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भलाई इसी में है – एम के पाण्डेय निल्को

सरकार, छोड़िये ब्लैकमेल की राजनीति, जनता तो हिसाब मांगेगी।

लूला-लँगड़ा हो चुके विपक्ष से आप यह उम्मीद लगाकर बैठेंगे, कि सरकारी लूट का ए विरोध करेंगे तो इस मुग़ालते में मत रहिए। सरकार का विरोध करने के लिए किसी के पास कूबत नहीं है। थोड़ी कूबत राहुल ने दिखा दी तो आपने उसे मानसिक बीमार बता डाला। मुलायम सिंह यादव, मायावती बोलेंगे नहीं, क्योंकि आय से अधिक सम्पप्ति का मामला सरकार उछाल कर इन्हें अंदर कर सकती है। जब प्रेस कांफ्रेंस में नथुने बहुत जोर-जोर से फड़क रहे हों तो इसका मतलब यही होता है कि दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है। रविशंकर प्रसाद नथुने फड़काते हुए प्रेस काँफ्रेंस में आये। ठीक उसी तरह जैसे अमित शाह जी के लाडले जय शाह के बचाव में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आये थे।
वैसे दोनों मामलों में एक अंतर है। पीयूष गोयल देश के पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री बने थे जो किसी प्राइवेट सिटीजन पर लगे चार-बीसी के इल्जामों का बचाव करने आये हों। प्रसाद जी मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं, इस नाते उन्हे प्रधानमंत्री की ओर से बोलने का पूरा हक है। आप पूछ सकते हैं कि मामला रक्षा मंत्रालय का था, तो फिर निर्मला सीतारमन क्यों नही, नथुने तो उनके भी बराबर फड़कते हैं।
आपका पता होना चाहिए कि यह सर्जिकल स्ट्राइक वाली सरकार है। कब कहां से स्ट्राइक हो जाएगा पता नहीं। कृषि मामलों में गृह मंत्री, गृह संबंधित मामलों पर रक्षा मंत्री और रक्षा से जुड़े मामलों पर आईटी मंत्री। जैसे टोटल हॉकी के नये फॉरमेंट में कभी डिफेंडर आगे बढ़ जाता है और कभी फॉरवर्ड गोल बचाने के लिए पीछे चला आता है। पात्रा जी तो मैनेजर हैं ही।
रविशंकर प्रसाद बहुत तगड़े डिफेंडर हैं। वकालत में कोई सानी नहीं है। आंखे निकालकर चंगू-मंगुओं को डराना भी जानते हैं।
  हद देखिये,  रवि बाबू ने राफेल सौदे पर लगे अति गंभीर इल्जामों के जवाब में पहले पूरे नेहरू-गांधी खानदान की कुंडली बांची। मैं इंतज़ार कर रहा था कि वे कहेंगे कि हम लोगों ने मोहन जी के सामने शपथ ली है कि अगली सात पीढ़ियों तक इस घटिया खानदान में बेटे या बेटी का ब्याह नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं कहा। यह मास्टर स्ट्रोक आगे लिए बचा लिया।
देश इंतज़ार कर रहा था कि रवि बाबू राफेल विमान की कीमत निकालकर कांग्रेसियों के मुंह पर दे मारेंगे। पर कुछ न हुआ न होगा क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई

मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है

सुबह जैसे ही आँख खुलती है
मानो एक शिकायत किया करती है
भोर होते ही क्यू छोड़ देता है मुझको
मेरी तनहाई मुझसे यही सवाल किया करती है

एम के पाण्डेय निल्को

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मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है

तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है
पर निल्को को कहा लिखने पर पाबंदी है
ये टूटे फूटे मन के भावो को पढ़कर भी
लोग कहते है मधुलेश तेरी भी तो चाँदी है
एम के पाण्डेय निल्को


 

मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया

दिल मे कोई प्रेम रत्न धन रख लिया
उनके लिए लिख , उनका भी मन रख लिया
ऐसी नजरों से घूरते है वो मुझको
की नज़र निल्को की’ मैंने शीर्षक ही रख लिया

एम के पाण्डेय निल्को

मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही

चाँद की चादनी मे नहाती रही

सारी रात मुझे वो जगाती रही

प्यार से ज़रा छु लिया था होठो को उसके

और निल्को की धुन वो अब तक गाती रही

एम के पाण्डेय निल्को


भगवान श्री कृष्ण के जीवन सी जुड़ी 24 अनसुनी बातें

1. भगवान श्री कृष्ण के खड्ग का नाम ‘नंदक’, गदा
का नाम ‘कौमौदकी’ और शंख का नाम ‘पांचजन्य’ था जो गुलाबी रंग का था।

2. भगवान् श्री कॄष्ण के परमधामगमन के समय ना तो
उनका एक भी केश श्वेत था और ना ही उनके शरीर पर कोई झुर्री थीं।

3.भगवान् श्री कॄष्ण के धनुष का नाम शारंग व मुख्य
आयुध चक्र का नाम ‘ सुदर्शन’ था। वह लौकिक , दिव्यास्त्र व देवास्त्र तीनों रूपों में कार्य कर सकता था
उसकी बराबरी के विध्वंसक केवल दो अस्त्र और थे पाशुपतास्त्र ( शिव , कॄष्ण और अर्जुन के पास
थे) और प्रस्वपास्त्र ( शिव , वसुगण , भीष्म और
कॄष्ण के पास थे) ।

4. भगवान् श्री कॄष्ण की परदादी ‘मारिषा’ व सौतेली मां रोहिणी( बलराम की मां) ‘नाग’ जनजाति
की थीं.

5. भगवान श्री कॄष्ण से जेल में बदली गई यशोदापुत्री का नाम एकानंशा था, जो आज विंध्यवासिनी देवी के नाम से पूजी जातीं हैं।

6. भगवान् श्री कॄष्ण की प्रेमिका ‘राधा’ का वर्णन महाभारत, हरिवंशपुराण, विष्णुपुराण व भागवतपुराण में नहीं है। उनका उल्लेख बॄम्हवैवर्त पुराण, गीत गोविंद व प्रचलित जनश्रुतियों में रहा है।

7. जैन परंपरा के मुताबिक, भगवान श्री कॄष्ण के
चचेरे भाई तीर्थंकर नेमिनाथ थे जो हिंदू परंपरा में ‘घोर
अंगिरस’ के नाम से प्रसिद्ध हैं.

8. भगवान् श्री कॄष्ण अंतिम वर्षों को छोड़कर कभी भी द्वारिका में 6 महीने से अधिक नहीं रहे।

9. भगवान श्री कृष्ण ने अपनी औपचारिक शिक्षा उज्जैन के संदीपनी आश्रम में मात्र कुछ महीनों में पूरी कर ली थी।

10. ऐसा माना जाता है कि घोर अंगिरस अर्थात नेमिनाथ के यहाँ रहकर भी उन्होंने साधना की
थी.

11. प्रचलित अनुश्रुतियों के अनुसार, भगवान श्री
कॄष्ण ने मार्शल आर्ट का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था और डांडिया रास उसी का नॄत्य रूप है।

’12. कलारीपट्टु’ का प्रथम आचार्य कॄष्ण को माना
जाता है। इसी कारण ‘नारायणी सेना’ भारत की सबसे भयंकर प्रहारक सेना बन गई थी।

13. भगवान श्रीकृष्ण के रथ का नाम ‘जैत्र’ था और
उनके सारथी का नाम दारुक/ बाहुक था। उनके घोड़ों
(अश्वों) के नाम थे शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक।

14. भगवान श्री कृष्ण की त्वचा का रंग मेघश्यामल था और उनके शरीर से एक मादक गंध
स्रावित होती थी.

15. भगवान श्री कॄष्ण की मांसपेशियां मृदु परंतु युद्ध के समय विस्तॄत हो जातीं थीं, इसलिए सामन्यतः लड़कियों के समान दिखने वाला उनका लावण्यमय
शरीर युद्ध के समय अत्यंत कठोर दिखाई देने लगता था ठीक ऐसे ही लक्ष्ण कर्ण, द्रौपदी व कॄष्ण के शरीर में देखने को मिलते थे।

16. जनसामान्य में यह भ्रांति स्थापित है कि अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, परंतु वास्तव में कॄष्ण इस विधा में भी सर्वश्रेष्ठ थे और ऐसा सिद्ध हुआ मद्र राजकुमारी
लक्ष्मणा के स्वयंवर में जिसकी प्रतियोगिता द्रौपदी स्वयंवर के ही समान परंतु और कठिन थी।

17. यहां कर्ण व अर्जुन दोंनों असफल हो गये और तब श्री कॄष्ण ने लक्ष्यवेध कर लक्ष्मणा की इच्छा पूरी की, जो पहले से ही उन्हें अपना पति मान चुकीं
थीं।

18. भगवान् श्री युद्ध कृष्ण ने कई अभियान और
युद्धों का संचालन किया था, परंतु इनमे तीन सर्वाधिक
भयंकर थे। 1- महाभारत, 2- जरासंध और कालयवन के विरुद्ध, 3- नरकासुर के विरुद्ध

19. भगवान् श्री कृष्ण ने केवल 16 वर्ष की आयु में विश्वप्रसिद्ध चाणूर और मुष्टिक जैसे मल्लों का वध किया. मथुरा में दुष्ट रजक के सिर
को हथेली के प्रहार से काट दिया.

20. भगवान् श्री कॄष्ण ने असम में बाणासुर से युद्ध
के समय भगवान शिव से युद्ध के समय माहेश्वर ज्वर के विरुद्ध वैष्णव ज्वर का प्रयोग कर विश्व का प्रथम ‘जीवाणु युद्ध’ किया था।

21. भगवान् श्री कॄष्ण के जीवन का सबसे भयानक द्वंद युद्ध सुभुद्रा की प्रतिज्ञा के कारण अर्जुन के साथ हुआ था, जिसमें दोनों ने अपने अपने सबसे विनाशक शस्त्र क्रमशः सुदर्शन चक्र और पाशुपतास्त्र निकाल
लिए थे। बाद में देवताओं के हस्तक्षेप से दोंनों शांत हुए।

22. भगवान् श्री कृष्ण ने 2 नगरों की स्थापना की थी द्वारिका (पूर्व मे कुशावती) और पांडव पुत्रों के द्वारा इंद्रप्रस्थ ( पूर्व में खांडवप्रस्थ)।

23. भगवान् श्री कृष्ण ने कलारिपट्टू की नींव रखी जो बाद में बोधिधर्मन से होते हुए आधुनिक मार्शल आर्ट में विकसित हुई।

24. भगवान् श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता के रूप में आध्यात्मिकता की वैज्ञानिक व्याख्या दी, जो मानवता के लिए आशा का सबसे बडा संदेश थी, है और सदैव रहेगी.

प्रस्तुति
एम के पाण्डेय निल्को

अपनी संस्कृति को पहचाने ।

संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र रूप का नाम है, जो उस समाज के सोचने, विचारने, कार्य करने, खाने-पीने, बोलने, नृत्य, गायन, साहित्य, कला, वास्तु आदि में परिलक्षित होती है। संस्कृति का वर्तमान रूप किसी समाज के दीर्घ काल तक अपनायी गयी पद्धतियों का परिणाम होता है। संस्कृति जीवन की विधि है। जो भोजन हम खाते हैं, जो कपड़े पहनते हैं, जो भाषा बोलते हैं और जिस भगवान की पूजा करते हैं, ये सभी संस्कृति के पक्ष हैं। सरल शब्दों मे हम कह सकते हैं कि संस्कृति उस विधि का प्रतीक है जिसमें हम सोचते हैं और कार्य करते हैं। इसमें वे चीजें भी सम्मिलित हैं जो हमने एक समाज के सदस्य के नाते उत्तराधिकार में प्राप्त की हैं। एक सामाजिक वर्ग के सदस्य के रूप में मानवों की सभी उपलब्धियाँ संस्कृति कही जा सकती हैं। कला, संगीत, साहित्य, वास्तुविज्ञान, शिल्पकला, दर्शन, धर्म और विज्ञान सभी संस्कृति के पक्ष हैं। तथापि संस्कृति में रीतिरिवाज, परम्पराएँ, पर्व, जीने के तरीके, और जीवन के विभिन्न पक्षों पर व्यक्ति विशेष का अपना दृष्टिकोण भी सम्मिलित हैं।

इस प्रकार संस्कृति मानव जनित पर्यावरण से सम्बन्ध रखती है जिसमें सभी भौतिक और अभौतिक उत्पाद एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्रदान किये जाते हैं। सभी समाज-वैज्ञानिकों में एक सामान्य सहमति है कि संस्कृति में मनुष्यों द्वारा प्राप्त सभी आन्तरिक और बाह्य व्यवहारों के तरीके समाहित हैं। ये चिह्नों द्वारा भी स्थानान्तरित किए जा सकते हैं जिनमें मानवसमूहों की विशिष्ट उपलब्धियाँ भी समाहित हैं। इन्हें शिल्पकलाकृतियों द्वारा मूर्त रूप प्रदान किया जाता है। अतः संस्कृति का मूल केन्द्रबिन्दु उन सूक्ष्म विचारों में निहित है जो एक समूह में ऐतिहासिक रूप से उनसे सम्बद्ध मूल्यों सहित विवेचित होते रहे हैं। संस्कृति वह है जिसके माध्यम से लोग परस्पर सम्प्रेषण करते हैं, विचार करते हैं और जीवन के विषय में अपनी अभिवृत्तियों और ज्ञान को विकसित करते हैं।

संस्कृति हमारे जीने और सोचने की विधि में हमारी प्रकृति की अभिव्यक्त है। यह हमारे साहित्य में, धार्मिक कार्यों में, मनोरंजन और आनन्द प्राप्त करने के तरीकों में भी देखी जा सकती हैं। संस्कृति के दो भिन्न उप-विभाग होते हैं- भौतिक और अभौतिक। भौतिक संस्कृति उन विषयों से जुड़ी है जो हमारे जीवन के भौतिक पक्षों से सम्बद्ध हैं, जैसे हमारी वेशभूषा, भोजन, घरेलू सामान आदि। अभौतिक संस्कृति का सम्बध विचारों, आदर्शों, भावनाओं और विश्वासों से है।  

संस्कृति एक स्थान से दूसरे स्थान तथा एक देश से दूसरे देश में बदलती रहती है। इसका विकास एक स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय संदर्भ में विद्यमान ऐतिहासिक प्रक्रिया पर आध शरित होता है। उदाहरण के लिए हमारे अभिवादन की विधियों में, हमारे वस्त्रें में, खाने की आदतों में, सामाजिक और धार्मिक रीतिरिवाजों और मान्यताओं में परिचम से भिन्नता है। दूसरे शब्दों में, किसी भी देश के लोग अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परम्पराओं के द्वारा पहचाने जाते हैं।

सांस्कृतिक विकास एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सी बातें अपने पुरखों से सीखी है। समय के साथ उन्होंने अपने अनुभवों से उसमें और वृद्धि की। जो अनावश्यक था, उसको उन्होंने छोड़ दिया। हमने भी अपने पूर्वजों से बहुत कुछ सीखा। जैसे-जैसे समय बीतता है, हम उनमें नए विचार, नई भावनाएँ जोड़ते चले जाते हैं और इसी प्रकार जो हम उपयोगी नहीं समझते उसे छोड़ते जाते हैं। इस प्रकार संस्कृति एक पीढी से दूसरी पीढी तक हस्तान्तरिक होती जाती है।


ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये, खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा…
 दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !
तीन ऋण –
देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !
 चार युग –
सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !
 चार धाम –
द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !
चारपीठ –
शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !
चार वेद-
ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !
 चार आश्रम –
ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !
चार अंतःकरण –
मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !
पञ्च गव्य –
गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !
  पञ्च देव –
गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !
 पंच तत्त्व –
पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !
 छह दर्शन –
वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !
  सप्त ऋषि –
विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!
  सप्त पुरी –
अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची – विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !
  आठ योग –
यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !
 आठ लक्ष्मी –
आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !
 नव दुर्गा —
शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !
  दस दिशाएं –
पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !
  मुख्य ११ अवतार –
मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !
 बारह मास –
चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !
  बारह राशी –
मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !
 बारह ज्योतिर्लिंग –
सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !
 पंद्रह तिथियाँ –
प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !
 स्मृतियां –
मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !
**********************
इस  को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो।
सादर
एम के पाण्डेय निल्को

मुस्कुराओ….. क्योंकि …….

😊मुस्कुराओ….. क्योंकि परिवार में रिश्ते तभी तक कायम रह पाते हैं जब तक हम एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते रहते है”

😊मुस्कुराओ….. क्योंकि दुनिया का हर आदमी खिले फूलों और खिले चेहरों को पसंद करता है।”

☺मुस्कुराओ….. क्योंकि आपकी हँसी किसी की ख़ुशी का कारण बन सकती है।”

😊मुस्कुराओ…. क्योंकि यह मनुष्य होने की पहली शर्त है। एक पशु कभी भी नहीं मुस्कुरा सकता।”

😊मुस्कुराओ….. क्योंकि क्रोध में दिया गया आशीर्वाद भी बुरा लगता है और मुस्कुराकर कहे गए बुरे शब्द भी अच्छे लगते हैं।”

सादर
अनुज शुक्ला

हाल – ए – दिल क्या सुनाऊ

कहाँ छुपा के रख दूँ मैं अपने हिस्से की शराफत,
जिधर भी देखता हूँ उधर बेईमान खड़े हैं..
क्या खूब तरक्की कर रहा है अब देश देखिये,
खेतों में बिल्डर, सड़क पर किसान खड़े हैं….!!

गीत ग़ज़ल हो या हो कविता – एम के पाण्डेय निल्को


गीत ग़ज़ल हो या हो कविता 
नज़र है उस पर चोरो की 
सेंध लगाये बैठे तैयार 
कॉपी पेस्ट को मन बेक़रार 
लिखे कोई और, पढ़े कोई और 
नाम किसी और का चलता है 
कुछ इस तरह इन चोरो का 
ताना बना भी चलता रहता है 
सोच सोच कर लिखे गजल जो
प्रसंशा वो नहीं पाता है 
पर चुराए हुए रचना पर 
वाह वाही खूब कमाता है 
मन हो जाता उदास निल्को 
किसी और का गुल खिलाये जाते है 
वो खुश होता किन्तु 
मन से पछताए जाये है 
***************
एम के पाण्डेय निल्को 

सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ – एम के पाण्डेय ‘निल्को’


समय पर जब यह समय मिला 
उनके लिए ही यह गीत बुना
मुलाकात जब उनसे हुई 
मानो बंजारे को घर मिला

देखा उनको जब आज के दिन
अच्छा नहीं लग रहा अब उनके बिन
मुलाकात का क्या हाल बताऊ
सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ

तुम्हारे पास हूँ लेकिन
जो दूरी मैं समझता हूँ
तुम्हारे बिन यह रिश्ता
अधूरा है समझता हूँ

तुम्हे मैं भूल जाउगा
यह मुमकिन है नहीं लेकिन 
पर तुम्ही को भूलना सबसे 
जरुरी है समझता हूँ

अच्छा लगा मिल कर उनसे
बातें हुई पर न खुल कर उनसे
दिन का एक पहर कुछ ऐसे निकला
जैसे निल्को का कोई अपना निकला

सोच रहा हूँ की लिखूँ उनपर
लेकिन शुरुआत करू मैं कहा से
शब्दों के युद्ध हो रहे दिमाग में
काफी कुछ लिखा है उनके चेहरे के किताब में

निल्को ने जब देखा अपनी नज़र से
सब कुछ भूल गया उनकी असर से
क्षणिक मिलाप पर क्या कहूँ
कैसे इस पर कोई गीत लिखू

*********************
एम के पाण्डेय ‘निल्को’

बहुत कठिन है पत्रकारिता की डगर, फिर भी निभाना होगा अपना दायित्व

राष्ट्रीय प्रेस परिषद जनपद महराजगंज की इकाई का प्रथम वार्षिक अधिवेशन मंगलवार को स्थानीय अंबेडकर पार्क में संपंन हुआ। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता और गोरखपुर के पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर ने कहा कि पत्रकारिता की डगर कठिन है। उसमें अपने लिए कम किंतु देश और समाज के लिए अधिक करने की जरूरत होती है। मीडिया इस काम को बखूबी कर रही है। यही कारण है कि उसे तरह तरह के आलोचनाओं और कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इन सब पर पत्रकारों को विजय पानी होगी। चाहे कितनी भी परेशानियों का सामना करना पडे़ अपने दायित्व को निभाना होगा। खुद को भले ही जलाना पडे़, लेकिन आम लोगों में अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजगता और जागरूकता की ज्योति जलानी पडे़गी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। इसके बाद तत्काल रक्तदान कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि चिकित्सक डा. सीपी सिंह ने रक्तदान किया। ब्लड निकालने का कार्य गोरखपुर मेडिकल कालेज से आई डा. मंजीता मिश्रा की नेतृत्व वाली टीम ने किया। इस दौरान तीन दर्जन से अधिक लोगों ने रक्तदान किया।
अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार नर्वदेश्वर पांडेय देहाती ने की। कार्यक्रम के दौरान संरक्षक केदार शरण मिश्र द्वारा मुख्य अतिथि के साथ आए इंका नेता सूर्यनाथ पांडेय तथा अन्य को अंग वस्त्र भेंट कर स्मृति चिन्ह प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन बसंतपुर इंटर कालेज के समाज शास्त्र के प्रवक्ता डा. कृष्ण कुमार ने किया। अंत में अध्यक्ष अमित कुमार तिवारी ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

लिखता हूँ बचपन की वो कहानी – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

बचपन की वो दुनिया
पचपन की उम्र में भी नहीं भूलती
क्योंकि जो की थी शरारते
वो भी कुछ नहीं कहती ।।  
न तो लोग बुरा मानते
और न ही मुझे मनाते
रूठे और मनाने के खेल से
हम किसी को नहीं सताते ।।
शाम को जब हम छत पर जाते
खेलते कूदते नहीं घबराते
पर आज के इस परिवेश में
हम बचपन को ही खोते पाते ।।
त्योहारों पर करते थे जो मस्ती
देखती रहती थी पूरी बस्ती
पर अब कोई साथ नहीं है
अकेलापन ही है अब सस्ती ।।
वो पेड़ों पर चड़ना और लटकना
मिट्टी में एक दूसरे को पटकना
छुपन छुपाई हो या हो सरकना
इसके लिए है अब तरसना ।।


लिखता हूँ बचपन की वो कहानी
खुद ही यानि निल्कोकी जुबानी
पर यह कलम अब नहीं चलती सुहानी
क्योंकि यह कविता शायद है अभी बाकी …….।।

एम के पाण्डेय निल्को

पेशावर – खून के नापाक ये धब्बे


खून के नापाक ये धब्बे ,

खुदा से कैसे छिपाओगे ?

मासूमो के कब्र पर चढ़कर

कौन सा जन्नत पाओगे ?

अल्लाह की भी रूह काप गई होगी

शांति दूतो के इस कृत्य से ?

कैसी होगी उस माँ की हालत

जिसके बच्चे ने कहा होगा –

माँ, मैं आज स्कूल नहीं जाऊंगा

पर माँ ने उसे डाट कर

जबरजस्ती स्कूल भेजा होगा |

आतंक के खिलाफ गर

पाकिस्तान ने आवाज़ उठाई होती

तो मासूमो की जान

आज यू न जाई होती |

अब स्कूल मदरसे भी डरे हुए है

किसी अनजान डर से सहमे हुए है

क्यों इंसानियत होती है हर बार शर्मशार ?

क्या इसका जवाब कोई देगा…..&%*#$@$……..?

किसी ने सच ही कहा है –

आज दिन में एक अजीब सा दर्द है मेरे मौला

ये तेरी दुनिया है , तो यहाँ इंसानियत क्यों मरी है …?

हिंदुस्तानी होना क्या होता है

ये तब पता चलता है जब गाढ़े वक़्त में

पाकिस्तान के लिए भी दुःख होता है

पेशावर में मासूम परिंदों के लहू से

भरे पंखों को पेशा बना डाला…

लगा ऐसा जैसा शैतान ने खुदा को

भी अपने जैसा बना डाला..


ईश्वर उन बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करे जिनका जीवन, जीवन बनने से पहले ही समाप्त कर दिया गया और प्रभु बाकी बचे बच्चों को साहस और हिम्मत दे कि वो इस ह्रदय विदारक घटना से खुद को उबार पाये। मासूम बच्चों की मौत का हमें बड़ा दुःख है और पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है मगर फिर भी हमें बच्चों की मौत का मजाक नहीं बनाना चाहिए, लेकिन ये बात #
जेहाद का समर्थन करने वाले मुसलमानों को समझनी चाहिए कि आज ये जेहादी बीमारी गैर- मुसलमानों से ज्यादा खुद मुसलमानों को ही निगल रही है, ये जेहाद सिर्फ और सिर्फ इंसानियत के खिलाफ है न की किसी समुदाय विशेष के खिलाफ।।

भगवान इस हादसे में मारे गए बच्चों की आत्मा को शांति दें।।

झुकना – नज़र निल्को की

वो शख्स जो
तुमसे झुक का
मिला हो
शायद
वह तुमसे
कई गुना बड़ा हो ..!
उसकी आँखों में
तुम्हे लिए
जो खास बात है
वह एक
किसी के लिए
मिशाल है …!
मत हस
उसके इस
चाल चलन पर
वह गई गुना
समझदार है तुमसे …!
तुमने हस दिया
उसकी बुद्दिमता पर
लेकिन वह
सफल हो गया
अपनी इरादों पर…..!
तुमसे हस कर
जो कह दिया
ठीक है
उसने सचमुच में ही
ठीक कर दिया …..!
एक अनोखे तरीके से
अपना और तुम्हारा
काम कर गया ….!




एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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….बंजारे को घर मिला

दोस्तो मेरे मित्र सिद्धार्थ सिंह श्रीनेत कहते है की आज कल रचनाओ मे अलंकार का प्रयोग देखने को कम ही मिलता है , उनकी इस बात से कुछ हट तक सहमत मैं भी हूँ । बहुत कोशिश करने के बाद कुछ प्रयोग करने की कोशिश है, ज़रा आप लोग ही बताए की कोशिश कहा तक सफल रही । साथ मे पाठको की जानकारी के लिए अलंकार के बारे मे भी कुछ जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है, ‘आभूषण। जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभूषणों से शरीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य अलंकारों से काव्य की। काव्य में भाषा को शब्दार्थ से सुसज्जित तथा सुन्दर बनाने वाले चमत्कारपूर्ण मनोरंजन ढंग को अलंकार कहते हैं। भारतीय साहित्य में अनुप्रास, उपमा, रूपक, अनन्वय, यमक, श्लेष, उत्प्रेक्षा, संदेह, अतिशयोक्ति, वक्रोक्ति आदि प्रमुख अलंकार हैं।

 

अब यह रचना आप के लिए …..

समय पर जब समय मिला

सागर मे भी गगन मिला
मुलाक़ात जब उनसे हुई
मानो बंजारे को घर मिला
खुशखबर जब यह सुना
उनके लिए ही गीत गुना
जिसको सर्च किया मैंने यहाँ वहाँ
वह तो मेरे ही करीब मिला
राजनीति पर जब यह कलम चली
काजनीति की लहर चली
गली मोहल्ले और चौराहे पर
मधुलेश की ही बात चली
कुछ सीखने की जब सीख मिली
नहीं किसी से भीख मिली
जब वह अकेले चले थे
तो नहीं यह भीड़ चली
बेशक कवियों की घनी आबादी है
पर लिखने की कहाँ पाबन्दी है
कभी-कभी तो चर्चा मंच पर भी
निल्को की भी लहर चली
****************
मधुलेश पाण्डेय निल्को

 

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लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त

यूपी के बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्‍या कर शव पेड़ पर लटका देने के मामले के बाद भी राज्‍य सरकार सक्रिय नहीं लगती। इस घटना के बाद देश-विदेश में यूपी की बदनामी हुई है और केंद्र सरकार ने भी राज्‍य सरकार को घेरा है। लेकिन, लगता है राज्‍य में अभी भी बलात्‍कारियों का राज है। बदायूं की घटना के बाद भी पूरे राज्‍य से करीब आधा दर्जन बलात्‍कार के बड़े मामले सामने आए हैं।


यूपी दुनिया का पहला ऐसा राज्य होगा जहां के लोगों को दो कौड़ी के लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त दे के चुकानी पड़ रही है..

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