Tag Archives: चुनाव

भारत महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश


एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट में भारत को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है । 

इस सर्वे के अनुसार महिलाओं के मुद्दे पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया क्रमश: दूसरे और तीसरे सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर हैं । सात साल पहले इसी सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश बताया गया था।

दुनिया भर से केवल 548 जानकारों से 26 मार्च से 4 मई के बीच ऑनलाइन फोन और व्यक्तिगत तौर पर रायशुमारी की गई और बना दी गई एक ऐसा रिपोर्ट जिस पर विश्वास हो भी तो क्यो और कैसे ? 


जो फिरंगी आजतक एक आदर्श परिवार न बसा सके वो खुद के बनाए मापदंड के अनुसार भारत का सर्वे कर रहे है ? इस मुद्दे पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि भारत के बाद रखे गए देशों में महिलाओं को बोलने का हक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से सर्वे किया गया उनकी संख्या बहुत कम है। उनकी राय के आधार पर दुनिया की राय नहीं बनाई जा सकती। 

भारत से ज्यादा सुरक्षा जिन देशो में है इस सर्वे के मुताबिक , उनका नाम लिखुंगा तो हसते हसते पेट मे दर्द हो जाएगा । आज भी भारत की महिलाएं और देशो की महिलाओं की तुलना में बहुत सभ्य संस्कारी और सुरक्षित है हाँ कुछ अपवाद हो सकते है इससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता लेकिन इस तरह की रिपोर्ट तो बस पूर्व प्रायोजित ही है । महिलाएं ही नहीं किसी भी श्रेणी के लोगो के लिए भारत ही सबसे सुरक्षित देश है , इसके लिए कोई भी इतिहास का सहारा ले सकता है ।

एम के पाण्डेय निल्को

इक दो कौड़ी का जेहादी,सैनिक को थप्पड़ मार गया

कश्मीर घाटी में अक्सर सुरक्षाबलों पर ताकत के बेतहाशा प्रयोग और मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सुरक्षाकर्मी ही अपने मान-सम्मान, जान को खतरे में डाल संयम बरतते हैं। इस हकीकत का खुलासा सुरक्षाबलों ने नहीं किया, इस कड़वे सच से पर्दा अलगाववादियों की समर्थक

हिंसक भीड़ ने अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिए सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो अपलोड कर उठाया। डियो में हिंसक भीड़ दो सुरक्षाकर्मियों को बुरी तरह पीटती हुई नजर आती है तथा सुरक्षाकर्मी भीड़ का प्रतिरोध करने की बजाए निरीह प्राणियों की तरह मार खा रहे हैं। एक अन्य वीडियो में कुछ लडक़े एक सीआरपीएफ जवान को लातों से पीट रहे हैं और जवान है कि मार खा रहा है। एक वीडियो है जिसमें डयूटी से लौट रहे जवानों के लडक़ों की भीड़ चल रही है। लडक़े बार-बार जवानों को उकसाते हुए कह रहे हैं कि गो इंडिया गो, जालिमों कश्मीर छोड़ दो। कुछ लडक़े जवानों की हेल्मेट उतार रहे हैं तो कुछ लडक़ों ने उनकी शील्ड तक छीन ली। एक लडक़े ने एक जवान का स्लीपिंग बैग भी नीचे गिरा दिया। भीड़ में शामिल एक लडक़ा उत्तेजित हो जवानों को गाली देते हुए मारपीट करने लगता है,लेकिन उसका दूसरा साथी उसे रोक लेता है। जवान देश की रक्षा के लिए हैं अपमान का घूंट पीने के लिए नहीं लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील जगह पर शांति बनी रहे इसलिए हमारे देश के जवान अदम्य साहस के साथ अटूट धैर्य का परिचय देते हैं

लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त

यूपी के बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्‍या कर शव पेड़ पर लटका देने के मामले के बाद भी राज्‍य सरकार सक्रिय नहीं लगती। इस घटना के बाद देश-विदेश में यूपी की बदनामी हुई है और केंद्र सरकार ने भी राज्‍य सरकार को घेरा है। लेकिन, लगता है राज्‍य में अभी भी बलात्‍कारियों का राज है। बदायूं की घटना के बाद भी पूरे राज्‍य से करीब आधा दर्जन बलात्‍कार के बड़े मामले सामने आए हैं।


यूपी दुनिया का पहला ऐसा राज्य होगा जहां के लोगों को दो कौड़ी के लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त दे के चुकानी पड़ रही है..

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

क्या है धारा 370

स्वतंत्रता के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के ‍पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह कश्मीर के राजा थे। उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा।  तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालात को देखते हुए गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में धारा 306-ए, जो बाद में धारा 370 बनी, का प्रारूप प्रस्तुत किया। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। धारा ३७० भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद ३७० जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

क्या हैं अधिकार : 
 
भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 

 वित्तीय आपातकाल लगाने वाली धारा 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती। 

 जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है। 

 भारत की संसद जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून नहीं बना सकती।

 धारा 356 लागू नहीं, राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं। 

 कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहरी से शादी करती है तो उसकी कश्मीर की नागरिकता छिन जाती है। 

 जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता है।

विशेष अधिकार धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।

अबकी बार मोदी सरकार!



क्या दिल्ली ,क्या काशी , 
मोदी को चुनेगा .हर भारतवासी ,
अबकी बार मोदी सरकार …..
युवराज बन गया पप्पू यार…..अबकी बार मोदी सरकार!!
देश न बने पप्पू इस बार….अबकी बार मोदी सरकार!!
नहीं चाहिये कोई ख़ैरात, बहुत
देखी तेरी बारात! बस चाहिये
सुरक्षा, सु़विधा, सुअवसर के हालात!
बाक़ी दम रखते है यार,
अबकी बार मोदी सरकार!
मंदर,डाक्टर, दफ़्तर, बार,
हर जगह बड़ी क़तार!
पंडीत,कंपौडर,चपरासी, साकी,
कोई नहीं है ज़िम्मेवार!
शायद अब सुधरे हालात,
अबकी बार मोदी सरकार!
भैंस आजम को छोड़ गयीं!!
सांड़ ने मुलायम के हेलिकोप्टर को रोक दिया!!
यानि……
पशु पक्षी की भी यही पुकार, अबकी बार मोदी सरकार!

Madhulesh Pandey Nilco

बनारस में ‘चायवाला’ के सामने ‘पानवाला’

 भाजपा अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के ‘चाय वाले’ की पृष्ठभूमि पर ‘चाय पर चर्चा’ आयोजनों के जरिए मतदाताओं को जोड़ने में लगी है। वाराणसी में उनके मुकाबले उतरे सपा उम्मीदवार कैलाश चौरसिया लोगों को उनके पारिवारिक पेशे ‘पान वाले’ को भुनाने में लग गए हैं।

चौरसिया कहते हैं कि मोदी यदि कभी ‘चाय’ बेचते रहे हैं तो वे अपनी ’चाय वाले’ की पृष्ठभूमि को भुना रहे हैं। हमारे पुरखे तो ‘पान’ बेचने के धंधे में रहे है और उसी तर्ज पर हम ‘पान वाला’ अभियान पर निकल पड़े हैं।

उत्तरप्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री चौरसिया ने कहा, मैंने भी बहुत सालों तक पान बेचा है और पान बेचना तो हमारा पुश्तैनी व्यवसाय है।

उन्होंने कहा कि मोदी जहां एक तरफ लोगों से ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए संवाद कर रहे है। उनकी कोशिश अधिक से अधिक पान वालों से सीधे संवाद स्थापित करने की है। इसलिए भी कि इसमें निजत्व का अहसास होता है।

चौरसिया ने कहा, मैं मोदी की तरह हवा-हवाई में भरोसा नहीं करता, जो भारी धनराशि खर्च करके अपने प्रचार के लिए ‘चाय पर चर्चा’ कर रहे हैं। मेरा मकसद इस तरह के बेकार प्रचार पर धन खर्च करना नहीं है कि खुद को टीवी पर दिखाए और अखबारों में विज्ञापन दें। यह पैसा गरीबों की सहायता में, उनके इलाज में, शादी-विवाह में सहायता के रूप में खर्च किया जाना बेहतर है।

चौरसिया की ‘पान वाला’ पृष्ठभूमि को चुनावी चर्चा में लाने के लिए सपा कार्यकर्ता मशहूर फिल्मी गाने ‘खईके पान बनारस वाला, खुल जाए बंद अक्ल का ताला’, छोरा गंगा किनारे वाला’ गाते घूम रहे हैं और मोदी तथा केजरीवाल के वादों को खोखला बताते हुए लोगों से उनसे सावधान रहने की नसीहत दे रहे हैं।

चौरसिया यह आरोप भी लगा रहे है कि मोदी समर्थकों ने देवी-देवताओं के लिए मशहूर नारों और मंत्रों की तर्ज पर उनके समर्थन में नारे उछालकर देवी-देवताओं का अपमान किया है।

सपा के स्थानीय कार्यकर्ता किशन दीक्षित कहते हैं कि देवी दुर्गा और भगवान शंकर से मोदी की तुलना करके भाजपा कार्यकर्ताओं ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

उन्होंने कहा, हम भाजपाइयों के विपरीत ‘खईके पान बनारस वाला..’ गाने के साथ आम लोगों और पान वालों के बीच जाकर उनका समर्थन मांग रहे है। साथ ही लोगों को यह भी समझा रहे हैं कि हमारा उम्मीदवार इसी शहर का है और यहीं रहेगा, जबकि मोदी या केजरीवाल चुनाव बाद यहां से चले जाएंगे।

चौरसिया कहते हैं कि बनारस अपने बनारसी पान के लिए दुनिया में मशहूर है और बनारसी पान वाले के साथ चाय वाले का क्या मुकाबला। (साभार – वेब दुनिया )
आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

योगेश पाण्डेय 

                                                                                                

हर – हर मोदी, घर – घर मोदी

मधुलेश पाण्डेय निल्को
अब दिख रही है असर
हो गए सब बेखबर
जबसे चली अनोखी लहर
किसी को लगने लगी है जहर
हर हर मोदी
घर घर मोदी का नारा है

पूरा भारतवर्ष हमारा है
विदेशी बाहर  जायेगे
मोदी को ही लायेगे
पप्पू घर को जायेगा
मोदी दिल्ली आएगा
निल्को ने भी अब ठाना है
वोट देने जाना है
बाकि सब पुराना है
सिर्फ लोकतंत्र ही हमारा हैं. 

# मधुलेश पाण्डेय निल्को 

 

आपको एवं आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है।यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता हैं ! यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहां भी धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं! पहलेदिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं, और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं। 

आपको एवं आपके परिवार को होली की बहुत मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ.






आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………! 

बज गई चुनावी रणभेरी- देश के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा चुनाव

सोलहवीं लोकसभा के लिए होने जा रहा आम चुनाव देश के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा होगा। कई मायनों में यह चुनाव ऐतिहासिक भी होगा क्योंकि इसमें कई प्रयोग पहली बार देखने को मिलेंगे।चुनाव 7 अप्रैल से शुरू होकर 9 चरणों 12 मई को संपन्न होंगे और वोटों की गिनती 16 मई को होगी। 

इस मौके पर संपत ने कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं उन्हें नाम दर्ज कराने के लिए एक और मौका मिलेगा। संपत ने कहा कि 9 मार्च तक नए वोटरों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए देश भर में करीब 9 लाख कैम्प लगाए जाएंगे।

सबको ध्यान में रखकर तारीखों का ऐलान मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस.संपत ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि पिछले 4 फरवरी को सभी दलों के साथ हुई बैठक में चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया था। सभी पार्टियों की बातों को ध्यान में रखकर तारीखों का ऐलान किया गया है। उन्होंने तारीखों का ऐलान करते वक्त मॉनसून, त्योहारों परीक्षाओं सहित सभी बातों का ध्यान रखा गया है।

गौरतलब है कि 2009 में लोकसभा के चुनाव 16 अप्रैल से 13 मई के बीच 5 चरणों में हुए थे, यानी यह पहली बार होगा, जब देश में 9 चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे।

कब कहां पड़ेंगे वोट

आंध्र प्रदेश: 30 अप्रैल, 7 मई
अरुणाचल प्रदेश: 9 अप्रैल
असम:12, 17 और 24 अप्रैल
बिहार: 10, 17, 24, 30 अप्रैल, मई 7 और 12 मई
छत्तीसगढ़: 10, 17 और 24 अप्रैल
गोवा: 17 अप्रैल
गुजरात: 30 अप्रैल
हरियाणा: 10 अप्रैल
हिमाचल प्रदेश: 7 मई
जम्मू-कश्मीर: 10, 17, 24, 30 अप्रैल और 7 मई
झारखंड: 10, 17 और 24 अप्रैल
कर्नाटक: 17 अप्रैल
केरल: 10 अप्रैल
मध्य प्रदेश: 10, 17 और 24 अप्रैल
महाराष्ट्र: 10, 17 और 24 अप्रैल
मणिपुर: 9 और 17 अप्रैल
मेघालय: 9 अप्रैल
मिजोरम: 9 अप्रैल
नगालैंड: 9 अप्रैल
ओडिशा: 10 और 17 अप्रैल
पंजाब: 30 अप्रैल
राजस्थान: 17 और 24 अप्रैल
सिक्कम: 12 अप्रैल
तमिलनाडु: 24 अप्रैल
त्रिपुरा: 7 और 12 अप्रैल
उत्तर प्रदेश: 10, 17, 24 और 30 अप्रैल, मई 7 और 12
उत्तराखांड : 7 मई
पश्चिम बंगाल: 17, 24, 30 अप्रैल, 7 और 12 मई
अंडमान और निकोबार: 10 अप्रैल
चंडीगढ़: 12 अप्रैल
दादर और नागर हवेली: 12 अप्रैल
दमन और दीव: 30 अप्रैल
लक्षद्वीप: 10 अप्रैल
पुड्डुचेरी: 24 अप्रैल

वोटिंग की रसीद
ईवीएम के नतीजों पर भी यदाकदा शक जताया जाता रहा है। इसका इलाज ढूंढ़ लिया गया है। वोटिंग के बाद ईवीएम से रसीद भी निकलेगी। हालांकि इस चुनाव में यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं होगी। दरअसल फिलहाल ऐसी सिर्फ 600 मशीन है। जबकि 31 मार्च तक आयोग के पास अतिरिक्त 20 हजार मशीन आ जाएगी।
हवाई घोषणाओं पर पाबंदी
घोषणापत्र में मुफ्त उपहार बांटने से लेकर दिवास्वप्न दिखाने जैसी कई घोषणाएं वोटरों को लुभाती रही है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग के दिशानिर्देश में ही घोषणापत्र बनाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को दिशानिर्देश जारी कर दिया है।
नोटा का इस्तेमाल
हाल के विधानसभा चुनावों में तो नोटा (नन आफ द एबव) का इस्तेमाल हो चुका था। लेकिन पहली बार लोकसभा में भी वोटरों के पास अधिकार होगा कि वह सभी उम्मीदवारों के खिलाफ मतदान करें।