Tag Archives: व्यंग

Why do dogs run after the bikes ??

आखिर कुत्ते मोटर साइकिल के पीछे भागते क्यों है ? 

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जौ के ठेकाने ना, सतुआने के तैयारी – भोजपुरी व्यंग्य -एन डी देहाती

14 अप्रेल 17 के सतुआन ह। अब लखनऊआ , दिल्लिहिया कहि दिहे सतुआन का होला। पुरबिहन से पूछ ल। सतुआन के पुरवर परिभाषा बता दीहें। सतुआ भी एगो संस्कृति ह, सादगी के, समानता के, सहजता के। पुरनिया लोग बहुत पहिले से सतुआन मनावेलन। हमहुँ मनाईलन। लोग जौ बोअल छोड़ दिहल जेकरा चलते सतुआ पर संकट आ गईल बा।
हिन्दू पतरा परम्परा में सौर मास के हिसाब से सुरूज देवता जहिआ कर्क रेखा से दखिन के ओर जाले तहिये मेष संक्राति लागेला। ओहि के सतुआन कहल जाला। एहि दिन से खरमास के भी समाप्ति हो जाला आ रडूहन के शादी विवाह होखल शुरू हो जाला।
जवन असकतिहा सालों साल ना नहात होइहैं उहो सतूआन के दिन जरूर नहा लेलन। एही से कहल गईल- असकतिहन के तीन नहान।
खिचड़ी, फगुआ औ सतुआन।।
सतुआन के बहुत तरह से बनावल जाला, सामान्य रूप से आज के दिन जौ के सत्तू गरीब असहाय के दान करे के प्रचलन बा। आज के दिन लोग स्नान पावन नदी गंगा में करे ला, पूजा आदि के बाद जौ के सत्तू, गुर, कच्चा आम के टिकोरा आदि गरीब असहाय के दान कइल जाला आ इष्ट देवता, ब्रह्मबाबा आदि के चढ़ा के प्रसाद के रूप में ग्रहण कइल जाला। ई काल बोधक पर्व संस्कृति के सचेतना, मानव जीवन के उल्लास आ सामाजिक प्रेम प्रदान करेला। पूर्वांचल में चाहे केहू केतनो अमीर होखे आज के दिन सादगी में मनावे खातिर सतुआ के ही भोग लगायी। गावँ से उजड़त गोनसार( भूजा भुजने का चूल्हा , जो गोंड जाति का परम्परागत पेशा रहा), समहुत में जौ के बुआई, नेवान में जौ के भुनल बालि के परसादी अब दुलम होत बा। भाई हो जौ ना बोआई त सतुआ कहा से आयी। सतुआन के पर्व हमे याद दिलावेला। सतुआ के। सतुआ खातित जौ जरूरी बा। जौ के जय जय कार कईल जा। डॉक्टर की कहला पर ना, अपनों विचार से थोड़ा बहुत जौ बोअल जा।
फेरू कबो भेंट होई त दूसरे टॉपिक पर बतकुचन होई। जय राम जी के।

बड़ा महत्त्व है

” बड़ा महत्त्व  है ”
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👉 ससुराल में साली का
👉 बाग  में  माली     का
👉 होठों  में  लाली    का
👉 पुलिस में  गाली   का
👉 मकान  में  नाली   का
👉 कान   में   बाली   का
👉 पूजा   में   थाली   का
👉 खुशी  में  ताली   का…. बड़ा महत्त्व है…
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👉 फलों  में  आम  का
👉 भगवान में  राम  का
👉 मयखाने में  जाम का
👉 फैक्ट्री  में  काम  का
👉 सुर्खियों में  नाम  का
👉 बाजार  में  दाम  का
👉 मोहब्बत में शाम  का……. बड़ा महत्त्व है.
👉 व्यापार  में  घाटा  का
👉 लड़ाई  में  चांटा   का
👉 रईसों  में   टाटा   का
👉 जूत्तों  में  बाटा   का….. बड़ा  महत्त्व  है

👉 फिल्म  में  गाने  का
👉 झगड़े   में  थाने  का
👉 प्यार   में  पाने    का
👉 अंधों   में  काने   का
👉 परिंदों  में  दाने   का…….. बड़ा  महत्त्व है

👉जिंदगी में मोहब्बत का
👉 परिवार में इज्जत का
👉तरक्की में किस्मत का
👉 दीवानों में हसरत  का……. बड़ा महत्त्व है

👉 पंछियों में बसेरे  का
👉 दुनिया में सवेरे   का
👉 डगर   में  उजेरे  का
👉 शादी  में  फेरे   का…… बड़ा महत्त्व  है

👉 खेलों  में  क्रिकेट   का
👉 विमानों में   जेट    का
👉 शरीर    में   पेट   का
👉 दूरसंचार में  नेट  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 मौजों  में  किनारों का
👉 गुर्वतों  में  सहारों   का
👉 दुनिया  में  नजारों का
👉 प्यार   में   इशारों  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 खेत  में  फसल   का
👉 तालाब में कमल  का
👉 उधार  में  असल  का
👉 परीक्षा में  नकल  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 ससुराल में जमाई का
👉 परदेश  में  कमाई का
👉 जाड़े  में  रजाई   का
👉 दूध   में  मलाई  का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 बंदूक  में  गोली   का
👉 पूजा   में  रोली  का
👉 समाज में बोली  का
👉 त्योहारों में होली का
👉 श्रृंगार में रूप का……. बड़ा महत्त्व है

👉 बारात  में  दूल्हे  का
👉 रसोई  में  चूल्हे  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 सब्जियों में  आलू का
👉 बिहाऱ   में   लालू  का
👉 मशाले में   बालू   का
👉 जंगल   में  भालू  का
👉 बोलने   में  तालू  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 मौसम में सामण  का
👉 घर   में   आँगण  का
👉 दुआ  में  माँगण   का
👉 लंका  में  रावण   का….. बड़ा महत्त्व है

👉 चमन  में  बहार   का
👉 डोली  में  कहार   का
👉 खाने   में  अचार  का
👉 मकान में  दीवार  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 सलाद  में   मूली  का
👉 फूलों    में  जूली   का
👉 सजा   में  सूली   का
👉 स्टेशन  में  कूली  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 पकवानों  में  पूरी  का
👉 रिश्तों  में    दूरी   का
👉 आँखों  में   भूरी   का
👉 रसोई   में   छूरी   का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 माँ    की   गोदी  का
👉 देश   में     मोदी  का…… बड़ा महत्त्व है

रावण को ही क्यों मारे?

सिर्फ पुरुष ही अपने अन्दर के रावण को क्यों मारें…?
स्त्रियों को भी चाहिये कि वो भी अपने अन्दर की कैकई, ताड़का, मंथरा और शूर्पणखा को मारें !

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

हाल – ए – दिल क्या सुनाऊ

कहाँ छुपा के रख दूँ मैं अपने हिस्से की शराफत,
जिधर भी देखता हूँ उधर बेईमान खड़े हैं..
क्या खूब तरक्की कर रहा है अब देश देखिये,
खेतों में बिल्डर, सड़क पर किसान खड़े हैं….!!

तेरी दीवार से ऊची मेरी दीवार बने

बस यही दौड़ है इस दौर के इन्सानो की
तेरी दीवार से ऊची मेरी दीवार बने
तू रहे पीछे और मैं सदा आगे
ऐसी कोई बात या करामात बने
निंदा हो या हो आलोचना
करता तू है यही आराधना
की मैं न आगे निकलु तेरे से
इसके लिए ही करुगा साधना
गया जमाना मदद , सहयोग का
लगता है ये कुछ हठयोग सा
अगर न माना इनकी बात
तो करते है ये काम लठयोग का
कैसे होगा दूर ये सब
कौन कराएगा नैया पार
गर यही चलता रहा तो निल्को
फस जाएगे बीच मझधार
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एम के पाण्डेय निल्को
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रविवारीय ज्ञान द्वारा एम के पाण्डेय निल्को

आज रविवार है आलस्य से भरा यह दिन मेरे लिए बातों की खिचड़ी पकाता है,  रविवार का दिन मेरे लिए शेयर मार्केट जैसा होता है कुछ भी निश्चित नहीं , कुछ भी कभी भी हो सकता है । जैसे अभी अभी ये विचार मन मे आया की……………………………………….
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