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मोदीजी को बधाई

मोदीजी को बधाई
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     बहस बहुत बधाई .लोक सभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के लिए .  वैसे मोदी को समर्थन करने के नाते इस देश की बहुसंख्यक जनता को बहुत गालियाँ , अपशब्द सुनने पड़े हैं. चोचलेबाज विपक्षियों के . अंधभक्त कहकर अपमानित किया गया . सच्चे हिन्दुस्तानियों को देशभक्ति के लिए विपक्षी जलील करते रहे . और सभी मोदी के गुणों की समर्थक जनता मौन-मुखर दोनों तरह से सहती रही है । एक महिला नेता  आपको थप्पड़ (प्रजातंत्र का )  मारने की कहकर सरेआम हिंसक और असंसदीय हुई थी । अब जनता ने सबको एक साथ जवाब दे दिया है ।  “चौकीदार चोर है” कहनेवाले की बोलती बंद करदी है ।  आप के हर कार्य पर सही का ठप्पा लगाया है इसलिए बधाई ।

.               पुलवामा काण्ड पर घेरने की साजिश करने वाले , पाकिस्तान के भरोसे मोदी को हराने की साजिश करने वाले , जनता को भ्रम मे डालने की कोशिश करने वालों को जनता ने घेरे मे रख दिया है ।रफाल पर जनता  को बर्गलाने की साजिश विपक्ष के काम नहीं आयी . जनता ने अंततः मोदी पर भरोसा किया ।

         देश के विखण्डन , भेदभाव पूर्णव्यवहार, और सरकार को चलने मे जगह-जगह रोड़ा अटका कर जनता के बीच झूठ फैला कर येनकेनप्रकारेण सत्ता पर काबिज होने के लिए  सेना, मान. सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और ईवीएम  को दोष देने वालों की जनता ने एक न चलने दी .
आगे के लिए यह सभी के लिए लेसन हैं । जातिवाद वर्गवाद की दीवार तोड़कर जनता ने मोदी को अपनाया है ।अत: आगामी पाँच वर्षों के लिए पुनः एक सक्षम सरकार  को ध्यान में रखकर मोदी जी को कोटिश: बधाइयाँ । 
शुभमस्तु ।

                     —  —  –हरि शरण ओझा ।

नीचों का गठबंधन है

सारे  कौरव  हुए  इकट्ठे, नीचों  का  गठबंधन है
सूपनखा की नाक कटी है, चोरों के घर कृन्दन है

पड़ी है पीछे सीबीआई जगह कहाँ अब जाने को
मिल कर एक हुए हैं गीदड़ अपनी लाज बचाने को

मफलर वाला गिरगिट आया अपनी शान दिखायेगा
टोंटी चोर बुआ को लाया वो भी गाल बजायेगा

संविधान की रक्षा करने आया है एक  नौवीं फेल
जिसके अब्बा खाकर चारा भुगत रहे वर्षों से जेल

राफेल वाला पप्पू आया, दिखा रहा है अपना जोश 
खुद बेचारा बेल पे बाहर कोई दिलाये इसको होश

वो अब्दुल्ला जिसका जीवन गीत पाक के गाते गुजरा
उसको भी अब ये लगता है देश पे सच में आया खतरा

कई और छुटभैये नेता जिनकी कहीं नहीं है पूछ
चोरों के संग सीना ताने ऐंठ रहे है अपनी मूछ

कहे समीक्षा राष्ट्र विरोधी ख्वाबों की ताबीर नहीं
बंगाल हमारा सूपनखा के अब्बा की जागीर नहीं

एक साथ हैं गिद्ध और गीदड़,कुत्ते,और बिलाब सभी
एक  शेर  को  घेरेंगे  क्या नीच  निक्कमे घाघ  कभी

संविधान खतरे में होता जब भी इनकी पोल खुले
सच तो ये है डर है इनको कहीं न इनके झोल खुले

सीधी सच्ची बात है कि ये तभी तो मिलकर खायेंगे
जब  ये  चोर उचक्के मिलकर खुद सरकार बनायेंगे

देख  रहे  सब  भारतवासी इन सब झूठे मक्कारों को
उन्निस में सबक सिखाएंगे इन लोकतंत्र हत्यारों को

समीक्षा सिंह जादौन

हनुमान जी की जाति क्या है ?

हनुमान ब्राह्मण जाति से हैं – रामायण में कई स्थान पर उनके प्रगाढ़ पाण्डित्य पर प्रकाश डाला गया है । जब वे अशोक वाटिका पहुंचते हैं तो उनका वक्तव्य है – यदि वाचं प्रदास्यामि द्विजातिरिव संस्कृताम् । रावण मन्यमाना मां सीता भीता भविष्यति ॥ अर्थात् यदि मैं संस्कृत भाषा का प्रयोग करता हूं तो सीता मां मुझे रावण समझकर भयभीत हो सकती हैं । ( संस्कृत प्रायः उच्च वर्गों की खास तौर पर ब्राह्मणों की भाषा थी)

हनुमान क्षत्रिय जाति से हैं – क्षत्रिय कौन होता है जो शौर्य प्रदर्शन करे । आपद्काल में शत्रुओं से रक्षा करे । हनुमान जब राक्षसों के विरूद्ध लड़ रहे हैं तो अपने क्षत्रियत्व गुण का ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । हनुमान चालीसा में उक्त है –महावीर विक्रम बजरंगी । आगे वहीं पर कथित है कि उनके हाथ में वज्र और ध्वजा विद्यमान है और वे जनेउ भी धारण किए हैं ( हाथ वज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेउ साजै)

हनुमान वैश्य जाति से हैं – अर्थ की दृष्टि से इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जिसका मूल अर्थ “बसना” होता है। कर्म सिद्धांत वर्गीकरण मे पोषण के कार्यों से जुड़े गतिविधियों को वैश्य जाति के लोग अंजाम देते हैं । इस लिहाज से हनुमान सबसे बड़े वैश्य हैं क्योंकि वे स्वयं तो बसे ही लक्ष्मण को भी बसा दिया ।( संजीवनी लाकर उन्होंने लक्ष्मण को पुनर्जीवित किया था।)

हनुमान शूद्र जाति से हैं – गीता के १८वें अध्याय में कहा गया है कि परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यपि स्वभावजम् अर्थात् सेवा व सुश्रुषा करना शूद्र का कर्तव्य है । हनुमान से बड़ा भक्त खोज पाना नामुमकिन है । वे अनवरत अपने अराध्य प्रभु राम की सेवा में निरत रहते थे ।

गौरतलब है कि वर्ण का वर्गीकरण कर्म का वर्गीकरण है, न कि मनुष्य का वर्गीकरण। प्रत्येक मनुष्य कहीं न कहीं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र स्वयं है क्योंकि इन चारों के गुण उसमें समबेत हैं । पहले समय मनुष्य जाति का एक ही वर्ण था, चार वर्ण अथवा भिन्न-भिन्न जातियों की स्थापना बाद में हुई है

एक वर्ण मिदं पूर्वं विश्वमासीद् युधिष्ठिर।

कर्म क्रिया विभेदेन चातुर्वर्ण्यम् प्रतिष्ठितम्॥

न विशेषोऽस्ति वर्णानाम् सर्व ब्राह्ममिदं जगत्। ( महाभारत )

आज के परिप्रेक्ष्य में हमें यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि वार्ता का प्रस्थान बिन्दु क्या है? क्या हनुमान को हम वर्ग विशेष के नाते पूजते हैं या उनके कर्म व गुणों के आधार पर । यदि वे नीच कुल के भी होते तो क्या हम उनके गुणों के आधार पर उन्हें समादृत नहीं करते ?

एम के पाण्डेय
रिसर्च स्कॉलर

स्वच्छता अभियान पर दो टूक – ब्रजेश पाण्डेय

सबसे पहले देश के दो महान सपूत बापू और शास्त्री जी को नमन। बापू ने स्वछता के प्रति हमें जगाया तो शास्त्री जी ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया। स्वच्छ्ता अभियान का शुभारम्भ आज ही के दिन आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया। उन्हें भी मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। लेकिन मन में एक सवाल चुभता है कि हम कितना स्वच्छ हैं और देश का जवान-किसान कितना खुशहाल। स्वच्छता अभियान को लेकर झाड़ू लगाने का दौर पिछले चार साल से चल रहा है। तकरीबन 50 फीसद हम सफल भी हुए हैं। यह आंकड़ा और भी बढ़ता जब हम सिर्फ मीडिया में स्वच्छता का ढोंग न रचते। जैसा की अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की आदत है। पहले अपने घर की गंदगी साफ़ करनी होगी।तन-मन दोनों की सफाई जरूरी है। लेकिन यहां तो सफाई का बजट भी साफ़ करने में बंदे पीछे नहीं हैं। बजट पर नहीं जाऊँगा क्योंक़ि सफाई मद पर जितना प्रदेश को मिलना था, एक तिहाई मिला। जो मिला उसमें से भी तथाकथित लोगों ने कमीशन बनना शुरू कर दिया। मेरा अपना विचार है कि जब तक करप्शन की सफाई नहीं होगी। संसद की गंदगी दूर नहीं की जायेगी, संपूर्ण स्वच्छ्ता पर बात बेमानी होगी।

अब बात जवानों और किसानों की। जवान सीमा पर कितना सुरक्षित हैं, आप जानते हैं। आपको यह भी पता होगा कि बापू, नेहरू और शास्त्री जी जैसे लोग कभी सुरक्षा में जवानों की फौज नहीं लेकर चलते थे। उनकी दृढ इच्छा शक्ति ही, उनके लिए ढाल का काम करता था। जब अच्छे-बुरे कर्मो का हिसाब-किताब करके इस दुनिया से सबको चले जाना है तो फिर नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा पर करोड़ो रुपये जनता का क्यों खर्च हो रहा। इस रकम से तो देश की सीमा को और भी मजबूत किया जा सकता है। किसान जिंदगी भर मेहनत करते-करते सिर्फ दो जून की रोटी, तन ढकने के लिए कपड़ा और रहने के लिए दो कमरे बना लेता है, लेकिन वह तो कभी लक्जरी गाडी में बैठने का भी सपना नहीं देख पाता। तो फिर क्या शास्त्री जी का नारा अधूरा नहीं लगता। बात कड़वी जरूर लगेगी मित्रों, लेकिन सही मायने में सबका साथ, सबका विकास का दंभ भरने वाली अपनी सरकार सिर्फ अपने नेताओं और पूंजीपतियों के लिए ही कार्य कर रही है।
यदि मेरी बातें आपको बुरा लगे तो क्षमा कीजियेगा।
सादर
ब्रजेश पाण्डेय
दैनिक जागरण गोरखपुर

कश्मीर में जेहादियों द्वारा सैनिकों को थप्पड़-लात मार कर अपमानित करने पर एक सैनिक की सरकार से अपील को बंया करती मेरी नयी कविता- गौरव चौहान

(कश्मीर में जेहादियों द्वारा सैनिकों को थप्पड़-लात मार कर अपमानित करने पर एक सैनिक की सरकार से अपील को बंया करती मेरी नयी कविता)
रचनाकार-कवि गौरव चौहान उ प्र
9557062060

दिल्ली में बैठे शेरों को सत्ता का लकवा मार गया,
इस राजनीति के चक्कर में सैनिक का साहस हार गया,

मैं हूँ जवान उस भारत का,जो “जय जवान” का पोषक है,
जो स्वाभिमान का वाहक है जो दृढ़ता का उद्घोषक है,

मैं हूँ जवान उस भारत का, जो शक्ति शौर्य की भाषा है,
जो संप्रभुता का रक्षक है,जो संबल की परिभाषा है,

उस भारत की ही धरती पर ये फिर कैसी लाचारी है,
हम सैनिक कैसे दीन हुए,अब कहाँ गयी खुद्दारी है?

“कश्मीर हमारा” कहते हो,पर याचक जैसे दिखते हो,
तुम राष्ट्रवाद के थैले में,गठबंधन करके बिकते हो,

वर्दी सौंपी,हथियार दिए,पर अधिकारों से रीते हैं,
हम सैनिक घुट घुट रहते है,कायर का जीवन जीते हैं,

छप्पन इंची वालों ने कुछ ऐसे हमको सम्मान दिए,
कागज़ की कश्ती सौंपी है,अंगारो के तूफ़ान दिए,

हर हर मोदी घर घर मोदी,यह नारा सिर के पार गया,
इक दो कौड़ी का जेहादी,सैनिक को थप्पड़ मार गया,

अब वक्ष ठोंकना बंद करो,घाटी में खड़े सवालों पर,
ये थप्पड़ नही तमाचा है भारत माता के गालों पर,

सच तो ये है दिल्ली वालों,साहस संयम से हार गया,
इक पत्थरबाज तुम्हारे सब,कपड़ों को आज उतार गया,

इस नौबत को लाने वालों,थोड़ा सा शर्म किये होते,
तुम काश्मीर में सैनिक बन,केवल इक दिवस जिए होते,

इस राजनीती ने घाटी को,सरदर्द बनाकर छोड़ा है,
भारत के वीर जवानों को नामर्द बना कर छोड़ा है,

अब और नही लाचार करो,हम जीते जी मर जायेंगे,
दर्पण में देख न पाएंगे,निज वर्दी पर शर्मायेंगे,

या तो कश्मीर उन्हें दे दो,या आर पार का काम करो,
सेना को दो ज़िम्मेदारी,तुम दिल्ली में आराम करो,

थप्पड़ खाएं गद्दारों के,हम इतने भी मजबूर नही,
हम भारत माँ के सैनिक हैं,कोई बंधुआ मजदूर नहीं,

मत छुट्टी दो,मत भत्ता दो,बस काम यही अब करने दो,
वेतन आधा कर दो,लेकिन कुत्तों में गोली भरने दो,

भारत का आँचल स्वच्छ रहे ,हम दागी भी हो सकते है,
दिल्ली गर यूँ ही मौन रही,हम बागी भी हो सकते हैं,
——कवि गौरव चौहान

अम्बेडकर जयंती – 14 अप्रैल

सामाजिक आज़ादी के बिना क़ानूनी स्वतंत्रता बेमानी होती है – बी आर अम्बेडकर
काशǃ भारत के एक धर्म जो की क़ानूनी रूप से अल्पसंख्यक है उनके पास भी एक अम्बेडकर होते।
सदर नमन
सादर वंदे
एम के पाण्डेय निल्को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को VMW Team का खुला पत्र

सेवा में ,
        माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
              प्रधानमंत्री ,
              भारत सरकार ,
                         नई दिल्ली

विषय- भारत में आरक्षण को   समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

  माननीय महोदय ,
      सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है।
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।
*माननीय महोदय* ,
जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र *दस वर्षों के लिये आरक्षण* की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है ,
जिसे कि 10–  10 वर्ष करते करते आज 67 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
*आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।*
  *इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 67 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*
महोदय ,
*इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 67 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।*
*ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।*
महोदय,
*गरीबी जाती देखकर नहीं आती*
*आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,*
*वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।*
  अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
किसी भी जाति – धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को *आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण* देना सरकार को   सुनिश्चित करना चाहिए ।

*आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।*

*आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।*

*पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।*

   आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने  का कष्ट करेंगे |

🙏 *विशेष निवेदन /आग्रह*🙏
*जन जागृति* के लिए आपको सिर्फ 10 लोगो को ये मेसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को ये मेसेज करें ।
इस प्रकार
1 = 10 लोग
यह 10 लोग अन्य 10 लोगों को मेसेज करेंगे
इस प्रकार :-
10 x10 = 100
100×10=1000
1000×10=10000
10000×10=100000
100000×10=1000000
1000000×10=10000000
10000000×10=100000000
100000000×10=1000000000
                            (100 करोड़ )
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा।

भारत और महाभारत

*दुर्योधन और राहुल गांधी* –
                           दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।

*भीष्म और आडवाणी* –
                       कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके फिर भी सबसे ज्यादा सम्मान मिला। उसके बाद भी जीवन के अंतिम पड़ाव पे सबसे ज्यादा असहाय दिखते हैं।

*अर्जुन और नरेंद्र मोदी*-
                     दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है।

*कर्ण और मनमोहन सिंह* –
                      बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके।

*जयद्रथ और केजरीवाल*-
                           दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई ही हुयी।

*शकुनि और दिग्विजय-*
                    दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे।

*धृतराष्ट्र और सोनिया* –
                      अपने पुत्र प्रेम में अंधे है।

*श्रीकृष्ण और कलाम-*
                     भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है।

–यह है *भारत और महाभारत*

Startup India, Stand Up India

आजकल हर तरफ स्टार्टअप इंडिया के चर्चे हैं। अगर आप भी स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले इन के बारे में जरूर पढ़ लीजिए, जिनसे स्टार्टअप शुरू करने के दौरान आपका सामना होगा। फ्रांसीसी शब्द ऑन्त्रेप्रनोर व्यापार जगत में आजकल खूब चलन में है। प्रबंधन प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ इसमें दो प्रमुख बातों का होना बताते हैं। पहला किसी उद्यम का नया या नवोन्वेषी होना और दूसरा जोखिम उठाने या घाटा उठाने का हौसला होना। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया, भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिये मोदी सरकार द्वारा चलाया गया नया अभियान है। इस योजना के अनुसार, कम्पनियों को प्रोत्साहन दिया जायेगा ताकि वो अधिक रोजगार को सृजन कर सके। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया अभियान युवाओं (विशेष रुप से महिलाएं, दलित या आदिवासी) को शुरुआत के लिए बैंक वित्त पोषण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया जाएगा।
ये पहल स्टार्ट-अप्स को नये कारोबार की शुरुआत में सहायता करने में सरकार की ओर से किया गया एक प्रभावी प्रयास है विशेषरुप नये विचारों को रखने वालों के लिये। ये छोटे और बड़े स्तर के उद्यमियों के स्तर को सुधारने में मदद करने के साथ ही दूसरों के लिये रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी बैंकों से कम से कम एक दलित और एक महिला उद्यमी को अपना व्यवसाय खोलने के लिये प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया है। भारत में नये विचारों के साथ प्रतिभासंपन्न और कुशल युवाओं की कोई कमी नहीं है, हांलाकि, उन्हें आगे बढ़ने के लिये कुछ प्रभावी समर्थन की आवश्यकता है। सभी आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईएम, एनआईटी और भारत के अन्य संस्थानों को सीधे इस अभियान के सफल प्रक्षेपण के लिए एक दूसरे से जोड़ा जाएगा।

स्टार्टअप एक्शन प्लान की मुख्य बातें-

  •  सेल्फ सर्टिफिकेट आधारित कमप्लायंस की व्यवस्था
  •  तीन साल तक कोई इंस्पेक्शन नहीं
  •  स्टार्टअप के लिए वेब पोर्टल और मोबाइल एप
  •  छोटे फॉर्म के जरिए ई-रजिस्ट्रेशन
  •  स्टार्टअप के लिए एग्जि‍ट की भी व्यवस्था होगी
  •  पेटेंट फीस में 80 फीसदी की कटौती
  •  इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी के लिए कानूनी मदद
  •  स्टार्टअप से प्रॉफिट पर तीन साल तक टैक्स नहीं
  •  प्रमुख शहरों में सलाह के लिए निशुल्क व्यवस्था
  •  स्टापर्टअप इंडि‍या हब के तहत सिंगल प्वागइंट ऑफ कॉन्टैाक्ट
  •  हैंडहॉल्डिं्ग की व्येवस्थाा की जाएगी
  •  सार्वजनि‍क और सरकारी खरीद में स्टातर्टअप को छूट मि‍लेगी
  •  10 हजार करोड़ रुपये का फंड बनाया जाएगा, इसमें हर साल 2500 करोड़ रुपये का फंड स्टा1र्टअप्सक को दि‍ए जाएंगे
  •  चार साल तक 500 करोड़ रुपये प्रति‍वर्ष का क्रेडि‍ट गारंटी फंड बनाया जाएगा
  •  शेयर मार्केट वैल्यूो से ऊपर के इन्वेरस्टरमेंट पर टैक्सग में छूट दी जाएगी
  •  अटल इनोवेशन मिशन की शुरुआत, इसके तहत स्टारर्टअप को कंपटेटिव बनाना होगा
  •  एंटरप्रेन्योर के नेटवर्क को बनाया जाएगा, स्टा‍र्टअप को सीड कैपिटल देने के साथ कई अन्यड सुविधाएं
  •  35 नए इन्यूवर्कबेशन सेंटर खोले जाएंगे
  •  बच्चोंय में इनोवेशन बढ़ाने के लिए इनोवेशन कोर प्रोग्राम शुरू होगा
  •  5 लाख स्कूचलों के 10 लाख बच्चोंप की पहचान की जाएगी जो इनोवेशन को आगे बढ़ा सकें
  •  अपनी प्रॉपर्टी को बेच कर स्टा र्टअप शुरू करने पर कैपि‍टल गेन टैक्सज की छूट दी जाएगी
स्टार्टअप के मामले में भारत अमेरिका और ब्रिटेन के बाद तीसरे नंबर पर है. साल 2015 में 4536 लोगों ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कदम रखा. साल 2013 में ये संख्या 3451 थी, जबकि 2011 में 791 लोगों ने अपना बिजनेस शुरू किया. भारत में स्टार्ट अप का कॉन्सेप्ट भले ही नया हो. लेकिन विदेशों में इसका चलन पहले से ही है. स्टार्ट अप कार्यक्रम में अमेरिका की सिलिकॉन वैली के 40 सीईओ ने हिस्सा लिया. इनमें सॉफ्ट बैंक सीईओ मासायोसी सन, उबर फाउंडर ट्राविस कालानिक, वीवर्क फाउंडर एडम न्यूमैन भी शामिल हैं दरसअल नयापन, जो स्टार्ट अप इंडिया की नींव है, उसके लिए ज्ञान की नहीं, एक अन्तर्दृष्टि की जरूरत होती है। इस अन्तर्दृष्टि का संबंध मस्तिष्क से न होकर भावना एवं अवचेतन तथा अचेतन मन से होता है। मन के इसी स्तर को भारतीय दर्शन अपनी तरह से आत्मा कहता है, अध्यात्म कहता है। इस स्तर पर विचार पलते-बढ़ते नहीं हैं, बल्कि कौंधते हैं। जब एक बार यह कौंध पकड़ में आ जाती है, तो वही बढ़कर नवीन बन जाता है।
इस लिहाज से स्टार्ट अप इंडिया के बारे में कहा जा सकता है कि इसके लिए भारत की चेतना की जमीन सबसे अधिक उपजाऊ जमीन है, क्योंकि यह देश मूलत: एक आध्यात्मिक देश है तथा यदि इस अभियान को बहुआयामी (मल्टी डायमेंशनल) तरीके से अपनाया गया, तो यह भारत को फिर से विश्व-गुरु के पद के निकट ले जाने में सहायक हो सकता है। इस रूप में यह अभियान आर्थिक से कहीं अधिक बौद्धिक भूमिका निभाने वाला सिद्ध होगा।

एम के पाण्डेय ‘निल्को’

(युवा ब्लॉगर)

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आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

VMW Team – आरक्षण की मांग करे

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

पहले से हम बंटे हुए हैं,और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,मिलकर इक दूजे को खाएं हम,

देश मरे भूखा चाहे पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत,भारत माँ के बाल नोचने आओ जी,

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में भूल नही ये जाना है,

याद करो ज़मीन के हिस्सों पर जब हम टकराते थे,
गज़नी कासिम बाबर मौका पाते ही घुस आते थे

अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर,

हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है,

मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर पंडित बनिया सब के सब कर लो तैयारी जी,

जब पटेल के कुनबों की थाली खाली हो सकती है,
कई राजपूतों के घर भी कंगाली हो सकती है,

बनिए का बेटा रिक्शे की मज़दूरी कर सकता है,
और किसी वामन का बेटा भूखा भी मर सकता है,

आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो,

शर्म करो,हिन्दू बनते हो,नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में,ये ज्वालायें फूकेंगी,

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे गजनी की संतानो से,

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,
संविधान को छलनी कर के,गोबर इसमें भर डालो,

राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे,

तुम अफज़ल का गुण गाते हों

गज़नी का है तुम में खून भरा जो तुम अफज़ल का गुण गाते हों,
जिस देश में तुमने जनम लिया उसको दुश्मन बतलाते हो!
भाषा की कैसी आज़ादी जो तुम भारत माँ का अपमान करो,
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप जो तुम देश की इज़्ज़त नीलाम करो!
अफज़ल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलायेगा,
कोई इनके रहनुमाओं का मज़हब मुझको बतलायेगा!
अपनी माँ से जंग करके ये कैसी सत्ता पाओगे,
जिस देश के तुम गुण गाते हो, वहाँ बस काफिर कहलाओगे!
हम तो अफज़ल मारेंगे तुम अफज़ल फिर से पैदा कर लेना,
तुम जैसे नपुंसको पे भारी पड़ेगी ये भारत सेना!
तुम ललकारो और हम न आये ऐसे बुरे हालात नहीं
भारत को बर्बाद करो इतनी भी तुम्हारी औकात नहीं!
कलम पकड़ने वाले हाथों को बंदूक उठाना ना पड़ जाए,
अफज़ल के लिए लड़ने वाले कहीं हमारे हाथो न मर जाये!
भगत सिंह और आज़ाद की इस देश में कमी नहीं,
बस इक इंक़लाब होना चाहिए,
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज दबनी चाहिए!
ये देश तुम्हारा है ये देश हमारा है, हम सब इसका सम्मान करें,
जिस मिट्टी पे हैं जनम लिया उसपे हम अभिमान करें! जय हिंद ।

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न”

भारतीय राजनीति के पितामाह, करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता एवं सुशासन के प्रतिक पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न” से सम्मानित करने पर हार्दिक बधाई |
मैं ईश्वर से अटल जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ |
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लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त

यूपी के बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्‍या कर शव पेड़ पर लटका देने के मामले के बाद भी राज्‍य सरकार सक्रिय नहीं लगती। इस घटना के बाद देश-विदेश में यूपी की बदनामी हुई है और केंद्र सरकार ने भी राज्‍य सरकार को घेरा है। लेकिन, लगता है राज्‍य में अभी भी बलात्‍कारियों का राज है। बदायूं की घटना के बाद भी पूरे राज्‍य से करीब आधा दर्जन बलात्‍कार के बड़े मामले सामने आए हैं।


यूपी दुनिया का पहला ऐसा राज्य होगा जहां के लोगों को दो कौड़ी के लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त दे के चुकानी पड़ रही है..

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PM grieved at the passing away of Shri Gopinath Munde.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has condoled the untimely passing away of the Union Minister for Rural Development, Shri Gopinath Munde, in a road accident this morning. Expressing his sadness and shock, the Prime Minister described Shri Gopinath Munde as a true mass leader, who rose to great heights and tirelessly served people.

Following is the text of the Prime Minister’s tweets:

“Extremely saddened & shocked by the demise of my friend & colleague Gopinath Munde ji. His demise is a major loss for the Nation & the Govt.

Gopinath Munde ji was a true mass leader. Hailing from backward sections of society, he rose to great heights & tirelessly served people.

My tributes to a dynamic leader whose premature demise leaves a void hard to fill.

Condolences to Munde ji’s family. We stand by them in this hour of grief.”

(From PMO Website)

श्रद्धांजलि


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, “मुंडे एक सच्चे जननेता थे. वो समाज के पिछड़े वर्ग से आते थे. वो ज़मीन से उठकर ऊंचाई तक पहुंचे और जनता की अथक सेवा की.”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुंडे का असामयिक निधन देश और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी मुंडे के निधन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, “हमारे प्रिय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपीनाथ मुंडे के असमय निधन की ख़बर से दुखी हूं.”

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उन्हें ट्विटर पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मुंडे मेरे दोस्त और महान नेता थे. उनके निधन की ख़बर सुनकर मैं हैरान हूं.”


VMW Team की तरफ से श्री गोपी नाथ जी को श्रद्धांजलि, ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में जगह दें.. और परिवार को इस अपूर्ण क्षति को सहने की शक्ति दें

चीनी में भी मुस्लिम विखंडनवाद

भस्मासुर को संरक्षण दोगो, भस्मासुर पैदा करोगे तो उसका परिणाम भी तो भुगतोगे? कुएं दूसरे के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोदा जाता है। जिस पाकिस्तान आतंकवाद नाम के भस्मासुर को चीन ने संरक्षण दिया था-अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था उसी आतंकवादी हिंसा से आज चीन खुद दग्ध है। इस्लामिक आतंकवाद आज चीन की राष्ट्रीय एकता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। चीन में भी कश्मीर-चैचन्या की तरह विखंडन-सहांरक आतंकवादी प्रक्रियाएं बेकसूर लोगों को लहूलुहान कर रही है। चीन को अगर इस्लामिक हिंसा और इस्लामिक विखंडन की प्रक्रिया से मुक्ति पानी है तो फिर उसे विश्व व्यापी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ वैचारिक और अभियानी पथ पर चलना ही होगा, क्योंकि दुनिया भर के मुस्लिम आतंकवादी एक-दूसरे के पूरक हैं और सहयोगी भी है, सभी का लक्ष्य आतंकवादी हिंसा के बल पर दुनिया में इस्लाम का झंडा फहराना है और दुनिया में मुस्लिम मजहबी कानून लागू करवाना है।
दुनिया भर में जारी इस्लामिक आतंकवाद के मूल्यांकन पर यह तथ्य सामने आता है कि राजनीतिक-मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया पहले शुरू होती है और उसके बाद आतंकवाद की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कश्मीर से लेकर रूस के चैचन्या तक एक लंबी फेहरिस्त है जहां पर पहले राजनीतिक -मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया शुरू हुई और उसके बाद आतंकवाद की प्रक्रिया शुरू हुई। चीन के शिनजियांग में पहले राजनीतिक-मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया चल रही थी और अब शिनजिंयाग आतंकवाद से लहूलुहान हो चुका है। कई मुस्लिम आतंकवादी हिंसा की घटनाओं मे तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गये हैं, कई सौ लोग घायल हो चुके हैं। मुस्लिम आतंकवादी हिंसा के दमन के लिए चीन को कड़े और प्रहारक सैनिक-पुलिस कार्रवाई का सहारा लेना पड़ा है। चीन का कहना है कि उसके यहां जो मुस्लिम हिंसा-आतंकवाद की जड़ है उसके लिए वैश्विक मुस्लिम आतंकवादी सरगनाएं और मजहबी संस्थाएं जिम्मेदार रही हैं। चीन ने खासतौर पर पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मुवमेंट, और तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी को जिम्मेदार मानता है। पाकिस्तान का तालिबान और अलकायदा की उपस्थिति भी शिनजियांग में है। पाकिस्तान के वजरिस्तान में पूर्वी तुर्किस्तान,इस्लामिक मुवमेंट और तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी के आतंकवादियों की टैनिंग सेंटर है। आतंकवादी शिनजिंयाग मे आतंकवाद का कहर बरपा कर पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, इस कारण चीन प्रहारक तौर पर मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ अभियान नहीं चला पाता है। 2003 में पाकिस्तान सेना के अभियान में पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मुवमेंट के सरगना हसन माहसूम की मौत हुई थी। हसन माहसूम के संबंध में कहा जाता है कि वह अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का भी निकटवर्ती था। हसन माहसूद की मौत के बाद आतंकवादी संगठनों षिनजियांग को और अधिक निशाना बनाया है। आतंकवादी संगठनों की समझ है कि चीन के कहने पर पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी तुर्कीस्तान इस्लामिक मुवमेंट के नेता हसन माहसूद को सैनिक अभियान में मार गिराया था। इसी कारण आतंकवादी संरगनाएं शिनजियांग में आतंकवादी हिंसा की आग झोंक रहे हैं।
शिनजियांग में तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी की बहुलता है। जिस देश में भी मुस्लिम आबादी की थोड़ी-बहुत भी उंची संख्या हो गयी, उस देश में अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग ही नहीं बल्कि इस्लामिक शासन लागू करने की मांग यानी विखंडन की राजनीतिक मजहबी-प्रकिया शुरू हो जाती है और फिर आतंकवादी हिंसा भी चरम पर पहुंच जाती है। कश्मीर में मुस्लिम बहुलता के कारण अलग देश की मांग हो रही है और इस निमित आतंकवादी राजनीतिक-मजहबी, विखंडन की हिंसा जारी है। रूस के चैचन्या में मुस्लिम आबादी बहुमत मे है वहां पर भी अलग मुस्लिम देश और मजहबी कानून को लागू करने के लिए आतंकवाद जारी है। म्यांमार के सिर्फ एक क्षेत्र में मुस्लिम आबादी वह बहुलता में नहीं है फिर भी वहां पर मुस्लिम आतंकवाद जारी है और मुस्लिम आतंकवाद से म्यांमार की बौद्ध संस्कृति लहू लुहान है। फिलीपींस में मुस्लिम आतंकवाद की जड़ में मुस्लिम देश की मांग है। नाईजीरिया में कड़े इस्लामिक कानून की मांग को लेकर बोको हरम ने मानवता को शर्मसार करने वाली हिंसा का खेल-खेल रहा है। बोको हरम ने 500 से अधिक ईसाई बच्चियों का अपहरण कर लिया जिनकी आयु आठ वर्ष से लेकर 14 वर्ष की थी। अपहरित ईसाई बच्चियो को बोको हरम ने अरब के षेखों और अफ्रीका धनाढंय वर्ग के लोगों को बेच कर जेहाद के लिए पैसे जुटाये हैं। अपहरित लड़कियो का पता लगाने में अमेरिकी खोजी विमान अभी तक अभियान पर है। इसी तरह चीन के शिगजियांग में तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी की बहुलता है। तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी चीन से अलग होकर एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए जेहाद कर रही हैं। शिनजियांग मे चीनी प्रतीको के सर्वनाश का भी जेहाद चला है। दो साल पूर्व शिनजियांग में मुस्लिम आबादी और चीन के समर्थकों के बीच में बड़ी हिंसा हुई थी, दंगे की आग मे शिनजियांग कई दिनों तक जला था। उस दंगे की आग को चीन ने सैनिक-पुलिस कार्रवाई कर बुझा दिया था।
चीन भस्मासुर है। चीन के सिर पर मुस्लिम आतंकवाद और मुस्लिम हिंसा का जो खेल जारी है उसके लिए चीन खुद जिम्मेदार है। चीन का सैनिक और कूटनीतिक साझेदार पाकिस्तान है। चीन ने ही पाकिस्तान को आणविक शक्ति बनाया है। भारत को दबा कर रखने की नीयत से चीन ने पाकिस्तान के मुस्लिम आतंकवाद पर न केवल मुंह मोड़ी थी बल्कि पाकिस्तान के तरफदारी भी की थी। जब भी भारत द्वारा पाकिस्तान पर आतंकवाद का कारखाना चलाने का आरोप लगाया जाता था या फिर विश्व समुदाय द्वारा पाकिस्तान पर कड़े कार्रवाई करने की मांग उठती थी तब चीन पाकिस्तान के संरक्षक के तौर पर खड़ा हो जाता था। उसकी समझ यह थी कि पाकिस्तान भारत और विष्व के अन्य क्षेत्रों में आतंकवाद का आउटसोर्सिंग जरूर कर सकता है पर उसके यहां पाकिस्तान आतंकवाद की आउटसोर्सिंग नहीं कर सकता है। चीन के सामने समस्या यह है कि आतंकवादी संगठन बेलगाम हैं, अनियंत्रित है, पाकिस्तान का नियंत्रण या फिर लगाम आतंकवादी संगठनों के उपर नहीं रहा। आतंकवादी खुद पाकिस्तान के लिए खतरा बने हुए है। हमें यह भी देखना होगा कि आतंकवादी संगठनों का लक्ष्य क्या है? आतंकवादी संगठनो का लक्ष्य दुनिया में आतंकवादी हिंसा के बल पर इस्लामिक राज्य की स्थापना और अन्य सभी धर्मो का नेस्तनाबुद करना है। ऐसी प्रक्रिया का हल भी सतही तौर पर नहीं हो सकता है। चीन को इन तथ्यों पर गौर करने की जरूरत है कि पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व हो सकता है कि आतंकवाद विरोधी हो पर पाकिस्तान की सेना और आईएसआई पूरी तरह से अभी भी आतंकवाद का खेल-खेल रही हैं। जब तक पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का आतंकवादियों के नेटवर्किंग जारी रही तब तक चीन ही क्यों दुनिया के अंदर में आतंकवादी हिंसा कहर बरपाती रहेगी।
चीन अगर यह सोच रहा होगा कि वह शिनजिंयाग की मुस्लिम आबादी को थोड़ी बहुत राजनीतिक छुट और मजहबी अधिकार की छूट देकर वह मुस्लिम आतंकवादी हिंसा का समाधान कर लेगा तो यह उसकी खुषफहमी ही है। शिनजियांग की मुस्लिम आबादी को चीन ने कई सुविधाएं भी उपलब्ध करायी है, मजहबी अधिकारों की छूट दी है। एक नहीं बल्कि दो बच्चे पैदा करने की भी छूट दी है। मुस्लिम आबादी को छोटकर अन्य चीनी नागरिक सिर्फ एक ही बच्चे पैदा कर सकते हैं। अन्य चीनी नागरिक धर्म को मानने के अधिकार नहीं रखते हैं, अन्य चीनी नागरिकों को अपने धर्म प्रतीको की पूजा करने का अधिकार नहीं है। पर मुस्लिम आबादी मस्जिद जाकर नमाज पढ़ सकती हैं। सार्वजनिक तौर पर भी मुस्लिम आबादी अपने मजहबी त्यौहार मना सकती हैं। इन सभी राजनीतिक और मजहबी अधिकारों की छूट के बावजूद भी शिनजियांग में मुस्लिम अलगाव और मुस्लिम विखंडन की प्रकिया क्यों नहीं रूक रही है? इस पर चीन को विचार करने की जरूरत है।
सिर्फ सार्वजनिक सजा की सुनवायी करके दंड देने मात्र से मुस्लिम आतंकवाद या मुस्लिम विखंडन की प्रक्रिया बंद नहीं होगी। विष्वव्यापी मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ स्वार्थपरख कूटनीति जब तक जारी रहेगी तब तक मुस्लिम आतंकवाद और मुस्लिम विखंडन की प्रक्रिया जारी रहेगी। चीन को इस तथ्य को समझना होगा? 
विष्णुगुप्त

हमारी सरकार – केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विभाग

केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विभाग
प्रधान मंत्री
श्री नरेन्द्र मोदी
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन 
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा 
किसी अन्य मंत्री को आवंटित न किए गए
अन्य सभी मंत्रालय

कैबिनेट मंत्री
1
श्री राजनाथ सिंह
गृह
2
श्रीमती सुषमा स्वराज
विदेश
प्रवासी भारतीय मामले
3
श्री अरुण जेटली
वित्त
कारपोरेट मामले 
रक्षा
4
श्री एम. वैंकैय्या नायडू
शहरी विकास 
आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन 
संसदीय कार्य
5
श्री नितिन जयराम गडकरी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
जहाजरानी
6
श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा
रेल
7
सुश्री उमा भारती
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरूद्धार
8
डॉ. नजमा ए. हेपतुल्ला
अल्पसंख्यक मामले
9
श्री गोपीनाथ मुण्डे
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्वच्छता
10
श्री राम विलास पासवान
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
11
श्री कलराज मिश्र
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
12
श्रीमती मेनका संजय गांधी
महिला एवं बाल विकास
13
श्री अनंत कुमार
रसायन एवं उर्वरक
14
श्री रविशंकर प्रसाद
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी 
कानून एवं न्याय
15
श्री अशोक गजपति राजू पुसपति
नागरिक उड्डयन
16
श्री अनंत गीते
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम
17
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
18
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर
खान
इस्पात
श्रम एवं रोजगार
19
श्री जुएल उरांव
जनजातीय मामले
20
श्री राधा मोहन सिंह
कृषि
21
श्री थावरचन्द गेहलोत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
22
श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी
मानव संसाधन विकास
23
डॉ. हर्ष वर्धन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
राज्य मंत्री
1
जनरल वी के सिंह
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार)
विदेश 
प्रवासी भारतीय मामले
2
श्री इन्द्रजीत सिंह राव
योजना (स्वतंत्र प्रभार)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (स्वतंत्र प्रभार)
रक्षा
3
श्री संतोष गंगवार
वस्त्र (स्वतंत्र प्रभार)
संसदीय कार्य
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरूद्धार
4
श्री श्रीपद यसो नायक
संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार)
5
श्री धर्मेन्द्र प्रधान
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)
6
श्री सर्बानन्द सोनवाल
कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले तथा खेल (स्वतंत्र प्रभार)
7
श्री प्रकाश जावड़ेकर
सूचना एवं प्रसारण (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार)
संसदीय कार्य
8
श्री पीयूष गोयल
विद्युत (स्वतंत्र प्रभार)
कोयला (स्वतंत्र प्रभार)
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार)
9
डॉ. जितेन्द्र सिंह
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार)
पृथ्वी-विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार)
प्रधान मंत्री कार्यालय
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
10
श्रीमती निर्मला सीतारमण
वाणिज्य एवं उद्योग (स्वतंत्र प्रभार)
वित्त 
कारपोरेट मामले
11
श्री जी.एम. सिद्धेश्वर
नागरिक उड्डयन
12
श्री मनोज सिन्हा
रेल
13
श्री निहालचन्द
रसायन एवं उर्वरक
14
श्री उपेन्द्र कुशवाहा
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्वच्छता
15
श्री राधाकृष्णन पी.
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम
16
श्री किरण रिजीजू
गृह
17
श्री कृष्ण पाल
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
जहाजरानी
18
डॉ. संजीव कुमार बालियान
कृषि
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
19
श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा
जनजातीय मामले
20
श्री रावसाहेब दादाराव दानवे
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
21
श्री विष्णु देव साय
खान
इस्पात
श्रम एवं रोजगार
22
श्री सुदर्शन भगत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एनडीए की पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए

 
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क्या है धारा 370

स्वतंत्रता के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के ‍पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह कश्मीर के राजा थे। उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा।  तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालात को देखते हुए गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में धारा 306-ए, जो बाद में धारा 370 बनी, का प्रारूप प्रस्तुत किया। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। धारा ३७० भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद ३७० जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

क्या हैं अधिकार : 
 
भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 

 वित्तीय आपातकाल लगाने वाली धारा 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती। 

 जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है। 

 भारत की संसद जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून नहीं बना सकती।

 धारा 356 लागू नहीं, राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं। 

 कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहरी से शादी करती है तो उसकी कश्मीर की नागरिकता छिन जाती है। 

 जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता है।

विशेष अधिकार धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।

अबकी बार मोदी सरकार!



क्या दिल्ली ,क्या काशी , 
मोदी को चुनेगा .हर भारतवासी ,
अबकी बार मोदी सरकार …..
युवराज बन गया पप्पू यार…..अबकी बार मोदी सरकार!!
देश न बने पप्पू इस बार….अबकी बार मोदी सरकार!!
नहीं चाहिये कोई ख़ैरात, बहुत
देखी तेरी बारात! बस चाहिये
सुरक्षा, सु़विधा, सुअवसर के हालात!
बाक़ी दम रखते है यार,
अबकी बार मोदी सरकार!
मंदर,डाक्टर, दफ़्तर, बार,
हर जगह बड़ी क़तार!
पंडीत,कंपौडर,चपरासी, साकी,
कोई नहीं है ज़िम्मेवार!
शायद अब सुधरे हालात,
अबकी बार मोदी सरकार!
भैंस आजम को छोड़ गयीं!!
सांड़ ने मुलायम के हेलिकोप्टर को रोक दिया!!
यानि……
पशु पक्षी की भी यही पुकार, अबकी बार मोदी सरकार!

Madhulesh Pandey Nilco

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