Tag Archives: भारत हैं नं. 1

सरकार, छोड़िये ब्लैकमेल की राजनीति, जनता तो हिसाब मांगेगी।

लूला-लँगड़ा हो चुके विपक्ष से आप यह उम्मीद लगाकर बैठेंगे, कि सरकारी लूट का ए विरोध करेंगे तो इस मुग़ालते में मत रहिए। सरकार का विरोध करने के लिए किसी के पास कूबत नहीं है। थोड़ी कूबत राहुल ने दिखा दी तो आपने उसे मानसिक बीमार बता डाला। मुलायम सिंह यादव, मायावती बोलेंगे नहीं, क्योंकि आय से अधिक सम्पप्ति का मामला सरकार उछाल कर इन्हें अंदर कर सकती है। जब प्रेस कांफ्रेंस में नथुने बहुत जोर-जोर से फड़क रहे हों तो इसका मतलब यही होता है कि दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है। रविशंकर प्रसाद नथुने फड़काते हुए प्रेस काँफ्रेंस में आये। ठीक उसी तरह जैसे अमित शाह जी के लाडले जय शाह के बचाव में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आये थे।
वैसे दोनों मामलों में एक अंतर है। पीयूष गोयल देश के पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री बने थे जो किसी प्राइवेट सिटीजन पर लगे चार-बीसी के इल्जामों का बचाव करने आये हों। प्रसाद जी मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं, इस नाते उन्हे प्रधानमंत्री की ओर से बोलने का पूरा हक है। आप पूछ सकते हैं कि मामला रक्षा मंत्रालय का था, तो फिर निर्मला सीतारमन क्यों नही, नथुने तो उनके भी बराबर फड़कते हैं।
आपका पता होना चाहिए कि यह सर्जिकल स्ट्राइक वाली सरकार है। कब कहां से स्ट्राइक हो जाएगा पता नहीं। कृषि मामलों में गृह मंत्री, गृह संबंधित मामलों पर रक्षा मंत्री और रक्षा से जुड़े मामलों पर आईटी मंत्री। जैसे टोटल हॉकी के नये फॉरमेंट में कभी डिफेंडर आगे बढ़ जाता है और कभी फॉरवर्ड गोल बचाने के लिए पीछे चला आता है। पात्रा जी तो मैनेजर हैं ही।
रविशंकर प्रसाद बहुत तगड़े डिफेंडर हैं। वकालत में कोई सानी नहीं है। आंखे निकालकर चंगू-मंगुओं को डराना भी जानते हैं।
  हद देखिये,  रवि बाबू ने राफेल सौदे पर लगे अति गंभीर इल्जामों के जवाब में पहले पूरे नेहरू-गांधी खानदान की कुंडली बांची। मैं इंतज़ार कर रहा था कि वे कहेंगे कि हम लोगों ने मोहन जी के सामने शपथ ली है कि अगली सात पीढ़ियों तक इस घटिया खानदान में बेटे या बेटी का ब्याह नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं कहा। यह मास्टर स्ट्रोक आगे लिए बचा लिया।
देश इंतज़ार कर रहा था कि रवि बाबू राफेल विमान की कीमत निकालकर कांग्रेसियों के मुंह पर दे मारेंगे। पर कुछ न हुआ न होगा क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई

खुद को दुर्घटना से बचाइए दूसरो की रक्षा स्वयं हो जाएगी…… नजर निल्को की

जीवन में कई बार दुर्घटनाए होती है। जिसमें कभी शरीर तो कभी दिल टूट जाता है। आष्चर्य की बात यह है कि आप भले ही कितने सर्तक हो, जागरूक हो….. दुर्घटना घट ही जाती है। मैं ठीक तरीके से वाहन चला रहा हूॅ किन्तु पीछे वाले की लापरवाही से दुर्घटना हुई। खुद भी घायल हुआ और दूसरो को भी किया। मतलब साफ है। केवल सावधानी ही नही रखनी है अपने आप को दुर्घटना से भी बचाना है। टे्र्ेन में सभी लोग सो रहे है। कुछ धार्मिक प्रवृति के लोग ईष्वर का नाम भी ले रहे है किन्तु डाइवर ने सिग्नल नही देखा और हो गई अनहोनी…….सैकडो लोगों की गई जान, कई घायल हुए।
जरा सोचिए कि क्या वाकई इसमें यात्रियोें की गलती थी। गलती किसी और की भरे कोई और….. क्या यही है निति……..?
भाग-दौड की इस दुनिया में क्या आॅख बंद करके भागना जरूरी है। निल्को की नजर जब इस पर पडती है तो हर तरफ प्रष्नवाचक चिन्ह दिखाई देता है। इसे सामाजिक रूप से सोचू या आध्यामिक रूप से संतोषजनक जवाब की अब तक प्रतिक्षा है | 

एम.के. पाण्डेय ‘निल्को’

देवउठनी एकादशी – पंडित सिद्धेश जी महाराज

ग्यारस के दिन ही तुलसी विवाह भी होता है। घरों में चावल के आटे से चौक बनाया जाता है। गन्ने के मंडप के बीच विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। पटाखे चलाए जाते हैं। देवउठनी ग्यारस को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है। देवउठनी या देव प्रबोधिनि ग्यारस के दिन से मंगल आयोजनों के रुके हुए रथ को पुनः गति मिल जाती है।
भारतीय पंचांग के अनुसार एकादशी की तिथि का महत्व यूं भी बहुत है। अतः इस दिन को विशेष पूजा-अर्चना के साथ मनाया जाता है। इस दिन से विवाह के अतिरिक्त उपनयन, गृह प्रवेश आदि अनेक मंगल कार्यों को संपन्न करने की शुरुआत कर दी जाती है।
इस दिन पूजन के साथ व्रत रखने को भी बड़ा महत्व दिया जाता है। महिलाएं इस दिन आंगन में गेरू तथा खड़ी से मांडणे सजाती हैं और तुलसी विवाह के साथ ही गीत एवं भजन आदि के साथ सभी उत्सव मनाते हैं।

बज गई चुनावी रणभेरी- देश के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा चुनाव

सोलहवीं लोकसभा के लिए होने जा रहा आम चुनाव देश के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा होगा। कई मायनों में यह चुनाव ऐतिहासिक भी होगा क्योंकि इसमें कई प्रयोग पहली बार देखने को मिलेंगे।चुनाव 7 अप्रैल से शुरू होकर 9 चरणों 12 मई को संपन्न होंगे और वोटों की गिनती 16 मई को होगी। 

इस मौके पर संपत ने कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं उन्हें नाम दर्ज कराने के लिए एक और मौका मिलेगा। संपत ने कहा कि 9 मार्च तक नए वोटरों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए देश भर में करीब 9 लाख कैम्प लगाए जाएंगे।

सबको ध्यान में रखकर तारीखों का ऐलान मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस.संपत ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि पिछले 4 फरवरी को सभी दलों के साथ हुई बैठक में चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया था। सभी पार्टियों की बातों को ध्यान में रखकर तारीखों का ऐलान किया गया है। उन्होंने तारीखों का ऐलान करते वक्त मॉनसून, त्योहारों परीक्षाओं सहित सभी बातों का ध्यान रखा गया है।

गौरतलब है कि 2009 में लोकसभा के चुनाव 16 अप्रैल से 13 मई के बीच 5 चरणों में हुए थे, यानी यह पहली बार होगा, जब देश में 9 चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे।

कब कहां पड़ेंगे वोट

आंध्र प्रदेश: 30 अप्रैल, 7 मई
अरुणाचल प्रदेश: 9 अप्रैल
असम:12, 17 और 24 अप्रैल
बिहार: 10, 17, 24, 30 अप्रैल, मई 7 और 12 मई
छत्तीसगढ़: 10, 17 और 24 अप्रैल
गोवा: 17 अप्रैल
गुजरात: 30 अप्रैल
हरियाणा: 10 अप्रैल
हिमाचल प्रदेश: 7 मई
जम्मू-कश्मीर: 10, 17, 24, 30 अप्रैल और 7 मई
झारखंड: 10, 17 और 24 अप्रैल
कर्नाटक: 17 अप्रैल
केरल: 10 अप्रैल
मध्य प्रदेश: 10, 17 और 24 अप्रैल
महाराष्ट्र: 10, 17 और 24 अप्रैल
मणिपुर: 9 और 17 अप्रैल
मेघालय: 9 अप्रैल
मिजोरम: 9 अप्रैल
नगालैंड: 9 अप्रैल
ओडिशा: 10 और 17 अप्रैल
पंजाब: 30 अप्रैल
राजस्थान: 17 और 24 अप्रैल
सिक्कम: 12 अप्रैल
तमिलनाडु: 24 अप्रैल
त्रिपुरा: 7 और 12 अप्रैल
उत्तर प्रदेश: 10, 17, 24 और 30 अप्रैल, मई 7 और 12
उत्तराखांड : 7 मई
पश्चिम बंगाल: 17, 24, 30 अप्रैल, 7 और 12 मई
अंडमान और निकोबार: 10 अप्रैल
चंडीगढ़: 12 अप्रैल
दादर और नागर हवेली: 12 अप्रैल
दमन और दीव: 30 अप्रैल
लक्षद्वीप: 10 अप्रैल
पुड्डुचेरी: 24 अप्रैल

वोटिंग की रसीद
ईवीएम के नतीजों पर भी यदाकदा शक जताया जाता रहा है। इसका इलाज ढूंढ़ लिया गया है। वोटिंग के बाद ईवीएम से रसीद भी निकलेगी। हालांकि इस चुनाव में यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं होगी। दरअसल फिलहाल ऐसी सिर्फ 600 मशीन है। जबकि 31 मार्च तक आयोग के पास अतिरिक्त 20 हजार मशीन आ जाएगी।
हवाई घोषणाओं पर पाबंदी
घोषणापत्र में मुफ्त उपहार बांटने से लेकर दिवास्वप्न दिखाने जैसी कई घोषणाएं वोटरों को लुभाती रही है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग के दिशानिर्देश में ही घोषणापत्र बनाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को दिशानिर्देश जारी कर दिया है।
नोटा का इस्तेमाल
हाल के विधानसभा चुनावों में तो नोटा (नन आफ द एबव) का इस्तेमाल हो चुका था। लेकिन पहली बार लोकसभा में भी वोटरों के पास अधिकार होगा कि वह सभी उम्मीदवारों के खिलाफ मतदान करें। 

एक विलुप्त कविता -रामधारी सिंह दिनकर

बरसों बाद मिले तुम हमको आओ जरा विचारें,
आज क्या है कि देख कौम को ग़म है।
कौम-कौम का शोर मचा है, किन्तु कहो असल में
कौन मर्द है जिसे कौम की सच्ची लगी लगन है?
भूखे, अपढ़, नग्न बच्चे क्या नहीं तुम्हारे घर में?
कहता धनी कुबेर किन्तु क्या आती तुम्हें शरम है?
आग लगे उस धन में जो दुखियों के काम न आए,
लाख लानत जिनका, फटता नहीं मरम है।

दुह-दुह कर जाती गाय की निजतन धन तुम पा लो
दो बूँद आँसू न उनको, यह भी कोई धरम है?
देख रही है राह कौम अपने वैभव वालों की
मगर फिकर क्या, उन्हें सोच तो अपनी ही हरदम है?
हँसते हैं सब लोग जिन्हें गैरत हो वे शरमायें
यह महफ़िल कहने वालों की, बड़ा भारी विभ्रम है।
सेवा व्रत शूल का पथ है, गद्दी नहीं कुसुम की!
घर बैठो चुपचाप नहीं जो इस पर चलने का दम है।

विजयी के सदृश जियो रे

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो
चट्टानों की छाती से दूध निकालो
है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो
पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो
चढ़ तुंग शैल शिखरों पर सोम पियो रे
योगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे
जब कुपित काल धीरता त्याग जलता है
चिनगी बन फूलों का पराग जलता है
सौन्दर्य बोध बन नई आग जलता है
ऊँचा उठकर कामार्त्त राग जलता है
अम्बर पर अपनी विभा प्रबुद्ध करो रे
गरजे कृशानु तब कंचन शुद्ध करो रे
जिनकी बाँहें बलमयी ललाट अरुण है
भामिनी वही तरुणी नर वही तरुण है
है वही प्रेम जिसकी तरंग उच्छल है
वारुणी धार में मिश्रित जहाँ गरल है
उद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती है
तलवार प्रेम से और तेज होती है
छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये
मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाये
दो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता है
मरता है जो एक ही बार मरता है
तुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रे
जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे
स्वातंत्र्य जाति की लगन व्यक्ति की धुन है
बाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण है
वीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रे
जो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे
जब कभी अहम पर नियति चोट देती है
कुछ चीज़ अहम से बड़ी जन्म लेती है
नर पर जब भी भीषण विपत्ति आती है
वह उसे और दुर्धुर्ष बना जाती है
चोटें खाकर बिफरो, कुछ अधिक तनो रे
धधको स्फुलिंग में बढ़ अंगार बनो रे
उद्देश्य जन्म का नहीं कीर्ति या धन है
सुख नहीं धर्म भी नहीं, न तो दर्शन है
विज्ञान ज्ञान बल नहीं, न तो चिंतन है
जीवन का अंतिम ध्येय स्वयं जीवन है
सबसे स्वतंत्र रस जो भी अनघ पियेगा
पूरा जीवन केवल वह वीर जियेगा!

रामधारी सिंह दिनकर

एक बूँद -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’





ज्यों निकल कर बादलों की गोद से,
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी,
सोचने फिर-फिर यही जी में लगी,
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी?

देव मेरे भाग्य में क्या है बदा,
मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में?
या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी,
चू पडूँगी या कमल के फूल में?

बह गयी उस काल एक ऐसी हवा,
वह समुन्दर ओर आई अनमनी,
एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला,
वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।

लोग यों ही हैं झिझकते, सोचते,
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर,
किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें,
बूँद लौं कुछ और ही देता है कर

कुर्सी का प्रमोशन

नमस्कार भाई लोग ,

कई दिनों बाद आया हूँ
नई  बात सुनाता हूँ 
अभी तक हर जगह 
कर्मचारी का प्रमोशन होता था 
लेकिन इस कलयुग में तो 
कुर्सी का प्रमोशन होता है 
माह अक्तूबर सन २०१२ 
जिस कुर्सी पर मैं बैठा था 
आज वह आखे दिखा रही 
रह रह कर बाते बना रही 
साथ उसका मेज दे रही 
जले पर नमक वह छिड़क रही ……..
करना था तो मेरा प्रमोशन
पर कुर्सी मेज का हो गया 
रह गया मैं वही का वही 
और लोग कहे सही है सही 
लेकिन एक बात सुन लो भाई 
यहाँ नहीं कही और सही ……………
**********
एम के पाण्डेय “निल्को”

भारतवासी सरबजीत सिंह की दुखद मृत्यु

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतवासी सरबजीत सिंह की दुखद मृत्यु पर समस्त ब्लॉग  परिवार शोक व्यक्त करता है ।
ये कटु सत्य आज भी मुझे झकझोर रहा है| जानता हूँ कि यही सत्य है परन्तु हृदय स्वीकार करने को तैयार नहीं है भगवान् सरबजीत की आत्मा को शांति प्रदान करे और उनका दिवंगत शरीर तुरंत भारत लाया जाये और उनके परिवार को सौंपा जाये बस यही अपील करना चाहता हूँ जिससे कम से कम उनकी अंतिम क्रिया तो सही प्रकार से पूरी की जा सके । जो अपने जीते जी कभी शांति नहीं देख सके वो मृत्युपरांत तो कम से कम सुकून हासिल कर सकें ।  उम्मीद है सरकार इस बारे में कुछ ठोस कदम ज़रूर उठाएगी । 
सरबजीत की दुखद और दर्दनाक मौत के लिए पाकिस्तानी सरकार तो ज़िम्मेदार है ही किन्तु उससे ज्यादा ज़िम्मेदार भारत की सरकार है जिसके घिनौने चेहरे का पर्दाफाश सरबजीत की इस हालत से हो गया है । लचर रवैया और गैर जिम्मेदारी का जो प्रमाण इस निर्लज्ज सरकार ने सरबजीत के मामले में प्रस्तुत किया है वह बेहद निंदनीय है । अगर इस मामले में पहले ही कुछ पुख्ता कदम उठा लिए गए होते तो शायद आज सरबजीत अपने परिवार के साथ होते । सरबजीत के साथ हुआ तो किसी से छिपा नहीं है परन्तु अब उनकी मौत पर अनेकों सवालिया निशाँ उभर कर आ रहे हैं । अब देखना यह है के इन सवालों के जवाब देने सरकार की तरफ से कौन आगे आता है ।

……बदल गया देखने का नज़रिया !

कई दिनों से किसी व्यक्ति विशेष पर रख रहा था नज़र
लेकिन हरकते देख कर
मन बोला
लोग बदले, ज़माने बदले
पर तुम न बदलो नज़रिया
क्योकि
तुम तो ठहरे ग्रामीण सहरिया
वे लोग जो भेष बदला करते है
‘निल्को’ उन्हें द रियल हीरो कहा करते है
जिनकी जिन्दगी ही फिल्मी हो जाये
अपने घर के ही पडोसी हो जाये
तो ‘मधुलेश’ की एक बात याद रखना
की कितना ही बड़ा पेड़ हो जाये ,
आखिर उसे गिरना तो आसमान में नहीं
धरती पर ही जगह मिलती है
इन सब बातो से लगा की
सचमुच ही जमाना भी तो बदल रहा है
किन्तु इस दौड़ में कम तो आप भी नहीं है
अब तो चार घंटे की ही चांदनी
के बाद अँधेरी काली रात है
फिर क्यों अपनो को पराये
बनाने के लिए लोग परेशान है
कविता तो शायद ‘सहज’ लगे
लेकिन इसका ‘श्रेय’ किसको जाता है
यह तो नज़रिये का खेल है
कभी ‘रियल’ तो कभी ‘आशियाना’ नज़र आता है .
v मधुलेश पाण्डेय निल्को

होली निकट आते ही कुछ …..


पानी बचाने के लिए अपना दैनिक व्यवहार बदलें, त्यौहार नहीं !!


होली निकट आते ही कुछ ……………… किस्म के लोग पानी बचाने का सन्देश देना शुरू कर देते हैं ! होली के अवसर पर पानी इनके लिए डीजल और पेट्रोल से भी ज्यादा कीमती हो जाता है ! होली ही क्यों भारतीय संस्कृति से जुड़ा हर त्यौहार इनके अनुसार पर्यावरण के लिए खतरा है ! दीपावली आने पर इन्हें सीधी ओजोन परत दिखाई देती है ! नदियों का प्रदुषण केवल गणेश चतुर्थी पर नजर आता है !


अब होली पर पुनः एक बार ऐसा माहोल बनाया जा रहा है कि पानी मिले रंग से होली खेलने पर पूरा देश सूखा और अकाल से ग्रस्त हो जाएगा ! इन ……………. में कुछ धूर्त गणितज्ञ भी होते हैं जो होली के दिन कितने लाख/करोड़ गैलेन पानी बर्बाद होगा, इसका भी हिसाब लगाकर अखबारों में छपवा देते हैं ! अब इन मूर्खों को कौन समझाए कि अपनी आवश्यकता के अनुसार पानी संग्रहण का काम बरसात में होता है ! उस समय ये प्राणी पता नहीं किस शाख पर बैठे रहते है ??

मेरा सभी मित्रों से अनुरोध है कि पानी बचाने के लिए अपने दैनिक व्यवहार को बदलें, त्यौहार को नहीं ! वर्ष पर पानी बचाएं लैकिन होली को होली की तरह मनाएँ !!

होली तो आएगी पर पानी…………?

बसंत का संग है, होली का रंग है। आने वाली हुड़दंग और मस्ती की तैयारी में बाजार से लेकर घर के अंदर तक होली की मस्ती का आलम बनने लगा है। 
होली तो आप हर साल मानते है पर हमारी टीम पिछले साल की तरह  इस बार भी आप को तिलक होली मनाने का  अनुरोध कर रही है क्योकि कुछ साल बाद होली तो आएगी पर पानी…………? देखे http://vmwteam.blogspot.in/2011/03/vmw-team.html
“होली वही जो स्वाधीनता की आन बन जाये
होली वही जो गणतंत्रता की शान बन जाये
भरो पिचकारियों में पानी ऐसे तीन रंगों का
जो कपड़ो पर गिरे तो हिंदुस्तान बन जाये
होली की आप सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाये”
इस होली में कृपया पानी को बचाने का संकल्प ले ताकि आपकी अगली पीढी भी होली खेल सके औए आपकी खुशी का दुःख उनको ना भुगतना पड़े . क्योकि पानी की कमी अब व्यापक पैमाने पे महसूस की जाने लगी है , और हम ये नहीं सोचते कि हमने कितनी बार बेकार में पानी को यूं ही बर्बाद कर दिया है .जितनी मात्रा में पानी को हम बहार निकालते है क्या वह उतनी मात्रा में पुन: जमीन के अन्दर जाती है ? नहीं ना ! तो बस अब अपनी सकारात्मक सोच का सही उपयोग करना ही होगा ताकि हम अपने आने वाली पीढी को तीसरे विश्व युद्ध की तपिश से बचा ले. एक बार फिर आप सभी को होली की बहुत – बहुत शुभकामना.  
 


Image Say Something…………

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………! आपकी प्रतीक्षा में ….

VMW Team 
 The Team With Valuable Multipurpose Work
 vmwteam@live.com 
+91-9044412246
+91-9044412223
 +91-9024589902
+91-9261545777

मेहनत मे है सफलता की मिठास

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………! 
 VMW Team 
 The Team With Valuable Multipurpose Work
 vmwteam@live.com
 +91-9044412246
+91-9044412223 
 +91-9024589902
+91-9261545777

एक कविता जो

 

एक कविता जो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई …!

एक कविता जो शुरू होने से पहले
 ही खत्म हो गई !
शाम ढलने से पहले
 ही सुबह हो गई
बैठा था किसी के आदेश के इंतजार में
और बैठा ही रह गया
उस आदेश की इंतजार मे जो
 कभी तो मिलेगी ,
 किसी काम को पूरा करने के लिए
लेकिन आदेश से पहले
ही वह पूरी हो गई ।
कभी – कभी तो लोग
 कुछ कहते है निल्को ,
और आप करते हुये भी
 न करते है उसको ॥
इन सब बातों से लगा की
एक बार फिर ज़िंदगी
 नई से पुरानी हो गई ।
लेकिन ये
एक बुरे सपने जैसा था
और मैं समझा की यही
अपनी कहानी हो गई ।
रात के बाद एक
 नई सुबह फिर आई
और
मुझे इन बेकार की बातों से
 अलग कर गई ।
इन सब बातों को
 कविता के माध्यम से लिखने की
कोशिश की तो
कविता शुरू हो ने से पहले ही
 खत्म हो गई ।
 मधुलेश कुमार पाण्डेय “निल्को”

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, 
 और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! 
धन्यवाद ………!
 आपकी प्रतीक्षा में ….
 VMW Team 
The Team With Valuable Multipurpose Work 
vmwteam@live.com 
+91-9044412246;+91-9044412223
 +91-9024589902;+91-9261545777

भारत के महान संत स्वामी विवेकानंद की आज जन्मतिथि है

भारत के महान संत स्वामी विवेकानंद की आज जन्मतिथि है. दुनियां भर के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहे स्वामी विवेकानंद आज भी बहुत से लोगों के आदर्श हैं. उनके जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करें.
 अच्छा लगने पर ब्लॉग समर्थक बनकर मेरा उत्साहवर्द्धन एवं मार्गदर्शन करें |
 vmwteam@live.com 
+91-9024589902 
+91-9044412246

CWG, 2G, कोयला और न जाने कितने जी…..जा……जी

 

एक बार की बात है,
वोट देते ही पड़ गई लात है|
थोड़े देर सकपकाने के बाद,
बोले निल्को भाई
वोट देने का क्या यही परिणाम है ?
मैंने कहा भाई,
तुम तो बहुत कमात हो
लेकिन मनमोहन सब खाए जात है
फिर वोट कांग्रेस को देकर
क्या संदेश देत जात हो ।
मैंने कहा सही है भाई,
लेकिन यह मौन का
क्या राज है ?
अरे जनाब,
CWG,2G, कोयला
और न जाने
कितने जी…..जा……जी
तो इनके पास है।
खाने के वक्त बोलना नहीं चाहिए,
और पचाने के लिए विपक्ष को
जगाना नहीं चाहिए ।
इतने मे ही भाई नीलेश आए,
और बोले की
ये नोट मेरे पास
आया था,
देखने मे सफ़ेद पर अंदर से
काला था,
आप की बात सुनकर
समझ आया यह तो कांग्रेस का
छापा था,
गलती से यह मेरे पास
आया था ।

अच्छा लगने पर ब्लॉग समर्थक बनकर मेरा उत्साहवर्द्धन एवं मार्गदर्शन करें | 
vmwteam@live.com +91-9024589902 
+91-9044412246

सुरमन- एक मां ऐसी जो ……….

अपने लिए जीएं तो क्या जीएं, ए दिल तू जी जमाने के लिए…कुछ इसी तरह का जज्बा इन दिनों हर देशवासी के दिल में पनप रहा है। सभी लोग बढ़- चढ़कर देश के लिए बहुत कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए आगे बढ़ने की चाहत रखते हैं। शहर में कई ऎसे लोग हैं, जिन्होंने कभी किसी के साथ की जरूरत महसूस नहीं की और आगे बढ़ते चले गए। आज उन्होंने साबित कर दिया है कि हम सभी में एक हीरो है। मतलब अगर समाज के लिए आप कुछ करना चाहते हैं तो कदम बढ़ाइए, दिशा अपने आप बनती चली जाएगी।
मां कौन होती है जो सिर्फ जन्म दे या फिर वो जो जीवन दे। जयपुर में एक मां ऐसी भी है जो ऐसे को बच्चों को जीवन दे रही है जिनका इस दुनिया में और कोई नहीं। वह हैं  मनन चतुर्वेदी……….
यशोदा बनकर मां के आंचल में छिपाना आसान काम नहीं है लेकिन मनन चतुर्वेदी को देखकर खुद यशोदा भी हैरान हो सकती है। मनन एक नहीं दो नहीं बल्कि कई  बच्चों की मां है।वो  जब  13 साल की थी तो अपनी मम्मी-पापा के साथ घूमने जा रही थी एक 13 साल का बच्चा उनके  पास भीख मांगने के लिए आया। वह उनके  जीवन का एक ऐसा हादसा था जिससे उन्हे  लगा कि हमारे पास सब कुछ है लेकिन इनके पास कुछ नहीं। उस दिन ने उनकी  जिंदगी में ऐसा बदलाव आया  कि आज वह कई  बच्चों की मां हैं । बच्चो के लिए उन्होने “सुरमन संस्थान” बनाया है , जहा बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ कई चीजे सीखते है ।  वो बताती है की – कुछ साल पहले फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद दिल्ली से आ रही थी, तभी एक जगह कूड़े के ढेर के पास एक बच्ची को खराब खाना खाते देखा। इस घटना ने मन को अंदर तक कचोट दिया। खुद से सवाल किया, जब लोगों के पास पहनने के लिए कपड़े ही नहीं तो मैं कपड़े डिजाइन आखिर किसके लिए करना चाहती हूं, यह कहना है सुरमन संस्थान की सैक्रेट्री मनन चतुर्वेदी का। वे बताती हैं, इस समय मैं करीबन 66 बच्चों की मां हूं। ये बच्चे मुझे मम्मी और एंजिल ऑफ लव कहकर पुकारते हैं। मेरे लिए यह बड़ी बात नहीं है कि मैंने इन्हें अपनाया है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि इन्होंने मुझे अपनी मां की जगह दी है। आठ- नौ साल पहले जब सुरमन संस्थान शुरू किया था, तब कोई भी साथ नहीं था। लेकिन आज हमारे साथ कई लोग जुड़ चुके हैं, जो वॉलिएंट्री हमारी हैल्प करते हैं।

शुभकामना कार्ड छपाना, हस्तनिर्मित वस्तुओं की बिक्री, बोगन वेलिया नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन और चित्र बनाना जैसे कामों से होने वाली आय से पालना का खर्च चल रहा है। मनन के इस कार्य में कई दानदाताओं ने भी सहयोग दिया है।  वह सुरमन ग्राम का निर्माण करने की ओर अग्रसर हैं। जहां बच्चे, परित्यक्त महिलाएं एवं बेघर स्वाभिमान की जिंदगी जी सकें एवं खुली हवा में सांस ले सकें।


अच्छा लगने पर ब्लॉग समर्थक बनकर मेरा उत्साहवर्द्धन एवं मार्गदर्शन करें | 
vmwteam@live.com 
+91-9024589902 +91-9044412246
« Older Entries