Tag Archives: ‘भारत रत्न’

प्रतिभाओ को मिला समाज रत्न 2015 अवार्ड

परमार्थ एवं आध्यत्मिक समिति व राजस्थान जन मंच की ओर से रविवार को गो सेवा, अहिंसा, शाकाहार, प्राणी कल्याण, विलक्षण प्रतिभा, साहित्य, खेल कूद  जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले विभिन्न विशिष्ट बालको,  व्यक्तियों और संस्था को समाज रत्न 2015′  से सम्मानित किया गया। पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में आयोजित समारोह में विलक्षण प्रतिभा के लिए मास्टर मनन सूद, नशा मुक्ति के लिए अजय कुमार, सामाजिक जागरण के लिए श्री अर्जुन देव,राजस्थानी साहित्य के लिए देव किशन राजपुरोहित, गौ सेवा के लिए श्री मदन मोहन खेल के लिए महेश नेहरा, हिन्दी साहित्य के लिए मुश्ताक अहमद, समाज सेवा के लिए श्री विश्वनाथ, श्री निर्मल गोधा,श्री राम बाबू, श्री सत्यनारायण शिक्षा के क्षेत्र मे श्रीमती स्नेहलता तथा विकलांग सेवा के लिए श्री सुभाष तटवार सहित कई प्रतिभाओ को सम्मानित किया गया । कहते है की जितना आवश्यक है समाज कानून विरोधियो को दंडित करना उससे कही अधिक आवश्यक है सेवा भावी व कर्मयोगियों को सम्मानित करना । कार्यक्रम मे मुख्य सरक्षक श्री आर के अग्रवाल सहित श्री कमल लोचन, श्री श्याम विजय सहित मुख्य अतिथि  श्री महेश चंद गुप्ता, आर डी शर्मा तथा परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रज्ञानन्द जी महाराज सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे । 

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न”

भारतीय राजनीति के पितामाह, करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता एवं सुशासन के प्रतिक पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न” से सम्मानित करने पर हार्दिक बधाई |
मैं ईश्वर से अटल जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ |
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एक विलुप्त कविता -रामधारी सिंह दिनकर

बरसों बाद मिले तुम हमको आओ जरा विचारें,
आज क्या है कि देख कौम को ग़म है।
कौम-कौम का शोर मचा है, किन्तु कहो असल में
कौन मर्द है जिसे कौम की सच्ची लगी लगन है?
भूखे, अपढ़, नग्न बच्चे क्या नहीं तुम्हारे घर में?
कहता धनी कुबेर किन्तु क्या आती तुम्हें शरम है?
आग लगे उस धन में जो दुखियों के काम न आए,
लाख लानत जिनका, फटता नहीं मरम है।

दुह-दुह कर जाती गाय की निजतन धन तुम पा लो
दो बूँद आँसू न उनको, यह भी कोई धरम है?
देख रही है राह कौम अपने वैभव वालों की
मगर फिकर क्या, उन्हें सोच तो अपनी ही हरदम है?
हँसते हैं सब लोग जिन्हें गैरत हो वे शरमायें
यह महफ़िल कहने वालों की, बड़ा भारी विभ्रम है।
सेवा व्रत शूल का पथ है, गद्दी नहीं कुसुम की!
घर बैठो चुपचाप नहीं जो इस पर चलने का दम है।

एक बूँद -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’





ज्यों निकल कर बादलों की गोद से,
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी,
सोचने फिर-फिर यही जी में लगी,
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी?

देव मेरे भाग्य में क्या है बदा,
मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में?
या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी,
चू पडूँगी या कमल के फूल में?

बह गयी उस काल एक ऐसी हवा,
वह समुन्दर ओर आई अनमनी,
एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला,
वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।

लोग यों ही हैं झिझकते, सोचते,
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर,
किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें,
बूँद लौं कुछ और ही देता है कर

कुर्सी का प्रमोशन

नमस्कार भाई लोग ,

कई दिनों बाद आया हूँ
नई  बात सुनाता हूँ 
अभी तक हर जगह 
कर्मचारी का प्रमोशन होता था 
लेकिन इस कलयुग में तो 
कुर्सी का प्रमोशन होता है 
माह अक्तूबर सन २०१२ 
जिस कुर्सी पर मैं बैठा था 
आज वह आखे दिखा रही 
रह रह कर बाते बना रही 
साथ उसका मेज दे रही 
जले पर नमक वह छिड़क रही ……..
करना था तो मेरा प्रमोशन
पर कुर्सी मेज का हो गया 
रह गया मैं वही का वही 
और लोग कहे सही है सही 
लेकिन एक बात सुन लो भाई 
यहाँ नहीं कही और सही ……………
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एम के पाण्डेय “निल्को”

हिन्दू

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भारतवासी सरबजीत सिंह की दुखद मृत्यु

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतवासी सरबजीत सिंह की दुखद मृत्यु पर समस्त ब्लॉग  परिवार शोक व्यक्त करता है ।
ये कटु सत्य आज भी मुझे झकझोर रहा है| जानता हूँ कि यही सत्य है परन्तु हृदय स्वीकार करने को तैयार नहीं है भगवान् सरबजीत की आत्मा को शांति प्रदान करे और उनका दिवंगत शरीर तुरंत भारत लाया जाये और उनके परिवार को सौंपा जाये बस यही अपील करना चाहता हूँ जिससे कम से कम उनकी अंतिम क्रिया तो सही प्रकार से पूरी की जा सके । जो अपने जीते जी कभी शांति नहीं देख सके वो मृत्युपरांत तो कम से कम सुकून हासिल कर सकें ।  उम्मीद है सरकार इस बारे में कुछ ठोस कदम ज़रूर उठाएगी । 
सरबजीत की दुखद और दर्दनाक मौत के लिए पाकिस्तानी सरकार तो ज़िम्मेदार है ही किन्तु उससे ज्यादा ज़िम्मेदार भारत की सरकार है जिसके घिनौने चेहरे का पर्दाफाश सरबजीत की इस हालत से हो गया है । लचर रवैया और गैर जिम्मेदारी का जो प्रमाण इस निर्लज्ज सरकार ने सरबजीत के मामले में प्रस्तुत किया है वह बेहद निंदनीय है । अगर इस मामले में पहले ही कुछ पुख्ता कदम उठा लिए गए होते तो शायद आज सरबजीत अपने परिवार के साथ होते । सरबजीत के साथ हुआ तो किसी से छिपा नहीं है परन्तु अब उनकी मौत पर अनेकों सवालिया निशाँ उभर कर आ रहे हैं । अब देखना यह है के इन सवालों के जवाब देने सरकार की तरफ से कौन आगे आता है ।

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