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बात बात पर अवरोध क्यों की हम स्वतंत्र है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

बात-बात पर अवरोध,क्योकि हम स्वतंत्र हैं।
 एम.के.पाण्डेय “निल्को”

      नगर निगम ने कई दिनों से मोहल्लों का कचड़ा नहीं उठाया,लोगो ने रोड जाम कर दिया। गुस्सा बहुत था,इसलिए वाहनो पर पथराव किया गया । स्कूल मे मिड डे मील नहीं बना, छोटे बच्चों को लेकर अभिभावक सड़क पर आ गये । परिवहन विभाग के बसों के शीशे तोड़ दिये। शहर मे शोहदों ने किसी से छेड़खानी की। किसी शरीफ से नहीं देखा गया ,वह मना करने लगा तो विवाद हो गया । विवाद बढ़ा तो बात चक्काजाम पर आ गई। सिटी मजिस्ट्रेट ने समझाबुझा कर जाम समाप्त कराया । महाविद्यालय मे एडमिशन नहीं तो जाम ……. । बात-बात पर अवरोध, क्योकि हम स्वतंत्र हैं। हालत यह है की –
कुछ घरों मे मुश्किल है
सुबह-शाम चूल्हे जलाना,
बड़ा आसान हो गया है
बात-बात पर बस्ती जलाना।
      सामान्‍य रूप में आजादी का अर्थ पूर्ण तौर पर स्‍वतंत्र होना है , जिसमें किसी का भी कोई हस्‍तक्षेप न हो। पर मनुष्‍य के जीवन में वैसी आजादी किसी काम की नहीं , क्‍यूंकि इसमें उसके समुचित विकास की कोई संभावना नहीं बनती।  लेकिन आज स्वतंत्रता का मतलब बदल गया है। हम स्वच्छंद होते जा रहे है। 15 अगस्त 1947 से आज तक की राष्ट्रीय यात्रा का विश्लेषण करे तो बहुत कुछ अपेक्षित नहीं दिखाई दे रहा है। यहा अंग्रेज़ नहीं है,न उनकी व्यवस्था है। सब कुछ हमारा है, लेकिन हम संतुष्ट नहीं है। सत्ता के स्तर पर सबसे पहले तो केंद्र और राज्य सरकारें ही स्वतंत्र नहीं हैं। आज सब गोलमाल हो गया है। राज्य सरकारे उन मामलों में भी केंद्र पर निर्भर हैं, जिनमें उन्हें स्वतंत्र होना चाहिए। शरीर से हम भारतीय, दिल और दिमाग से पश्चिमी धारा के गुलाम हो गए। यह सब आज हमारे खान-पान,रीति-रिवाज़,बोल-चाल तथा पहनावे में साफ दिख रहा है। हमारे स्वतंत्र व्यवहार के कारण चहुंओर क्या दीख रहा है? अपने घर से ही शुरुआत करें? पढ़ाईलिखाई के कारण आत्मनिर्भरता आती है, आर्थिक उन्नति होती है। पर इस आत्मनिर्भरता ने व्यक्ति को स्वच्छंद बना दिया है। स्वच्छंदता स्वतंत्रता नहीं है।  स्वच्छंदता का आलम यह है कि देश की सामूहिक स्वतंत्रता को ध्वस्त करने के लिए न जाने कितने आतंकी, अलगाववादी और विध्वसंक संगठन खड़े हो गए। इन संगठनों के कारण समाज जितना तबाह हो रहा है, शायद साम्राच्यवाद के समय भी न हुआ हो।
      अंग्रेज़ो को केवल गालिया देकर स्वतंत्रा की जयकार करने से पहले यदि अपने आस-पास के पुलो,भवनो पर नज़र दौड़ाए, तो देखते है की इतने सालो पहले की बनी इमारत खड़ी होकर इठला रही है और जिस भवन, पुल को आज़ाद भारत के कमीशनबाज नेताओ,ठेकेदारो ने बनवाया है वह धराशायी हो गए । जबसे देश आजाद हुआ है हमने केवल अपने बारे में सोचा है. मेरा भारत महान कहने वाले कई लोग मिल जाते है परउसमे उनका क्या योगदान है ये वो नहीं बता पाते. मानो उनके यहाँ पैदा होने से ही ये देश महान हुआ हो. इस देश के लिए जो लोग कुर्बान हो गए उनके सपनोके भारत को हमने कही खो दिया है।  स्वतंत्रा के मतलब इतना बदल गए हैं कि किसी कवि कि यह लाइन बहुत ही सटीक बैठ रही है –
देखता हूं चलन सियासत का,
हर कहीं बैर के बवंडर हैं।
फर्क ऊंचाइयों मे है लेकिन,
नीचता मे सभी बराबर हैं।
      बहुत दुःख का विषय है कि स्वराज्यप्राप्ति के इतने वर्षों बाद भी सामाजिक और राजनैतिक हालत इतने अधिक चिंताजनक हैं। समाज में स्वार्थ लगातार बढ़ रहा है। अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। आतंकवाद, नक्सलवाद, विदेशी घुसपैठ इत्यादि खतरे देश को चारों ओर से घेर रहे हैं। देश के किसी न किसी भाग से प्रतिदिन किसी आतंकवादी घटना,नक्सली हमले या किसी बम विस्फोट का समाचार अवश्य मिलता है और ऐसे कठिन समय में सरे मतभेद भुलाकर एक होने और इन हमलावरों को कुचलने कि बजाय हमभाषावाद, प्रांतवाद और मजहबी उन्माद से ग्रस्त होकर आपस में ही लड़ रहे हैं। या तो हमें सत्य दिखाई नहीं देता, या हम देखना ही नहीं चाहते। किसी को केवल अपनी जाति की चिंता है और कोई राष्ट्र की बजाय केवल किसी समुदायविशेष के हित को ही प्राथमिकता देता है।  जिस देश में युवावस्था का अर्थ बल, बुद्धि एवं विद्या होना चाहिए, वहाँ अधिकांश युवा इसके विपरीत धूम्रपान, मद्यपान और ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की चपेट में हैं। उनके जीवन में संयम, धैर्य तथा शान्ति का स्थान स्वच्छंदता, उन्मुक्त जीवन शैली तथा विवेकहीन उन्माद ने ले लिया है। अधिकांश युवाओं को क्रांतिकारियों की कम और क्रिकेट की जानकारी अधिक है। विदेशी वस्तुओं तथा विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर, खादी को प्रतीक बनाकर स्वदेशी के प्रयोग का संदेश देने वाले महात्मा गाँधी के देश में आज कोने कोने तक विदेशी वस्तुओं के विक्रेता पुनः पहुँच गए हैं। जिस देश में कभीजय जवानजय किसानका मंत्र गूंजता था, वहाँ शासन की नीतियों से व्यथित होकर शहीद सैनिकों के परिजन सरकार को सभी पदक लौटा रहे हैं और किसान प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। सोने की चिडिया कहलने वाला देश छोटेछोटे कार्यों में आर्थिक सहायता के लिए कभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, तो कभी विश्व बैंक की और देखता है। हमारी आर्थिक नीतियों से आज भी भारत की बजाय बाहरी देशों को ही अधिक लाभ हो रहा है। ऐसी स्थिति में हम कैसे कह सकते हैं की हम स्वतंत्र हैं?
      आज यह आवश्यक है कि देश आत्मविश्लेषण करे। देश, राज्य और व्यक्ति को स्वतंत्र बनाया जाए स्वच्छंद नहीं। सर्वधर्म समभाव, सर्वे भवंतु सुखिन: और तेन त्यक्तेन भुंजीथ: जैसे संबल हमारे पास हैं। अंत कि चार लाइनों को भी ध्यान से पढ़ कर आप अपने सुझाव या शिकायत VMW Team को लिखने के लिए स्वतंत्र है ।
हम तो स्वतंत्र होते हुए भी परतंत्र हैं
यहाँ ना खुशियाँ हैं, ना खिलखिलाहट
यहाँ तो चलता है बस आतंकवादी तंत्र
यह कैसा प्रजातंत्र है, यह कैसा लोकतंत्र
कोई हमें बतलाये तो
क्या यही स्वतंत्र है?
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 एम.के.पाण्डेय “निल्को”
+91-9024589902

 

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….बंजारे को घर मिला

दोस्तो मेरे मित्र सिद्धार्थ सिंह श्रीनेत कहते है की आज कल रचनाओ मे अलंकार का प्रयोग देखने को कम ही मिलता है , उनकी इस बात से कुछ हट तक सहमत मैं भी हूँ । बहुत कोशिश करने के बाद कुछ प्रयोग करने की कोशिश है, ज़रा आप लोग ही बताए की कोशिश कहा तक सफल रही । साथ मे पाठको की जानकारी के लिए अलंकार के बारे मे भी कुछ जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है, ‘आभूषण। जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभूषणों से शरीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य अलंकारों से काव्य की। काव्य में भाषा को शब्दार्थ से सुसज्जित तथा सुन्दर बनाने वाले चमत्कारपूर्ण मनोरंजन ढंग को अलंकार कहते हैं। भारतीय साहित्य में अनुप्रास, उपमा, रूपक, अनन्वय, यमक, श्लेष, उत्प्रेक्षा, संदेह, अतिशयोक्ति, वक्रोक्ति आदि प्रमुख अलंकार हैं।

 

अब यह रचना आप के लिए …..

समय पर जब समय मिला

सागर मे भी गगन मिला
मुलाक़ात जब उनसे हुई
मानो बंजारे को घर मिला
खुशखबर जब यह सुना
उनके लिए ही गीत गुना
जिसको सर्च किया मैंने यहाँ वहाँ
वह तो मेरे ही करीब मिला
राजनीति पर जब यह कलम चली
काजनीति की लहर चली
गली मोहल्ले और चौराहे पर
मधुलेश की ही बात चली
कुछ सीखने की जब सीख मिली
नहीं किसी से भीख मिली
जब वह अकेले चले थे
तो नहीं यह भीड़ चली
बेशक कवियों की घनी आबादी है
पर लिखने की कहाँ पाबन्दी है
कभी-कभी तो चर्चा मंच पर भी
निल्को की भी लहर चली
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मधुलेश पाण्डेय निल्को

 

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यह जरूरी तो नहीं…… – मधुलेश पाण्डेय ‘निल्को’

मधुलेश पाण्डेय ‘निल्को’

दोस्तो पिछली रचना (तुम्हें दुनिया में जन्नत नज़र आएगी)  को सम्माननीय डॉ. रूप चंद मयंक जी के द्वारा चर्चामंच पर चर्चा की गई । उम्मीद से ज्यादा लोगो द्वारा द्वारा पढ़ी गई इस के लिए सभी पाठको का दिल से शुक्रिया…. आप की प्रतिक्रियाओं से मुझे हमेशा ही उर्जा और चिंतन की दिशा मिलती है, यूं ही आपका स्नेह मिलता रहे, आप लोगो के इस हौसला अफजाई से एक नई रचना आप के सामने प्रस्तुत है, शब्दो को समेटने की कोशिश की है ज़रा आप ही बताए की कितनी सिमटी है या नहीं ?

 

उनके दर पर ही खड़ा हूँ
पर वह अन्दर बुलाये यह जरूरी तो नहीं
मैं अपनी बात कहने की कोशिश की
पर वह मेरी भी सुने यह जरूरी तो नहीं
माना की शब्दो को समेटने की कोशिश की
पर वह सिमट जाए यह जरूरी तो नहीं
जानता हूँ की लोग हसेंगे इस पर भी
पर मैं किसी को रुलाऊ यह जरूरी तो नहीं
चर्चा मंच पर होती है कई लोगो की चर्चा
मधुलेश की भी हो यह जरूरी तो नहीं
नीद तो बिस्तर पे भी आ सकती है
मगर सिर उनकी गोद मे हो ये जरूरी तो नहीं
निल्को की नज़र मे सभी अच्छे है
पर उनकी नज़र मे मैं अच्छा हूँ ये जरूरी तो नहीं
मेरी कलम मे स्याही चाहे हो जितना
हमेशा चलेगी यह जरूरी तो नहीं
रचने की कोशिश की है मैंने भी
पर दुनिया मुझको ही पढ़ेगी यह जरूरी तो नहीं
माना कि खिले हुए फूलों से महक उठताहै गुलशन सारा
दिन और रात मे एक ही खुशबू हो  यह जरूरी तो नहीं
बीमार को मर्ज़ की दवा देनी ही चाहिए
पर वह दवा पिले यह जरूरी तो नहीं
बड़ी मुद्दत से रची है ये रचना
लेकिन ठीक से परोसी जाए यह जरूरी तो नहीं
नदी के किनारे चुप-चाप बैठा हूँ दोस्तो
प्यास मेरी भी मिटेगी यह जरूरी तो नहीं
विराम देने के लिए अंतिम पंक्ति की तलाश मे हूँ
पर वह आज ही मिलेगी यह जरूरी तो नहीं
ज़िंदगी के सफर मे थक जाते है लोग कई
पर मैं अभी थका सा महसूस करू यह जरूरी तो नहीं
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मधुलेश पाण्डेय निल्को

Madhulesh Pandey ‘Nilco’

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तुम्हें दुनिया में जन्नत नज़र आएगी – मधुलेश पाण्डेय ‘निल्को’

आईने के सामने न आया करो
जुल्फों को यू न सवारा करो
अपनी ही नज़र न लगाया करो
यू हंस – हंस कर न इशारा करो
अपनी अदाए यू ही न दिखाया करो
अगड़ाइया लेकर ये जुल्म न डाला करो
मार डालेगी यह अदा यू ही न दिखाया करो
तुम्हें दुनिया में जन्नत नज़र आएगी
निल्को की नज़र से जब तुम देखा करो
सताते हो जिस तरह तुम मुझको
किसी गैर को तो सता कर देखो
खुदा के लिए अब छोड़ तो यह पर्दा
तुम्हारा नहीं अब कोई है कर्जा
इस पर्दे को ज़रा उठा कर के देखो
किसी दिन ज़रा मुस्करा कर के देखो
तुम्हें दुनिया में जन्नत नज़र आएगी
किसी को अपना बना कर के देखो
मैंने दुनिया को आजमा कर के  देखा
अब तुम भी मुझे आजमा कर के देखो
गर वह नाराज़ है तुमसे
किसी दिन उसे मना कर के देखो ……..
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मधुलेश पाण्डेय निल्को
 

Madhulesh Pandey ‘Nilco’

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धन्यवाद ………! 

PM grieved at the passing away of Shri Gopinath Munde.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has condoled the untimely passing away of the Union Minister for Rural Development, Shri Gopinath Munde, in a road accident this morning. Expressing his sadness and shock, the Prime Minister described Shri Gopinath Munde as a true mass leader, who rose to great heights and tirelessly served people.

Following is the text of the Prime Minister’s tweets:

“Extremely saddened & shocked by the demise of my friend & colleague Gopinath Munde ji. His demise is a major loss for the Nation & the Govt.

Gopinath Munde ji was a true mass leader. Hailing from backward sections of society, he rose to great heights & tirelessly served people.

My tributes to a dynamic leader whose premature demise leaves a void hard to fill.

Condolences to Munde ji’s family. We stand by them in this hour of grief.”

(From PMO Website)

श्रद्धांजलि


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, “मुंडे एक सच्चे जननेता थे. वो समाज के पिछड़े वर्ग से आते थे. वो ज़मीन से उठकर ऊंचाई तक पहुंचे और जनता की अथक सेवा की.”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुंडे का असामयिक निधन देश और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी मुंडे के निधन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, “हमारे प्रिय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपीनाथ मुंडे के असमय निधन की ख़बर से दुखी हूं.”

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उन्हें ट्विटर पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मुंडे मेरे दोस्त और महान नेता थे. उनके निधन की ख़बर सुनकर मैं हैरान हूं.”


VMW Team की तरफ से श्री गोपी नाथ जी को श्रद्धांजलि, ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में जगह दें.. और परिवार को इस अपूर्ण क्षति को सहने की शक्ति दें
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