Tag Archives: प्रेम

आज लिखने को कुछ नहीं – एम के पाण्डेय निल्को

सुना है तुम्हारे चाहने वाले बहुत हैं

ये मोहब्बत की मिठाई सब में बांट देती हो क्या

कई गिर चुके हैं तुम्हारे इश्क के मंजर में

अंखियों से गोली मार देती हो क्या

पुरानी बातों को इस लॉक डाउन में फिर से सजाना है

आज हमारे पास बस यादों का खजाना है

कभी लिखा था तुम्हारें जुल्फों पर शेर

पर आज पूरी गजल तुम पर बनाना है

पर ग़ज़ल लिखे तो लिखे कैसे

मुझे नहीं पता तुम हो कैसे

मैं हूं यहां निभा रहा हूं जिम्मेदारियां

पूरे देश में जमातियों को मैंने ही बुलाया हो जैसे

ये महामारी है इसका सामना करो

घर बैठो और मेरी यादों को ताजा करो

सोचो कब मिले थे हम दोनों

एक बार फिर से बातों को साझा करो

– एम के पाण्डेय निल्को

पराया हमें वो बताने लगे हैं

इशारे से सब कुछ जताने लगे हैं
मुझे अपना अब वो बनाने लगे हैं।

उठाया है मैने जिन्हें ज़िन्दगी भर,
वही आज मुझको गिराने लगे हैं।

बताते थे ख़ुद कभी यार जो कल
वही आज मुझको बेगाने लगे हैं।

रहेंगे सदा साथ कहते थे जो कल
वही आँख मुझसे चुराने लगे हैं।

न रखते थे नज़रों से ओझल कभी जो
वही आज मुझको भुलाने लगे हैं।

बनाया था हमने जिसे दिल से अपना,
पराया हमें वो बताने लगे हैं।

बसाया था हमने जिसे अपने दिल में,
वही आज नश्तर चुभाने लगे हैं।

अनुज शुक्ल
VMW Team

चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया

दिल हमारा जब तुम्हारी चाहतों से भर गया ।
चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया ।।

तेरी यादों में मेरे दिन रात कटते थे मगर।
मेरी नजरों में मेरे महबूब अब तू मर गया।।

आंख में पानी है होंठों पर मचलता है सवाल।
तुझसे पूछुं क्या तेरा एहसास इतना मर गया।।

मेरे चारों सिम्त सन्नाटों का इतना शोर है।
मेरा कमरा चीख के लम्हों से पल में भर गया।।

इन्तज़ार -ऐ-यार करना मेरी मजबूरी हुआ।
मैं अभी आता हूं ऐसा बोल कर दिलबर गया।।.

अलविदा कहकर गया वो फिर भी मेरे साथ है।
कैसे कह दूं दिल सजन की चाहतों से भर गया ।।

रात ढलकर सुबह आई कल्पना सपने धुले।
घर से निकली तो सफर में याद का लश्कर गया।।

“कल्पना गागडा़” शिमला, हिमाचल प्रदेश ।

मैं फिर से ‘नज़र निल्को की’ ये शीर्षक ले कर आया हूँ

आज कई दिनो बाद फिर यहाँ पर आया हूँ

इतने दिन व्यस्त रहा वो बताने आया हूँ

आप याद किए या न किए हो पर

मैं फिर से नज़र निल्को की ये शीर्षक ले कर आया हूँ

सादर वंदे

एम के पाण्डेय निल्को 

गरीब बच्चो के संग लिया जन्मदिन का ‘आनंद’

 बड़े बड़े होटलो और रिहायसी जगह तो अपना जन्मदिन सभी मनाते है किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो के साथ ये कुछ और स्पेशल हो जाता है । हमारा उदेश्य उन तरसती आखो तक जन्मदिन के मिठाई और केक पहुंचाना है जो कभी ये स्वाद चख न सके । इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| देवदर्शन डॉट नेट के सहयोग से बच्चो को खाने-पीने की सामग्री व खिलौने दिये गए । एम के पाण्डेय निल्को ने कहा की इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| अपने बच्चों के जन्मदिन की पार्टी पर हम हजारों और लाखों रूपये खर्च कर देते हैं और कुछ बच्चों, दोस्तों और रिश्तेदारों को हम खिलाते-पिलाते हैं, जो कि इस तरह की पार्टी से उब चुके होते हैं या उनके लिये इतना महत्वपूर्ण नहीं होता , लेकिन यकीन मानिये आप उतनी ख़ुशी नहीं पा सकते जो इन बच्चों को ख़ुशी देकर पायी है| उक्त अवसर पर उमाकांत, रोहित, रवि, सुभाष ज्योति, प्रीती, कृष्ण, दीपक, अनुप, वर्षा, इत्यादि कई लोग मौजूद थे । 

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मुझ पर एहसान करती है – एम के पाण्डेय ‘निल्कों’

मुझ पर एहसान करती है

ये कह कर बदनाम करती है

किसी रोज पढ़ेगा कोई इन चन्द लाइनों को

तो कोई कहेगा की तुमसे ही प्यार करती है

पर कभी नहीं वो एक़रार करती है

बस हर पल ही तकरार करती है

छेड़ा था किसी रोज दूर से ही उसको 

आज तक वो मुझसे सवाल करती है

शाम की वो क्लास करती है

सरे बाज़ार श्रंगार करती है

क्या मजाल जो कोई कह दे कुछ उसको

वही पर वो उसको हलाल करती है

गुस्से से चेहरा जब वो अपना लाल करती है

पूरे मोहल्ले मे फिर बवाल करती है

निल्को एक टक देखता है उसको

जब जब वो आखे चार करती है

एम के पाण्डेय निल्कों


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मुक्तक : आँख


आंखो मे सुरमा लगाती क्यू है

आईना देख इतराती क्यू है

तुझ पर जाऊ मैं वारि वारि

पर मुझे तू बार बार आजमाती क्यू है

एम के पाण्डेय निल्को

 

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होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया

होंठ उसके चेहरे पर
कुछ यूँ नज़र आते है
जैसे कुछ गुलाब की पंखुड़िया
पानी में नज़र आते है
उसे देख कर तो कुछ
लड़के भी शरमाते है
नंबर लेना देना, आगे पीछे घूमना
सब उसे देख अपनी
किस्मत आजमाते है
वो कहती है कैसे कैसे गीत
मुझे देख कर लोग गाते है
शक्ल सूरत में मुझे
अपनी प्रेमिका को को पाते है
कह दे वो यदि वो सच
और दिल की बात तो ‘निल्को’
सबसे पहले तुम्हारे जैसे लोग ही
अपना मुँह फुलाते है

एम के पाण्डेय निल्को

 

निल्को का ये उद्दघोष है

आप के समक्ष प्रस्तुत है ‘उद्दघोष’ पर एम के पाण्डेय निल्को का एक प्रयास
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मैंने खोया अब होश है
देखोगो अब वो मेरा जोश है
बंद करो इन सापो को दूध पिलाना
पूरी दुनिया को निल्को का ये उद्दघोष है
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एम के पाण्डेय निल्को

मुक्तक विषय : आवारगी

मेरी ताज़ा मुक्तक विषय : आवारगी

आवारगी होता क्या है
मेरी तरफ देख तेरा जाता क्या है
तुझे देख कर दिल डोले और बोले
मेरी बनने में तुझे होता क्या है

सादर वंदे
एम के पाण्डेय निल्को

सुविचार

🌹🌿🙏 🙏🍃🌹

“डाली से टुटा फूल फिर से नहीं लग सकता हे मगर डाली मजबूत हो तो उस पर नया फूल खिल सकता है,

इसी तरह जिंदगी में खोये पल को ला नही सकते मगर हौंसले और विश्वास से आने वाले हर पल को खूबसूरत बना सकते है “
  💐🌸🙂 सुप्रभात् 🌝🍀💐