मानित किया जाएगा । अतीन्द्रिय ज्ञान के धनी व्यक्तित्वों में एक प्रमुख नाम जयपुर की निर्मला सेवानी जी का भी है। वह महज आवाज सुनकर जीवन का हाल बता देती हैं। बात कुछ अटपटी जरूर है, पर है बिलकुल सच। निर्मलाजी ने मात्र 13 साल की उम्र में पहली भविष्यवाणी कर दी थी। वह 1989 से यह कार्य कर रही हैं, लेकिन 1991 से उन्होंने इसे व्यावसायिक तौर पर अपना लिया है। ज्योतिष के क्षेत्र में निर्मला सेवानी जी ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की है। वह अपने जयपुर, दिल्ली आदि कार्यालयों में लोगों से घिरी रहती हैं। उनके बारे में लोगों की यह धारणा है कि वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं तथ व्यक्ति की आवाज सुनकर उसका भविष्य कथन करने में उन्हें महारथ हासिल है। निर्मला जी जन्मपत्री भी देखती हैं, लेकिन उसके अभाव में वह आवाज सुनकर भविष्य के बारे में बताना शुरू कर देती हैं। उनको इस अनोखी प्रतिभा के लिए ही यह सम्मान देने की घोषणा की गई है । इसी के साथ जयपुर के गूगल बॉय मनन सूद को उनकी इंटेलिजेंस और स्मार्टनेस के लिए वर्ष 2015 के राष्ट्रीय स्तर पर अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान के लिए चुना गया है।

मनन सूद 

जयपुर के रूट्स पब्लिक स्कूल के प्रेप क्लास में पढ़ने वाले मनन को यह पुरस्कार उन्हें शॉर्प माइंड अच्छी याददाश्त के लिए नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को दिया जा रहा है। मनन को पूरे विश्व का नक्शा मुंहजबानी याद है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है । 

सादर
एम के पाण्डेय निल्को 
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इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये – मुनव्वर राना


इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये 

आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये


आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं 

आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये


ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों 

आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये


जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें 

टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये


अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे 

इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये

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