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अवन्तिका शिक्षक सम्मान 28 फरवरी को

अवन्तिका संस्था द्वारा राज्य के शिक्षाविदों को दिनाक 28 फरवरी को मानसरोवर, जयपुर स्थित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ इन्फॉर्मैटिक्स एंड मैनेजमेंट टेक्निकल कैम्पसमे, शिक्षा जगत मे किए गए अनुकरणीय कार्यो हेतु अवन्तिका शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा । इसमे राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओ के प्राचार्यो को सम्मानित किया जाना है । कार्यक्रम के शुभारम्भ मेडिटेशन एक्सपर्ट निर्मला सेवानी मेडिटेशन से कराएगी । अवन्तिका के राष्ट्रीय निदेशक डॉ. आनंद अग्रवाल द्वारा कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण जयपुर के छ वर्षीय बालक गूगल बॉय मनन सूद रहेगे । सांगीतिक प्रस्तुति गायक सुदेश शर्मा द्वारा दी जाएगी । उक्त जानकारी अवन्तिका के राजस्थान मीडिया प्रभारी मधुलेश पाण्डेय ने दी । अधिक जानकारी हेतु आप 9799113100 पर सम्पर्क कर सकते है

गरीब बच्चो के संग लिया जन्मदिन का ‘आनंद’

 बड़े बड़े होटलो और रिहायसी जगह तो अपना जन्मदिन सभी मनाते है किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो के साथ ये कुछ और स्पेशल हो जाता है । हमारा उदेश्य उन तरसती आखो तक जन्मदिन के मिठाई और केक पहुंचाना है जो कभी ये स्वाद चख न सके । इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| देवदर्शन डॉट नेट के सहयोग से बच्चो को खाने-पीने की सामग्री व खिलौने दिये गए । एम के पाण्डेय निल्को ने कहा की इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| अपने बच्चों के जन्मदिन की पार्टी पर हम हजारों और लाखों रूपये खर्च कर देते हैं और कुछ बच्चों, दोस्तों और रिश्तेदारों को हम खिलाते-पिलाते हैं, जो कि इस तरह की पार्टी से उब चुके होते हैं या उनके लिये इतना महत्वपूर्ण नहीं होता , लेकिन यकीन मानिये आप उतनी ख़ुशी नहीं पा सकते जो इन बच्चों को ख़ुशी देकर पायी है| उक्त अवसर पर उमाकांत, रोहित, रवि, सुभाष ज्योति, प्रीती, कृष्ण, दीपक, अनुप, वर्षा, इत्यादि कई लोग मौजूद थे । 

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मेकडोनाल्ड : 16 दिन पुराने तेल में पका रहे आलू-टिक्की, फ्रेंच फ्राइज

मेकडोनाल्ड : मुनाफे के िलए भरोसा तोड़ा

 
16 दिन पुराने तेल में पका रहे थे आलू-टिक्की, फ्रेंच फ्राइज 
काला और गाढ़ा तेल मिला, 2 सैंपल लिए, 120 लीटर तेल फिंकवाया 
जयपुर| पांचबत्ती स्थित मेकडोनाल्ड में पिछले 16 दिन से आलू टिक्की, फ्रेंच फ्राइज और अन्य पदार्थों को तलने वाले तेल को नहीं बदला गया था। यहां ऐसे तेल को काम में लिया जा रहा था जिसकी क्वालिटी सबसे गुणवत्ताहीन होती है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को मेकडोनाल्ड पर कार्रवाई के दौरान ऐसी ही स्थिति पाई। टीम ने यहां खराब हो चुका 120 लीटर तेल फिंकवाया और तेल के दो नमूने लिए। साथ ही टीम ने डोमिनोज से भी दो सॉस के सैंपल लिए हैं। 

मामले के अनुसार सीएमएचओ डॉ. नरोत्तम शर्मा के निर्देश पर फूड इंस्पेक्टर की टीम शुक्रवार शाम मेकडोनाल्ड पर पहुंची। यहां जिन स्थान पर फ्रेंच फ्राइज और टिक्की पकाए जा रहे थे, वहां ऑयल मैनेजमेंट शीट की जांच की। इस शीट में तेल बदलने की तिथि डाली जाती है। जांच में सामने आया कि एक जून को तेल डाला गया और उसके बाद कभी चेंज ही नहीं किया गया। 

काम में ले रहे पामोलीन ऑयल 

सुबह11 बजे से रात 11 बजे तक 360 डिग्री पर तेल को उबाल कर खाद्य पदार्थ पकाए जाते थे। टीम ने यहां ऐसा तेल पकड़ा जो कि पूरी तरह काला और गाढ़ा हो चुका था। डामर जैसा। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि खाने के लिए पामोलीन तेल काम में लिया जा रहा है। ऐसे में तुरंत खराब 120 लीटर तेल नष्ट कराया। साथ ही तेल के दो सैंपल भी लिए। 

बार-बारपका तेल हानिकारक 

एसएमएसअस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुनीत सक्सैना ने बताया कि तेल को बार-बार पकाने से तेल के प्रोटीन और न्यूट्रीशियंस समाप्त हो जाते हैं। चिकनाई खत्म हो जाती है। तेल सेचुराइट फैटी एसिड में तब्दील हो जाता है। इससे शरीर में सीधे वसा और कोलेस्ट्रोल जाता है। 

एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से सम्मानित किया जाएगा ।

निर्मला सेवानी जी 
एस्ट्रोलॉजर निर्मला सेवानी और गूगल बॉय मनन सूद को ‘अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान 2015’ से 10 अक्टूबर 2015 को दिल्ली के राष्ट्रीय सम्मेलन मे सम्मानित किया जाएगा । अतीन्द्रिय ज्ञान के धनी व्यक्तित्वों में एक प्रमुख नाम जयपुर की निर्मला सेवानी जी का भी है। वह महज आवाज सुनकर जीवन का हाल बता देती हैं। बात कुछ अटपटी जरूर है, पर है बिलकुल सच। निर्मलाजी ने मात्र 13 साल की उम्र में पहली भविष्यवाणी कर दी थी। वह 1989 से यह कार्य कर रही हैं, लेकिन 1991 से उन्होंने इसे व्यावसायिक तौर पर अपना लिया है। ज्योतिष के क्षेत्र में निर्मला सेवानी जी ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की है। वह अपने जयपुर, दिल्ली आदि कार्यालयों में लोगों से घिरी रहती हैं। उनके बारे में लोगों की यह धारणा है कि वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं तथ व्यक्ति की आवाज सुनकर उसका भविष्य कथन करने में उन्हें महारथ हासिल है। निर्मला जी जन्मपत्री भी देखती हैं, लेकिन उसके अभाव में वह आवाज सुनकर भविष्य के बारे में बताना शुरू कर देती हैं। उनको इस अनोखी प्रतिभा के लिए ही यह सम्मान देने की घोषणा की गई है । इसी के साथ जयपुर के गूगल बॉय मनन सूद को उनकी इंटेलिजेंस और स्मार्टनेस के लिए वर्ष 2015 के राष्ट्रीय स्तर पर अवंतिका स्वर्णिम भारत सम्मान के लिए चुना गया है।

मनन सूद 

जयपुर के रूट्स पब्लिक स्कूल के प्रेप क्लास में पढ़ने वाले मनन को यह पुरस्कार उन्हें शॉर्प माइंड अच्छी याददाश्त के लिए नई दिल्ली में 10 अक्टूबर को दिया जा रहा है। मनन को पूरे विश्व का नक्शा मुंहजबानी याद है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है । 

सादर
एम के पाण्डेय निल्को 
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कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

नवरात्रि के पवन पर्व पर

कन्याए जिमाई जाती है

ढुढ़ते है घर घर उनको

फिर पूजन करी जाती है

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

फिर भी देवी का रूप माना जाता है

विरोधाभास लगती है रीति रिवाज भी

आखिर इनका बचपन काटा क्यो जाता है

****************
एम के पाण्डेय ‘निल्को’

लिखता हूँ बचपन की वो कहानी – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

बचपन की वो दुनिया
पचपन की उम्र में भी नहीं भूलती
क्योंकि जो की थी शरारते
वो भी कुछ नहीं कहती ।।  
न तो लोग बुरा मानते
और न ही मुझे मनाते
रूठे और मनाने के खेल से
हम किसी को नहीं सताते ।।
शाम को जब हम छत पर जाते
खेलते कूदते नहीं घबराते
पर आज के इस परिवेश में
हम बचपन को ही खोते पाते ।।
त्योहारों पर करते थे जो मस्ती
देखती रहती थी पूरी बस्ती
पर अब कोई साथ नहीं है
अकेलापन ही है अब सस्ती ।।
वो पेड़ों पर चड़ना और लटकना
मिट्टी में एक दूसरे को पटकना
छुपन छुपाई हो या हो सरकना
इसके लिए है अब तरसना ।।


लिखता हूँ बचपन की वो कहानी
खुद ही यानि निल्कोकी जुबानी
पर यह कलम अब नहीं चलती सुहानी
क्योंकि यह कविता शायद है अभी बाकी …….।।

एम के पाण्डेय निल्को

मैं कवि नहीं हूँ


जब भी मैं कोई कविता पढ़ता हूँ

मेरे मन में ख्याल आता है

इतनी अच्छी रचना मेरे द्वारा क्यो नहीं …?

‘निल्को ‘की नज़र के सामने

किताबों के पन्नो में

वो शब्दो का समूह

जिसमे कभी प्रेम

तो कभी आक्रोश

कभी बनता बिगड़ता वाक्य

बार – बार यही कहता है

मैं कवि नहीं हूँ

दरअसल कविता मन का भाव है

कवि के जीवन का सार है

रचना भले की

किसी रूप रंग की हो

उसकी नज़रिये का माध्यम

तो तुम ही हो

पर मन अनायास ही

कह उठता है

मैं कवि नहीं हूँ

एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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