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VMW Team – शून्य एक हक़ीकत –

शून्य एक हक़ीकत तो क़रीब क़रीब हर पढ़े लिखे व्यक्ति पर उजागर है कि अंकगणित की दुनिया के इस हीरो, जिसे अंग्रेजी में ज़ीरो कहा जाता है का जन्म भारत में हुआ था। शून्य दरअसल क्या है? शून्य के आकार पर गौर करें। गोलाकार मण्डल की आकृति यूँ ही नहीं है। उसके खोखलेपन, पोलेपन पर गौर करें। एक सरल रेखा के दोनों छोर एक निर्दिष्ट बिन्दु की ओर बढ़ाते जाइए और फिर उन्हें मिला दीजिए। यह बन गया शून्य। यह शून्य बना है संस्कृत की ‘शू’ धातु से जिसमें फूलने, फैलने, बढ़ने, चढ़ने, बढ़ोतरी, वृद्धि, उठान, उमड़न और स्फीति का भाव है। स्पष्ट है कि शू से बने शून्य में बाद में चाहे निर्वात, सूनापन, अर्थहीन, खोखला जैसे भाव उसकी आकृति की वजह से समाविष्ट हुए हों, मगर दाशमिक प्रणाली को जन्म देने वालों की निगाह में शून्य में दरअसल फूलने-फैलने, समृद्धि का आशय ही प्रमुख था। इसीलिए यह शून्य जिस भी अंक के साथ जुड़ जाता है, उसकी क्षमता को दस गुना बढ़ा देता है, अर्थात अपने गुण के अनुसार उसे फुला देता है। जब इसके आगे से अंक या इकाई गायब हो जाती है, तब यह सचमुच खोखलापन, निर्वात, शून्यता का बोध कराता है। शून्य के आकार में भी यही सारी विशेषताएँ समाहित हैं। गोलाकार, वलयाकार जिसमें लगातार विस्तार का, फैलने का, वृद्धि का बोध होता है। दरअसल शून्य ही समृद्धि और विस्तार का प्रतीक है।

https://youtu.be/D9NUxnrj-Es

यह महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के बचपन की घटना है। एक बार गणित की कक्षा में अध्यापक ने ब्लैकबोर्ड पर तीन केले बनाए और पूछा- यदि हमारे पास तीन केले हों और तीन विद्यार्थी, तो प्रत्येक विद्यार्थी के हिस्से में कितने केले आएंगे? एक बालक ने तपाक से जवाब दिया- प्रत्येक विद्यार्थी को एक-एक केला मिलेगा। अध्यापक ने कहा-बिल्कुल ठीक। अभी भाग देने की क्रिया को अध्यापक आगे समझाने ही जा रहे थे कि रामानुजन ने खड़े होकर सवाल किया-सर! यदि किसी भी बालक को कोई केला न बांटा जाए, तो क्या तब भी प्रत्येक बालक को एक केला मिलेगा? यह सुनते ही सारे के सारे विद्यार्थी हो-हो करके हंस पड़े।
उनमें से एक ने कहा-यह क्या मूर्खतापूर्ण सवाल है। इस बात पर अध्यापक ने मेज थपथपाई और बोले-इसमें हंसने की कोई बात नहीं है। मैं आपको बताऊंगा कि यह बालक क्या पूछना चाहता है। बच्चे शांत हो गए। वे कभी आश्चर्य से शिक्षक को देखते तो कभी रामानुजन को। अध्यापक ने कहा – यह बालक यह जानना चाहता है कि यदि शून्य को शून्य से विभाजित किया जाए, तो परिणाम क्या एक होगा?
आगे समझाते हुए अध्यापक ने बताया कि इसका उत्तर शून्य ही होगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह गणित का एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल था तथा अनेक गणितज्ञों का विचार था कि शून्य को शून्य से विभाजित करने पर उत्तर शून्य होगा, जबकि अन्य कई लोगों का विचार था कि उत्तर एक होगा। अंत में इस समस्या का निराकरण भारतीय वैज्ञानिक भास्कर ने किया। उन्होंने सिद्ध किया कि शून्य को शून्य से विभाजित करने पर परिणाम शून्य ही होगा न कि एक।

जन्मदिन उन बच्चो के साथ

जन्मदिन उन बच्चो के साथ
डाल गले मे हाथ
खा रहे थे सभी बैठ सड़क पर
पिज्जा हम उनके साथ
कोई जाति नहीं
कोई मजहब नहीं
जो उनको दे दिया
है वही सही

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विश्व महिला दिवस – 8 मार्च

आज महिला दिवस है देखा जाये तो हर दिन महिलाओ के बिना अधूरा है । सूरज उगने के साथ माँ की आरती के मीठे बोल या बहन की खट्टी सी झिड़की । बेटियो की ढेर सी बातें पत्नी के साथ सुबह की चाय  । वो खास लम्हा क्यू खास है? किसी न किसी रूप में उस लम्हे में शामिल महिलाओ की वजह से । सच ही जहाँ पर वो नहीं वो वहाँ मुमकिन हो ही नहीं सकता । वह जोड़ती है सर्जती है क्यू की जानती है की टूटना क्या होता है तभी तो उसका सृजन मानव आस्तित्व का आधार  है । तुम्हारी क्षेष्ठ कथाये तुम्हारे संघर्ष में निहित है । तुम्हारी सफलता के बीज अवरोधों में समाए है तुम्हारी सराहना पीडाओ से फूटेगी डटी रहो – क्योकि इस दुनिया ने कभी स्थायी तूफान नहीं देखा । विश्व महिला दिवस पर हर महिला को इस शुभेच्छा के साथ
तुम वही हो जिसका तुम्हे इंतज़ार था ।
असंख्य भावी सफलताओ की अग्रिम शुभकामनाये ।
सादर
योगेश पाण्डेय

Freedom 251 Smartphone: भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन

नोएडा स्थित रिंगिंग बेल्स भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन Freedom 251 लेकर आई है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन की कीमत महज 251 रूपए रखी गई है। हालांकि इतनी कम कीमत में स्मार्टफोन पेश करने को लेकर लोगों को इसके फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस को लेकर संशय है। क्योंकि महज 215 रूपए में एक स्मार्टफोन उपलब्ध करवाना किसी कंपनी के लिए आसान काम नहीं होता हैं।

इतनी कम कीमत के बावजूद इस स्मार्टफोन में शानदार फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस दिए गए हैं।

Bells के इस नए हैंडसेट की कीमत 3 से 4 हजार नहीं है और न ही 2 से 3 हजार रूपए के बीच है, बल्कि यह स्मार्टफोन इतना सस्ता है कि इसके सामने नोकिया और सैमसंग के फीचर फोन भी महंगे लगेंगे। इस स्मार्टफोन की कीमत महज 251 रूपए है। इस फोन फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस के बारे में लॉन्चिंग के मौके पर ही बताया जाएगा।

रिंगिंग बेल्स फ्रीडम 251 की एडवांस बुकिंग्स 18 फरवरी से 21 फरवरी तक चालू है। बुक हुए स्मार्टफोन्स को 30 जून 2016 तक डिलीवर किया जाएगा।

 इस फोन को आप यहां क्लिक कर बुक करवा सकते हैं।

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प्रतिभाओ को मिला समाज रत्न 2015 अवार्ड

परमार्थ एवं आध्यत्मिक समिति व राजस्थान जन मंच की ओर से रविवार को गो सेवा, अहिंसा, शाकाहार, प्राणी कल्याण, विलक्षण प्रतिभा, साहित्य, खेल कूद  जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले विभिन्न विशिष्ट बालको,  व्यक्तियों और संस्था को समाज रत्न 2015′  से सम्मानित किया गया। पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में आयोजित समारोह में विलक्षण प्रतिभा के लिए मास्टर मनन सूद, नशा मुक्ति के लिए अजय कुमार, सामाजिक जागरण के लिए श्री अर्जुन देव,राजस्थानी साहित्य के लिए देव किशन राजपुरोहित, गौ सेवा के लिए श्री मदन मोहन खेल के लिए महेश नेहरा, हिन्दी साहित्य के लिए मुश्ताक अहमद, समाज सेवा के लिए श्री विश्वनाथ, श्री निर्मल गोधा,श्री राम बाबू, श्री सत्यनारायण शिक्षा के क्षेत्र मे श्रीमती स्नेहलता तथा विकलांग सेवा के लिए श्री सुभाष तटवार सहित कई प्रतिभाओ को सम्मानित किया गया । कहते है की जितना आवश्यक है समाज कानून विरोधियो को दंडित करना उससे कही अधिक आवश्यक है सेवा भावी व कर्मयोगियों को सम्मानित करना । कार्यक्रम मे मुख्य सरक्षक श्री आर के अग्रवाल सहित श्री कमल लोचन, श्री श्याम विजय सहित मुख्य अतिथि  श्री महेश चंद गुप्ता, आर डी शर्मा तथा परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रज्ञानन्द जी महाराज सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे । 

एक दिन कार,दूसरे दिन बेकार

 दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से मिली कड़ी फटकार के बाद केजरीवाल सरकार ने शुक्रवार को डीजल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला लिया। सरकार ने घोषणा की है कि एक जनवरी से राजधानी में इवेन और ऑड नंबर की गाड़ियों के लिए अलग अलग दिन निश्चित होगा। यानी 2,4,6,8,0 के नंबर वाली गाड़ियां पहले दिन और 1,3,5,7,9 की गाड़ियां दूसरे दिन चलेंगी। दिल्ली में वायु प्रदूषण घटाने के लिए केजरीवाल सरकार का गाड़ियों के सम-विषम नंबर वाला ये फैसला खुद दिल्ली वालों की नजर में कितना व्यावहारिक है? फैसले पर अमल से कैसे बढ़ेंगी उनकी दिक्कतें? और स्वच्छ हवा के लिए क्या वे ये कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं?
झाड़ू, जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह कचरा साफ करती है लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है तो खुद कचरा हो जाती है एकता का महत्व समझे

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ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

ए दोस्त ज़रा मुझ पर
रहमत की नज़र रखना
मै भी तुंहरा ही हूँ
इसकी तो खबर रखना 
मुझ जैसे डूबने वालों को
अब तेरा सहारा है
निल्को ने देख लिया सबको
अब तुझको पुकारा है 
कही डूब न जाऊ मैं
मेरा हाथ पकड़ रखना
तेरी ज़िंदगी के इतिहास में
मेरी भी एक कहानी लिखना 
प्रेम की गर न हो निशानी
ऐसी मीरा की क्या जो न हो दीवानी
ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा
जिसमे न हो तेरी मेरी कहानी

रंग तो इसका कुछ और चढ़ा होता
प्रेम का यदि व्याकरण तुमने पढ़ा होता
तुम्हारे साथ मिलकर मधुलेश
इक नया आचरण गढ़ा होता
अपनी तो क्या लिखू ए दोस्त
कुछ कम,कुछ गम और कुछ नम लिखते है
एक डायरी रखता हूँ दिल के अंदर
जिस पर सिर्फ़ और सिर्फ तुम्हारा नाम लिखते है
 एम के पाण्डेय निल्को
(युवा ब्लॉगर और कवि)

दशहरा : क्या रावण सचमुच मे मर गया ?

 दशहरे पर कल पूरे देश में अच्छाई पर बुराई की विजय के रूप में भगवान राम की पूजा होगी, दशहरा यानी विजय पर्व। दशहरा यानी न्याय और नैतिकता का पर्व। दशहरा यानी सत्य और शक्ति का पर्व। यह पर्व हमें संदेश देता है कि अन्याय और अनैतिकता का दमन हर रूप में सुनिश्चित है। चाहे दुनिया भर की शक्ति और सिद्धियों से आप संपन्न हों लेकिन सामाजिक गरिमा के विरूद्ध किए गए आचरण से आपका विनाश तय है।

कलयुग की तुलना में त्रेता युग हर मामले में बेहतर कहा जाता है और आखिर हो भी क्यों नहीं, उस समय कम से कम इस बात का सुकून था कि रावण एक ही था और उसे एक राम ने ठिकाने लगा दिया लेकिन आज के परिवेश में हालात बहुत पेचीदा हैं। अब तो गली-गली में रावण हैं। इन्हें मारने के लिए इतने राम कहां से लाएं?

पब्लिक जो हर बार रावण दहन देखने जाती है और खुशी-खुशी इस उम्मीद से घर लौटती है कि चलो रावण मर गया लेकिन हर बार होता है उसकी उम्मीदों पर …….? हम चाहे कितने ही रावण जला लें लेकिन हर कोने में कुसंस्कार और अमर्यादा के विराट रावण रोज पनप रहे हैं। रोज सीता के देश की कितनी ही ‘सीता’ नामधारी सरेआम उठा ली जाती है और संस्कृति के तमाम ठेकेदार रावणों के खेमें में पार्टियाँ आयोजित करते नजर आते हैं। आज देश में कहाँ जलता है असली रावण? जलती है यहाँ सिर्फ मासूम सीताएँ। जब तक सही ‘रावण’ को पहचान कर सही ‘समय’ पर जलाया नहीं जाता, कैसे सार्थक होगा, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद आया यह दसवाँ दिन जिस पर माँ सीता की अस्मिता जीती थीं। भगवान राम की दृढ़ मर्यादा जीती थीं। कब जलेंगें इस देश में असली रावण और कब जीतेगीं हर ‘सीता’? कब तक जलेंगे रावण के नकली पुतले और कब बंद होगा दहेज व ‘इज्जत’ के नाम पर कोमल ‘सीताओं’ का दहन?

दशहरा कहो या विजयदशमी लेकिन रावण की पराजय कहीं दिखाई नहीं देती। जब तक सही रावण को पहचान कर सही समय पर जलाया नहीं जलाया नहीं जाता, व्यर्थ है, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद आया यह दसवां दिन जिस पर असत्य पर सत्य की विजय हुई थी। भगवान राम की दृढ़ मर्यादा जीती थीं।

आज कहीं भी असली रावण नहीं जलते। वे तो अपने पुतले की तरह लगातार ऊंचे हो रहे हैं। होड़ हो रही है तेरा रावण 67 फुट का तो उसका 80 का फुट का परंतु मेरा रावण तो 100 फुट का। पुतलों की ऊंचाई की होड़ हो रही है जबकि राम जैसे चरित्र का कहीं अता-पता नहीं है। कब जलेंगे असली रावण और कब जीतेगा साधनहीन, वनवासी सरल राम और उसकी सेना। आखिर क्यों-

झूठ की जय-जयकार है सच पर सौ इल्जाम।

रावण का कद बढ़ रहा, सिकुड़ रहे श्रीराम॥

एम के पाण्डेय निल्को

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कौन कहता है भारत भूखा मर रहा है?

लड़कियाँ भाव खा रही हैँ 
 लड़के धोखा खा रहे हैँ 
पुलिस रिश्वत खा रही है 
 नेता माल खा रहे हैँ 
किसान जहर खा रहे हैँ
 जवान गोली खा रहे हैँ 
कौन कहता है 
भारत भूखा मर रहा है?
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एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से सम्मानित किया जाएगा ।

निर्मला सेवानी जी 
एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से 10 अक्टूबर 2015 को दिल्ली के राष्ट्रीय सम्मेलन मे सम्मानित किया जाएगा । अतीन्द्रिय ज्ञान के धनी व्यक्तित्वों में एक प्रमुख नाम जयपुर की निर्मला सेवानी जी का भी है। वह महज आवाज सुनकर जीवन का हाल बता देती हैं। बात कुछ अटपटी जरूर है, पर है बिलकुल सच। निर्मलाजी ने मात्र 13 साल की उम्र में पहली भविष्यवाणी कर दी थी। वह 1989 से यह कार्य कर रही हैं, लेकिन 1991 से उन्होंने इसे व्यावसायिक तौर पर अपना लिया है। ज्योतिष के क्षेत्र में निर्मला सेवानी जी ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की है। वह अपने जयपुर, दिल्ली आदि कार्यालयों में लोगों से घिरी रहती हैं। उनके बारे में लोगों की यह धारणा है कि वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं तथ व्यक्ति की आवाज सुनकर उसका भविष्य कथन करने में उन्हें महारथ हासिल है। निर्मला जी जन्मपत्री भी देखती हैं, लेकिन उसके अभाव में वह आवाज सुनकर भविष्य के बारे में बताना शुरू कर देती हैं। उनको इस अनोखी प्रतिभा के लिए ही यह सम्मान देने की घोषणा की गई है । इसी के साथ जयपुर के गूगल बॉय मनन सूद को उनकी इंटेलिजेंस और स्मार्टनेस के लिए वर्ष 2015 के राष्ट्रीय स्तर पर अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान के लिए चुना गया है।

मनन सूद 

जयपुर के रूट्स पब्लिक स्कूल के प्रेप क्लास में पढ़ने वाले मनन को यह पुरस्कार उन्हें शॉर्प माइंड अच्छी याददाश्त के लिए नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को दिया जा रहा है। मनन को पूरे विश्व का नक्शा मुंहजबानी याद है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है । 

सादर
एम के पाण्डेय निल्को 
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महात्मा गांधी और भारतरत्न पं. लालबहादुर शास्त्री को नमन।

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महत्वपूर्ण सूचना – कृपया ध्यान दे ….!

दोस्तो/पाठको आप का स्नेह मिलता रहे हमे और हम कुछ नया करते रहे ऐसी अभिलाषा और अपेक्षा रखते है, बताना चाहेगे की आज से हम ‘योगेश के युग’, ‘निशु के निशान’, ‘गजेंद्र का गोला’, ‘अभिषेक की अभिव्यक्ति’, ‘अनुज की अगड़ाई’, ‘नज़र और निशाना निल्को का’, ‘Whats App हँगामा’, और ‘मोहक की मार’, शीर्षक से कुछ अपनी अभिव्यक्ति, नज़रिया, सोच आप के सामने प्रस्तुत करेगे। उम्मीद है की यह VMW Team का नया, मज़ेदार, और अनोखा प्रयोग आप को रास आएगा । दोस्तों हमारा यह नया प्रयोग कैसा लगा पढ़कर बताईये, कृपया अपने भावपूर्ण कमेंट मेरे blog पर comment box में लिखिए और हमारा हौसला बढाए. कृपया अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा. आपकी राय हमे हमेशा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देती है और आपकी राय निश्चिंत ही हमारे लिए अमूल्य निधि है । मित्रों हम VMW Team ब्लॉग में लगातार कुछ ऐसा व्यापक बदलाव लाने की कोशिश में हैं जिससे कि यह आपकी अपेक्षाओं पर और भी खरा उतर सके। हम चाहते हैं कि इसमें आपकी भी सक्रिय भागीदारी हो। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।

सादर, सप्रेम
एम के पाण्डेय ‘निल्को’ 

एडमिन 

Whats App से प्राप्त – आरक्षण विरोध

हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो ,

आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो ,


आरक्षण तो स्वार्थ है नेताओं का ,

जो कर देते हैं खंडन हम युवाओं का,

बना लेते हैं सरकार हमारे वोट से ,

और घोट देते हैं गला विश्वासों का,


नेताओं की इस तृष्णा को ख़त्म कर दो,

वोट राजनीति को संसद में बंद कर दो ,

हमारा और दोहन हो ना पाएगा

तुम ये नारा और भी बुलंद कर दो ,


वक्त है यंही हमारी एकजुटता का,

अपने विरोध स्वर के सदिश प्रसारता का,

राज रक्षक वहीं जो बन बैठे हैं भक्षक ,

समय हैं यंही उनके सर्वानाषता का ,


वोट नीति की गली आज अन्धकार कर दो ,

जोश और अटलता का आज तुम हुंकार भर दो ,

हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो,

आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो 
(एक अजनबी के मैसेज से प्राप्त )
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कारगिल युद्ध – विजय दिवस

किसी का चित्र नोटों पे
किसी का चिन्ह वोटो पे
शहीदों तुम ह्रदय में हो
तुम्हारा नाम होंठो पे …..

VMW Group सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन करता हैं।
जय हिन्द जय भारत

आज कारगिल युद्ध की वर्षगाठ है आप सभी को इस

विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
और हमारे जांबाज सैनिको और शहीद जवानों को शत शत नमन…


नेट न्यूट्रेलिटी बिना शर्त अमल हो |

नेट न्यूट्रेलिटी के बारे में दूरसंचार विभाग की बहु-प्रतीक्षित रिपोर्ट पर मोबाइल इंटरनेट उपभोक्ताओं के नजरिए से गौर करें तो उसमें अच्छे और बुरे दोनों संकेत हैं। अच्छी बात तो यह है कि इसमें नेट न्यूट्रेलिटी का समर्थन किया गया है। लेकिन साथ ही ओवर टॉप (ओटीटी) कहे जाने वाले वाॅट्सएप, वाइबर, वीचैट, स्काइप जैसी सेवाओं पर मुफ्त ऑडियो/वीडियो कॉल की दी जा रही सेवाओं को विनियमित करने की जरूरत भी बताई गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाली समिति की राय है कि ओटीटी सेवाओं की वजह से मोबाइल सेवा देने वाली एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया जैसी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ये कंपनियां सरकार से मिले लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक फोन सेवा देती हैं, जबकि ओटीटी सेवाएं किसी ऐसी शर्त का पालन नहीं करतीं। बेशक कमेटी की यह राय अपनी जगह सही है। लेकिन मुद्दा है कि तकनीक की उन्नति के साथ विकसित होने वाली सुविधाओं को नियंत्रित या सीमित करने का प्रयास आखिर कितना वाजिब होगा? अगर इंटरनेट से जुड़ी किसी सेवा के साथ ऐसा किया जाता है, तो क्या उसके बाद भी यह मानने का आधार बचेगा कि नेट न्यूट्रेलिटी का समग्र रूप से पालन किया जा रहा है? नेट न्यूट्रेलिटी संबंधी बहस दो प्रवृत्तियों की वजह से उठी। ऐसा देखा गया कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां (आईएसपी) कुछ वेबसाइटों/एप्स के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कर रही हैं, जबकि दूसरों तक पहुंच वे रोक देती हैं अथवा उनकी रफ्तार को सुस्त कर देती हैं। माना गया कि वे ऐसा करके इंटरनेट सेवा-प्रदाता के रूप में अपेक्षित तटस्थता को भंग कर रही हैं। अमेरिका का संघीय दूरसंचार आयोग इसके विरुद्ध निर्णय दे चुका है। अपने देश में ये बहस कुछ महीने पहले भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा इस विषय पर लोगों की राय मांगने के साथ खड़ी हुई। तब लाखों लोगों ने ट्राई को भेजे पत्र में नेट न्यूट्रेलिटी का पक्ष लिया। एनडीए सरकार ने भी इस सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन अंतिम रुख घोषित करने से पहले वह ट्राई द्वारा बनाई गई समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही थी। अब जबकि यह रिपोर्ट गई है, सरकार से अपेक्षा रहेगी कि यथाशीघ्र वह अपनी राय बताए। बेशक उससे ऐसी नीति की आशा है, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों का संपूर्ण संरक्षण हो। निर्विवाद रूप से नेट न्यूट्रेलिटी के सिद्धांत को बिना शर्त और अविभाज्य रूप से लागू करके ही ऐसा किया जा सकता है। 

Save The Girl Child

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गीत ग़ज़ल हो या हो कविता – एम के पाण्डेय निल्को


गीत ग़ज़ल हो या हो कविता 
नज़र है उस पर चोरो की 
सेंध लगाये बैठे तैयार 
कॉपी पेस्ट को मन बेक़रार 
लिखे कोई और, पढ़े कोई और 
नाम किसी और का चलता है 
कुछ इस तरह इन चोरो का 
ताना बना भी चलता रहता है 
सोच सोच कर लिखे गजल जो
प्रसंशा वो नहीं पाता है 
पर चुराए हुए रचना पर 
वाह वाही खूब कमाता है 
मन हो जाता उदास निल्को 
किसी और का गुल खिलाये जाते है 
वो खुश होता किन्तु 
मन से पछताए जाये है 
***************
एम के पाण्डेय निल्को 

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

नवरात्रि के पवन पर्व पर

कन्याए जिमाई जाती है

ढुढ़ते है घर घर उनको

फिर पूजन करी जाती है

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

फिर भी देवी का रूप माना जाता है

विरोधाभास लगती है रीति रिवाज भी

आखिर इनका बचपन काटा क्यो जाता है

****************
एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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