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…वो कहर बरसाती है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

वह पायल नहीं पहनती पांव में
 बस एक काले धागे से कहर बरसाती है
उसकी यही अदा तो ‘निल्को’
मुझे उसका दीवाना बनाती है
बहुत मजे से इठलाती है
 गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती है
माथे पर जब बिंदी लगाती है
तो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है
‘मधुलेश’ का ख्याल आए तो
वह भी कविता बनाती है
जीवन की गहन अनुभूतियों पर
लिखने का प्रयास कर रचना वो बनाती है
मौसम बेईमान हो जाए जो तपाक से
रसोई में जाकर पकोड़े वो बनाती है
बस कुछ ही यूं ही आए हैं बड़े दिनों बाद इस ब्लॉग पर
पढ़कर वह भी इसे सार्थक बनाती है
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एम केपाण्डेयनिल्को

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है


ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है 

क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है 

कलम लिखने को बहुत बेक़रार है 

क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

प्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है 

उनकी चाहत भी बेशुमार है 

मैसेज के साथ साथ ऑडियो भी भेज दिया 

पर किया नहीं आज  तक इजहार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

लेकिन तेरा आशिक बहुत दिलदार है 

प्यार ही जीवन का आधार है 

सोच रहा हूँ क्या लिखू तुम पर ‘निल्को’

वो कहती है तुम्हारी कलम,कैमरा, कम्प्यूटर सब लाजवाब है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

एम के पाण्डेय निल्को 

VMW Team – झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई ने अपने अद्भुत शौर्य और पराक्रम से न सिर्फ अंग्रेजों को नतमस्तक किया बल्कि पूरे विश्व मे भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित किया। रानी लक्ष्मीबाई ने भारतीय इतिहास में वीरता और स्वाभिमान का ऐसा अध्याय जोड़ा है जो सदियों तक देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’ अदम्य साहस के साथ बोला गया यह वाक्य बचपन से लेकर अब तक हमारे साथ है . रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ. उन्हें मणिकर्णिका नाम दिया गया और घर में मनु कहकर बुलाया गया. 4 बरस की थीं, जब मां गुजर गईं. पिता मोरोपंत तांबे बिठूर जिले के पेशवा के यहां काम करते थे और पेशवा ने उन्हें अपनी बेटी की तरह पाला. प्यार से नाम दिया छबीली . मणिकर्णिका का ब्याह झांसी के महाराजा राजा गंगाधर राव नेवलकर से हुआ और देवी लक्ष्मी पर उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा. बेटे को जन्म दिया, लेकिन 4 माह का होते ही उसका निधन हो गया. राजा गंगाधर ने अपने चचेरे भाई का बच्चा गोद लिया और उसे दामोदार राव नाम दिया गया. ग्वालियर के फूल बाग इलाके में मौजूद उनकी समाधि आज भी मर्दानी की कहानी बयां कर रही है. हम सभी ने लक्ष्मीबाई की कहानी सुनी है, लेकिन सुभद्राकुमारी चौहान ने अपनी कलम के जरिए उनकी जो बहादुरी हमारे सामने रखी, उसकी मिसाल दूसरी कोई नहीं.

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी, 

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, 

दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। 


चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ 


कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी, 

लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, 

नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी, 

बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।


वीर शिवाजी की गाथायें उसको याद ज़बानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार, 

देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार, 

नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार, 

सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़। 


महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ 


हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में, 

ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में, 

राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में, 

सुघट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आयी थी झांसी में।


चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई, 

किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई, 

तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई, 

रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।


निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया, 

राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, 

फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया, 

लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया। 


अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ 


अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया, 

व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया, 

डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया, 

राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया। 


रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ 


छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात, 

कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात, 

उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात? 

जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात। 


बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार, 

उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार, 

सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार, 

‘नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार’। 


यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान, 

वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान, 

नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान, 

बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान। 


हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, 

यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी, 

झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी, 

मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी, 


जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम, 

नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम, 

अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम, 

भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम। 


लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में, 

जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में, 

लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में, 

रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में। 


ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार, 

घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार, 

यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार, 

विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार। 


अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी, 

अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी, 

काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी, 

युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी। 


पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार, 

किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार, 

घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार, 

रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार। 


घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी, 

मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी, 

अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी, 

हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी, 


दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥


जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी, 

यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी, 

होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी, 

हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी। 


तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी, 

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

….या फिर तुम्हारी यादें

तुम या फिर तुम्हारी यादें

जब जब आती है

एक सुखद एहसास मेरे मन को

छू कर भाग जाती है

भाग जाती है

क्योकि

वो रुक नही सकती

और मैं उसे

रोक नही सकता

उस क्षणिक समय में

खो जाते है

हम दोनों 

जी हाँ , सही सुन रहे है

हम दोनों

मैं और मेरी तन्हाइयां

क्योंकि यही तो साथ देती है

पहले से थी और 

बाद तक साथ रहेगी

यही तो है जो अपना है

जो साथ है

जो साथ रहेगा 

सुनाऊंगा किसी रोज

एक दूसरा किस्सा

जिसका तू ही होगा एक हिस्सा

मेरी खामोशियों को न तोड़ो

भादो का महीना है

वर्षा से कही आफत है तो

कही राहत है

क्या सुनाऊ

क्या लिखूं

सोच रहा हूँ यही छोड़ 

देता हूँ जो है

वो किस्मत के 

भरोसे

या करे संघर्ष 

मिलते है इस आधी अधूरी

बिना सिर पैर की

रचना के बाद

एम के पाण्डेय निल्को

इक दो कौड़ी का जेहादी,सैनिक को थप्पड़ मार गया

कश्मीर घाटी में अक्सर सुरक्षाबलों पर ताकत के बेतहाशा प्रयोग और मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सुरक्षाकर्मी ही अपने मान-सम्मान, जान को खतरे में डाल संयम बरतते हैं। इस हकीकत का खुलासा सुरक्षाबलों ने नहीं किया, इस कड़वे सच से पर्दा अलगाववादियों की समर्थक

हिंसक भीड़ ने अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिए सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो अपलोड कर उठाया। डियो में हिंसक भीड़ दो सुरक्षाकर्मियों को बुरी तरह पीटती हुई नजर आती है तथा सुरक्षाकर्मी भीड़ का प्रतिरोध करने की बजाए निरीह प्राणियों की तरह मार खा रहे हैं। एक अन्य वीडियो में कुछ लडक़े एक सीआरपीएफ जवान को लातों से पीट रहे हैं और जवान है कि मार खा रहा है। एक वीडियो है जिसमें डयूटी से लौट रहे जवानों के लडक़ों की भीड़ चल रही है। लडक़े बार-बार जवानों को उकसाते हुए कह रहे हैं कि गो इंडिया गो, जालिमों कश्मीर छोड़ दो। कुछ लडक़े जवानों की हेल्मेट उतार रहे हैं तो कुछ लडक़ों ने उनकी शील्ड तक छीन ली। एक लडक़े ने एक जवान का स्लीपिंग बैग भी नीचे गिरा दिया। भीड़ में शामिल एक लडक़ा उत्तेजित हो जवानों को गाली देते हुए मारपीट करने लगता है,लेकिन उसका दूसरा साथी उसे रोक लेता है। जवान देश की रक्षा के लिए हैं अपमान का घूंट पीने के लिए नहीं लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील जगह पर शांति बनी रहे इसलिए हमारे देश के जवान अदम्य साहस के साथ अटूट धैर्य का परिचय देते हैं

तस्वीर पर रचनाएं

मैं भारत माँ की कोख से जन्मा, भारत माँ का ही दूध पिया हैं
मेरी भारत माँ की ममता देखो, कभी सियार ने भी दूध पिया है
मुझे माँ के दूध की कसम, लाज रखी ना जिनने दूध की उन्हें मिटाना है
सोच पाकिस्तान तेरा क्या होगा अब, तूने भी माँ का दूध पिया हैं

नरेन्द्र कुर्मी मस्ताना
९४२५८६२०८२
बरेली
उत्तरप्रदेश

Startup India, Stand Up India

आजकल हर तरफ स्टार्टअप इंडिया के चर्चे हैं। अगर आप भी स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले इन के बारे में जरूर पढ़ लीजिए, जिनसे स्टार्टअप शुरू करने के दौरान आपका सामना होगा। फ्रांसीसी शब्द ऑन्त्रेप्रनोर व्यापार जगत में आजकल खूब चलन में है। प्रबंधन प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ इसमें दो प्रमुख बातों का होना बताते हैं। पहला किसी उद्यम का नया या नवोन्वेषी होना और दूसरा जोखिम उठाने या घाटा उठाने का हौसला होना। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया, भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिये मोदी सरकार द्वारा चलाया गया नया अभियान है। इस योजना के अनुसार, कम्पनियों को प्रोत्साहन दिया जायेगा ताकि वो अधिक रोजगार को सृजन कर सके। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया अभियान युवाओं (विशेष रुप से महिलाएं, दलित या आदिवासी) को शुरुआत के लिए बैंक वित्त पोषण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया जाएगा।
ये पहल स्टार्ट-अप्स को नये कारोबार की शुरुआत में सहायता करने में सरकार की ओर से किया गया एक प्रभावी प्रयास है विशेषरुप नये विचारों को रखने वालों के लिये। ये छोटे और बड़े स्तर के उद्यमियों के स्तर को सुधारने में मदद करने के साथ ही दूसरों के लिये रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी बैंकों से कम से कम एक दलित और एक महिला उद्यमी को अपना व्यवसाय खोलने के लिये प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया है। भारत में नये विचारों के साथ प्रतिभासंपन्न और कुशल युवाओं की कोई कमी नहीं है, हांलाकि, उन्हें आगे बढ़ने के लिये कुछ प्रभावी समर्थन की आवश्यकता है। सभी आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईएम, एनआईटी और भारत के अन्य संस्थानों को सीधे इस अभियान के सफल प्रक्षेपण के लिए एक दूसरे से जोड़ा जाएगा।

स्टार्टअप एक्शन प्लान की मुख्य बातें-

  •  सेल्फ सर्टिफिकेट आधारित कमप्लायंस की व्यवस्था
  •  तीन साल तक कोई इंस्पेक्शन नहीं
  •  स्टार्टअप के लिए वेब पोर्टल और मोबाइल एप
  •  छोटे फॉर्म के जरिए ई-रजिस्ट्रेशन
  •  स्टार्टअप के लिए एग्जि‍ट की भी व्यवस्था होगी
  •  पेटेंट फीस में 80 फीसदी की कटौती
  •  इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी के लिए कानूनी मदद
  •  स्टार्टअप से प्रॉफिट पर तीन साल तक टैक्स नहीं
  •  प्रमुख शहरों में सलाह के लिए निशुल्क व्यवस्था
  •  स्टापर्टअप इंडि‍या हब के तहत सिंगल प्वागइंट ऑफ कॉन्टैाक्ट
  •  हैंडहॉल्डिं्ग की व्येवस्थाा की जाएगी
  •  सार्वजनि‍क और सरकारी खरीद में स्टातर्टअप को छूट मि‍लेगी
  •  10 हजार करोड़ रुपये का फंड बनाया जाएगा, इसमें हर साल 2500 करोड़ रुपये का फंड स्टा1र्टअप्सक को दि‍ए जाएंगे
  •  चार साल तक 500 करोड़ रुपये प्रति‍वर्ष का क्रेडि‍ट गारंटी फंड बनाया जाएगा
  •  शेयर मार्केट वैल्यूो से ऊपर के इन्वेरस्टरमेंट पर टैक्सग में छूट दी जाएगी
  •  अटल इनोवेशन मिशन की शुरुआत, इसके तहत स्टारर्टअप को कंपटेटिव बनाना होगा
  •  एंटरप्रेन्योर के नेटवर्क को बनाया जाएगा, स्टा‍र्टअप को सीड कैपिटल देने के साथ कई अन्यड सुविधाएं
  •  35 नए इन्यूवर्कबेशन सेंटर खोले जाएंगे
  •  बच्चोंय में इनोवेशन बढ़ाने के लिए इनोवेशन कोर प्रोग्राम शुरू होगा
  •  5 लाख स्कूचलों के 10 लाख बच्चोंप की पहचान की जाएगी जो इनोवेशन को आगे बढ़ा सकें
  •  अपनी प्रॉपर्टी को बेच कर स्टा र्टअप शुरू करने पर कैपि‍टल गेन टैक्सज की छूट दी जाएगी
स्टार्टअप के मामले में भारत अमेरिका और ब्रिटेन के बाद तीसरे नंबर पर है. साल 2015 में 4536 लोगों ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कदम रखा. साल 2013 में ये संख्या 3451 थी, जबकि 2011 में 791 लोगों ने अपना बिजनेस शुरू किया. भारत में स्टार्ट अप का कॉन्सेप्ट भले ही नया हो. लेकिन विदेशों में इसका चलन पहले से ही है. स्टार्ट अप कार्यक्रम में अमेरिका की सिलिकॉन वैली के 40 सीईओ ने हिस्सा लिया. इनमें सॉफ्ट बैंक सीईओ मासायोसी सन, उबर फाउंडर ट्राविस कालानिक, वीवर्क फाउंडर एडम न्यूमैन भी शामिल हैं दरसअल नयापन, जो स्टार्ट अप इंडिया की नींव है, उसके लिए ज्ञान की नहीं, एक अन्तर्दृष्टि की जरूरत होती है। इस अन्तर्दृष्टि का संबंध मस्तिष्क से न होकर भावना एवं अवचेतन तथा अचेतन मन से होता है। मन के इसी स्तर को भारतीय दर्शन अपनी तरह से आत्मा कहता है, अध्यात्म कहता है। इस स्तर पर विचार पलते-बढ़ते नहीं हैं, बल्कि कौंधते हैं। जब एक बार यह कौंध पकड़ में आ जाती है, तो वही बढ़कर नवीन बन जाता है।
इस लिहाज से स्टार्ट अप इंडिया के बारे में कहा जा सकता है कि इसके लिए भारत की चेतना की जमीन सबसे अधिक उपजाऊ जमीन है, क्योंकि यह देश मूलत: एक आध्यात्मिक देश है तथा यदि इस अभियान को बहुआयामी (मल्टी डायमेंशनल) तरीके से अपनाया गया, तो यह भारत को फिर से विश्व-गुरु के पद के निकट ले जाने में सहायक हो सकता है। इस रूप में यह अभियान आर्थिक से कहीं अधिक बौद्धिक भूमिका निभाने वाला सिद्ध होगा।

एम के पाण्डेय ‘निल्को’

(युवा ब्लॉगर)

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