Tag Archives: नजरिया

VMW Team – आरक्षण की मांग करे

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

पहले से हम बंटे हुए हैं,और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,मिलकर इक दूजे को खाएं हम,

देश मरे भूखा चाहे पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत,भारत माँ के बाल नोचने आओ जी,

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में भूल नही ये जाना है,

याद करो ज़मीन के हिस्सों पर जब हम टकराते थे,
गज़नी कासिम बाबर मौका पाते ही घुस आते थे

अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर,

हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है,

मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर पंडित बनिया सब के सब कर लो तैयारी जी,

जब पटेल के कुनबों की थाली खाली हो सकती है,
कई राजपूतों के घर भी कंगाली हो सकती है,

बनिए का बेटा रिक्शे की मज़दूरी कर सकता है,
और किसी वामन का बेटा भूखा भी मर सकता है,

आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो,

शर्म करो,हिन्दू बनते हो,नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में,ये ज्वालायें फूकेंगी,

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे गजनी की संतानो से,

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,
संविधान को छलनी कर के,गोबर इसमें भर डालो,

राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे,

तुम अफज़ल का गुण गाते हों

गज़नी का है तुम में खून भरा जो तुम अफज़ल का गुण गाते हों,
जिस देश में तुमने जनम लिया उसको दुश्मन बतलाते हो!
भाषा की कैसी आज़ादी जो तुम भारत माँ का अपमान करो,
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप जो तुम देश की इज़्ज़त नीलाम करो!
अफज़ल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलायेगा,
कोई इनके रहनुमाओं का मज़हब मुझको बतलायेगा!
अपनी माँ से जंग करके ये कैसी सत्ता पाओगे,
जिस देश के तुम गुण गाते हो, वहाँ बस काफिर कहलाओगे!
हम तो अफज़ल मारेंगे तुम अफज़ल फिर से पैदा कर लेना,
तुम जैसे नपुंसको पे भारी पड़ेगी ये भारत सेना!
तुम ललकारो और हम न आये ऐसे बुरे हालात नहीं
भारत को बर्बाद करो इतनी भी तुम्हारी औकात नहीं!
कलम पकड़ने वाले हाथों को बंदूक उठाना ना पड़ जाए,
अफज़ल के लिए लड़ने वाले कहीं हमारे हाथो न मर जाये!
भगत सिंह और आज़ाद की इस देश में कमी नहीं,
बस इक इंक़लाब होना चाहिए,
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज दबनी चाहिए!
ये देश तुम्हारा है ये देश हमारा है, हम सब इसका सम्मान करें,
जिस मिट्टी पे हैं जनम लिया उसपे हम अभिमान करें! जय हिंद ।

मनुष्य की कीमत

लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से  पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”
पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये.
फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है.”
बालक – क्या सभी उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?
पिताजी – हाँ बेटे.
बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम रिस्पेक्ट तो कीसी की ज्यादा क्यो होती है?
सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा.
रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?
बालक – 200 रूपये.
पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?
बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का .
पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?
बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी.”
फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है.”
बालक अपने पिता की बात समझ चुका था.
अक्सर हम अपनी सही कीमत आंकने मे गलती कर देते है. हम अपनी present status को देख कर अपने आप को valueless समझने लगते है. लेकिन हममें हमेशा अथाह शक्ति होती है. हमारा जीवन हमेशा सम्भावनाओ से भरा होता है. हमारी जीवन मे कई बार स्थितियाँ अच्छी नही होती है पर इससे हमारी Value कम नही होती है. मनुष्य के रूप में हमारा जन्म इस दुनिया मे हुआ है इसका मतलब है हम बहुत special और important हैं . हमें हमेशा अपने आप को improve करते रहना चाहिये और अपनी सही कीमत प्राप्त करने की दिशा में बढ़ते रहना चाहिये.

ब्राह्मण है एक परंतु सरनेम अलग क्यों ?

मेरे एक मित्र ने मुझसे प्रश्न किया कि ब्राह्मण
तो एक ही है परंतु कोई तिवारी है कोई
दुबे है कोई शुक्ला पाठक चौबे आदि
अलग – अलग नाम क्यों ?
मैंने उनसे बोला की आपने सही
प्रश्न किया इसका कारण मैं लिख
रहा हूँ- ब्राम्हणो का उपनाम
अलग अलग कैसा हुआ यह लेख पूरा
पढ़े..
प्राचीन काल में महर्षि कश्यप के पुत्र कण्वय की आर्यावनी नाम की देव कन्या पत्नी हुई। ब्रम्हा की आज्ञा से
दोनों कुरुक्षेत्र वासनी
सरस्वती नदी के तट
पर गये और कण् व चतुर्वेदमय
सूक्तों में सरस्वती देवी की स्तुति करने लगे
एक वर्ष बीत जाने पर वह देवी प्रसन्न हो वहां आयीं और ब्राम्हणो की समृद्धि के लिये उन्हें
वरदान दिया ।
वर के प्रभाव कण्वय के आर्य बुद्धिवाले दस पुत्र हुए जिनका
क्रमानुसार नाम था –

उपाध्याय,
दीक्षित,
पाठक,
शुक्ला,
मिश्रा,
अग्निहोत्री,
दुबे,
तिवारी,
पाण्डेय,
और
चतुर्वेदी ।

इन लोगो का जैसा नाम था वैसा ही गुण। इन लोगो ने नत मस्तक हो सरस्वती देवी को प्रसन्न किया। बारह वर्ष की अवस्था वाले उन लोगो को भक्तवत्सला शारदा देवी ने
अपनी कन्याए प्रदान की।
वे क्रमशः
उपाध्यायी,
दीक्षिता,
पाठकी,
शुक्लिका,
मिश्राणी,
अग्निहोत्रिधी,
द्विवेदिनी,
तिवेदिनी
पाण्ड्यायनी,
और
चतुर्वेदिनी कहलायीं।

फिर उन कन्याआं के भी अपने-अपने पति से सोलह-सोलह पुत्र हुए हैं

वे सब गोत्रकार हुए जिनका नाम –

कष्यप,
भरद्वाज,
विश्वामित्र,
गौतम,
जमदग्रि,
वसिष्ठ,
वत्स,
गौतम,
पराशर,
गर्ग,
अत्रि,
भृगडत्र,
अंगिरा,
श्रंगी,
कात्याय,
और
याज्ञवल्क्य।

इन नामाे से सोलह-सोलह पुत्र जाने जाते हैं।
मुख्य 10 प्रकार ब्राम्हणों ये हैं-
(1) तैलंगा,
(2) महार्राष्ट्रा,
(3) गुर्जर,
(4) द्रविड,
(5) कर्णटिका,
यह पांच “द्रविण” कहे जाते हैं, ये विन्ध्यांचल के दक्षिण में पाय जाते हैं|
तथा
विंध्यांचल के उत्तर मं पाये जाने वाले या वास करने वाले ब्राम्हण
(1) सारस्वत,
(2) कान्यकुब्ज,
(3) गौड़,
(4) मैथिल,
(5) उत्कलये,

उत्तर के पंच गौड़ कहे जाते हैं।

वैसे ब्राम्हण अनेक हैं जिनका वर्णन आगे लिखा है।
ऐसी संख्या मुख्य 115 की है।
शाखा भेद अनेक हैं । इनके अलावा संकर जाति ब्राम्हण अनेक है ।
यहां मिली जुली उत वैसे ब्राम्हण अनेक हैं जिनका वर्णन आगे लिखा है।
ऐसी संख्या मुख्य 115 की है।
शाखा भेद अनेक हैं । इनके अलावा संकर जाति ब्राम्हण अनेक है ।
यहां मिली जुली उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हणों की नामावली 115 की दे रहा हूं।
जो एक से दो और 2 से 5 और 5 से 10 और 10 से 84 भेद हुए हैं,
फिर उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हण की संख्या शाखा भेद से 230 के
लगभग है |
तथा और भी शाखा भेद हुए हैं, जो लगभग 300 के करीब ब्राम्हण भेदों की संख्या का लेखा पाया गया है।
उत्तर व दक्षिणी ब्राम्हणां के भेद इस प्रकार है
81 ब्राम्हाणां की 31 शाखा कुल 115 ब्राम्हण संख्या
(1) गौड़ ब्राम्हण,
(2)मालवी गौड़ ब्राम्हण,
(3) श्री गौड़ ब्राम्हण,
(4) गंगापुत्र गौडत्र ब्राम्हण,
(5) हरियाणा गौड़ ब्राम्हण,
(6) वशिष्ठ गौड़ ब्राम्हण,
(7) शोरथ गौड ब्राम्हण,
(8) दालभ्य गौड़ ब्राम्हण,
(9) सुखसेन गौड़ ब्राम्हण,
(10) भटनागर गौड़ ब्राम्हण,
(11) सूरजध्वज गौड ब्राम्हण(षोभर),
(12) मथुरा के चौबे ब्राम्हण,
(13) वाल्मीकि ब्राम्हण,
(14) रायकवाल ब्राम्हण,
(15) गोमित्र ब्राम्हण,
(16) दायमा ब्राम्हण,
(17) सारस्वत ब्राम्हण,
(18) मैथल ब्राम्हण,
(19) कान्यकुब्ज ब्राम्हण,
(20) उत्कल ब्राम्हण,
(21) सरवरिया ब्राम्हण,
(22) पराशर ब्राम्हण,
(23) सनोडिया या सनाड्य,
(24)मित्र गौड़ ब्राम्हण,
(25) कपिल ब्राम्हण,
(26) तलाजिये ब्राम्हण,
(27) खेटुुवे ब्राम्हण,
(28) नारदी ब्राम्हण,
(29) चन्द्रसर ब्राम्हण,
(30)वलादरे ब्राम्हण,
(31) गयावाल ब्राम्हण,
(32) ओडये ब्राम्हण,
(33) आभीर ब्राम्हण,
(34) पल्लीवास ब्राम्हण,
(35) लेटवास ब्राम्हण,
(36) सोमपुरा ब्राम्हण,
(37) काबोद सिद्धि ब्राम्हण,
(38) नदोर्या ब्राम्हण,
(39) भारती ब्राम्हण,
(40) पुश्करर्णी ब्राम्हण,
(41) गरुड़ गलिया ब्राम्हण,
(42) भार्गव ब्राम्हण,
(43) नार्मदीय ब्राम्हण,
(44) नन्दवाण ब्राम्हण,
(45) मैत्रयणी ब्राम्हण,
(46) अभिल्ल ब्राम्हण,
(47) मध्यान्दिनीय ब्राम्हण,
(48) टोलक ब्राम्हण,
(49) श्रीमाली ब्राम्हण,
(50) पोरवाल बनिये ब्राम्हण,
(51) श्रीमाली वैष्य ब्राम्हण (51) श्रीमाली वैष्य ब्राम्हण,
(52) तांगड़ ब्राम्हण,
(53) सिंध ब्राम्हण,
(54) त्रिवेदी म्होड ब्राम्हण,
(55) इग्यर्शण ब्राम्हण,
(56) धनोजा म्होड ब्राम्हण,
(57) गौभुज ब्राम्हण,
(58) अट्टालजर ब्राम्हण,
(59) मधुकर ब्राम्हण,
(60) मंडलपुरवासी ब्राम्हण,
(61) खड़ायते ब्राम्हण,
(62) बाजरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(63) भीतरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(64) लाढवनिये ब्राम्हण,
(65) झारोला ब्राम्हण,
(66) अंतरदेवी ब्राम्हण,
(67) गालव ब्राम्हण,
(68) गिरनारे ब्राह्मण

प्रस्तुति
एम के पाण्डेय निल्को
(युवा ब्लॉगर और कवि)

चार पत्नियां – बोध कथा

एक आदमी की चार पत्नियाँ थी।
वह अपनी चौथी पत्नी से बहुत प्यार करता था और उसकी खूब देखभाल करता व उसको सबसे श्रेष्ठ देता।

वह अपनी तीसरी पत्नी से भी प्यार करता था और हमेशा उसे अपने मित्रों को दिखाना चाहता था। हालांकि उसे हमेशा डर था की वह कभी भी किसी दुसरे इंसान के साथ भाग सकती है।

वह अपनी दूसरी पत्नी से भी प्यार करता था।जब भी उसे कोई परेशानी आती तो वे अपनी दुसरे नंबर की पत्नी के पास जाता और वो उसकी समस्या सुलझा देती।

वह अपनी पहली पत्नी से प्यार नहीं करता था जबकि पत्नी उससे बहुत गहरा प्यार करती थी और उसकी खूब देखभाल करती।

एक दिन वह बहुत बीमार पड़ गया और जानता था की जल्दी ही वह मर जाएगा।उसने अपने आप से कहा,” मेरी चार पत्नियां हैं, उनमें से मैं एक को अपने साथ ले जाता हूँ…जब मैं मरूं तो वह मरने में मेरा साथ दे।”

तब उसने चौथी पत्नी से अपने साथ आने को कहा तो वह बोली,” नहीं, ऐसा तो हो ही नहीं सकता और चली गयी।

उसने तीसरी पत्नी से पूछा तो वह बोली की,” ज़िन्दगी बहुत अच्छी है यहाँ।जब तुम मरोगे तो मैं दूसरी शादी कर लूंगी।”

उसने दूसरी पत्नी से कहा तो वह बोली, ” माफ़ कर दो, इस बार मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती।ज्यादा से ज्यादा मैं तुम्हारे दफनाने तक तुम्हारे साथ रह सकती हूँ।”

अब तक उसका दिल बैठ सा गया और ठंडा पड़ गया।तब एक आवाज़ आई,” मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ।तुम जहाँ जाओगे मैं तुम्हारे साथ चलूंगी।”

उस आदमी ने जब देखा तो वह उसकी पहली पत्नी थी।वह बहुत बीमार सी हो गयी थी खाने पीने के अभाव में।
वह आदमी पश्चाताप के आंसूं के साथ बोला,” मुझे तुम्हारी अच्छी देखभाल करनी चाहिए थी और मैं कर सकता थाI”

दरअसल हम सब की चार पत्नियां हैं जीवन में।

1. चौथी पत्नी हमारा शरीर है।
हम चाहें जितना सजा लें संवार लें पर जब हम मरेंगे तो यह हमारा साथ छोड़ देगा।

2. तीसरी पत्नी है हमारी जमा पूँजी, रुतबा। जब हम मरेंगे
तो ये दूसरों के पास चले जायेंगे।

3. दूसरी पत्नी है हमारे दोस्त व रिश्तेदार।चाहेंवे कितने भी करीबी क्यूँ ना हों हमारे जीवन काल में पर मरने के बाद हद से हद वे हमारे अंतिम संस्कार तक साथ रहते हैं।

4. पहली पत्नी हमारी आत्मा है, जो सांसारिक मोह माया में हमेशा उपेक्षित रहती है।

यही वह चीज़ है जो हमारे साथ रहती है जहाँ भी हम जाएँ…….
कुछ देना है तो इसे दो….
देखभाल करनी है तो इसकी करो….
प्यार करना है तो इससे करो…

             मिली थी जिन्दगी
      किसी के ‘काम’ आने के लिए..

           पर वक्त बीत रहा है
     कागज के टुकड़े कमाने के लिए..                       
   क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..?
ना कफन मे ‘जेब’ है ना कब्र मे ‘अलमारी..’

       और ये मौत के फ़रिश्ते तो
           ‘रिश्वत’ भी नही लेते…

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन

अभिव्यक्ति की आज़ादी
पर लगा कर बैन
आ ही रहा होगा
उनके दिल को चैन
बोलने पर उन्होंने
भले लगाई पाबन्दी है
पर ‘निल्को’ हम तो
लिखने के भी आदी है
इतनी आसानी से
नहीं छोड़ेगे ‘जानेमन’
क्यू की ये तो है
किसी का दीवानापन
जितना दूर जाना चाहोगी
पास चले आयेगे
तुम्हे दूर से ही चूमकर
घर को लौट आयेगे
सस्ती महँगी जब
बातें तुम करती हो
अनमोल का भी
मोल लगाती हो
पर कई बार तो
तुम भी ब्लाक करके
अपने मन का
भड़ास निकलती हो
############
एम के पाण्डेय निल्को

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया
उनके लिए भी लिख, उनका भी मन रख दिया
पर ऐसी नज़रो से घूरते है वो मुझको
की ‘नज़र निल्को की’ मैंने शीर्षक रख लिया
एम के पाण्डेय निल्को

मैं सुबह का अख़बार नहीं होता

मंगलवार की सुबह
जल्दी ही नीद खुली
लगा हुआ किसी मुद्दे पर सुबह
और किसी को जीत मिली
रूप का
रंग का
बाजार नहीं होता
भले कमज़ोर हूँ
पर लाचार नहीं होता
निल्को को पढ़ना है तो
उसकी नज़र से पढ़िए
किसी के लिए भी
मैं सुबह का अख़बार नहीं होता
न जाने क्यू बैठे बैठे ही
कही दर्द हुआ करता है
कौन दुखता हुआ
मेरे घाव छुआ करता है
जो सामने की भीड़ में शामिल है
वह शख्स भी किसी का कातिल है
टूटते ये अजीबोगरीब रिश्ते
बस कलम,कैमरा और कीबोर्ड
यही निल्को के सिपाही है

बड़ा महत्त्व है

” बड़ा महत्त्व  है ”
—————————-
👉 ससुराल में साली का
👉 बाग  में  माली     का
👉 होठों  में  लाली    का
👉 पुलिस में  गाली   का
👉 मकान  में  नाली   का
👉 कान   में   बाली   का
👉 पूजा   में   थाली   का
👉 खुशी  में  ताली   का…. बड़ा महत्त्व है…
:
👉 फलों  में  आम  का
👉 भगवान में  राम  का
👉 मयखाने में  जाम का
👉 फैक्ट्री  में  काम  का
👉 सुर्खियों में  नाम  का
👉 बाजार  में  दाम  का
👉 मोहब्बत में शाम  का……. बड़ा महत्त्व है.
👉 व्यापार  में  घाटा  का
👉 लड़ाई  में  चांटा   का
👉 रईसों  में   टाटा   का
👉 जूत्तों  में  बाटा   का….. बड़ा  महत्त्व  है

👉 फिल्म  में  गाने  का
👉 झगड़े   में  थाने  का
👉 प्यार   में  पाने    का
👉 अंधों   में  काने   का
👉 परिंदों  में  दाने   का…….. बड़ा  महत्त्व है

👉जिंदगी में मोहब्बत का
👉 परिवार में इज्जत का
👉तरक्की में किस्मत का
👉 दीवानों में हसरत  का……. बड़ा महत्त्व है

👉 पंछियों में बसेरे  का
👉 दुनिया में सवेरे   का
👉 डगर   में  उजेरे  का
👉 शादी  में  फेरे   का…… बड़ा महत्त्व  है

👉 खेलों  में  क्रिकेट   का
👉 विमानों में   जेट    का
👉 शरीर    में   पेट   का
👉 दूरसंचार में  नेट  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 मौजों  में  किनारों का
👉 गुर्वतों  में  सहारों   का
👉 दुनिया  में  नजारों का
👉 प्यार   में   इशारों  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 खेत  में  फसल   का
👉 तालाब में कमल  का
👉 उधार  में  असल  का
👉 परीक्षा में  नकल  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 ससुराल में जमाई का
👉 परदेश  में  कमाई का
👉 जाड़े  में  रजाई   का
👉 दूध   में  मलाई  का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 बंदूक  में  गोली   का
👉 पूजा   में  रोली  का
👉 समाज में बोली  का
👉 त्योहारों में होली का
👉 श्रृंगार में रूप का……. बड़ा महत्त्व है

👉 बारात  में  दूल्हे  का
👉 रसोई  में  चूल्हे  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 सब्जियों में  आलू का
👉 बिहाऱ   में   लालू  का
👉 मशाले में   बालू   का
👉 जंगल   में  भालू  का
👉 बोलने   में  तालू  का….. बड़ा महत्त्व है

👉 मौसम में सामण  का
👉 घर   में   आँगण  का
👉 दुआ  में  माँगण   का
👉 लंका  में  रावण   का….. बड़ा महत्त्व है

👉 चमन  में  बहार   का
👉 डोली  में  कहार   का
👉 खाने   में  अचार  का
👉 मकान में  दीवार  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 सलाद  में   मूली  का
👉 फूलों    में  जूली   का
👉 सजा   में  सूली   का
👉 स्टेशन  में  कूली  का…… बड़ा महत्त्व है

👉 पकवानों  में  पूरी  का
👉 रिश्तों  में    दूरी   का
👉 आँखों  में   भूरी   का
👉 रसोई   में   छूरी   का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 माँ    की   गोदी  का
👉 देश   में     मोदी  का…… बड़ा महत्त्व है

आखिर कब तक ढूँढेगा निल्को

बहुत याद आउगा 
जब छोड़ के जाउगा
चाहे लाख बुराई क्यू न हो
पर तुम जैसा दोस्त नहीं पाउगा

बहुत छेड़ता हूँ न मैं
परेशान भी करता हूँ न मैं
गुस्सा तुम होते हो मन ही मन
पर मनाता भी न हूँ मैं

क्यू सताते हो कुछ इस तरह
मिलते नहीं हो रोज की  तरह
आखिर कब तक ढूँढेगा निल्को
तुम्हे बीच इस शहर

कहती हो न की छोडो मुझको
अपनी बाहों में न लो मुझको
उस दिन आँसू न बहाना
जिसदिन छोड़ जाऊगा तुम सबको

बहुत ही अच्छा मैं तो नहीं
दिल से बच्चा मैं तो नहीं
पर एक बात तो कहूँगा ही
थोडा सा सच्चा मैं भी सही

एम के पाण्डेय निल्को 




नज़र निल्को की – 20 बातें (सुविचार)

***************************************
1. जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना क्योक़ि बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।
**************************************
2. किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस ‘मक्खी’ की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म कोछोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है।
**************************************
3. टूट जाता है गरीबी मे वो रिश्ता जो खास होता है । हजारो यार बनते है जब पैसा पास होता है.।
************************************
4. मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।
************************************
5..जल्द मिलने वाली चीजे ज्यादा दिन तक नही चलती और जो चीजे ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नही मिलती ।
************************************
6. बुरे दिनो का एक अच्छा फायदा अच्छे-अच्छे दोस्त परखे जाते है।
************************************
7. बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और खरगोश की तरह जाता है!
*************************************
8. छोटी छोटी बातो मे आनंद खोजना चाहिए क्योकि बङी बङी तो जीवन मे कुछ ही होती है।
*************************************
9. ईश्वर से कुछ मांगने पर न मिले तो उससे नाराज ना होना क्योकि ईश्वर वह नही देता जो आपको अच्छा लगता है बल्कि वह देता है जो आपके लिए अच्छा होता है।
************************************
10. लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
************************************
11. ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।
************************************
12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हे तोङना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो अगर प्यास नही बुझा सकता पर आग तो बुझा सकता है।
***********************************
13. अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला, मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।
************************************
14. इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
************************************
15. जब हम बोलना नही जानते थे, तो हमारे बोले बिना’माँ’ हमारी बातो को समझ जाती थी और आज हम हर बात पर कहते है ”छोङो भी ‘माँ’ आप नही समझोगी”।
************************************
16. ” शुक्रगुजार हूँ उन तमाम लोगो का जिन्होने बुरे वक्त मे मेरा साथ छोङ दिया क्योकि उन्हे भरोसा था कि मै मुसीबतो से अकेले ही निपट सकता हूँ।
************************************
17. शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
*************************************
18. जिदंगी मे उतार चङाव का आना बहुत जरुरी है क्योकि ECG मे सीधी लाईन का मतलब मौत ही होता है।
*************************************
19. रिश्ते, आजकल रोटी की तरह हो गए जरा सी आंच तेज क्या हुई जल भुनकर खाक हो जाते।
*************************************
20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो “खुद अच्छे बन जाओ” आपसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो जाए।

उठो लाल अब आँखे खोलो

उठो लाल अब आँखे खोलो
मोबाईल ऑन कर नेट टटोलो..
चलो देख लो वाट्सएप पहले
ज्ञान जोक्स पर रोले हंस ले।
फेसबुक की है दूसरी बारी
जहाँ दिखेगी दुनिया सारी
देखो किसने क्या है डाला
किसने कितना किया घोटाला
कौन आज दुनिया में आया
किसने किससे केक कटाया
ट्विटर की तो बात निराली
चार शब्द् में गाथा गा ली।
उठो तुम भी कुछ लिख लिख बोलो
उठो लाल अब आँखे खोलो
मोबाईल ऑन कर नेट टटोलो..!!

ज़िन्दगी है एक पहेली – एम के पाण्डेय निल्को


गांव में छोड़ आये वो बड़ी सी हवेली
शहरो में ढूंढते है वो एक सहेली
आराम या हराम से जिए जा रहे है
पर कौन समझाए की ज़िन्दगी है एक पहेली
छप रहे थे वो बन कर ख़बरे
कुछ लोग खड़े द्वार बन पहरे
उनका बनना और बिगड़ना मंज़ूर तो था की
क्योकि हम इस रफ़्तार में भी ठहरे
बढ़ चले वो प्रगति के पथ पर
अर्थ नहीं समझे वो इस अर्थ पर
जीतनी रफ़्तार से वो निखर रहे थे
आज देख रहा हूँ उन्हें इस फर्श पर
लोग बाज़ार में आकर बिक भी गए
हमारी कीमत भी वो लगा कर भी गए
पर आज बस इतना कहेगा ये निल्को
की वो तो लोगो के पान की पिक से भी गए

एम के पाण्डेय निल्को


आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान दिखाता हूँ

आँखों के दरमियान मैं
गुलिस्तां दिखाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मैं आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|
खेजड़ी के साखो पर लटके फूलो की कीमत
बताता हुँ,
मै साम्भर की झील से देखना कैसे नमक
उठाता हुँ|
मै शेखावाटी के रंगो से
पनपी चित्रकला दिखाता हुँ,
महाराणा प्रताप के शौर्य
की गाथा सुनाता हुँ|
पद्मावती और हाड़ी रानी का जोहर
बताता हुँ,
पग गुँघरु बाँध मीरा का मनोहर
दिखाता हुँ|
सोने सी माटी मे पानी का अरमान
बताता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|
हिरन की पुतली मे चाँद के दर्शन कराता हुँ,
चंदरबरदाई के
शब्दों की व्याख्या सुनाता हुँ|
मीठी बोली, मीठे पानी मे जोधपुर की सैर
करता हुँ,
कोटा, बूंदी, बीकानेर और हाड़ोती की मै
मल्हार गाता हुँ|
पुष्कर तीरथ कर के मै चिश्ती को चाद्दर
चढ़ाता हुँ,
जयपुर के हवामहल मै, गीत मोहबत के गाता हुँ|
जीते सी इस धरती पर स्वर्ग का मैं वरदान
दिखाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ||
कोठिया दिखाता हुँ, राज
हवेली दिखाता हुँ,
नज़्ज़रे ठहर न जाए कही मै आपको कुम्भलगढ़
दिखाता हुँ|
घूंघट में जीती मर्यादा और गंगानगर
का मतलब समझाता हुँ,
तनोट माता के मंदिर से मै विश्व
शांति की बात सुनाता हुँ|
राजिया के दोहो से लेके, जाम्भोजी के
उसूल पढ़ाता हुँ,
होठो पे मुस्कान लिए, मुछो पे ताव देते
राजपूत की परिभाषा बताता हुँ|
सिक्खो की बस्ती मे, पूजा के बाद अज़ान
सुनाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|| 
जय जय राजस्थान

राजस्थान दिवस की आप  सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

सोच रहा हूँ लिखू रानीखेत एक्सप्रेस की कहानी

दोस्तों अभी ट्रेन में सफ़र कर रहूँ और मन बेचैन हो रहा है । मुक्तक लिखने की सोचा तो विषय से भटक गया और मुक्तक की जगह लिख दिया पुक्तक । जैसे जैसे ट्रेन आगे बढ़ रही है ठण्ड उसका साथ बखूबी निभा रही है । सोच रहा हूँ लिखू रानीखेत एक्सप्रेस की कहानी निल्को की जुबानी , किन्तु भारतीय रेल इसमें बाधा उत्पन्न कर रही है । न तो कोई चार्जिंग की जगह और ना की कोई माहौल।
अभी तो इन पुक्तक से ही काम चलाये अगली बार कुछ नया जरूर लेकर आउगा । सादर – एम के पाण्डेय निल्को

की मेरे जाने या आने में
निल्को याद आता है ।
जहाँ भी मैं तो जाता हूँ
पास उसको ही पाता हूँ ।।

क्या गज़ब वो सफ़र था
क्या अजब वो पहर था ।
गांव की उसअजीबोगरीब
गलियो में एक शहर था ।।

तुम्हारी याद आती है
नज़ारे जो भो सोचता हूँ।
कोई जब रूप धरता हूँ
तो तुम रास आती हो।।

ठण्ड के इस मौसम में
बर्फ जब भी जमती है।
तुम्हारी सोच की गरमाहट
पसीने से तर बतर करती है।।

एम के पाण्डेय निल्को

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम, गौ हत्या पर पाबंदी और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के सन्दर्भ में VMW Team का सार्वजनिक पत्र

दिनाक : 18 जनवरी 2015
प्रतिष्ठा में
            माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
            प्रधानमंत्री भारत सरकार
            साउथ ब्लॉक रेसकोर्स रोड
            नई दिल्ली- 110001
विषय : गौ हत्या पर पाबंदी  और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के सन्दर्भ में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
            मैं यहां परेशान हूं तथा आपकी कुशलता की खबरें पढ़ता-सुनता-देखता रहता हूं। आप मुझे नहीं पहचानते लेकिन मैं आपको जानता हूं अच्छी तरह से जानता हूं क्योंकि आपको तो बच्चा-बच्चा जानता है। आपको फुर्सत ही कहां? हम जैसे आम-जामुन लोगों को जानने की, अब आप अकबर तो हैं नहीं कि भेष बदलकर जनता के बारे में जान सकें। खैर छोड़िए इन बातों से क्या लाभ। अगर मैं अपना परिचय थोड़े शब्दों में दूं तो मैं वही वोटर हूं जिसे कुछ समय पहले तक आप भगवान मानते थे और आज केवल भोली जनता, जो देख-सुन तो सकती है लेकिन बोलने का साहस नहीं है उसमें। किन्तु आज मैं आप का ध्यान गौ हत्या की तरफ ले जाना चाहुगा । भारत में गौ हत्या को लेकर कई आंदोलन हुए हैं और कई आज भी जारी हैं, लेकिन किसी में भी कोई ख़ास कामयाबी हासिल नहीं हो सकी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्हें जनांदोलन का रूप नहीं दिया गया यह कहना क़तई ग़लत न होगा कि ज़्यादातर आंदोलन स़िर्फ अपनी सियासत चमकाने या चंदा उगाही तक सीमित रहे,  अल कबीर स्लास्टर हाउस में रोज़ हज़ारों गाय काटी जाती हैं, कुछ साल पहले हिंदुत्ववादी संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम भी छेड़ी थी, लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई कि इसका मालिक ग़ैर मुसलमान है तो अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जगज़ाहिर है, गौ हत्या से सबसे बड़ा फ़ायदा तस्करों एवं गाय के चमड़े का कारोबार करने वालों को होता है, इनके दबाव के कारण ही सरकार गौ हत्या पर पाबंदी लगाने से गुरेज़ करती है वरना क्या वजह है कि जिस देश में गाय को माता के रूप में पूजा जाता हो, वहां सरकार गौ हत्या रोकने में नाकाम है। गावो विश्वस्य मातरःअर्थात गौ केवल हिन्दुओं की ही नहीं इस सम्पूर्ण विश्व की माता है ! गाय के अस्तित्व पर इस जगत का अस्तित्व है वेदों में गोघ्नया गायों के वध के संदर्भ हैं और गाय का मांस परोसने वाले को महापापी और अति दुष्ट कहा गया है वेदों में गाय को अघन्या या अदिती अर्थात् कभी न मारने योग्य कहा गया है और गोहत्यारे के लिए अत्यंत कठोर दण्ड के विधान भी है ,गाय का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है।  
 आज हमारे देश में गंगा मैया, यमुना मैया, गौ माता कुछ भी सुरक्षित नहीं है क्यों…?
हैरत की बात यह है कि गौ हत्या पर पाबंदी लगाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है, इसके बावजूद अभी तक इस पर कोई विशेष अमल नहीं किया गया, भारत में गौ हत्या को बढ़ावा देने में अंग्रेज़ों ने अहम भूमिका निभाई  । जब 1700 ई. में अंग्रेज़ भारत आए थे, उस वक़्त यहां गाय और सुअर का वध नहीं किया जाता था, हिंदू गाय को पूजनीय मानते थे और मुसलमान सुअर का नाम तक लेना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अंग्रेजों को इन दोनों ही पशुओं के मांस की ज़रूरत थी, इसके अलावा वे भारत पर क़ब्ज़ा करना चाहते थे, उन्होंने मुसलमानों को भड़काया कि क़ुरआन में कहीं भी नहीं लिखा है कि गाय की क़ुर्बानी हराम है, इसलिए उन्हें गाय की क़ुर्बानी करनी चाहिए, उन्होंने मुसलमानों को लालच भी दिया और कुछ लोग उनके झांसे में आ गए, इसी तरह उन्होंने दलित हिंदुओं को सुअर के मांस की बिक्री कर मोटी रकम कमाने का झांसा दिया ग़ौरतलब है कि यूरोप दो हज़ार बरसों से गाय के मांस का प्रमुख उपभोक्ता रहा है भारत में अपने आगमन के साथ ही अंग्रेज़ों ने यहां गौ हत्या शुरू करा दी, 18वीं सदी के आख़िर तक बड़े पैमाने पर गौ हत्या होने लगी, अंग्रेज़ों की बंगाल, मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी सेना के रसद विभागों ने देश भर में कसाईखाने बनवाएजैसे-जैसे यहां अंग्रेज़ी सेना और अधिकारियों की तादाद बढ़ने लगी, वैसे-वैसे गौ हत्या में भी बढ़ोत्तरी होती गई, गौ हत्या और सुअर हत्या की आड़ में अंग्रेज़ों को हिंदू और मुसलमानों में फूट डालने का भी मौक़ा मिल गया, इस दौरान हिंदू संगठनों ने गौ हत्या के ख़िला़फ मुहिम छेड़ दी, आख़िरकार महारानी विक्टोरिया ने वायसराय लैंस डाउन को पत्र लिखा, महारानी ने कहा, हालांकि मुसलमानों द्वारा की जा रही गौ हत्या आंदोलन का कारण बनी है, लेकिन हक़ीक़त में यह हमारे ख़िलाफ़ है, क्योंकि मुसलमानों से कहीं ज़्यादा गौ वध हम कराते हैं, इसके ज़रिए ही हमारे सैनिकों को गौ मांस मुहैया हो पाता है, आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र ने भी 28 जुलाई, 1857 को बकरीद के मौक़े पर गाय की क़ुर्बानी न करने का फ़रमान जारी किया था, साथ ही चेतावनी दी थी कि जो भी गौ वध करने या कराने का दोषी पाया जाएगा, उसे मौत की सज़ा दी जाएगी, इसके बाद 1892 में देश के विभिन्न हिस्सों से सरकार को हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजकर गौ वध पर रोक लगाने की मांग की जाने लगी इन पत्रों पर हिंदुओं के साथ मुसलमानों के भी हस्ताक्षर होते थेइस समय भी देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और भारतीय गौवंश की रक्षा के लिए कठोर क़ानून बनाए जाने की मांग की जा रही है, गाय की रक्षा के लिए अपनी जान देने में भारतीय मुसलमान किसी से पीछे नहीं हैं, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के गांव नंगला झंडा निवासी डॉ. राशिद अली ने गौ तस्करों के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी थी, जिसके चलते 20 अक्टूबर, 2003 को उन पर जानलेवा हमला किया गया और उनकी मौत हो गई उन्होंने 1998 में गौ रक्षा का संकल्प लिया था और तभी से डॉक्टरी का पेशा छोड़कर वह अपनी मुहिम में जुट गए थे, गौ वध को रोकने के लिए विभिन्न मुस्लिम संगठन भी सामने आए हैं, दारूल उलूम देवबंद ने एक फ़तवा जारी करके मुसलमानों से गौ वध न करने की अपील की है, दारूल उलूम देवबंद के फतवा विभाग के अध्यक्ष मुती हबीबुर्रहमान का कहना है कि भारत में गाय को माता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए मुसलमानों को उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गौ वध से ख़ुद को दूर रखना चाहिए, उन्होंने कहा कि शरीयत किसी देश के क़ानून को तोड़ने का समर्थन नहीं करती, क़ाबिले ग़ौर है कि इस फ़तवे की पाकिस्तान में कड़ी आलोचना की गई थी, इसके बाद भारत में भी इस फ़तवे को लेकर ख़ामोशी अख्तियार कर ली गई
गाय भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, यहां गाय की पूजा की जाती है. यह भारतीय संस्कृति से जुड़ी है, महात्मा गांधी कहते थे कि अगर निस्वार्थ भाव से सेवा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहीं देखने को मिलता है तो वह गौ माता है, गाय का ज़िक्र करते हुए वह लिखते हैं, गौ माता जन्म देने वाली माता से श्रेष्ठ है, हमारी माता हमें कई वर्ष दुग्धपान कराती है और यह आशा करती है कि हम बड़े होकर उसकी सेवा करेंगे, गाय हमसे चारे और दाने के अलावा किसी और चीज़ की आशा नहीं करती हमारी मां प्राय: रूग्ण हो जाती है और हमसे सेवा की अपेक्षा करती है, गौ माता शायद ही कभी बीमार पड़ती है, वह हमारी सेवा आजीवन ही नहीं करती, अपितु मृत्यु के बाद भी करती है अपनी मां की मृत्यु होने पर हमें उसका दाह संस्कार करने पर भी धनराशि व्यय करनी पड़ती है, गौ माता मर जाने पर भी उतनी ही उपयोगी सिद्ध होती है, जितनी अपने जीवनकाल में थी हम उसके शरीर के हर अंग-मांस, अस्थियां, आंतों, सींग और चर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं, यह बात जन्म देने वाली मां की निंदा के विचार से नहीं कह रहा हूं, बल्कि यह दिखाने के लिए कह रहा हूं कि मैं गाय की पूजा क्यों करता हूंदरअसल भारत में गौ वध रोकने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने की ज़रूरत है, मुसलमान तो गाय का गोश्त खाना छोड़ देंगे, लेकिन गाय के चमड़े का कारोबार करने वाले क्या इससे हो रही मोटी कमाई छोड़ने के लिए तैयार हैं,  इस बात में कोई दो राय नहीं कि गौ हत्या से सबसे ज़्यादा फ़ायदा ग़ैर मुसलमानों को है और उन्हीं के दबाव में सरकार गौ हत्या पर पाबंदी नहीं लगाना चाहती

देश की करोड़ों जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए आप से प्रार्थना है कि आप गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करके ऐसा विधान बना दें कि गौ हत्या करने वाले को कड़ी सजा हो जाये। आप की बड़ी मेहरबानी होगी। आपकी के सरकार की आंखें अब भी खुल जायें तो गौ माता की आप पर अति कृपा होगी ऐसा मेरा मानना है ।
राष्ट्रहित व जनहित में आपके सकारात्मक उत्तर की अपेक्षा के साथ आपको पुनः प्रणाम!
जय हिन्द ….!
भवदीय
एम के पाण्डेय निल्को
राकड़ी, सोडाला, जयपुर 302006

+91-9024589902 



एम के पाण्डेय ‘निल्को’ की कविता – वो दूरिया बढ़ाते गए

वो दूरिया बढ़ाते गए
और कुछ लोग यह देख कर मुस्कुराते गए
इस ज़िंदगी के कशमकश में
शायद निल्को को वो भुलाते गए
जब याद दिन वो आते है
इतिहास बनाए जाते है
ढ़ूढ़ते है सबको इधर उधर
पर तन्हा की ख़ुद को पाते है
जब जब तुम मुझसे दूर गए
शायद हमें तुम भूल गए
पर पुरानी अपनी बातों से
कहा तुम चूक गए
पर सुनो लकीरें भी बड़ी अजीब होती हैं
माथे पर खिंच जाएँ तो किस्मत बना देती हैं
जमीन पर खिंच जाएँ तो सरहदें बना देती हैं
खाल पर खिंच जाएँ तो खून ही निकाल देती हैं
और रिश्तों पर खिंच जाएँ तो दीवार बना देती हैं
जब जब तुम मौन रहते हो
तब तब मैं गुज़रते लम्हों में सदिया तलाश करता हूँ
में अपने आप में ही खामिया तलाश करता हूँ
अब तो  मेरा खुदसे मिलने को जी चाहता है
काफी कुछ सुना रहा हूँ अपने बारे में
इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ
लेकिन शायद तुमने ही ठीक से न पढ़ा है मुझे
किन्तु ये सबक मिल ही गया जाते जाते मुझे
अच्छे होते हैं बुरे लोग
कम से कम अच्छे होने का,
वे दिखावा तो नहीं करते………
सादर



एम के पाण्डेय निल्को

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!
« Older Entries Recent Entries »