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VMW Team – राजस्थान प्रतिभा सम्मान समारोह 2017

रवीन्द्र कला मंच और वीएमडबल्यू टीम के तत्वावधान में राज्य स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजन गुलाबी नगरी में 26 दिसंबर को आयोजित होगा। समिति के संयोजक एम के पाण्डेय निल्को ने बताया कि सम्मान समारोह के लिए 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक आवेदन पत्र भरे जाएगें। प्रतिभा सम्मान हेतु शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान, पत्रकारिता और खेल के क्षेत्र से आवेदन आमंत्रित है । अधिक जानकारी के लिए आप +91-9024589902 पर संपर्क कर सकते है ।

कश्मीर में जेहादियों द्वारा सैनिकों को थप्पड़-लात मार कर अपमानित करने पर एक सैनिक की सरकार से अपील को बंया करती मेरी नयी कविता- गौरव चौहान

(कश्मीर में जेहादियों द्वारा सैनिकों को थप्पड़-लात मार कर अपमानित करने पर एक सैनिक की सरकार से अपील को बंया करती मेरी नयी कविता)
रचनाकार-कवि गौरव चौहान उ प्र
9557062060

दिल्ली में बैठे शेरों को सत्ता का लकवा मार गया,
इस राजनीति के चक्कर में सैनिक का साहस हार गया,

मैं हूँ जवान उस भारत का,जो “जय जवान” का पोषक है,
जो स्वाभिमान का वाहक है जो दृढ़ता का उद्घोषक है,

मैं हूँ जवान उस भारत का, जो शक्ति शौर्य की भाषा है,
जो संप्रभुता का रक्षक है,जो संबल की परिभाषा है,

उस भारत की ही धरती पर ये फिर कैसी लाचारी है,
हम सैनिक कैसे दीन हुए,अब कहाँ गयी खुद्दारी है?

“कश्मीर हमारा” कहते हो,पर याचक जैसे दिखते हो,
तुम राष्ट्रवाद के थैले में,गठबंधन करके बिकते हो,

वर्दी सौंपी,हथियार दिए,पर अधिकारों से रीते हैं,
हम सैनिक घुट घुट रहते है,कायर का जीवन जीते हैं,

छप्पन इंची वालों ने कुछ ऐसे हमको सम्मान दिए,
कागज़ की कश्ती सौंपी है,अंगारो के तूफ़ान दिए,

हर हर मोदी घर घर मोदी,यह नारा सिर के पार गया,
इक दो कौड़ी का जेहादी,सैनिक को थप्पड़ मार गया,

अब वक्ष ठोंकना बंद करो,घाटी में खड़े सवालों पर,
ये थप्पड़ नही तमाचा है भारत माता के गालों पर,

सच तो ये है दिल्ली वालों,साहस संयम से हार गया,
इक पत्थरबाज तुम्हारे सब,कपड़ों को आज उतार गया,

इस नौबत को लाने वालों,थोड़ा सा शर्म किये होते,
तुम काश्मीर में सैनिक बन,केवल इक दिवस जिए होते,

इस राजनीती ने घाटी को,सरदर्द बनाकर छोड़ा है,
भारत के वीर जवानों को नामर्द बना कर छोड़ा है,

अब और नही लाचार करो,हम जीते जी मर जायेंगे,
दर्पण में देख न पाएंगे,निज वर्दी पर शर्मायेंगे,

या तो कश्मीर उन्हें दे दो,या आर पार का काम करो,
सेना को दो ज़िम्मेदारी,तुम दिल्ली में आराम करो,

थप्पड़ खाएं गद्दारों के,हम इतने भी मजबूर नही,
हम भारत माँ के सैनिक हैं,कोई बंधुआ मजदूर नहीं,

मत छुट्टी दो,मत भत्ता दो,बस काम यही अब करने दो,
वेतन आधा कर दो,लेकिन कुत्तों में गोली भरने दो,

भारत का आँचल स्वच्छ रहे ,हम दागी भी हो सकते है,
दिल्ली गर यूँ ही मौन रही,हम बागी भी हो सकते हैं,
——कवि गौरव चौहान

शिक्षाविदों को अवंतिका शिक्षक सम्मान से नवाजा गया

  • जयपुर के गूगल बॉय मनन सूद ने अपने विलक्षण प्रतिभा से किया सभी को आश्चर्यचकित । 
  • संगीत समीक्षक सुदेश शर्मा ने अपने गायन से लोगो का मन मोहा ।
अवन्तिका संस्था द्वारा स्थानीय इंटरनेशनल स्कूल ऑफ इन्फॉर्मैटिक्स एंड मैनेजमेंट टेक्निकल कैम्पस, मानसरोवर पर शहर के चयनित शिक्षाविदों को उनके द्वारा किए गए समर्पित शिक्षण सेवा व अनुकरणीय कार्यों हेतु अवन्तिका शिक्षक सम्मान से नवाजा गया । कार्यक्रम का शुभारंभ विख्यात मंत्रज्ञ व मेडिटेसन एक्सपर्ट निर्मला सेवानी द्वारा मेडिटेशन और दीप प्रज्वलित कर किया गया । उक्त अवसर पर अवंतिका के राष्ट्रीय निदेशक डॉ॰ आनंद अग्रवाल ने कहा की शिक्षक समाज का दर्पण होते हैं और देश के विकास में शिक्षकों की महत्ती भूमिका होती है। उन्होंने शिक्षकों से आव्हान किया कि वे निःश्वार्थ भाव शिक्षण कार्य का निर्वहन करने और शिक्षक और विद्यार्थियों बीच की गरिमा को बनाये रखने पर जोर दिया। इस सम्मान समारोह में  डॉ॰ राखी गुप्ता (आई॰ आई॰ एस॰ यूनिवर्सिटी), डॉ॰ मधु श्रीवास्तव (सुबोध गर्ल्स कॉलेज), डॉ॰ निमाली सिंह (महारानी कॉलेज), श्रीमती रामा दत्त (संस्कार स्कूल), फादर जॉन रवि (सेंट जेवियर्स स्कूल, नेवटा), श्रीमती रश्मी तलवार (महावीर पब्लिक स्कूल), श्रीमती नीरा पाण्डेय (आर्मी पब्लिक स्कूल), श्रीमती सोनाली सिंधवी बंसल (जयश्री पेड़ीवाल प्री स्कूल) श्रीमती ज्योति राठौड़ (एम॰ के॰ बी॰ स्कूल), श्रीमती माला अग्निहोत्री (इंडिया इन्टरनेशनल स्कूल), सिस्टर दीपा मैथ्यु (सेंट जेवियर्स स्कूल, जयपुर), श्रीमती सुनीता राठौड़ (टैगोर पब्लिक स्कूल), श्रीमती उषा किरण शर्मा (बाल विश्व भारती स्कूल), श्रीमती सरिता कटियार (रेयान इन्टरनेशनल स्कूल), श्रीमती मधु सूद (रवीन्द्र निकेतन पब्लिक स्कूल), श्रीमती तान्या शर्मा (टी॰ पी॰ एस॰), श्रीमती सीमा अहमद (आलोक मेमोरियल स्कूल), श्रीमती बीना शर्मा (टी॰ पी॰ एस॰), श्रीमती सीमा चौधरी (राजकीय सी॰ सै॰ स्कूल, हरमाड़ा), श्री धीरज मिश्रा ( टैगोर विद्द्या भवन), श्रीमती पीयूष सूद (द रूटस पब्लिक स्कूल) को सम्मानित किया गया ।
समारोह को मुख्य रूप से आई. आई. एस. यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ॰ अशोक गुप्ता, श्री पी. डी. सिंह आदि ने संबोधित किया तथा निर्मला सेवानी, आलोक सूद ने सभी लोगो का आभार व्यक्त किया था । इस अवसर पर जय, मधुलेश पाण्डेय, अर्जुन, प्रणव सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे ।

मास्टर सिद्धेश पाण्डेय उर्फ यश को देवरिया रत्न अवार्ड से मुख्य अतिथि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बच्चालाल मौर्य ने सम्मानित किया

देवरिया, लार थाना के हरखौली निवासी मास्टर सिद्धेश पाण्डेय उर्फ यश बाबा को शहर के कार्यक्रम देवरिया महोत्सव 2017 में देवरिया रत्न अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। VMW Team के सिद्धेश के जयपुर में होने के कारण अवार्ड उनके बड़े भाई बैंक मैनेजर योगेश पाण्डेय ने ग्रहण किया। कराटे में राष्टीय फलक पर नाम रोशन करने वाले 10 वर्षीय यश बाबा अमरेश कुमार पाण्डेय के पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार एन डी देहाती के भतीजे है। आचार्य व्यास मिश्र स्मृति समिति ने देवरिया रत्न अवार्ड के लिए सिद्देश का चयन किया था। समिति के अध्यक्ष पवन मिश्र ने बताया कि सिद्धेश को देवरिया स्थित एस एस बी एल इंटर कॉलेज के समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य के कई व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सिद्धेश का चयन राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए किया गया था। इस अवसर पर टाइगर्स मार्शल आर्ट के कोच जय सूद ने सिद्धेश के इस उपलब्धि पर बधाई दी है तथा केंद्रीय विद्यालय क्रमांक चार के अध्यापक को भी इस बालक पर गर्व है।  

मास्टर सिद्धेश पाण्डेय उर्फ़ यश बाबा की कुछ तस्वीरे 

‘सुर-तरंग’ संगीत प्रतियोगिता संपन्न

राजस्थान की प्रतिभाओ को एक मंच प्रदान करने वाली राज्य स्तरीय संगीत प्रतियोगिता ‘सुर-तरंग’ आज जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ | इस दौरान बड़ी संख्या में प्रतिभागियों हिस्सा ने लिया और संगीत विधा में प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा | बच्चों में साहित्य, संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित रविन्द कला मंच और संगम कला ग्रुप कि ओर से आयोजित यह कार्यक्रम द रूट्स पब्लिक स्कूल शिव कॉलोनी लक्ष्मी नगर जयपुर में संपन्न हुआ | कार्यक्रम की शुरुआत अवंतिका ग्रुप के राष्टीय अध्यक्ष श्री आनंद अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया उनके साथ श्रीमती मधु सूद , श्री आर सी सूद मौजूद रहे | जज के रूप में श्री शिवाजी शिव, श्री सुनील जयपुरी, श्रीमती उषा जोया और श्री सुदेश शर्मा जी नज़र आये |

गायन के सब जूनियर वर्ग (फ़िल्मी) में अनन्या गौतम, वस्सु और नमन क्रमशः प्रथम, द्दितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया वही गैर फ़िल्मी में क्रिशन बालूदा और मोनिका को क्रमशः प्रथम और द्दितीय स्थान मिला | जूनियर वर्ग (फ़िल्मी) में नंदिनी,साना, और मोहक विजयी हुए तथा गैर फ़िल्मी में आर्यन ने अपना लोहा मनवाया | सीनियर वर्ग (फ़िल्मी) में राहुल भालिया , सुनील शर्मा विक्रम सैन ने क्रमशः प्रथम, द्दितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया वही सीनियर वर्ग (गैर फ़िल्मी) में मोसिन खान और बादल पारिक ने अपने गीतों से जजों को खुश किया | विजेताओं के साथ-साथ सैकड़ों अन्य छात्र-छात्राओं और गणमान्य नागरिकों ने भी सुगम संगीत का आनंद लिया | विजेताओ को श्री डी वी नेहरा मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित भी किया गया |

प्रतियोगिता के मुख्य आयोजक श्री अलोक सूद ने बताया कि विजयी टीम को राष्टीय स्तर पर दिल्ली में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया जायेगा | संस्था के राजस्थान अध्यक्ष श्री आर सी सूद ने कहा की इसी मंच से सोनू निगम, श्रेया धोसले, सुनिधि चौहान, आनंद राज, पीनाज़, जैसे कई हीरे तरासे गए है | इस अवसर पर एम के पाण्डेय निल्को, अरविन्द सिंह, अशोक गुप्ता, प्रमोद शर्मा, पूजा राठी, मधुकर तिवारी, सुधीर, सुखविंदर, मनन सूद, स्वाति अग्रवाल आदि भी मौजूद रहे | अंत में कार्यक्रम संचालक श्री जय सूद ने सामारोह में उपस्थिति सभी लोगो के लिए का आभार व्यक्त किया |

प्राचार्य सेवाभावी शिक्षाकर्मी सम्मानित

 जयपुर|अवंतिका संस्था,नई दिल्ली द्वारा शुक्रवार को समाज के विशिष्ट गुणीजनों को रवींद्र कला केंद्र सभागार में सम्मानित किया गया। संस्था के राष्ट्रीय निदेशक आनंद अग्रवाल ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े निम्न प्राचार्यों सेवाभावी शिक्षा कर्मियों में सुमन वार्ष्णेय, मधु सूद, उषा जोया, सुखविंदर कौर, अरविंदर सिंह टक्कर, वीरेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. स्नेहलता भटनागर, किरण पाल, स्नेहलता शर्मा, आलोक सूद, प्रद्युम्न कुमार शर्मा रेखा कोटवानी को ‘स्वामी विवेकानंद अवार्ड’ प्रदान किया गया

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न”

भारतीय राजनीति के पितामाह, करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता एवं सुशासन के प्रतिक पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न” से सम्मानित करने पर हार्दिक बधाई |
मैं ईश्वर से अटल जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ |
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राम नवमी की सभी दोस्त पाठकों को अनेक शुभकामनायें!

त्रिस्थिरस्त्रिप्रलम्बश्च  त्रिसमस्त्रिपु चोन्नतः 
त्रिताम्रस्त्रिपु च स्निग्धो गंभीरस्त्रिषु नित्यशः 
त्रिवली मांस्त्रयंवतः ………………….सुन्दरकाण्ड ३५/१७-१८
आप सभी को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाये.

VMW Team का होली मिलन समारोह सम्पन्न

आज के इस भागमभाग भरी जिन्दगी में किसी के पास भी समय नहीं है लेकिन पुछो की क्या करते है तो उनका जवाब यही होता है की – कुछ खास नहीं या कुछ भी तो नहीं । हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है एक साथ मिलना बड़ा मुश्किल हो गया है लेकिन तकनीक के इस समय मे हम हमेसा एक दूसरे से जुड़े रहते है । इस बार का होली मिलन समारोह फोन पर ही हुआ किन्तु मजेदार और रसदार था सभी लोग एक से बढ़ कर एक रगीली बाते अपनी पिचकारी से एक दूसरे पर छोड़ रहे थे और आश्चर्य की बात की कोई भी इसका बुरा नहीं मन रहा था क्योकि सबको पता है की माहौल तो फगुआ का है । इसी क्रम मे एम के पाण्डेय निल्को ने रची एक रंगभरी रचना, अब आप को ही बताना है की कितनी रंगी है और कितनी गुजियादार, मसालेदार है ये रचना………..

VMW Team का होली मिलन समारोह सम्पन्न
जिसमे से कुछ रंगभरी बाते हुई उत्पन्न
शुरुआत  की मुख्य आयोजक योगेश जी ने कुछ इस तरह
की सभी रंग गय , एक ही रंग में हमारी तरह
मुख्य अतिथि के रूप में हरिदयाल जी और रामसागर जी पधारे
और अपने रंगीन मिजाज से, हमको सुधारे
माइक मिला जब हमारे विजय भाई को
लेकिन छोड़ कर आए थे हमारी भौजाई को
सब लोगो ने किया इसका विरोध प्रदर्शन
दिलीप जी ने भी दिया भरपूर समर्थन
गोरखपुर से गजेन्द्र जी आए
होली की गुजिया भी लाए
साथ मे उनके देवेश हमारे
होली के वे गीत सुनाये
जब मौका मिला मधुलेश भाई को
मारा चौका और ले आए भौजाई को
होली पर कुछ रचना सुनाये
जो किसी को भी न सुहाए
इसी क्रम मे अभिषेक जी आए
क्या हाल सुनाए, क्या बात बताए
देव भूमि की हवा लगी है उनको
और ठण्ड लग रही है हम सबको
हिमाचल मे रहते ऋषिन्द्र जी
फगुआ मे बनाते सबको पगलेन्द्र जी
होली की उनकी बाते सुनकर
खड़े हो जाते सभी तनकर
त्रिपुरेन्द्र जी है आज कल अलवर
मचाते है अंदर ही ये खलबल
देसी इनका जो मिज़ाज रंगीला
कईयो का चेहरा हो जाता पीला
लाल गुलाल सिद्धार्थ जी  लाए
खुद को बाबू साहब कहलाए
बीच मे कूदना इनकी आदत
पर मिलता है इनको भी आदर
मोहक जी की मन मोहिनी सी छटा
मोहित कर गई, ऐसी हो गई घटा
गुल खिलाये ये जैसे गुलगुल्ले
और खिलाये हम सबको रसगुल्ले
आशुतोष हमारे लालू कहलाए
फागुन में किसी को भी भालू बनाए
साथ में इनके सुन्दर बाबू को लेकर
चल दिये रंग पिचकारी खरीदकर
नीलेश, सत्यम कम नहीं किसी ओर
रोज गढ़ते है ये मजेदार जोक
बात बात मे कहते है ये मर्द
सुनकर इनको होता है पेट दर्द
गिरिजेश बाबू का क्या कहना
सिद्धेश बाबा के साथ ही रहना
दोनों दक्ष है अपनी कक्षा में
पर आता नहीं कुछ इनके बक्से में
सर्वेश हमारे दबंग
होली मे मचाए हुड़दंग
निल्को ने किया पुनः अभिनन्दन
होली मनाए और ले आनन्दन
कुछ ऐसे मना मिलन समारोह
कोई नहीं यहा आरोह अवरोह
याद करेगी दुनिया हमको कुछ इस तरह
की इतिहास रचा जाता है जिस तरह
होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाये के साथ……
एम के पाण्डेय निल्को
VMW Team

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है (डॉ कुमार विश्वास – Dr Kumar Vishwas)

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को, बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक एहसासो की, पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है, मेरी आँखों में आंसू है
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर के अंदर है, लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है , इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू, बना लेना मगर सुनले
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुमुदनी पर, मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे, सब किस्सा मोहब्बत का
हम किस्से को, हकीक़त में, बदल बैठे तो हंगामा
तुम्हारे पास हूँ लेकिन, जो दूरी है समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती , अधूरी है समझता हूँ
तुम्हे मै भूल जाऊँगा, ये मुमकिन है नही लेकिन
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
मैं जब भी तेज चलता हूँ ,नज़ारे छूट जाते हैं
कोई जब रूप धरता हूँ , तो साँसे टूट जाती है
मैं रोता हूँ तो आकार लोग कन्धा थपथपाते हैं
मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं
बहुत टुटा बहुत बिखरा, थपेड़े सह नहीं पाया
हवाओं के इशारो पर मगर में बह नहीं पाया
अधुरा अनसुना ही रह गया, ये प्यार का किस्सा

कभी में कह नहीं पाया कभी तुम सुन नहीं पाई

डॉ कुमार विश्वास

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अबकी बार मोदी सरकार!



क्या दिल्ली ,क्या काशी , 
मोदी को चुनेगा .हर भारतवासी ,
अबकी बार मोदी सरकार …..
युवराज बन गया पप्पू यार…..अबकी बार मोदी सरकार!!
देश न बने पप्पू इस बार….अबकी बार मोदी सरकार!!
नहीं चाहिये कोई ख़ैरात, बहुत
देखी तेरी बारात! बस चाहिये
सुरक्षा, सु़विधा, सुअवसर के हालात!
बाक़ी दम रखते है यार,
अबकी बार मोदी सरकार!
मंदर,डाक्टर, दफ़्तर, बार,
हर जगह बड़ी क़तार!
पंडीत,कंपौडर,चपरासी, साकी,
कोई नहीं है ज़िम्मेवार!
शायद अब सुधरे हालात,
अबकी बार मोदी सरकार!
भैंस आजम को छोड़ गयीं!!
सांड़ ने मुलायम के हेलिकोप्टर को रोक दिया!!
यानि……
पशु पक्षी की भी यही पुकार, अबकी बार मोदी सरकार!

Madhulesh Pandey Nilco

देवरिया जिले में नया मीडिया मंच के बैनर तले नया मीडिया एवं ग्रामीण पत्रकारिता विषयक संगोष्ठी, सतीश मिश्रा, एन डी देहाती , डॉ सौरभ मालवीय, राजीव कुमार यादव और जय प्रकाश पाठक को मोती बी.ए नया मीडिया सम्मान से सम्मानित किया गया

देवरिया संगोष्ठी की कथा-गाथा : प्रारंभ से प्रारब्ध तक : कुछ सीखा, कुछ सिखा गए…

(पूरे कार्यक्रम की शुरुआत से अंत तक शिवानन्द द्विवेदी सहर की नजर से ये रिपोर्ट)

17 नवंबर को दिल्ली के कॉफी हाउस दिल्ली में कुछ लोग यूँ ही बैठ लिए और तय कर लिए कि आगामी २१ दिसंबर को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नया मीडिया मंच के बैनर तले नया मीडिया एवं ग्रामीण पत्रकारिता विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा. हालाकि इससे पहले अनौपचारिक तौर पर एक बार इसी मुद्दे पर प्रवीन शुक्ल, संजीव सिन्हा, सौरभ मालवीय और मै पहले भी बैठ चुके थे. लेकिन इस बैठक में सर्व सम्मति से कार्यक्रम के संयोजक के तौर पर प्रवीण शुक्ल पृथक एवं सह-संयोजक के तौर पर शिवानन्द द्विवेदी सहर (यानी मेरा) नाम तय किया गया.

बैठक में कार्यक्रम के संरक्षक के तौर पर डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी का नाम प्रस्तावित किया गया जिसे सभी लोगों ने मान लिया. बैठक में सबकुछ तय होने के बाद अब नया मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार की शुरुआत मैंने अपने फेसबुक वाल से शुरू की. तमाम लोग जो शुरू में कार्यक्रम की योजना से उत्साहित होकर कॉफी हाउस की बैठक में आयोजन के साथ जुड़े, अंत तक जुड़े रहे. तमाम ऐसे भी लोग थे जो जुड़े तो जोश के साथ लेकिन मझधार में अपनी मजबूरियों की भेंट चढ़ते हुए अलग  हो गए. सवाल अतिथितियों का था, सों दिल्ली से मै आगे आया और चर्चा बढ़ाया.

अतिथि वक्ता के तौर पर श्री अमिताभ ठाकुर (आईजी), प्रो. रामदेव शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार श्री शंभूनाथ शुक्ल, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री पंकज झा, श्री संजीव सिन्हा, श्री यशवंत सिंह से आने का अनुरोध खुद मैंने किया. वहीँ भोपाल से डॉ श्रीकांत सिंह का प्रोग्राम डॉ सौरभ मालवीय ने तय कराया. हालाकि इनसे भी मेरी बात हुई थी. देवरिया की माटी से जुड़े पाँच गणमान्यो को सम्मानित कराये जाने की योजना कॉफी हाउस बैठक में तय हुई थी सों तमाम लोगों से पूछ कर, जांच कर श्री संजय मिश्र (दैनिक जागरण), डॉ जय प्रकाश पाठक, श्री नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती (सहारा), डॉ सौरभ मालवीय, श्री राजीव यादव (हिन्दुस्तान) के नामों का चयन किया गया था. चयनित नामो की घोषणा भी की गयी बाद में.

इस कार्यक्रम को लेकर मेरा सुझाव था कि यह कार्यक्रम बिना प्रायोजक के किया जाय और क्षेत्रीय लोगों से चंदा इकठ्ठा करके किया जाय. कई लोग इस फार्मूले को नकार भी दिये थे लेकिन मैं कायम रहा. धन जुटाना वो भी दिल्ली में बैठकर देवरिया के लोगों से, किसी लोहे चने चबाने से कम न तब था और न आज है, ये बात मैं हाल ही में मिले निजी अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ. खैर, मैं इसी फार्मूले पर चला. मैंने धन जुटाने के लिए तमाम लोगों से संपर्क किया और तमाम लोगों ने स्वीकृति भी. ये अलग बात है कि कार्यक्रम के दिन ११ बजे तक मेरे हाथ में किसी भी स्थानीय द्वारा जुटाया गया एक रुपया भी नहीं आया था.

इस दौरान दिल्ली में रहकर मैंने निजी प्रयास किया था जिसमें सिंगापुर से चुन्नू सिंगापुरी जी द्वारा तीन हजार और आशुतोष कुमार द्वारा एक हजार, मतलब चार हजार का सहयोग मिल सका था. लेकिन बताना चाहूँगा कि मेरे स्थिति को कुछ अतिथि भांप गए थे जिसमे श्री पंकज झा और श्री पंकज चतुर्वेदी, भाई आशुतोष सिंह सहित डॉ धीरेन्द्र मिश्र एवं अलका सिंह जी का नाम ले रहा हूँ. श्री पंकज झा जी ने अपने खर्चे से आने का वादा कर मुझे राहत दिया तो वहीँ पंकज चतुर्वेदी जी ने अपना टिकट खुद कराया (मेरे द्वारा कराया गया टिकट कैंसल कराकर). तमाम उतार-चढाव के साथ कार्यक्रम की तारीख नजदीक आई और १८ की शाम वैशाली से मैं निकल गया देवरिया के लिए. बताता चलूँ कि देवरिया में सतह पर जो लोग इस आयोजन के लिए लगे हुए थे उनमे श्री रामकुमार सिंह (दैनिक जागरण), विद्यानंद पाण्डेय, श्री दिलीप मल्ल, रामदास मिश्र, संतोष उपाध्याय, अभिनव पाठक,कपीन्द्र मिश्र, राहुल तिवारी, आदर्श तिवारी, श्री नवनीत मालवीय सहित तमाम अन्य लोगों के नाम प्रमुख हैं. इनके सहयोग से कार्यक्रम अपनी सफलता तक पहुंचा.

खैर, वो तारीख भी आई जब मैं १९ तारीख को देवरिया पहुंचा. स्टेशन उतरते ही वहाँ रामकुमार सिंह और विद्द्यानंद पाण्डेय अपनी बोलेरो और आदर्श अपनी बाइक लेकर आये थे. रामकुमार सिंह और विद्यानंद के साथ मिलकर मैंने कार्यक्रम से सम्बन्धी होटल-अतिथि आवास, फुल-माला, माइक-साउंड, फोटो-फ्रेमिंग, आदि का ऑर्डर किया. स्मृति-चिन्ह और बैनर तो मैं खुद दिल्ली से ले गया था. अंतिम लड़ाई २० तारीख की सुबह की थी. बीस की सुबह मै अकेला ही घर से निकला लेकिन तभी आदर्श भी साथ आ लिए. हम लोग निमंत्रण-पत्र वितरण से लेकर, दो सौ लोगों के नाश्ते पानी तक के इन्तजामो में लग गए (बता दूँ कि अभी तक कुछ भी हुआ नहीं था). शाम तक बिना रुके काम करने के बाद ये भी हो गया.

अब मेरा ध्यान दिल्ली की तरफ गया. शाम ४:५० पर दिल्ली स्टेशन से पूर्बिया एक्सप्रेस में शंभूनाथ जी, पंकज चतुर्वेदी जी, पृथक जी, धीरेन्द्र जी, उमेश जी, यशवंत जी, जनार्दन जी, अलका जी, संजीव जी, उमेश चतुर्वेदी जी का टिकट था. कुल आठ अतिथियों का आगमन एक ही ट्रेन से दिल्ली से होना था. हालाकि पंकज झा जी और डॉ श्रीकांत सिंह जी एकदिन पूर्व ही देवरिया एवं गोरखपुर पहुच चुके थे. अपने दो महत्वपूर्ण अतिथियों की उपस्थिति मेरे आत्मबल को बढ़ा रही थी. शाम चार बजे के बाद उमेश चतुर्वेदी जी का फोन आता है कि यह ट्रेन कई घंटे लेट हो सकती है और फिलहाल दो घंटे लेट है.

यह खबर मेरे माथे के बल पहाड़ का भार लेकर पडी. पूरे कार्यक्रम के लगभग सभी अतिथि उसी ट्रेन से आने वाले थे. पृथक जी और शंभूनाथ जी स्टेशन पहुंचे फिर पंकज चतुर्वेदी जी और अलका सिंह जी पहुंचे. धीरेन्द्र मिश्र का फोन आया कि वो भी स्टेशन पहुंच चुके हैं. यहाँ दिल्ली से सबके फोन आने शुरू हुए और मेरी धड़कनें बढ़नी शुरू हुई. ऐसा होना लाजिमी था क्योंकि कल कार्यक्रम और आज अतिथियों का आना ही संशय में. इसके अलावा कई सूत्रों से यह खबर भी आ रही थी कि देवरिया के तमाम पत्रकार संगठनों द्वारा इस कार्यक्रम का बहिष्कार भी किया गया है. इस बहिष्कार की वजह मेरी समझ से बाहर थी लेकिन लोगों की माने तो शायद यही वजह थी कि उनके जमे-जमाये मठ में यह शिवानन्द सहर और नया मीडिया मंच जैसी चीजें उनकी इजाजत के बिना कैसे आ गयी हैं.

मैं कार्यक्रम में आने का निमंत्रण देने के लिए जिलाधिकारी देवरिया श्री मनिप्रसाद मिश्र से रात आठ बजे मिला. हालाकि वो कार्यक्रम में जाने क्यों स्वीकृति के बावजूद नहीं आये. जिलाधिकारी महोदय के न आने की बात एक दिन पहले ही मुझे तब स्थानीय लोग बता दिये थे जब मैं उनसे (जिलाधिकारी) निमंत्रण के लिए मिलने जा रहा था. लोगों ने मुझसे कहा कि जिलाधिकारी महोदय को तमाम लोगों ने कार्यक्रम के खिलाफ समझा दिया है, अत: वो नहीं आयेंगे. हालांकि मुझे आज भी इस पर व्यक्तिगत रूप से विश्वास नहीं है. जिलाधिकारी से मिलकर आठ सवा आठ बजे बाहर निकला तो सूचना मिली कि श्री शंभूनाथ शुक्ल, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री प्रवीण शुक्ल (संयोजक) ट्रेन छोड़कर घर लौट गए हैं और अलका सिंह, धीरेन्द्र मिश्र, यशवंत सिंह ट्रेन में बैठ गए हैं.

हालात ऐसे थे के किसी को भी मैं जबरन आने को कह नहीं सकता था और उनके नहीं आने की स्थिति में यहाँ रातो-रात कोई विकल्प भी नहीं खड़ा कर सकता था. खैर, हालाकि मुझे इस बात की संतुष्टि जरूर थी कि वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल और पंकज चतुर्वेदी सरीखे लोग मेरे कहने पर कम से कम चार घंटे से ज्यादा स्टेशन पर तो खड़े रहे. वाकई मैं इसके लिए उनका आभार व्यक्त करूँगा कि वो तब तक स्टेशन पर जमे रहे जब तक ट्रेन के समय से देवरिया पहुंचने की अंतिम उम्मीद बनी रही. इस मामले में संजीव सिन्हा बहुत निराश किये. चार बजे उन्होंने आने की पुष्टि की और साढ़े चार बजे उनका फोन आता है कि उन्हें छुट्टी नहीं मिल रही और प्रभात झा मना कर रहे हैं.

उमेश जी ने बताया कि वो बैग लेकर संजीव जी के यहाँ गए लेकिन उनके मना करने के बाद वो भी लौट रहे हैं. सबकी बातें मेरी समझ में आ रहीं थीं लेकिन संजीव जी द्वारा न आने का कारण बेहद लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना और मजाकिया लग रहा था. जिस कार्यक्रम का टिकट डेढ़ महीने पहले हो चुका हो उसकी छुट्टी भला आधे घंटे पहले मांगने जाना मजाकिया नहीं तो क्या लगना चाहिए. जब संजीव सिन्हा ने मना किया तब टिकट कैंसल नहीं हो सकता था क्योंकि चार्ट बन चुका था. एक अनुज के नाते माफी के साथ एक सुझाव संजीव सिन्हा के लिए है कि “आगे से अगर कोई कार्यक्रम बनाये तो कम से कम छुट्टी थोड़ा पहले ले लें और नहीं आ पाने की पुष्टि इतना पहले कर दें कि आयोजक आपका टिकट कैंसल करवा सकें. कई बार कार्यक्रमों के पास कोई बड़ा प्रायोजक नहीं होता है”.
ट्रेन से बेपरवाह अब २१ दिसंबर के मंच योजना में लगते हुए मै अपना ध्यान कार्यक्रम की तरफ लगा दिया. दूसरे दिन ग्यारह बजे ही हम सात आठ लोग जिला पंचायत सभागार पहुचे और बैनर आदि लगा दिये. जिलापंचायत सभागार बुक करवाया था सतीश मणि और जिलापंचायत सदस्य राणा प्रताप ने, अत: यहाँ भी हमें आर्थिक राहत मिली थी. नियत समय पर दो बजे लोग जुटने शुरू हो गए. मुख्य अतिथि श्री अमिताभ ठाकुर भी देवरिया पहुच चुके थे. अपने तय समय से आधे घंटे देर से यानी ढाई बजे कार्यक्रम शुरू हुआ. बतौर मुख्यातिथि आईजी गोरखपुर श्री अमिताभ ठाकुर, सभाध्य्क्ष प्रो. रामदेव शुक्ल,मुख्य वक्ता डॉ श्रीकांत सिंह, श्री पंकज कुमार झा एवं संरक्षक डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी मंच पर उपस्थित हुए.

कार्यक्रम शुरू होते-होते सभागार पूरा भर गया था जिनमे महिला और पुरुष दोनों की उपस्थिति थी. बतौर संचालक मैंने कार्यक्रम देर से शुरू होने की माफी मांगते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की. माँ सरस्वती की तस्वीर पर पुष्पांजली के बाद अतिथि स्वागत का क्रम चला. इसी क्रम में श्री संजय मिश्र,डॉ जय प्रकाश पाठक, श्री नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती, डॉ सौरभ मालवीय एवं श्री राजीव यादव को मोती बीए नया मीडिया सम्मान प्रो. रामदेव शुक्ल के हाथों दिया गया. सभी सम्मानित गणमान्यों ने सभा को संबोधित करते हुए अपने विचार रखे. सभा को संबोधित करते हुए सम्मान प्राप्त अतिथि डॉ जय प्रकाश पाठक ने शंभूनाथ शुक्ल जी का एक फेसबुक स्टेट्स पढ़कर सबको सुनाया जिसमे शुक्ला जी ने “लौट के बुद्धू घर को आये” वाला मुहावरा इस्तेमाल किये थे.

संबोधन के क्रम में श्री देहाती जी ने नयम मीडिया मंच को ग्रामीण पत्रकारों की जरुरत बताते हुए कहा कि जो लोग बाहर बैठ कि इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं, बेहतर है कि वो अंदर सभागार में आयें और खुली बहस करे. बकौल देहाती जी “देवरिया के पत्रकारिता इतिहास में हुए कार्यक्रमों में यह पहला मंच है जहाँ विरोधियों को भी अपनी बात रखने के लिए आजादी दी जा रही है”. सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री संजय मिश्र ने नया मीडिया की जरुरत एवं जवाबदेही से सम्बंधित सवाल उठाया. सम्मान समारोह एवं सम्मनित व्यक्तियों के संबोधन के बाद माइक पर आये वक्ता श्री पंकज कुमार झा ने बेहद शालीनता से अपनी बात रखा. नया मीडिया के विकास एवं जरुरत पर बोलते हुए श्री झा ने कहा कि हमें अभी इसकी शुचिता की बजाय इसके विकास पर बल देने की जरूरत है.

वहीँ मुख्य वक्ता डॉ श्रीकांत सिंह ने कहा “ कोई भी मीडिया नयी नहीं होती है अत: इसे नया मीडिया की बजाय डिजिटल मीडिया कहना ज्यादा प्रासंगिक होगा. इस मीडिया पर भी अनुशासन की जरूरत है और इसे भी अपनी जवाबदेही तय करनी होगी.”. इस क्रम में डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी ने कार्यक्रम का प्रस्तावन भाषण देते हुए इस आयोजन को अद्भुत बताया तो वहीँ ग्रामीण अंचल से आये पत्रकार श्री सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी. श्री राघव तिवारी, श्री अरुण पाण्डेय. श्री सतीश सिंह आदि ने न्यू मीडिया को को ग्रामीण पत्रकारों के सशक्तीकरण के लिए सबसे जरूरी हथियार के रूप में स्वीकार किया. कार्यक्रम खतम होने में अभी आधे घंटे शेष थे और सभा में मौजूद भीड़ ज्यों की त्यों टिकी थी. तभी सूचना मिली कि यशवंत सिंह, कुमार सौवीर, जनार्दन यादव, अलका सिंह, डॉ धीरेन्द्र मिश्र भी पहुंच गए हैं. बिना देर किये संचालक द्वारा श्री यशवंत सिंह (भड़ास) एवं श्रीमती अलका सिंह (आकाशवाणी) को मंच पर आमंत्रित किया गया.

यशवंत सिंह द्वारा अपने संबोधन में उसी तेवर को कायम रखते हुए मुख्यधारा मीडिया पर प्रहार एवं नया मीडिया के सशक्तीकरण की बात की गयी. वहीँ अलका सिंह ने संक्षिप्त में ही ऐसे कार्यक्रमों पर अपना पक्ष रखा. सभा की अध्यक्षता कर रहे प्रो. रामदेव शुक्ल ने मुख्यधारा मीडिया के जवाब के रूप में नया मीडिया के विकास पर बात करते कहा कि इस नए माध्यम पर और अधिक प्रशिक्षण शिविर आदि लगाकर उन लोगों को खड़ा करने की जरुरत है जो इस माध्यम से अनभिग्य हैं.

अंत में कार्यक्रम के संरक्षक डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी ने सभी तमाम अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया. शुरुआत में कार्यक्रम को हल्के में लेने एवं उपेक्षित नजर से देखने के बावजूद कार्यक्रम की सफलता ने तमाम राष्ट्रीय अख़बारों को कवरेज करने पर मजबूर किया और तमाम अखबारों के देवरिया ब्यूरो प्रमुखों ने देर रात इस कार्यक्रम को संज्ञान में लेकर जानकारी ली. ये वही अखबार के ब्यूरो प्रमुख थे जो इस कार्यक्रम की सुचना तक छापने से बच रहे थे. दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख ने तो पूरे कार्यक्रम के ढांचे को ही अपूर्ण बता दिया था लेकिन यह अंत तक नहीं बता पाए कि क्या अपूर्ण था? मुझे उम्मीद थी कि वो इसकी अपूर्णता बताने मंच तक आयेंगे लेकिन नहीं आये.

खैर, सबकी नजर में कार्यक्रम सफल रहा.
आयोजन और इसके दाएं-बाएं की कुछ तस्वीरें…

साहित्यकार प्रोफेसर रामदेव शुक्ल ने कहा कि पारंपरिक मीडिया में जो चीजें छूट जाती हैं उसे नया मीडिया उठाता है। ग्रामीण अंचल के पत्रकारों के लिए नया मीडिया सशक्त माध्यम है। शुक्ल शनिवार को जिला पंचायत सभागार में नया मीडिया एवं ग्रामीण पत्रकारिता विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पत्रकारिता के इस तरह के प्रयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ाकर लोगों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। इसकी चुनौतियां भी बहुत है जिससे लड़ने के लिए पत्रकार को जिम्मेदारियों के साथ रहना पड़ेगा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रानिक मीडिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीकांत सिंह ने कहा कि कोई भी मीडिया नई नहीं होती है। इसलिए इसे डिजीटलमीडिया कहना ज्यादा प्रासंगिक लगता है। नया मीडिया को एक समय बाद मुख्य धारा के मीडिया के रूप में जाना जाने लगेगा। आईजी अमिताभ ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया ने आम व्यक्ति को ताकतवर बनाया। लोग अपनी बात को आसानी से पहुंचा रहे हैं। सभी बड़े राजनैतिक लोग फेसबुक और ट्यूटर पर हैं। हालांकि इसका दुरुपयोग भी हो रहा है, इसे रोकने की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार पंकज झा ने कहा कि नया मीडिया मुख्य धारा की मीडिया के विकल्प के रूप में सामने आ रहा है। इसमें सूचनाओं को रोकना संभव नहीं हो सकेगा। पत्रकार यशवंत सिंह ने ग्रामीण पत्रकारिता व वर्तमान पत्रकारिता की दशा पर अपना विचार व्यक्त किया। इस दौरान माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रकाशन अधिकारी सौरभ मालवीय, वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र, एनडी देहाती, राजीय यादव, संत विनोबा पीजी कॉलेज के अध्यापक प्रो. जयप्रकाश पाठक को मोती बीए सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर शिवानंद िद्ववेदी ‘सहर’ आल इण्डिया रेडियो दिल्ली की समाचार वाचिका अलका सिंह, डॉ. दिनेश मणि, रामदास मिश्र, राम कुमार सिंह, दिलीप मल्ल, उदय प्रताप आदि मौजूद रहे।