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ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है


ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है 

क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है 

कलम लिखने को बहुत बेक़रार है 

क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

प्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है 

उनकी चाहत भी बेशुमार है 

मैसेज के साथ साथ ऑडियो भी भेज दिया 

पर किया नहीं आज  तक इजहार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

लेकिन तेरा आशिक बहुत दिलदार है 

प्यार ही जीवन का आधार है 

सोच रहा हूँ क्या लिखू तुम पर ‘निल्को’

वो कहती है तुम्हारी कलम,कैमरा, कम्प्यूटर सब लाजवाब है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

एम के पाण्डेय निल्को 

प्रकृति की विशेषता : एम के पाण्डेय निल्को

इस पूरे ब्रह्माण्ड में सिर्फ एक ही जगह ऐसी है जहाँ जीवन है और जहाँ चारो ओर हरियाली रहती है और इस हरियाली से यह धरती बहुत ही सुन्दर और आकर्षक लगती है. यह प्रकृति ही है जो हमें स्वस्थ जीवन जीने के लिए एक प्राकृतिक पर्यावरण देती है | यह प्रकृति हमें भगवान द्वारा दिया गया एक बहुमूल्य कीमती उपहार के समान है. हमें इस प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और इसे नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए |
प्रकृति की सभी चीजों में कुछ ना कुछ अदभुत है