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…वो कहर बरसाती है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

वह पायल नहीं पहनती पांव में
 बस एक काले धागे से कहर बरसाती है
उसकी यही अदा तो ‘निल्को’
मुझे उसका दीवाना बनाती है
बहुत मजे से इठलाती है
 गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती है
माथे पर जब बिंदी लगाती है
तो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है
‘मधुलेश’ का ख्याल आए तो
वह भी कविता बनाती है
जीवन की गहन अनुभूतियों पर
लिखने का प्रयास कर रचना वो बनाती है
मौसम बेईमान हो जाए जो तपाक से
रसोई में जाकर पकोड़े वो बनाती है
बस कुछ ही यूं ही आए हैं बड़े दिनों बाद इस ब्लॉग पर
पढ़कर वह भी इसे सार्थक बनाती है
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एम केपाण्डेयनिल्को

नीचों का गठबंधन है

सारे  कौरव  हुए  इकट्ठे, नीचों  का  गठबंधन है
सूपनखा की नाक कटी है, चोरों के घर कृन्दन है

पड़ी है पीछे सीबीआई जगह कहाँ अब जाने को
मिल कर एक हुए हैं गीदड़ अपनी लाज बचाने को

मफलर वाला गिरगिट आया अपनी शान दिखायेगा
टोंटी चोर बुआ को लाया वो भी गाल बजायेगा

संविधान की रक्षा करने आया है एक  नौवीं फेल
जिसके अब्बा खाकर चारा भुगत रहे वर्षों से जेल

राफेल वाला पप्पू आया, दिखा रहा है अपना जोश 
खुद बेचारा बेल पे बाहर कोई दिलाये इसको होश

वो अब्दुल्ला जिसका जीवन गीत पाक के गाते गुजरा
उसको भी अब ये लगता है देश पे सच में आया खतरा

कई और छुटभैये नेता जिनकी कहीं नहीं है पूछ
चोरों के संग सीना ताने ऐंठ रहे है अपनी मूछ

कहे समीक्षा राष्ट्र विरोधी ख्वाबों की ताबीर नहीं
बंगाल हमारा सूपनखा के अब्बा की जागीर नहीं

एक साथ हैं गिद्ध और गीदड़,कुत्ते,और बिलाब सभी
एक  शेर  को  घेरेंगे  क्या नीच  निक्कमे घाघ  कभी

संविधान खतरे में होता जब भी इनकी पोल खुले
सच तो ये है डर है इनको कहीं न इनके झोल खुले

सीधी सच्ची बात है कि ये तभी तो मिलकर खायेंगे
जब  ये  चोर उचक्के मिलकर खुद सरकार बनायेंगे

देख  रहे  सब  भारतवासी इन सब झूठे मक्कारों को
उन्निस में सबक सिखाएंगे इन लोकतंत्र हत्यारों को

समीक्षा सिंह जादौन

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है


ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है 

क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है 

कलम लिखने को बहुत बेक़रार है 

क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

प्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है 

उनकी चाहत भी बेशुमार है 

मैसेज के साथ साथ ऑडियो भी भेज दिया 

पर किया नहीं आज  तक इजहार है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

लेकिन तेरा आशिक बहुत दिलदार है 

प्यार ही जीवन का आधार है 

सोच रहा हूँ क्या लिखू तुम पर ‘निल्को’

वो कहती है तुम्हारी कलम,कैमरा, कम्प्यूटर सब लाजवाब है 

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

एम के पाण्डेय निल्को 

कुछ और हो गए तुम – सोनू जैन

शेर  से  शोर  हो   गये  हो  तुम,
कितने कमज़ोर हो गये हो तुम।

हमको  पहचानते  नहीं  साहब,
आज कुछ ओर हो गये हो तुम।

बात  करते  नहीं ख़ुदा  से भी,
क्या कोई चोर हो गये हो तुम।

तुमको मालूम  ही नहीं  शायद,
ख़ुद से भी बोर हो गये हो तुम।

“सोनू” तुमसे हमें ये कहना है,
मैं पतंग, डोर  हो गये हो तुम।

✍सोनू कुमार जैन

ग़ज़ल – सरिता कोहिनूर

देश के उपकार पर अभिसार होना चाहिए
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए

कौन कहता है,यहाँ है देश भक्तों की कमी
देखने वाली ऩज़र में धार होना चाहिए

सरहदों पर सैनिकों की क्यों शहादत रोज हो
आधुनिक और तेज सब हथियार होना चाहिए

पाक की नापाक कोशिश, चीन का अभिमान भी
तोड़ कर सीमा हमें अब पार होना चाहिए

देश की रोटी हैं खाते और बजाते पाक की
दोगले घोषित यहाँ गद्दार होना चाहिए

आज भी जिसको यहाँ माँ भारती से प्रेम है
उन जियालों का यहाँ सत्कार होना चाहिए

बह रहा है रक्त में हम सबके भारत का नमक
इसलिए माँ भारती पे वार होना चाहिए

देखती है ख़्वाब सरिता देश की तरुणाइ का
विश्व गुरु का अर्थ अब साकार होना चाहिए

सरिता कोहिनूर 💎

मुक्तक – जो भी तेरे पास आता है ।

जो भी तेरे पास आता है
वो तेरा ही हो जाता है
तेरी उलझी सुलझी ये जुल्फ़े
मद मस्त होकर लहराता है

एम के पाण्डेय निल्को

नज़र निल्को की…….

न दुपट्टा गिरा और न उसकी उम्मीदों के दुपट्टे गिरे,
पर कुछ लोग उसके दुपट्टे गिराने मे कई बार गिरे
सादर
एम के पाण्डेय निल्को

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