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जवानों के काफिले पर हमला कई जवान शहीद, आखिर कब तक??

मेरी अश्रुपूरित श्रदांजलि उन अमर शहीद सैनिकों को ,और उनके परिवारजनों की ओर से सुनी कोखों और कलाइयों का दर्द आपके सामने , शेयर करें अगर देश से प्यार है ताकि फिर एक सर्जीकल स्ट्राइक हो

बहुत हो रहा समझौता इन दो कौड़ी के नागों से।
फिर कहता हूँ न हल निकलेगा मीठी मीठी बातों से।।
घर मे घुसकर इनको मारो दम दिखलाओ मोदी जी।
या फिर सत्ता करो हवाले सैनिक को तुम मोदी जी।।
राजनीति के बस में कुछ न राजनीति ही दिखती है।
देश भूलकर सारी कोशिस मुद्दों पर ही टिकती है।।
समझौता क्यों मुद्दों खातिर सैनिक की है लाशों से।
रोज रोज है कोख उजड़ती चरण चाटती बातों से।।
कुछ कुत्ते दाखिल हो जाते सीमा के दरवाजों से।
तेरे cctv कँहा गए क्या लगे हुए दरबारों में।।
कहते थे सीमा पर कोई नहीं परिंदा पर मारे।
एक के बदले 10 सर लेंगे लगते थे ऐसे नारे।।
कोख पूछती तुमसे है क्यों बार बार सैनिक मरता।
कहते रहते हो मोदी से अखिल विश्व हलहल कँपता।।
अगर इंच है 56 वाला तो दिखला दो मोदी जी।
दूध छठी का नामर्दों को चलो पिला दो मोदी जी।।
आगे आगे मैं जाऊँगा कसम सैन्य की खाता हूँ।
पाकिस्तान पर गर हमले का एक निमंत्रण पाता हूँ।।
एक बार घर मे घुस करके इनका दमन जरूरी है।
इनके काले मंसूबों पर काला कफन जरूरी है।।
बस इक मौका सेना को दो पाकिस्तान मिटाने का।
माँ का जितना दूध पिया है उसका कर्ज निभाने का।।

जय हिंद! जय भारत
योगेश योगी किसान
9755454999

पुलवामा में हुये शहीदों को नमन बंदे मातरम् – सरिता कोहिनूर

भारत माता पर न्यौछावर, वीर सपूत हुये बलिदान।
उनकी शहादत याद रखेगा,युगों युगों तक हिंदुस्तान।
पुलवामा में आंतकी ने,जो हरकत दिख लाई है,
भारत माता के सीने में, दर्द कि आग जलाई है।
खैर नहीं अब ओ नापाकी,तू तो अपनी गिनती गिन
होगें अनाथ बच्चे भी तेरे,बालिद और आका के बिन।
इस दहशत गर्दी से भारत,अब न डरने वाला है,
भारत माता का हर बेटा,सरहद पर मरने वाला है
काश्मीर की पावन धरती भारत का स्वाभिमान है।
जब तक तन में साँसे बाकी,वो पोरुष का अभिमान है।
तुमने अठरह मारे है हम भी अठ्ठाइस ले लेगें।
खून का बदला खून ही होगा,अब हम गम को न झेलेगें।

बंदे मातरम्

सरिता कोहिनूर

कुछ और हो गए तुम – सोनू जैन

शेर  से  शोर  हो   गये  हो  तुम,
कितने कमज़ोर हो गये हो तुम।

हमको  पहचानते  नहीं  साहब,
आज कुछ ओर हो गये हो तुम।

बात  करते  नहीं ख़ुदा  से भी,
क्या कोई चोर हो गये हो तुम।

तुमको मालूम  ही नहीं  शायद,
ख़ुद से भी बोर हो गये हो तुम।

“सोनू” तुमसे हमें ये कहना है,
मैं पतंग, डोर  हो गये हो तुम।

✍सोनू कुमार जैन

ग़ज़ल – सरिता कोहिनूर

देश के उपकार पर अभिसार होना चाहिए
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए

कौन कहता है,यहाँ है देश भक्तों की कमी
देखने वाली ऩज़र में धार होना चाहिए

सरहदों पर सैनिकों की क्यों शहादत रोज हो
आधुनिक और तेज सब हथियार होना चाहिए

पाक की नापाक कोशिश, चीन का अभिमान भी
तोड़ कर सीमा हमें अब पार होना चाहिए

देश की रोटी हैं खाते और बजाते पाक की
दोगले घोषित यहाँ गद्दार होना चाहिए

आज भी जिसको यहाँ माँ भारती से प्रेम है
उन जियालों का यहाँ सत्कार होना चाहिए

बह रहा है रक्त में हम सबके भारत का नमक
इसलिए माँ भारती पे वार होना चाहिए

देखती है ख़्वाब सरिता देश की तरुणाइ का
विश्व गुरु का अर्थ अब साकार होना चाहिए

सरिता कोहिनूर 💎

भारत महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश


एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट में भारत को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है । 

इस सर्वे के अनुसार महिलाओं के मुद्दे पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया क्रमश: दूसरे और तीसरे सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर हैं । सात साल पहले इसी सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश बताया गया था।

दुनिया भर से केवल 548 जानकारों से 26 मार्च से 4 मई के बीच ऑनलाइन फोन और व्यक्तिगत तौर पर रायशुमारी की गई और बना दी गई एक ऐसा रिपोर्ट जिस पर विश्वास हो भी तो क्यो और कैसे ? 


जो फिरंगी आजतक एक आदर्श परिवार न बसा सके वो खुद के बनाए मापदंड के अनुसार भारत का सर्वे कर रहे है ? इस मुद्दे पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि भारत के बाद रखे गए देशों में महिलाओं को बोलने का हक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से सर्वे किया गया उनकी संख्या बहुत कम है। उनकी राय के आधार पर दुनिया की राय नहीं बनाई जा सकती। 

भारत से ज्यादा सुरक्षा जिन देशो में है इस सर्वे के मुताबिक , उनका नाम लिखुंगा तो हसते हसते पेट मे दर्द हो जाएगा । आज भी भारत की महिलाएं और देशो की महिलाओं की तुलना में बहुत सभ्य संस्कारी और सुरक्षित है हाँ कुछ अपवाद हो सकते है इससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता लेकिन इस तरह की रिपोर्ट तो बस पूर्व प्रायोजित ही है । महिलाएं ही नहीं किसी भी श्रेणी के लोगो के लिए भारत ही सबसे सुरक्षित देश है , इसके लिए कोई भी इतिहास का सहारा ले सकता है ।

एम के पाण्डेय निल्को

भारत और महाभारत

*दुर्योधन और राहुल गांधी* –
                           दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।

*भीष्म और आडवाणी* –
                       कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके फिर भी सबसे ज्यादा सम्मान मिला। उसके बाद भी जीवन के अंतिम पड़ाव पे सबसे ज्यादा असहाय दिखते हैं।

*अर्जुन और नरेंद्र मोदी*-
                     दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है।

*कर्ण और मनमोहन सिंह* –
                      बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके।

*जयद्रथ और केजरीवाल*-
                           दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई ही हुयी।

*शकुनि और दिग्विजय-*
                    दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे।

*धृतराष्ट्र और सोनिया* –
                      अपने पुत्र प्रेम में अंधे है।

*श्रीकृष्ण और कलाम-*
                     भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है।

–यह है *भारत और महाभारत*

विक्रम संवत और शक संबत

ये दोनों ही संवत शकों पर भारतीय चक्रवर्ती राजाओं की विजय के स्मारक हैं। विक्रम संवत 57 ईपू सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शकों पर जीत के उपलक्ष में माना जाता है जबकि शक संवत 78 ई. में सातवाहनों द्वारा शकों पर विजय के रूप में मनाया जाता है या शक सम्राट कनिष्क द्वारा प्रारंभ किया बताया जाता है।
शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है जबकि विक्रम संबत हिन्दुओं का धार्मिक कलेन्डर है।
बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ | महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है | यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं | जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है | पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है | उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है | चंद्र वर्ष सौर वर्ष से 11 दिन 3 घाटी 48 पल छोटा है | इसीलिए हर 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है |
यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथम नवरात्रि के प्रथम दिन से शुरू होता है।
बर्तमान में प्रचलित ईसा सन में +57 करने पर विक्रम संबत और -78 करने पर शक सबंत निकल आता है।

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