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राम पर लिखना कठिन हैं….

पहले उसे छला गया । फिर वो वन चला गया ।।
एक वचन की लाज रखने । भाई के सर ताज रखने।।
माँ की ममता छोड़ कर । सारे बंधन तोड़ कर।।
राम पर लिखना कठिन है ।।


न थी लालसा वैभव की । न थी सत्ता की पिपासा ।। रखा ठोकर पर सिंहासन । और दी
पिता को दिलासा ।।
जानते थे वे प्रभु है । और वैभव सारे लघु है।।
सोचो तुम तनिक ये । अवतार लेकर मानव में ।।
आम रहना कितना कठिन है । राम पर लिखना कठिन है ।।

सूखा सकते थे वे सागर। फिर भी उन्होंने हाथ जोड़े।।
जीत लेते लंका को । फिर भी वानर साथ जोड़े।।

राम हो जब दुख ही देखो । सोच कर तुम ख़ुद ही देखो।।
पास हो जब सारी शक्ति। और जिसकी होती हो भक्ति।।
काम करना कितना कठिन है। राम पर लिखना कठिन है ।।
राम पर लिखना कठिन है ।।

Anshu Pathak

गुरुपूर्णिमा 9 जुलाई – गुरु गूंगे गुरू बावरे गुरू के रहिये दास

एक बार की बात है नारद जी विष्णु भगवानजी से मिलने गए !
भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया ! जब नारद जी वापिस गए तो विष्णुजी ने कहा हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे ! उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो !

जब विष्णुजी यह बात कह रहे थे तब नारदजी बाहर ही खड़े थे ! उन्होंने सब सुन लिया और वापिस आ गए और विष्णु भगवान जी से पुछा हे भगवान जब मै आया तो आपने मेरा खूब सम्मान किया पर जब मै जा रहा था तो आपने लक्ष्मी जी से यह क्यों कहा कि जिस स्थान पर नारद बैठा था उस स्थान को गोबर से लीप दो !

भगवान ने कहा हे नारद मैंने आपका सम्मान इसलिए किया क्योंकि आप देव ऋषि है और मैंने देवी लक्ष्मी से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आपका कोई गुरु नहीं है ! आप निगुरे है ! जिस स्थान पर कोई निगुरा बैठ जाता है वो स्थान गन्दा हो जाता है !

यह सुनकर नारद जी ने कहा हे भगवान आपकी बात सत्य है पर मै गुरु किसे बनाऊ ! नारायण! बोले हे नारद धरती पर चले जाओ जो व्यक्ति सबसे पहले मिले उसे अपना गुरु मानलो !

नारद जी ने प्रणाम किया और चले गए ! जब नारद जी धरती पर आये तो उन्हें सबसे पहले एक मछली पकड़ने वाला एक मछुवारा मिला ! नारद जी वापिस नारायण के पास चले गए और कहा महाराज वो मछुवारा तो कुछ भी नहीं जानता मै उसे गुरु कैसे मान सकता हूँ ?

यह सुनकर भगवान ने कहा नारद जी अपना प्रण पूरा करो ! नारद जी वापिस आये और उस मछुवारे से कहा मेरे गुरु बन जाओ ! पहले तो मछुवारा नहीं माना बाद में बहुत मनाने से मान गया !

मछुवारे को राजी करने के बाद नारद जी वापीस भगवान के पास गए और कहा हे भगवान! मेरे गुरूजी को तो कुछ भी नहीं आता वे मुझे क्या सिखायेगे ! यह सुनकर विष्णु जी को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा हे नारद गुरु निंदा करते हो जाओ मै आपको श्राप देता हूँ कि आपको ८४ लाख योनियों में घूमना पड़ेगा !

यह सुनकर नारद जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा हे भगवान! इस श्राप से बचने का उपाय भी बता दीजिये !भगवान नारायण ने कहा इसका उपाय जाकर अपने गुरुदेव से पूछो ! नारद जी ने सारी बात जाकर गुरुदेव को बताई ! गुरूजी ने कहा ऐसा करना भगवान से कहना ८४ लाख योनियों की तस्वीरे धरती पर बना दे फिर उस पर लेट कर गोल घूम लेना और विष्णु जी से कहना ८४ लाख योनियों में घूम आया मुझे माफ़ करदो आगे से गुरु निंदा नहीं करूँगा !
नारद जी ने विष्णु जी के पास जाकर ऐसा ही किया उनसे कहा ८४ लाख योनिया धरती पर बना दो और फिर उन पर लेट कर घूम लिए और कहा नारायण मुझे माफ़ कर दीजिये आगे से कभी गुरु निंदा नहीं करूँगा ! यह सुनकर विष्णु जी ने कहा देखा जिस गुरु की निंदा कर रहे थे उसी ने मेरे श्राप से बचा लिया !
नारदजी गुरु की महिमा अपरम्पार है !
गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास,
गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस !

गुरु चाहे गूंगा हो चाहे गुरु बाबरा हो (पागल हो) गुरु के हमेशा दास रहना चाहिए ! गुरु यदि नरक को भेजे तब भी शिष्य को यह इच्छा रखनी चाहिए कि मुझे स्वर्ग प्राप्त होगा ,अर्थात इसमें मेरा कल्याण ही होगा! यदि शिष्य को गुरु पर पूर्ण विश्वास हो तो उसका बुरा “स्वयं गुरु” भी नहीं कर सकते !

एक प्रसंग है कि एक पंडीत ने धन्ने भगत को एक साधारण पत्थर देकर कहा  इसे भोग लगाया करो एक दिन भगवान कृष्ण दर्शन देगे ! उस धन्ने भक्त के विश्वास से एक दिन उस पत्थर से भगवान प्रकट हो गए ! फिर गुरु पर तो वचन विश्वास रखने वाले का उद्धार निश्चित है।

Happy New Year – 2017

नव वर्ष मुबारक
नए साल की पावन बेला में एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ, हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ, जो आज तक सिमट कर रह गई थी ख्यालों में, उन सपनों को नव वर्ष 2017 में सच कर दिखाएँ………!!!!!!
आपको दिल के हर कोने से नव वर्ष मुबारक

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जन्मदिन उन बच्चो के साथ

जन्मदिन उन बच्चो के साथ
डाल गले मे हाथ
खा रहे थे सभी बैठ सड़क पर
पिज्जा हम उनके साथ
कोई जाति नहीं
कोई मजहब नहीं
जो उनको दे दिया
है वही सही

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कुंडली में मांगलिक ‍दोष से डरें नही

जीवन साथी के चयन के लिऐ ग्रह मेलापक (गुण-मिलान) की चर्चा होती है,तो मांगलिक विचार पर खासतौर पर विचार करते है,समाज मे मांगलिक दो  का हव्वा इतनी फैल गया है ।कि मांगलिक के नाम पर महत्वपूर्ण निर्णय अटक जाते है।कई बार अमंगली कुंडली को मांगलिक और मांगलिक कुंडली को अमांगलिक घोषि‍त कर दिया जाता है,जिससे परिजन असमंजस मे पड जाते है,॥
मांगलिक कुंडली का निर्णय बारिकी से किया जाना चाहिऐ क्योकि शास्त्रोँ मै मांगलिक दोष निवारण के तरीके उपलब्ध है.शास्त्रवचनो के जिस श्लोक के आधार पर जहा कोई कुंडली मांगलिक बनती है .वही उस श्लोक के परिहार (काट) कई प्रमाण है,ज्योतिष और व्याकरण का सिध्दांत है,कि पूर्ववर्ती कारिका से परवर्ती कारिका (बाद वाली) बलवान होती है .दोष के सम्बन्ध मै परवर्ती कारिका ही परिहार है ,इसलिये मांगलिक दोष का परिहार मिलता हो तो जरूर विवाह का फैसला किया जाना चाहिये॥ परिहार नही मिलने पर भी यदि मांगलिक कन्या का विवाह गैर मांगलिक वर से करना हो तो शास्त्रो मे विवाह से पूर्व “घट विवाह” का  प्रावधन है ,मांगलिक प्रभाव वाली कुंडलीसे भयभीत होने कि जरूरत नही है ॥यह दोष नही है वल्कि इसी मंगल के प्रभाव से जातक कर्मठ, प्रभावशाली, धैर्यवान तथा सम्मानीय बनता है ॥
                                             घट विवाह भी है उपाय
कन्या की कुंडली मै मांगलिक दोष का परिहार नही हो रहा हो तो उपाय के रूप मे कन्या का प्रथम विवाह \सात फेरे किसी घट (घडे) या पीपल के वृक्ष साथ कराए जाने का विधान है ।इस प्रकार के उपाय के पीछे तर्क यह है कि मंगली दोष का मारक प्रभाव उस घट या वृक्ष पर होता हे ,जिससे कन्या का प्रथम विवाह किया जाता है । वर दूसरा पति होने के कारण उस प्रभाव से सुरक्षित रह जाता है ॥घट विवाह शुभ विवाह मुहूर्त और शुभ लग्न मे पुरोहित द्वारा सम्पन्न कराया जाना चाहिये । कन्या का पिता पूर्वाभिमुख बैठकर अपने दाहिने तरफ कन्या को बिठाऐ॥ कन्या का पिता घट विवाह का सकल्प ले ।नवग्रह,गौरी गणेशादि का पूजन ,शांति पाठ इत्यादि करे ।घट कि षोडषोचार से पूजा करे ।शाखोचार,हवन,सात फेरे और विवाह कि अन्य रश्म निभाये ।बाद मे कन्या घट को उठाकर ह्र्दय से सटाकर भुमि पर छोड दे जिससे घट फूट जाये ।इसके बाद देवताओ का विसर्जन करे और ब्राह्मणो को दक्षिणा दे बाद मे चिरंजीवी वर से कन्या का विवाह करे॥
                             मंगल का विचार करना
लग्ने व्यये च पाताले यामित्रे चाष्टमे कुजे .                                                                                                     कन्या भर्तु विनाशाय भर्तु कन्या विनाशकृत ॥
जन्म लग्न मे (1,4,7,8,12)स्थानो मंगल होने से वर – कन्या मंगली होते है॥
                       
                            मंगल दोष के परिहार

मांगलिक कुंडलियो मे दो तरह के परिहार मिलते है। (1) स्वय की कुंडली मे-जैसे शुभ ग्रहो का केन्द्र मे होना,शुक्र द्वितीय भाव मे हो,गुरू मंगल साथ हो या मंगल पर गुरू की दृष्टिे हो तो मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है। (2) वर-कन्या की कुन्डली मे आपस मांगलिक दोष का काट –जैसे एक के मांगलिक स्थान मे मंगल हो और दूसरे के इन्ही स्थानो मे सूर्य,शनि,राहु,केतु मे से कोई एक ग्रह हो तो दोष नष्ट हो जाता है।पापक्रांत शुक्र और सप्तम भाव के स्वामी की नेष्ट स्थिति को भी मंगल तुल्य ही समझे।मंगल दोष परिहार के कुछ शास्त्र वचन निम्न प्रकार है।इनके आधार पर यदि मांगलिक दोष भंग हो जाता है तो विवाह के बाद उनका दाम्पत्य जीवन सुख और प्रसन्नता पूर्वक व्यतीत होगा॥
अंजे लग्ने व्यये चापे पाताले वृश्चिके कुजे।                                                                                                                                  वृषे जाए घटे रन्ध्रे भौमदोषो न विद्यते॥ 
मेष का मंगल लग्न मे, धनु का द्वादश भाव मे वृश्चिक का चौथे भाव मे,वृष का सप्तम मे कुम्भ का आठवे भाव मे हो तो भौम दोष नही रहता ॥
अर्केन्दु क्षेत्रजातां कुज दोषो न विद्यते ।                                                                                                                      स्वोच्चमित्रभ जातानां तद् दोषो न विद्यते ॥
सिंह लग्न और कर्क लग्न मे भी लग्नस्थ मंगल का दोष नही होता है
नीचस्थो रिपुराशिस्थः खेटो भाव विनाशकः ।                                                                                                                               मूलस्वतुंगा मित्रस्था भावबृद्धि करोत्यलमः ॥
कुंडली मे मंगल यदि स्व-राशि (मेष,बृश्चिक )मूलत्रिकोण,उच्चराशि (मकर)मित्र राशि (सिंह,धनु,मीन )मे हो तो भौम दोष नही रहता है                                                                                                                                               शनि भौमोथवा कश्चित्पापो वा तादृशो भवेत् ।                                                                                                                  तेष्वेव भवनेष्वेव भौम दोष विनाशकृत ॥
शनि मंगल या कोई भी पाप ग्रह जैसे राहु,सूर्य,केतु अगर मंगलिक भावो(1,4,7,8,12)मे कन्या कि कुंडली हो और उन्ही भावो मे वर के भी हो तो भौम दोषनष्ट होता है ।यानि यदि एक कुंडली मे मांगलिक स्थान मे मंगल हो तथा दूसरे की मे इन्ही स्थानो मे शनि,सूर्य,मंगल,राहु,केतु मे से कोई एक ग्रह हो तो उअस दोष को काटता है।
केन्द्रे कोणे शुभाढ्याश्चते् च त्रिषडा़येप्य सद्ग्रहाः ।                                                                                                                                         तदा भौमस्य दोषो न मदने मदपस्तथा ॥                  
यानी 3,6,11वे भावो मे अशुभ ग्रह हो और केन्द्र (1,4,7,10)व त्रिकोण (5,9) मे शुभ ग्रह हो,सप्तमेष सातवे भाव मे हो तो मंगल दोष नही रहता है ।
वाचस्पतौ नवपंच केन्द्र संस्थे जातांगना भवति पूर्णविभूतियुक्ता ।                                                                          साध्वी सुपुत्रजननी सुखिनीगुढ्यां सप्ताष्टके यदि भवेदशुभ ग्रहोपि ॥
कन्या की कुंडली मे गुरू यदि केन्द्र या त्रिकोण मे हो तो मांगलिक दोष नही लगता अपितु उसके सुख-सौभाग्य को बढाने वाला होता है ।    त्रिषट्‍ एकादशे राहु त्रिषड़कादशे शनिः। त्रिषड़कादशे भौमः सर्वदोष विनाशकृतः॥
यदि एक कुंडली मे मांगलिक योग हो और दूसरे कि कुंडली के (3,6,11)वे भाव मे से किसी भाव मे राहु ,मंगल या शनि मे से कोई ग्रह हो तो मांगलिक दोष नष्ट हो जाता है ।
द्वितीय भौमदोषस्तु कन्यामिथुन योर्विना,                                                                                                                                चतुर्थ कुजदोषःस्याद्‍ तुलाबृषभयोर्विना।                                                                                                                    अष्टमो भौमदोषस्तु धनु मीनद्व योर्विना,                                                                                                                                                                   व्यये तु कुजदोषःस्याद् कन्यामिथुन योर्विना॥
द्वितीय भाव मे यदि बुध राशि (मिथुन,कन्या) का मंगल हो तो मांगलिक दोष नही लगेगा ऐसा बृष व सिंह लग्न की कुंडली मे ही होगा ।चतुर्थ भाव मे शुक्र राशि (बृष,तुला) का मंगल दोषकृत नही है, ऐसा कर्क व कुम्भ लग्न मे होगा।अष्टम भाव मे गुरू राशि (धनु,मीन) का मंगल दोष पैदा नही करेगा ।ऐस बृष और सिंह लग्न मे ही सम्भव है और बारहवे भाव मे मंगल का दोष बुध कि राशि (मिथुन,कन्या) मे नही होगा ।ऐसा कर्क और तुला लग्नो मे ही होगा तथा 1,4,7,8,12 वे भाव मे मंगल यदि चर राशि मेष कर्क ,तुला और मकर मे हो तो भी मांगलिक दोष नही लगता है ॥
भौमेन सदृषो भौमः पापोवा तादृशो भवेत।                                                                                                      विवाह शुभदः प्रोक्ततिश्चरायुः पुत्र पौत्रदः ॥
मंगल के समान ही कोई पापग्रह (सूर्य,शनि,राहु,केतु) दूसरे कि कुंडली  के मांगलिक स्थान मे हो तो दोनो का विवाह करना चाहिए ,ऐसे दाम्पत्ति आयु,पुत्र,पौत्रादि से सम्पन्न होकर सुखी जीवन व्यतीत करेगे ।                                            यामित्रे च यदा सौरि लग्ने वा हिबूकेथवा ।                                                                                                                      अष्टमे द्वादशे चैव- भौम दोषो न विद्यते ॥
जिस वर –कन्या के (1,4,7,8,12) इन स्थनो मे शनि हो तो मंगली दोष मिट जाता है
गुरु भौम समायुक्तश्च भौमश्च निशाकरः                                                                                                                केन्द्रे वा वर्तते चन्द्र एतद्योग न मंगली ।                                                                                                                      गुरु लग्ने त्रिकोणेवा लाभ स्थाने यदा शनिः,                                                                                                                  दशमे च यदा राहु मंगली दोष नाश कृत॥
गुरु भौम के साथ पडने से अथवा चन्द्रमा भौम एक साथ और केन्द्र मे (1,4,7,10) इन स्थानो मे चन्द्रमा होवे तो भी मंगली दोष मिट जाता है , जिसके लग्न मे गुरु बैठा हो अथवा त्रिकोण स्थान (5,9) मे गुरु बैठा और 11 भाव शनि हो 10 वे स्थान राहु बैठा हो तो भी मंगली दोष मिट जाता है ॥

नेता जी सुभाषचन्द्र बोस

नेताजी शब्द हमारी स्मृति में सुभाषचन्द्र बोस के साथ इस कदर जुडी चली आयी है कि और के साथ इसका जुडना अटपटा लगता है।कभी बचपन में ही उनकी एक किताब पढी थी-तरुण के स्वप्न।उसका एक वाक्य मेरी स्मृति का स्थायी हिस्सा बन गया-‘हमें गलतियां करने का अधिकार चाहिए’।नेताजी की यह बात मेरे बचपन के लिए बहुत राहत देने वाली साबित हुई ।हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे।परिवार के मुखिया मेरे बाबा थे।बाबा स्वभावत: उदारमना व्यक्ति थे।बहुत पढे लिखे न थे लेकिन सहज बुद्धि के धनी और उद्यमी व्यक्ति थे।मेरे पिता को पढने लिखने के बाद भी जीवन में व्यावहारिक सफलता नहीं मिली थी और वे कुछ सधुआ से गये थे।घर के काम धाम और व्यवस्था से विशेष सरोकार नहीं था।एक कमरे में अपने को बन्द किए तरह तरह के मन्त्र और राम नाम जपते रहते।हम भाई बहन अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह बाबा पर आश्रित थे।हमारे घर में एक ऐसे सदस्य भी थे जो पढाई लिखाई छोडकर घर बैठ गये थे।गाँव के और उस जमाने के लिहाज से काफी दिनों तक शादी नहीं हुई थी।पता नहीं घर के काम में मन नही लगता था या करने की क्षमता नहीं थी सो उनके पास समय ही समय था।स्वभाव से गुस्सैल,ईर्ष्यालु और बेहद संकुचित दिल दिमाग के व्यक्ति ।उन्होंने घर में अपनी भूमिका हिन्दी फिल्मों के दरोगा की चुन ली थी।उनका एक मात्र काम हमारी गलतियां निकालना और इस बहाने हमारी पिटाई करना था।पिटाई भी ऐसे करते जैसे किसी चोर या कमजोर अपराधी की पिटाई दरोगा करता है।उनकी सतत निगरानी और छोटी छोटी बात पर कसाई की तरह पिटाई करने की आदत से हम आतंकित रहते।वे हमारे बचपन के अभियोजक,दण्डाधिकारी और सजा देने वाले सब बने हुए थे।हमारा शारीरिक मानसिक विकास अवरुद्ध हो गया था।हमारे लिए मुक्ति का कोई उपाय नहीं था ।ऐसे ही समय में मेरे हाथ यह किताब लगी थी।मुझे लगा कि तरुणाई को इतने कठोर और नृशंस बन्धन में रखना उसकी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का सत्यानाश करना है।धीरे धीरे सुभाष बाबू के इस वाक्य ने मेरी चेतना को बदलना शुरु किया।और मेरे भीतर बच्चों या किशोरों के लिए स्वाभाविक उन्मुक्तता की प्रबल चाह पैदा हुई।और हम अपने घर के स्वयंभू दारोगा से अत्याचार से अपने को मुक्त करा सके।
आगे चल कर यह भी महसूस हुआ कि इस तरह की स्वयंभू दरोगई ओढ लेने वाले लोग कहीं न कहीं बहुत गहरे कुण्ठित होते हैं,घर में हों या समाज में सृजन ,कल्पना और सौन्दर्य के शत्रु होते हैं।सुभाषचन्द्र बोस को याद करते हुए यह बात बहुत शिद्दत से महसूस होती है।

प्रतिभाओ को मिला समाज रत्न 2015 अवार्ड

परमार्थ एवं आध्यत्मिक समिति व राजस्थान जन मंच की ओर से रविवार को गो सेवा, अहिंसा, शाकाहार, प्राणी कल्याण, विलक्षण प्रतिभा, साहित्य, खेल कूद  जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले विभिन्न विशिष्ट बालको,  व्यक्तियों और संस्था को समाज रत्न 2015′  से सम्मानित किया गया। पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में आयोजित समारोह में विलक्षण प्रतिभा के लिए मास्टर मनन सूद, नशा मुक्ति के लिए अजय कुमार, सामाजिक जागरण के लिए श्री अर्जुन देव,राजस्थानी साहित्य के लिए देव किशन राजपुरोहित, गौ सेवा के लिए श्री मदन मोहन खेल के लिए महेश नेहरा, हिन्दी साहित्य के लिए मुश्ताक अहमद, समाज सेवा के लिए श्री विश्वनाथ, श्री निर्मल गोधा,श्री राम बाबू, श्री सत्यनारायण शिक्षा के क्षेत्र मे श्रीमती स्नेहलता तथा विकलांग सेवा के लिए श्री सुभाष तटवार सहित कई प्रतिभाओ को सम्मानित किया गया । कहते है की जितना आवश्यक है समाज कानून विरोधियो को दंडित करना उससे कही अधिक आवश्यक है सेवा भावी व कर्मयोगियों को सम्मानित करना । कार्यक्रम मे मुख्य सरक्षक श्री आर के अग्रवाल सहित श्री कमल लोचन, श्री श्याम विजय सहित मुख्य अतिथि  श्री महेश चंद गुप्ता, आर डी शर्मा तथा परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रज्ञानन्द जी महाराज सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे । 

आपको सर्दी की शुभकामनांए

जाड़े की धूप

              टमाटर का सूप ।।

मूंगफली के दाने

            छुट्टी के बहाने ।।

तबीयत नरम

                पकौड़े गरम ।।

ठंडी हवा

               मुँह से धुँआ ।।

फटे हुए गाल

             सर्दी से बेहाल ।।

तन पर पड़े

                 ऊनी कपड़े ।।

दुबले भी लगते

                   मोटे तगड़े ।।

किटकिटाते दांत

             ठिठुरते ये हाथ ।।

जलता अलाव

              हाथों का सिकाव ।।

गुदगुदा बिछौना

                रजाई में सोना ।।

सुबह का होना

                सपनो में खोना ।।

स्वागत है सर्दियों का आना

आपको सर्दी की शुभकामनांए

आइये मनाये सार्थक दीपावली

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे,
कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा…

एक गरीब बच्चे कि आखों मे,
मैने दिवाली को मरते देखा.

थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की…
पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा.

हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश…
उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा.

जब मैने कहा, “बच्चे, क्या चहिये तुम्हे”?
तो उसे चुप-चाप मुस्कुरा कर “ना” मे सिर हिलाते देखा.

थी वह उम्र बहुत छोटी अभी…
पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा

रात को सारे शहर कि दीपो कि लौ मे…
मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरें को देखा.

हम तो जीन्दा है अभी शान से यहा.
पर उसे जीते जी शान से मरते देखा.

लोग कहते है, त्योहार होते है जिंदगी मे खूशीयो के लिए,
तो क्यो मैने उसे मन ही मन मे घूटते और तरस्ते देखा

Attention Arm Wrestlers – Tigers’ Martial Arts Academy

Attention Arm Wrestlers

Weight Categories
 (Men)
45,50,55,60,65,70,75,80,85,90 & open grp
(Women)
35,40,45,50,55,60,65,70,75 & open grp
(Junior boys & girls)
25,30,35,40,45,50 & open grp
For queries whatsapp # 9829150450

Tigers’ Martial Arts Academy

The Roots Public School, Shiv Colony, 

Laxmi Nagar, Hatwara Road, Jaipur



Arm wrestling involves two participants. Each places one arm on a surface with their elbows bent and touching the surface, and they grip each other’s hand. The goal is to pin the other’s arm onto the surface, with the winner’s arm over the loser’s arm.

A trial of strength in which two people sit opposite each other with one elbow resting on a table, clasp each other’s hands, and try to force each other’s arm down on to the table.

दशहरा : क्या रावण सचमुच मे मर गया ?

 दशहरे पर कल पूरे देश में अच्छाई पर बुराई की विजय के रूप में भगवान राम की पूजा होगी, दशहरा यानी विजय पर्व। दशहरा यानी न्याय और नैतिकता का पर्व। दशहरा यानी सत्य और शक्ति का पर्व। यह पर्व हमें संदेश देता है कि अन्याय और अनैतिकता का दमन हर रूप में सुनिश्चित है। चाहे दुनिया भर की शक्ति और सिद्धियों से आप संपन्न हों लेकिन सामाजिक गरिमा के विरूद्ध किए गए आचरण से आपका विनाश तय है।

कलयुग की तुलना में त्रेता युग हर मामले में बेहतर कहा जाता है और आखिर हो भी क्यों नहीं, उस समय कम से कम इस बात का सुकून था कि रावण एक ही था और उसे एक राम ने ठिकाने लगा दिया लेकिन आज के परिवेश में हालात बहुत पेचीदा हैं। अब तो गली-गली में रावण हैं। इन्हें मारने के लिए इतने राम कहां से लाएं?

पब्लिक जो हर बार रावण दहन देखने जाती है और खुशी-खुशी इस उम्मीद से घर लौटती है कि चलो रावण मर गया लेकिन हर बार होता है उसकी उम्मीदों पर …….? हम चाहे कितने ही रावण जला लें लेकिन हर कोने में कुसंस्कार और अमर्यादा के विराट रावण रोज पनप रहे हैं। रोज सीता के देश की कितनी ही ‘सीता’ नामधारी सरेआम उठा ली जाती है और संस्कृति के तमाम ठेकेदार रावणों के खेमें में पार्टियाँ आयोजित करते नजर आते हैं। आज देश में कहाँ जलता है असली रावण? जलती है यहाँ सिर्फ मासूम सीताएँ। जब तक सही ‘रावण’ को पहचान कर सही ‘समय’ पर जलाया नहीं जाता, कैसे सार्थक होगा, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद आया यह दसवाँ दिन जिस पर माँ सीता की अस्मिता जीती थीं। भगवान राम की दृढ़ मर्यादा जीती थीं। कब जलेंगें इस देश में असली रावण और कब जीतेगीं हर ‘सीता’? कब तक जलेंगे रावण के नकली पुतले और कब बंद होगा दहेज व ‘इज्जत’ के नाम पर कोमल ‘सीताओं’ का दहन?

दशहरा कहो या विजयदशमी लेकिन रावण की पराजय कहीं दिखाई नहीं देती। जब तक सही रावण को पहचान कर सही समय पर जलाया नहीं जलाया नहीं जाता, व्यर्थ है, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद आया यह दसवां दिन जिस पर असत्य पर सत्य की विजय हुई थी। भगवान राम की दृढ़ मर्यादा जीती थीं।

आज कहीं भी असली रावण नहीं जलते। वे तो अपने पुतले की तरह लगातार ऊंचे हो रहे हैं। होड़ हो रही है तेरा रावण 67 फुट का तो उसका 80 का फुट का परंतु मेरा रावण तो 100 फुट का। पुतलों की ऊंचाई की होड़ हो रही है जबकि राम जैसे चरित्र का कहीं अता-पता नहीं है। कब जलेंगे असली रावण और कब जीतेगा साधनहीन, वनवासी सरल राम और उसकी सेना। आखिर क्यों-

झूठ की जय-जयकार है सच पर सौ इल्जाम।

रावण का कद बढ़ रहा, सिकुड़ रहे श्रीराम॥

एम के पाण्डेय निल्को

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एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से सम्मानित किया जाएगा ।

निर्मला सेवानी जी 
एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से 10 अक्टूबर 2015 को दिल्ली के राष्ट्रीय सम्मेलन मे सम्मानित किया जाएगा । अतीन्द्रिय ज्ञान के धनी व्यक्तित्वों में एक प्रमुख नाम जयपुर की निर्मला सेवानी जी का भी है। वह महज आवाज सुनकर जीवन का हाल बता देती हैं। बात कुछ अटपटी जरूर है, पर है बिलकुल सच। निर्मलाजी ने मात्र 13 साल की उम्र में पहली भविष्यवाणी कर दी थी। वह 1989 से यह कार्य कर रही हैं, लेकिन 1991 से उन्होंने इसे व्यावसायिक तौर पर अपना लिया है। ज्योतिष के क्षेत्र में निर्मला सेवानी जी ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की है। वह अपने जयपुर, दिल्ली आदि कार्यालयों में लोगों से घिरी रहती हैं। उनके बारे में लोगों की यह धारणा है कि वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं तथ व्यक्ति की आवाज सुनकर उसका भविष्य कथन करने में उन्हें महारथ हासिल है। निर्मला जी जन्मपत्री भी देखती हैं, लेकिन उसके अभाव में वह आवाज सुनकर भविष्य के बारे में बताना शुरू कर देती हैं। उनको इस अनोखी प्रतिभा के लिए ही यह सम्मान देने की घोषणा की गई है । इसी के साथ जयपुर के गूगल बॉय मनन सूद को उनकी इंटेलिजेंस और स्मार्टनेस के लिए वर्ष 2015 के राष्ट्रीय स्तर पर अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान के लिए चुना गया है।

मनन सूद 

जयपुर के रूट्स पब्लिक स्कूल के प्रेप क्लास में पढ़ने वाले मनन को यह पुरस्कार उन्हें शॉर्प माइंड अच्छी याददाश्त के लिए नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को दिया जा रहा है। मनन को पूरे विश्व का नक्शा मुंहजबानी याद है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है । 

सादर
एम के पाण्डेय निल्को 
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महात्मा गांधी और भारतरत्न पं. लालबहादुर शास्त्री को नमन।

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Happy Teachers Day

आज पाँच सितम्बर है यानी शिक्षक दिवस। आज हम सभी उन अध्यापकों, गुरुओं, आचार्यों, शिक्षकों, मास्टरों, टीचरों को बधाइयाँ देते हैं, याद करते हैं, जिन्होंने हमारे जीवन-दर्शन को कहीं न कहीं से प्रभावित किया। गुरू को इश्वर से अधिक महत्व प्राप्त है। गुरू का नाम ज़रूर बदला है, लेकिन हरेक के जीवन में कहीं न कहीं गुरू रूपी तत्व का समावेश ज़रूर है। ज़रूरी नहीं कि गुरू किसी गुरू के चोंगे में ही हो। प्रत्येक का गुरू अलग है। किसी के लिए माँ गुरू है, किसी के लिए पिता तो किसी के लिए मित्र। आज #VMW_Group भी ऐसे ही सभी गुरुओ को प्रणाम करता है ।

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

कारगिल युद्ध – विजय दिवस

किसी का चित्र नोटों पे
किसी का चिन्ह वोटो पे
शहीदों तुम ह्रदय में हो
तुम्हारा नाम होंठो पे …..

VMW Group सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन करता हैं।
जय हिन्द जय भारत

आज कारगिल युद्ध की वर्षगाठ है आप सभी को इस

विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
और हमारे जांबाज सैनिको और शहीद जवानों को शत शत नमन…


Save The Girl Child

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कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

नवरात्रि के पवन पर्व पर

कन्याए जिमाई जाती है

ढुढ़ते है घर घर उनको

फिर पूजन करी जाती है

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

फिर भी देवी का रूप माना जाता है

विरोधाभास लगती है रीति रिवाज भी

आखिर इनका बचपन काटा क्यो जाता है

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एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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