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Happy New Year – 2017

नव वर्ष मुबारक
नए साल की पावन बेला में एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ, हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ, जो आज तक सिमट कर रह गई थी ख्यालों में, उन सपनों को नव वर्ष 2017 में सच कर दिखाएँ………!!!!!!
आपको दिल के हर कोने से नव वर्ष मुबारक

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ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये व्यवहार नहीं

धरा ठिठुरती है शीत से
आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
सर्द हवा का पहरा है

सूना है प्रकृति का आँगन
कुछ रंग नहीं, उमंग नहीं
हर कोई है घर में दुबका हुआ
नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं

चंद मास अभी इंतज़ार करो
निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही
क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही

ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने  दो
फागुन का रंग बिखरने दो

प्रकृति दुल्हन का रूप धर
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी

तब चैत्र-शुक्ल  की प्रथम तिथि
नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जय-गान सुनाया जायेगा ।

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

साल निकल रहा है

साल निकल रहा है, कुछ नया होता है..
कुछ पुराना पीछे रह जाता है…
कुछ ख्वाईशैं दिल मैं रह जाती हैं..
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं …
कुछ छौड कर चले गये..
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मैं ..
कुछ मुझसे खफा हैं..
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं..
कुछ मुझे भूल गये…
कुछ मुझे याद करते हैं…
कुछ शायद अनजान हैं कुछ बहुत परेशान हैं..
कुछ को मेरा इंतजार हैं ..
कुछ का मुझे इंतजार है..
कुछ सही है कुछ गलत भी है.कोई गलती तो माफ कीजिये और कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये

महात्मा गांधी और भारतरत्न पं. लालबहादुर शास्त्री को नमन।

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नज़र निल्को की – तेरी नज़दीक वाली दूरिया


तेरी नज़दीक वाली दूरिया
लगती है जैसे गोलिया
तेरी हर अदा कुछ ख़ास नहीं
पर सहती है हर एक बोलिया


उसका बनना और सवरना
जैसे हो पानी का ठहरना 
पर इतराती ऐसे वो
जैसे दौड़ में भी टहलना
पुकारते है कई नाम से उसे 
धूप मे भी बारिश हो जैसे 
पर सुनती नहीं वो एक बार भी 
चाहे करा लो अपनी जैसे तैसे  
झील सी आखे है उसकी 
पर पता नहीं है वो किसकी 
मिलने का बनाया था इरादा 
किन्तु नहीं दी पता वो घर की 

उसकी खामोसी जब जब बोली है 
असर करती जैसे दर्द -ए -दिल की गोली है 
सारे पर्व और त्योहार उसके चेहरे पर 
और खेलता ‘निल्को‘ रोज जैसे होली है 

**************

एम के पाण्डेय निल्को 

उठो लाल अब आँखे खोलो

उठो लाल अब आँखे खोलो
मोबाईल ऑन कर नेट टटोलो..
चलो देख लो वाट्सएप पहले
ज्ञान जोक्स पर रोले हंस ले।
फेसबुक की है दूसरी बारी
जहाँ दिखेगी दुनिया सारी
देखो किसने क्या है डाला
किसने कितना किया घोटाला
कौन आज दुनिया में आया
किसने किससे केक कटाया
ट्विटर की तो बात निराली
चार शब्द् में गाथा गा ली।
उठो तुम भी कुछ लिख लिख बोलो
उठो लाल अब आँखे खोलो
मोबाईल ऑन कर नेट टटोलो..!!

कारगिल युद्ध – विजय दिवस

किसी का चित्र नोटों पे
किसी का चिन्ह वोटो पे
शहीदों तुम ह्रदय में हो
तुम्हारा नाम होंठो पे …..

VMW Group सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन करता हैं।
जय हिन्द जय भारत

आज कारगिल युद्ध की वर्षगाठ है आप सभी को इस

विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
और हमारे जांबाज सैनिको और शहीद जवानों को शत शत नमन…


लौट आओ हुआ सवेरा

 

लौट आओ, हुआ सवेरा ,
एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा |

बीत गया जो बीतना था
एक पुराने एहसास के साथ
समय आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
वो समय , जो गलत था
जिसको हमने नहीं समझा ,
एक गलतफहमी के साथ
नया साल आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
सारी भूमिकाएं पीछें छुट गयी
एक नए वादों के साथ
वो सारे दिन चले गए छोड़ हमें
एक नयी कहानी के साथ
समय आया एक नए हौसलों का
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
कर गया अंकित हमें
पुरे अंजर-पंजर के साथ
कैसे निकलू इस अंतःकरण से
इस गंभीर कल्पना के साथ
लौट आओ ,हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद|
लौट आओ ,हुआ सवेरा
 

-सौम्या पाण्डेय (बिट्टू)