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बहुत कठिन है पत्रकारिता की डगर, फिर भी निभाना होगा अपना दायित्व

राष्ट्रीय प्रेस परिषद जनपद महराजगंज की इकाई का प्रथम वार्षिक अधिवेशन मंगलवार को स्थानीय अंबेडकर पार्क में संपंन हुआ। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता और गोरखपुर के पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर ने कहा कि पत्रकारिता की डगर कठिन है। उसमें अपने लिए कम किंतु देश और समाज के लिए अधिक करने की जरूरत होती है। मीडिया इस काम को बखूबी कर रही है। यही कारण है कि उसे तरह तरह के आलोचनाओं और कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इन सब पर पत्रकारों को विजय पानी होगी। चाहे कितनी भी परेशानियों का सामना करना पडे़ अपने दायित्व को निभाना होगा। खुद को भले ही जलाना पडे़, लेकिन आम लोगों में अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजगता और जागरूकता की ज्योति जलानी पडे़गी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। इसके बाद तत्काल रक्तदान कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि चिकित्सक डा. सीपी सिंह ने रक्तदान किया। ब्लड निकालने का कार्य गोरखपुर मेडिकल कालेज से आई डा. मंजीता मिश्रा की नेतृत्व वाली टीम ने किया। इस दौरान तीन दर्जन से अधिक लोगों ने रक्तदान किया।
अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार नर्वदेश्वर पांडेय देहाती ने की। कार्यक्रम के दौरान संरक्षक केदार शरण मिश्र द्वारा मुख्य अतिथि के साथ आए इंका नेता सूर्यनाथ पांडेय तथा अन्य को अंग वस्त्र भेंट कर स्मृति चिन्ह प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन बसंतपुर इंटर कालेज के समाज शास्त्र के प्रवक्ता डा. कृष्ण कुमार ने किया। अंत में अध्यक्ष अमित कुमार तिवारी ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

हिन्दी भाषा मे हो रही मिलावट – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

     एम के पाण्डेय निल्को

हिन्दी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है। इस देश में भाषा के मसले पर हमेशा विवाद रहा है। भारत एक बहुभाषी देश है। हिन्दी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली तथा समझे जाने वाली भाषा है इसीलिए वह राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकृत है। लेकिन आजकल अन्य भाषाओ जो हिन्दी के साथ घुसपैठ कर रही है यह एक विचारक बिन्दु है । जब से प्रिंट मीडिया खुल के सामने आई है तब से हिन्दी का अन्य भाषाओ के साथ मिलाप बढ़ गया है, ये शब्द ऐसे नहीं कि इनकी जगह अपनी भाषा के सीधे साधे बोलचाल के शब्द लिखे ही न जा सकते हों। जो अर्थ इन मिश्रित शब्दो से निकलता है उसी अर्थ को देने वाले अपनी हिन्दी की भाषा के शब्द आसानी से मिल सकते हैं। पर कुछ चाल ही ऐसी पड गई है कि हिन्दी के शब्द लोगों को पसंद नहीं आते । वे यथा संभव मिश्रित भाषा के शब्द लिखना ही ज़रूरी समझते हैं। फल इसका यह हुआ है कि हिन्दी दो तरह की हो गई है। एक तो वह जो सर्वसाधारण में बोली जाती हैए दूसरी वह जो पुस्तकों और अखबारों में लिखी जाती है। पुस्तकें या अखबारे लिखने का सिर्फ इतना ही मतलब होता है कि जो कुछ उसमें लिखा गया है वह पढ़ने वालों की समझ में आ जाय । जितने ही अधिक लोग उन्हें पढ़ेगे उतना ही अधिक लिखने का मतलब सिद्ध होगा । तब क्या ज़रूरत है कि भाषा क्लिष्ट कर के पढ़ने वालों की संख्या कम की जाय, मिश्रित भाषा के शब्दो से घ्रणा करना उचित नहीं किन्तु इससे खुद का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है । यह एक बड़ी विडंबना है कि जिस भाषा को कश्मीर से कन्याकुमारी तक सारे भारत में समझा जाता हो उस भाषा के प्रति घोर उपेक्षा व अवज्ञा का भाव हमारे राष्ट्रीय हितों की सिद्धि में कहाँ तक सहायक होंगे ? हिन्दी का हर दृष्टि से इतना महत्व होते हुए भी प्रत्येक स्तर पर इसकी इतनी उपेक्षा क्यों ?

यहाँ यह प्रश्न उठता है कि क्या इस मुल्क में बिना भाषा के मिलावट के काम नही चला सकते । सफेदपोश लोगों का उत्तर है – हिन्दी में सामर्थ कहा है ? शब्द कहाँ है ? ऐसी हालत में मेरा मानना है कि विज्ञान, तकनीक, विधि, प्रशासन आदि पुस्तकों के सन्दर्भ में हिन्दी भाषा के क्षमता पर प्रश्न खड़े करने वालों को यह ध्यान देना होगा कि भाषा को बनाया नही जाता बल्कि वह हमें बनाती है। आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है। हिन्दी में हमें नए शब्द गढ़ने पड़ेंगे । भाषा एक कल्पवृक्ष के सामान होती है, उसका दोहन करना होता है। हिन्दी भाषा को प्रत्येक क्षेत्र में उत्तरोत्तर विकसित करना है। लेकिन इस तरफ़ कम ही ध्यान दिया गया है और अन्य भाषा को हिन्दी में मिलाकर आसान बनाने की कोशिश की गई । टीवी के निजी चैनलों ने हिन्दी में अंग्रेजी का घालमेल करके हिन्दी को गर्त में और भी नीचे धकेलना शुरू कर दिया और वहां प्रदर्शित होने वाले विज्ञापनों ने तो हिन्दी की चिन्दी की जैसे नीम के पेड़ पर करेला चढ़ गया हो। इसी प्रकार से रोज पढ़े जाने वाले हिन्दी समाचार पत्रों, जिनका प्रभाव लोगों पर सबसे अधिक पड़ता है ने भी वर्तनी तथा व्याकरण की गलतियों पर ध्यान देना बंद कर दिया और पाठकों का हिन्दी ज्ञान अधिक से अधिक दूषित होता चला गया। लेकिन आज जो हिन्दी का स्तर गिरता दिखाई दे रहा है वह पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रभाव के कारण हो रहा है। आज हर जगह लोग अंग्रेजी के प्रयोग को अपना भाषाई प्रतीक बनाते जा रहे हैं। अगर आज आप किसी को बोलते है कि यंत्र तो शायद उसे समझ न आए लेकिन मशीन शब्द हर किसी की समझ में आएगा। इसी प्रकार आज अंग्रेजी के कुछ शब्द प्रचलन में हैं जो सबके समझ में है। इसलिए यह कहना कि पूर्णतया हिन्दी पत्रकारिता या अन्य जगहो में सिर्फ हिन्दी भाषा का प्रयोग ही हो यह तर्क संगत नहीं है। हां यह जरूर है कि हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान अवश्य करना चाहिए और उसे अधिक से अधिक प्रयोग में लाने का प्रयास करना चाहिए। भाषा के क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग अपनी सहूलियत के हिसाब से होता रहा है। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि हम अभी भी यही मानते हैं कि अंग्रेजी हिंदी से बेहतर है। इसलिए जान बूझकर हिंदी को हिंगलिश बना कर काम करना पसंद करते हैं और ऐसा मानते हैं कि अगर मुझे अंग्रेजी नहीं आती तो मेरी तरक्की की राह दोगुनी मुश्किल है। भाषा आम समाज से अलग नहीं है, उसने भी अन्य बोलियों के साथ – साथ विदेशी भाषा के शब्दों को अपना लिया है। इसके साथ ही यह भी सही है कि विचारों की भाषा वही नहीं हो सकती जो बाज़ार में बोली जाती है। भाषा वही विकसित होती है जिसका हाजमा दुरुस्त होए जो अन्य भाषाओं के शब्दों को अपने भीतर शामिल करके उन्हें पचा सके और अपना बना सके। हिन्दी में भी अनेक शब्द ऐसे हैं जिनके विदेशी स्रोत का हमें पता ही नहीं। शुद्ध हिन्दी वाले भले ही कक्ष कहें पर आम आदमी तो कमरा ही कहता है। भाषा में जितना प्रवाह होगा, वह लोगों की जुबान पर उतना जल्दी चढेगी भी , रोजमर्रा के जितनी करीब होगी लोगों का उसकी ओर आकर्षण उतना ही ज्यादा होगा और वह उतनी ही जल्दी अपनाई जाएगी । हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर हुए सर्वे में एक सुखद तथ्य सामने आया कि तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद हिन्दी की स्वीकार्यता बढ़ी है। स्वीकार्यता बढ़ने के साथ – साथ इसके व्यावहारिक पक्ष पर भी लोगों ने खुलकर राय व्यक्त की, मसलन लोगों का मानना है कि हिन्दी के अखबारों में अँग्रेजी के प्रयोग का जो प्रचलन बढ़ रहा है वह उचित नहीं है लेकिन ऐसे लोगों की भी तादाद भी कम नहीं है जो भाषा के प्रवाह और सरलता के लिए इस तरह के प्रयोग को सही मानते हैं। कुछ लोगो को ऐसे शब्दों का बढ़ता प्रचलन रास आ रहा है और कुछ लोग शब्दों की मिली – जुली इस खिच़ड़ी को मजबूरी में खा रहे हैं। 


एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम, गौ हत्या पर पाबंदी और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के सन्दर्भ में VMW Team का सार्वजनिक पत्र

दिनाक : 18 जनवरी 2015
प्रतिष्ठा में
            माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
            प्रधानमंत्री भारत सरकार
            साउथ ब्लॉक रेसकोर्स रोड
            नई दिल्ली- 110001
विषय : गौ हत्या पर पाबंदी  और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के सन्दर्भ में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
            मैं यहां परेशान हूं तथा आपकी कुशलता की खबरें पढ़ता-सुनता-देखता रहता हूं। आप मुझे नहीं पहचानते लेकिन मैं आपको जानता हूं अच्छी तरह से जानता हूं क्योंकि आपको तो बच्चा-बच्चा जानता है। आपको फुर्सत ही कहां? हम जैसे आम-जामुन लोगों को जानने की, अब आप अकबर तो हैं नहीं कि भेष बदलकर जनता के बारे में जान सकें। खैर छोड़िए इन बातों से क्या लाभ। अगर मैं अपना परिचय थोड़े शब्दों में दूं तो मैं वही वोटर हूं जिसे कुछ समय पहले तक आप भगवान मानते थे और आज केवल भोली जनता, जो देख-सुन तो सकती है लेकिन बोलने का साहस नहीं है उसमें। किन्तु आज मैं आप का ध्यान गौ हत्या की तरफ ले जाना चाहुगा । भारत में गौ हत्या को लेकर कई आंदोलन हुए हैं और कई आज भी जारी हैं, लेकिन किसी में भी कोई ख़ास कामयाबी हासिल नहीं हो सकी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्हें जनांदोलन का रूप नहीं दिया गया यह कहना क़तई ग़लत न होगा कि ज़्यादातर आंदोलन स़िर्फ अपनी सियासत चमकाने या चंदा उगाही तक सीमित रहे,  अल कबीर स्लास्टर हाउस में रोज़ हज़ारों गाय काटी जाती हैं, कुछ साल पहले हिंदुत्ववादी संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम भी छेड़ी थी, लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई कि इसका मालिक ग़ैर मुसलमान है तो अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जगज़ाहिर है, गौ हत्या से सबसे बड़ा फ़ायदा तस्करों एवं गाय के चमड़े का कारोबार करने वालों को होता है, इनके दबाव के कारण ही सरकार गौ हत्या पर पाबंदी लगाने से गुरेज़ करती है वरना क्या वजह है कि जिस देश में गाय को माता के रूप में पूजा जाता हो, वहां सरकार गौ हत्या रोकने में नाकाम है। गावो विश्वस्य मातरःअर्थात गौ केवल हिन्दुओं की ही नहीं इस सम्पूर्ण विश्व की माता है ! गाय के अस्तित्व पर इस जगत का अस्तित्व है वेदों में गोघ्नया गायों के वध के संदर्भ हैं और गाय का मांस परोसने वाले को महापापी और अति दुष्ट कहा गया है वेदों में गाय को अघन्या या अदिती अर्थात् कभी न मारने योग्य कहा गया है और गोहत्यारे के लिए अत्यंत कठोर दण्ड के विधान भी है ,गाय का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है।  
 आज हमारे देश में गंगा मैया, यमुना मैया, गौ माता कुछ भी सुरक्षित नहीं है क्यों…?
हैरत की बात यह है कि गौ हत्या पर पाबंदी लगाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है, इसके बावजूद अभी तक इस पर कोई विशेष अमल नहीं किया गया, भारत में गौ हत्या को बढ़ावा देने में अंग्रेज़ों ने अहम भूमिका निभाई  । जब 1700 ई. में अंग्रेज़ भारत आए थे, उस वक़्त यहां गाय और सुअर का वध नहीं किया जाता था, हिंदू गाय को पूजनीय मानते थे और मुसलमान सुअर का नाम तक लेना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अंग्रेजों को इन दोनों ही पशुओं के मांस की ज़रूरत थी, इसके अलावा वे भारत पर क़ब्ज़ा करना चाहते थे, उन्होंने मुसलमानों को भड़काया कि क़ुरआन में कहीं भी नहीं लिखा है कि गाय की क़ुर्बानी हराम है, इसलिए उन्हें गाय की क़ुर्बानी करनी चाहिए, उन्होंने मुसलमानों को लालच भी दिया और कुछ लोग उनके झांसे में आ गए, इसी तरह उन्होंने दलित हिंदुओं को सुअर के मांस की बिक्री कर मोटी रकम कमाने का झांसा दिया ग़ौरतलब है कि यूरोप दो हज़ार बरसों से गाय के मांस का प्रमुख उपभोक्ता रहा है भारत में अपने आगमन के साथ ही अंग्रेज़ों ने यहां गौ हत्या शुरू करा दी, 18वीं सदी के आख़िर तक बड़े पैमाने पर गौ हत्या होने लगी, अंग्रेज़ों की बंगाल, मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी सेना के रसद विभागों ने देश भर में कसाईखाने बनवाएजैसे-जैसे यहां अंग्रेज़ी सेना और अधिकारियों की तादाद बढ़ने लगी, वैसे-वैसे गौ हत्या में भी बढ़ोत्तरी होती गई, गौ हत्या और सुअर हत्या की आड़ में अंग्रेज़ों को हिंदू और मुसलमानों में फूट डालने का भी मौक़ा मिल गया, इस दौरान हिंदू संगठनों ने गौ हत्या के ख़िला़फ मुहिम छेड़ दी, आख़िरकार महारानी विक्टोरिया ने वायसराय लैंस डाउन को पत्र लिखा, महारानी ने कहा, हालांकि मुसलमानों द्वारा की जा रही गौ हत्या आंदोलन का कारण बनी है, लेकिन हक़ीक़त में यह हमारे ख़िलाफ़ है, क्योंकि मुसलमानों से कहीं ज़्यादा गौ वध हम कराते हैं, इसके ज़रिए ही हमारे सैनिकों को गौ मांस मुहैया हो पाता है, आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र ने भी 28 जुलाई, 1857 को बकरीद के मौक़े पर गाय की क़ुर्बानी न करने का फ़रमान जारी किया था, साथ ही चेतावनी दी थी कि जो भी गौ वध करने या कराने का दोषी पाया जाएगा, उसे मौत की सज़ा दी जाएगी, इसके बाद 1892 में देश के विभिन्न हिस्सों से सरकार को हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजकर गौ वध पर रोक लगाने की मांग की जाने लगी इन पत्रों पर हिंदुओं के साथ मुसलमानों के भी हस्ताक्षर होते थेइस समय भी देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और भारतीय गौवंश की रक्षा के लिए कठोर क़ानून बनाए जाने की मांग की जा रही है, गाय की रक्षा के लिए अपनी जान देने में भारतीय मुसलमान किसी से पीछे नहीं हैं, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के गांव नंगला झंडा निवासी डॉ. राशिद अली ने गौ तस्करों के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी थी, जिसके चलते 20 अक्टूबर, 2003 को उन पर जानलेवा हमला किया गया और उनकी मौत हो गई उन्होंने 1998 में गौ रक्षा का संकल्प लिया था और तभी से डॉक्टरी का पेशा छोड़कर वह अपनी मुहिम में जुट गए थे, गौ वध को रोकने के लिए विभिन्न मुस्लिम संगठन भी सामने आए हैं, दारूल उलूम देवबंद ने एक फ़तवा जारी करके मुसलमानों से गौ वध न करने की अपील की है, दारूल उलूम देवबंद के फतवा विभाग के अध्यक्ष मुती हबीबुर्रहमान का कहना है कि भारत में गाय को माता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए मुसलमानों को उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गौ वध से ख़ुद को दूर रखना चाहिए, उन्होंने कहा कि शरीयत किसी देश के क़ानून को तोड़ने का समर्थन नहीं करती, क़ाबिले ग़ौर है कि इस फ़तवे की पाकिस्तान में कड़ी आलोचना की गई थी, इसके बाद भारत में भी इस फ़तवे को लेकर ख़ामोशी अख्तियार कर ली गई
गाय भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, यहां गाय की पूजा की जाती है. यह भारतीय संस्कृति से जुड़ी है, महात्मा गांधी कहते थे कि अगर निस्वार्थ भाव से सेवा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहीं देखने को मिलता है तो वह गौ माता है, गाय का ज़िक्र करते हुए वह लिखते हैं, गौ माता जन्म देने वाली माता से श्रेष्ठ है, हमारी माता हमें कई वर्ष दुग्धपान कराती है और यह आशा करती है कि हम बड़े होकर उसकी सेवा करेंगे, गाय हमसे चारे और दाने के अलावा किसी और चीज़ की आशा नहीं करती हमारी मां प्राय: रूग्ण हो जाती है और हमसे सेवा की अपेक्षा करती है, गौ माता शायद ही कभी बीमार पड़ती है, वह हमारी सेवा आजीवन ही नहीं करती, अपितु मृत्यु के बाद भी करती है अपनी मां की मृत्यु होने पर हमें उसका दाह संस्कार करने पर भी धनराशि व्यय करनी पड़ती है, गौ माता मर जाने पर भी उतनी ही उपयोगी सिद्ध होती है, जितनी अपने जीवनकाल में थी हम उसके शरीर के हर अंग-मांस, अस्थियां, आंतों, सींग और चर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं, यह बात जन्म देने वाली मां की निंदा के विचार से नहीं कह रहा हूं, बल्कि यह दिखाने के लिए कह रहा हूं कि मैं गाय की पूजा क्यों करता हूंदरअसल भारत में गौ वध रोकने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने की ज़रूरत है, मुसलमान तो गाय का गोश्त खाना छोड़ देंगे, लेकिन गाय के चमड़े का कारोबार करने वाले क्या इससे हो रही मोटी कमाई छोड़ने के लिए तैयार हैं,  इस बात में कोई दो राय नहीं कि गौ हत्या से सबसे ज़्यादा फ़ायदा ग़ैर मुसलमानों को है और उन्हीं के दबाव में सरकार गौ हत्या पर पाबंदी नहीं लगाना चाहती

देश की करोड़ों जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए आप से प्रार्थना है कि आप गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करके ऐसा विधान बना दें कि गौ हत्या करने वाले को कड़ी सजा हो जाये। आप की बड़ी मेहरबानी होगी। आपकी के सरकार की आंखें अब भी खुल जायें तो गौ माता की आप पर अति कृपा होगी ऐसा मेरा मानना है ।
राष्ट्रहित व जनहित में आपके सकारात्मक उत्तर की अपेक्षा के साथ आपको पुनः प्रणाम!
जय हिन्द ….!
भवदीय
एम के पाण्डेय निल्को
राकड़ी, सोडाला, जयपुर 302006

+91-9024589902 



पेशावर – खून के नापाक ये धब्बे


खून के नापाक ये धब्बे ,

खुदा से कैसे छिपाओगे ?

मासूमो के कब्र पर चढ़कर

कौन सा जन्नत पाओगे ?

अल्लाह की भी रूह काप गई होगी

शांति दूतो के इस कृत्य से ?

कैसी होगी उस माँ की हालत

जिसके बच्चे ने कहा होगा –

माँ, मैं आज स्कूल नहीं जाऊंगा

पर माँ ने उसे डाट कर

जबरजस्ती स्कूल भेजा होगा |

आतंक के खिलाफ गर

पाकिस्तान ने आवाज़ उठाई होती

तो मासूमो की जान

आज यू न जाई होती |

अब स्कूल मदरसे भी डरे हुए है

किसी अनजान डर से सहमे हुए है

क्यों इंसानियत होती है हर बार शर्मशार ?

क्या इसका जवाब कोई देगा…..&%*#$@$……..?

किसी ने सच ही कहा है –

आज दिन में एक अजीब सा दर्द है मेरे मौला

ये तेरी दुनिया है , तो यहाँ इंसानियत क्यों मरी है …?

हिंदुस्तानी होना क्या होता है

ये तब पता चलता है जब गाढ़े वक़्त में

पाकिस्तान के लिए भी दुःख होता है

पेशावर में मासूम परिंदों के लहू से

भरे पंखों को पेशा बना डाला…

लगा ऐसा जैसा शैतान ने खुदा को

भी अपने जैसा बना डाला..


ईश्वर उन बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करे जिनका जीवन, जीवन बनने से पहले ही समाप्त कर दिया गया और प्रभु बाकी बचे बच्चों को साहस और हिम्मत दे कि वो इस ह्रदय विदारक घटना से खुद को उबार पाये। मासूम बच्चों की मौत का हमें बड़ा दुःख है और पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है मगर फिर भी हमें बच्चों की मौत का मजाक नहीं बनाना चाहिए, लेकिन ये बात #
जेहाद का समर्थन करने वाले मुसलमानों को समझनी चाहिए कि आज ये जेहादी बीमारी गैर- मुसलमानों से ज्यादा खुद मुसलमानों को ही निगल रही है, ये जेहाद सिर्फ और सिर्फ इंसानियत के खिलाफ है न की किसी समुदाय विशेष के खिलाफ।।

भगवान इस हादसे में मारे गए बच्चों की आत्मा को शांति दें।।

फ्रिज में रखे आटे के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी।

भोजन केवल शरीर को ही नहीं, अपितु मन-मस्तिष्क को भी गहरे तक प्रभावित करता है। दूषित अन्न-जल का सेवन न सिर्फ आफ शरीर-मन को बल्कि आपकी संतति तक में असर डालता है।
ऋषि- मुनियों ने दीर्घ जीवन के जो सूत्र बताये हैं उनमें ताजे भोजन पर विशेष जोर दिया है। ताजे भोजन से शरीर निरोगी होने के साथ-साथ तरोताजा रहता है और बीमारियों को पनपने से रोकता है। लेकिन जब से फ्रीज का चलन बढा है तब से घर-घर में बासी भोजन का प्रयोग भी तेजी से बढा है। यही कारण है कि परिवार और समाज में तामसिकता का बोलबाला है। ताजा भोजन ताजे विचारों और स्फूर्ति का आवाहन करता है जबकि बासी भोजन से क्रोध, आलस्य और उन्माद का ग्राफ तेजी से बढने लगा है। शास्त्रों में कहा गया है कि बासी भोजन भूत भोजन होता है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति जीवन में नैराश्य, रोगों और उद्विग्नताओं से घिरा रहता है। हम देखते हैं कि प्रायःतर गृहिणियां मात्र दो से पांच मिनट का समय बचाने के लिए रात को गूंथा हुआ आटा लोई बनाकर फ्रीज में रख देती हैं और अगले दो से पांच दिनों तक इसका प्रयोग होता है। गूंथे हुए आटेको उसी तरह पिण्ड के बराबर माना जाता है जो पिण्ड मृत्यु के बाद जीवात्मा के लिए समर्पित किए जाते हैं। किसी भी घर में जब गूंथा हुआ आटा फ्रीज में रखने की परम्परा बन जाती है तब वे भूत और पितर इस पिण्ड का भक्षण करने के लिए घर में आने शुरू हो जाते हैं जो पिण्ड पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे भूत और पितर फ्रीज में रखे इस पिण्ड से तृप्ति पाने का उपक्रम करते रहते हैं। जिन परिवारों में भी इस प्रकार की परम्परा बनी हुई है वहां किसी न किसी प्रकार के अनिष्ट, रोग-शोक और क्रोध तथा आलस्य का डेरा पसर जाता है। इस बासी और भूत भोजन का सेवन करने वाले लोगों को अनेक समस्याओं से घिरना पडता है। आप अपने इष्ट मित्रों, परिजनों व पडोसियों के घरों में इस प्रकार की स्थितियां देखें और उनकी जीवनचर्या का तुलनात्मक अध्ययन करें तो पाएंगे कि वे किसी न किसी उलझन से घिरे रहते हैं। आटा गूंथने में लगने वाले सिर्फ दो-चार मिनट बचाने के लिए की जाने वाली यह क्रिया किसी भी दृष्टि से सही नहीं मानी जा सकती।
पुराने जमाने से बुजुर्ग यही राय देते रहे हैं कि गूंथा हुआ आटा रात को नहीं रहना चाहिए। उस जमाने में फ्रीज का कोई अस्तित्व नहीं था फिर भी बुजुर्गों को इसके पीछे रहस्यों की पूरी जानकारी थी। यों भी बासी भोजन का सेवन शरीर के लिए हानिकारक है ही।

आइये आज से ही संकल्प लें कि आयन्दा यह स्थिति सामने नहीं आए। तभी आप और आपकी संतति स्वस्थ और प्रसन्न रह सकती है और औरों को भी खुश रखने लायक व्यक्तित्व का निर्माण कर सके । 

….बंजारे को घर मिला

दोस्तो मेरे मित्र सिद्धार्थ सिंह श्रीनेत कहते है की आज कल रचनाओ मे अलंकार का प्रयोग देखने को कम ही मिलता है , उनकी इस बात से कुछ हट तक सहमत मैं भी हूँ । बहुत कोशिश करने के बाद कुछ प्रयोग करने की कोशिश है, ज़रा आप लोग ही बताए की कोशिश कहा तक सफल रही । साथ मे पाठको की जानकारी के लिए अलंकार के बारे मे भी कुछ जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है, ‘आभूषण। जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभूषणों से शरीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य अलंकारों से काव्य की। काव्य में भाषा को शब्दार्थ से सुसज्जित तथा सुन्दर बनाने वाले चमत्कारपूर्ण मनोरंजन ढंग को अलंकार कहते हैं। भारतीय साहित्य में अनुप्रास, उपमा, रूपक, अनन्वय, यमक, श्लेष, उत्प्रेक्षा, संदेह, अतिशयोक्ति, वक्रोक्ति आदि प्रमुख अलंकार हैं।

 

अब यह रचना आप के लिए …..

समय पर जब समय मिला

सागर मे भी गगन मिला
मुलाक़ात जब उनसे हुई
मानो बंजारे को घर मिला
खुशखबर जब यह सुना
उनके लिए ही गीत गुना
जिसको सर्च किया मैंने यहाँ वहाँ
वह तो मेरे ही करीब मिला
राजनीति पर जब यह कलम चली
काजनीति की लहर चली
गली मोहल्ले और चौराहे पर
मधुलेश की ही बात चली
कुछ सीखने की जब सीख मिली
नहीं किसी से भीख मिली
जब वह अकेले चले थे
तो नहीं यह भीड़ चली
बेशक कवियों की घनी आबादी है
पर लिखने की कहाँ पाबन्दी है
कभी-कभी तो चर्चा मंच पर भी
निल्को की भी लहर चली
****************
मधुलेश पाण्डेय निल्को

 

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World Environment Day – 5 June (विश्व पर्यावरण दिवस)

अपनी आवाज़ उठाइये, समुद्र तल नहीं

World Environment Day (WED) celebrates its 12th Anniversary on Tuesday, 5th June 2011. World Environment Day (WED) is a day that spread awareness of the environment and enhances political attention and public action. Every year WED is celebrated on 5 June. It was the day that United Nations Conference on the Human Environment began. The United Nations Conference on the Human Environment was from 5–16 June 1972. It was established by the United Nations General Assembly in 1972. The first World Environment Day was on 1973. World Environment Day is similar to Earth Day. 


The 2014 theme for World Environment Day will focus on ‘Small Islands and Climate Change’, the official slogan for the year 2014 is ‘Raise Your Voice Not The Sea Level.


World Environment Day Quotes & Saying

“Give a man a fish, and he can eat for a day.  But teach a man how to fish, and he’ll be dead of mercury poisoning inside of three years.”
– Charles Haas
“When you use a manual push mower, you’re “cutting”down on pollution and the only thing in danger of running out of gas is you!  ”
– Grey Livingston
“It appears to be a law that you cannot have a deep sympathy with both man and nature.”
– Henry David Thoreau
“We have been god-like in the planned breeding of our domesticated plants, but rabbit-like in the unplanned breeding of ourselves.”
– Arnold Toynbee
“Human destiny is bound to remain a gamble, because at some unpredictable time and in some unforeseeable manner nature will strike back.”
– Rene Dubos


लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त

यूपी के बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्‍या कर शव पेड़ पर लटका देने के मामले के बाद भी राज्‍य सरकार सक्रिय नहीं लगती। इस घटना के बाद देश-विदेश में यूपी की बदनामी हुई है और केंद्र सरकार ने भी राज्‍य सरकार को घेरा है। लेकिन, लगता है राज्‍य में अभी भी बलात्‍कारियों का राज है। बदायूं की घटना के बाद भी पूरे राज्‍य से करीब आधा दर्जन बलात्‍कार के बड़े मामले सामने आए हैं।


यूपी दुनिया का पहला ऐसा राज्य होगा जहां के लोगों को दो कौड़ी के लैपटॉप की कीमत बहू बेटियों की इज़्ज़त दे के चुकानी पड़ रही है..

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PM grieved at the passing away of Shri Gopinath Munde.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has condoled the untimely passing away of the Union Minister for Rural Development, Shri Gopinath Munde, in a road accident this morning. Expressing his sadness and shock, the Prime Minister described Shri Gopinath Munde as a true mass leader, who rose to great heights and tirelessly served people.

Following is the text of the Prime Minister’s tweets:

“Extremely saddened & shocked by the demise of my friend & colleague Gopinath Munde ji. His demise is a major loss for the Nation & the Govt.

Gopinath Munde ji was a true mass leader. Hailing from backward sections of society, he rose to great heights & tirelessly served people.

My tributes to a dynamic leader whose premature demise leaves a void hard to fill.

Condolences to Munde ji’s family. We stand by them in this hour of grief.”

(From PMO Website)

श्रद्धांजलि


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, “मुंडे एक सच्चे जननेता थे. वो समाज के पिछड़े वर्ग से आते थे. वो ज़मीन से उठकर ऊंचाई तक पहुंचे और जनता की अथक सेवा की.”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुंडे का असामयिक निधन देश और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी मुंडे के निधन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंडे को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, “हमारे प्रिय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपीनाथ मुंडे के असमय निधन की ख़बर से दुखी हूं.”

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उन्हें ट्विटर पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मुंडे मेरे दोस्त और महान नेता थे. उनके निधन की ख़बर सुनकर मैं हैरान हूं.”


VMW Team की तरफ से श्री गोपी नाथ जी को श्रद्धांजलि, ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में जगह दें.. और परिवार को इस अपूर्ण क्षति को सहने की शक्ति दें

हमारी सरकार – केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विभाग

केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विभाग
प्रधान मंत्री
श्री नरेन्द्र मोदी
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन 
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा 
किसी अन्य मंत्री को आवंटित न किए गए
अन्य सभी मंत्रालय

कैबिनेट मंत्री
1
श्री राजनाथ सिंह
गृह
2
श्रीमती सुषमा स्वराज
विदेश
प्रवासी भारतीय मामले
3
श्री अरुण जेटली
वित्त
कारपोरेट मामले 
रक्षा
4
श्री एम. वैंकैय्या नायडू
शहरी विकास 
आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन 
संसदीय कार्य
5
श्री नितिन जयराम गडकरी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
जहाजरानी
6
श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा
रेल
7
सुश्री उमा भारती
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरूद्धार
8
डॉ. नजमा ए. हेपतुल्ला
अल्पसंख्यक मामले
9
श्री गोपीनाथ मुण्डे
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्वच्छता
10
श्री राम विलास पासवान
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
11
श्री कलराज मिश्र
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
12
श्रीमती मेनका संजय गांधी
महिला एवं बाल विकास
13
श्री अनंत कुमार
रसायन एवं उर्वरक
14
श्री रविशंकर प्रसाद
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी 
कानून एवं न्याय
15
श्री अशोक गजपति राजू पुसपति
नागरिक उड्डयन
16
श्री अनंत गीते
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम
17
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
18
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर
खान
इस्पात
श्रम एवं रोजगार
19
श्री जुएल उरांव
जनजातीय मामले
20
श्री राधा मोहन सिंह
कृषि
21
श्री थावरचन्द गेहलोत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
22
श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी
मानव संसाधन विकास
23
डॉ. हर्ष वर्धन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
राज्य मंत्री
1
जनरल वी के सिंह
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार)
विदेश 
प्रवासी भारतीय मामले
2
श्री इन्द्रजीत सिंह राव
योजना (स्वतंत्र प्रभार)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (स्वतंत्र प्रभार)
रक्षा
3
श्री संतोष गंगवार
वस्त्र (स्वतंत्र प्रभार)
संसदीय कार्य
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरूद्धार
4
श्री श्रीपद यसो नायक
संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार)
5
श्री धर्मेन्द्र प्रधान
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)
6
श्री सर्बानन्द सोनवाल
कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले तथा खेल (स्वतंत्र प्रभार)
7
श्री प्रकाश जावड़ेकर
सूचना एवं प्रसारण (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार)
संसदीय कार्य
8
श्री पीयूष गोयल
विद्युत (स्वतंत्र प्रभार)
कोयला (स्वतंत्र प्रभार)
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार)
9
डॉ. जितेन्द्र सिंह
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार)
पृथ्वी-विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार)
प्रधान मंत्री कार्यालय
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
10
श्रीमती निर्मला सीतारमण
वाणिज्य एवं उद्योग (स्वतंत्र प्रभार)
वित्त 
कारपोरेट मामले
11
श्री जी.एम. सिद्धेश्वर
नागरिक उड्डयन
12
श्री मनोज सिन्हा
रेल
13
श्री निहालचन्द
रसायन एवं उर्वरक
14
श्री उपेन्द्र कुशवाहा
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्वच्छता
15
श्री राधाकृष्णन पी.
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम
16
श्री किरण रिजीजू
गृह
17
श्री कृष्ण पाल
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
जहाजरानी
18
डॉ. संजीव कुमार बालियान
कृषि
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
19
श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा
जनजातीय मामले
20
श्री रावसाहेब दादाराव दानवे
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
21
श्री विष्णु देव साय
खान
इस्पात
श्रम एवं रोजगार
22
श्री सुदर्शन भगत
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एनडीए की पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए

 
आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

प्रधानमंत्री- श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी


भारत की महान परम्पराओं एवं संस्कारों का पालन करने करने वाले नेता “श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी” को देश के “प्रधानमंत्री” बनने पर बहुत बहुत बधाईया !! – VMW Team

क्या है धारा 370

स्वतंत्रता के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के ‍पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह कश्मीर के राजा थे। उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा।  तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालात को देखते हुए गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में धारा 306-ए, जो बाद में धारा 370 बनी, का प्रारूप प्रस्तुत किया। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। धारा ३७० भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद ३७० जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

क्या हैं अधिकार : 
 
भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 

 वित्तीय आपातकाल लगाने वाली धारा 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती। 

 जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है। 

 भारत की संसद जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून नहीं बना सकती।

 धारा 356 लागू नहीं, राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं। 

 कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहरी से शादी करती है तो उसकी कश्मीर की नागरिकता छिन जाती है। 

 जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता है।

विशेष अधिकार धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।

अबकी बार मोदी सरकार!



क्या दिल्ली ,क्या काशी , 
मोदी को चुनेगा .हर भारतवासी ,
अबकी बार मोदी सरकार …..
युवराज बन गया पप्पू यार…..अबकी बार मोदी सरकार!!
देश न बने पप्पू इस बार….अबकी बार मोदी सरकार!!
नहीं चाहिये कोई ख़ैरात, बहुत
देखी तेरी बारात! बस चाहिये
सुरक्षा, सु़विधा, सुअवसर के हालात!
बाक़ी दम रखते है यार,
अबकी बार मोदी सरकार!
मंदर,डाक्टर, दफ़्तर, बार,
हर जगह बड़ी क़तार!
पंडीत,कंपौडर,चपरासी, साकी,
कोई नहीं है ज़िम्मेवार!
शायद अब सुधरे हालात,
अबकी बार मोदी सरकार!
भैंस आजम को छोड़ गयीं!!
सांड़ ने मुलायम के हेलिकोप्टर को रोक दिया!!
यानि……
पशु पक्षी की भी यही पुकार, अबकी बार मोदी सरकार!

Madhulesh Pandey Nilco

सामोद वीर हनुमानजी

बालाजी के दर्शन से शुरू हुई हमारी पार्टी कुछ अलग … अलग जगह लेकिन वही पुराने लोग पर अंदाज नया … जोश तो पूछिए ही मत 750 सीढ़िया ऐसे पार कर गए जैसे हनुमान जी ने समुन्द्र पार किया था । सभी लोगो ने भरपूर मजा किया और एक शाम को बेहतरीन बनाया । सभी को बहुत बहुत धन्यवाद । वर्षगांठ को हमारे योगेश जी , विजय जी , मधुलेश जी , अभिषेक जी, मोहक जी, त्रिपुरेंद्र जी , सिद्धार्थ जी, नीलेश जी, सुंदरम जी ने ख़ास बनाया ……


 Shri Samod Balaji also known as Veer Hanuman is one of the most ancient religious place in Rajasthan. Generations have over and this place regularly giving peace and prosperity to all peoples come here. After having a long route of ladders it seems that we have left all our tensions on the ground. It is Just 30 Kms far from main Jaipur. Nearest Railway station is Chomu. It is easily accessible from all the states of Rajasthan. Peoples from all india and abroad come to get some peace and wake their religious emotions. This temples’s completely maintained by a trust named “Mandir Shree Sita Ram Ji,Veer Hanuman Trust Samod”. This temple is regularly developing not only in the sense of infrastructure but also in life development . Trust is running a Gurukul for veda education which is rare in world. Somad Palace is one of the another attaraction of this place. This Temple is easily approachable. Its a beautiful place to visit.According to Times London Jan 99, Samod Palace is the 5th best hotel in the world .
Shri Samod Balaji is situated between the mountains of Samod. To reach at this temple nearest railway station is Chomu. After reaching there it is only 5 Kms far. Buses are regular available for this place. From Sanganer airport it is y 45 Minutes run.


 मंदिर जनमानस के ह्रदय मे बसे हुए हैँ।इसकी चौखट से कोई भी फरियादी खाली हाथ नहीँ लौटता हैँ।

एक बार पुनः आपके प्यार और स्नेह के लिए बहुत बहुत आभार एवं हार्दिक धन्यवाद !!


बनारस में ‘चायवाला’ के सामने ‘पानवाला’

 भाजपा अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के ‘चाय वाले’ की पृष्ठभूमि पर ‘चाय पर चर्चा’ आयोजनों के जरिए मतदाताओं को जोड़ने में लगी है। वाराणसी में उनके मुकाबले उतरे सपा उम्मीदवार कैलाश चौरसिया लोगों को उनके पारिवारिक पेशे ‘पान वाले’ को भुनाने में लग गए हैं।

चौरसिया कहते हैं कि मोदी यदि कभी ‘चाय’ बेचते रहे हैं तो वे अपनी ’चाय वाले’ की पृष्ठभूमि को भुना रहे हैं। हमारे पुरखे तो ‘पान’ बेचने के धंधे में रहे है और उसी तर्ज पर हम ‘पान वाला’ अभियान पर निकल पड़े हैं।

उत्तरप्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री चौरसिया ने कहा, मैंने भी बहुत सालों तक पान बेचा है और पान बेचना तो हमारा पुश्तैनी व्यवसाय है।

उन्होंने कहा कि मोदी जहां एक तरफ लोगों से ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए संवाद कर रहे है। उनकी कोशिश अधिक से अधिक पान वालों से सीधे संवाद स्थापित करने की है। इसलिए भी कि इसमें निजत्व का अहसास होता है।

चौरसिया ने कहा, मैं मोदी की तरह हवा-हवाई में भरोसा नहीं करता, जो भारी धनराशि खर्च करके अपने प्रचार के लिए ‘चाय पर चर्चा’ कर रहे हैं। मेरा मकसद इस तरह के बेकार प्रचार पर धन खर्च करना नहीं है कि खुद को टीवी पर दिखाए और अखबारों में विज्ञापन दें। यह पैसा गरीबों की सहायता में, उनके इलाज में, शादी-विवाह में सहायता के रूप में खर्च किया जाना बेहतर है।

चौरसिया की ‘पान वाला’ पृष्ठभूमि को चुनावी चर्चा में लाने के लिए सपा कार्यकर्ता मशहूर फिल्मी गाने ‘खईके पान बनारस वाला, खुल जाए बंद अक्ल का ताला’, छोरा गंगा किनारे वाला’ गाते घूम रहे हैं और मोदी तथा केजरीवाल के वादों को खोखला बताते हुए लोगों से उनसे सावधान रहने की नसीहत दे रहे हैं।

चौरसिया यह आरोप भी लगा रहे है कि मोदी समर्थकों ने देवी-देवताओं के लिए मशहूर नारों और मंत्रों की तर्ज पर उनके समर्थन में नारे उछालकर देवी-देवताओं का अपमान किया है।

सपा के स्थानीय कार्यकर्ता किशन दीक्षित कहते हैं कि देवी दुर्गा और भगवान शंकर से मोदी की तुलना करके भाजपा कार्यकर्ताओं ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

उन्होंने कहा, हम भाजपाइयों के विपरीत ‘खईके पान बनारस वाला..’ गाने के साथ आम लोगों और पान वालों के बीच जाकर उनका समर्थन मांग रहे है। साथ ही लोगों को यह भी समझा रहे हैं कि हमारा उम्मीदवार इसी शहर का है और यहीं रहेगा, जबकि मोदी या केजरीवाल चुनाव बाद यहां से चले जाएंगे।

चौरसिया कहते हैं कि बनारस अपने बनारसी पान के लिए दुनिया में मशहूर है और बनारसी पान वाले के साथ चाय वाले का क्या मुकाबला। (साभार – वेब दुनिया )
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योगेश पाण्डेय 

                                                                                                

आपको एवं आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है।यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता हैं ! यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहां भी धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं! पहलेदिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं, और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं। 

आपको एवं आपके परिवार को होली की बहुत मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ.






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ठण्डा का मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता

ठण्डा का मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता
(बचपन की एक कहानी, निल्को की कलम से …)



बात बहुत पुरानी नहीं होती,
कुछ बात छुपानी नहीं होती
हमारे बचपन की बात है
भाई गजेन्द्र जी के साथ है
एक अनोखी बात है –
ठण्डा पीने का आग्रह किया था साथ में
गजेन्द्र जी ने हामी भरी थी बीच बाज़ार में
जैसे ही निल्को ने ठण्डा का पाउच निकला
गजेन्द्र भाई जोर से भागा
और बड़े ज़ोर से चिल्लाया
अरे क्या यही ठण्डा होता है ?
जिससे आदमी भी ठण्डा पड़ सकता है
तो मधुलेश ने हंस कर कहा –
माना यह कविता पढ़ना जुर्म है
पर इससे किसी का मुंह कला नहीं होता
ठण्डा तो कुछ और भी होता है
इसका मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता …..  

मधुलेश पाण्डेय निल्को

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें

 आज मकर संक्रांति है। हवा में घुली है पतंगों की शोखी। क्या बच्चे और क्या जवान, सभी छतों पर हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर मे आज का दिन पतंगो के नाम रहा। सुबह से ही गुलाबी नगर के आसमान में सतरंगी पतंगो का जाल बुन गया। युवक युवतियां और महिलाएं पतंगबाजी में बड़े उल्लास के साथ शामिल हुईं। इस अवसर पर कई विदेशी सैलानी भी पतंग महोत्सव में शरीक होकर पतंग उड़ाकर इस पर्व का लुत्फ उठाया। जयपुर में मकर संक्राति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।  संभवतः इस परंपरा की शुरूआत भगवान श्री राम के समय में हुई थी। तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में भगवान श्री राम के बाल्यकाल का वर्णन करते हुए कहा गया है कि भगवान श्री राम ने भी पतंग उड़ायी थी।

राम इक दिन चंग उड़ाई।
इंद्रलोक में पहुंची जाई।।

तमिल की तन्दनानरामायण में भी इस घटना का जिक्र किया गया है। इस रामायण के अनुसार मकर संक्रांति ही वह पावन दिन था जब भगवान श्री राम और हनुमान जी की मित्रता हुई। मकर संक्राति के दिन राम ने जब पतंग उड़ायी तो पतंग इन्द्रलोक में पहुंच गयी।

पंतंग को देखकर इन्द्र के पुत्र जयंती की पत्नी सोचने लगी कि, जिसकी पतंग इतनी सुन्दर है वह स्वयं कितना सुंदर होगा। भगवान राम को देखने की इच्छा के कारण जयंती की पत्नी ने पतंग की डोर तोड़कर पतंग अपने पास रख ली।

भगवान राम ने हनुमान जी से पतंग ढूंढकर लाने के लिए कहा। हनुमान जी इंद्रलोक पहुंच गये। जयंत की पत्नी ने कहा कि जब तक वह राम को देखेगी नहीं पतंग वपस नहीं देगी। हनुमान जी संदेश लेकर राम के पास पहुंच गये। भगवान राम ने कहा कि वनवास के दौरान जयंत की पत्नी को वह दर्शन देंगे। हनुमान जी राम का संदेश लेकर जयंत की पत्नी के पास पहुंचे। राम का आश्वासन पाकर जयंत की पत्नी ने पतंग वापस कर दी।

तिन सब सुनत तुरंत ही, दीन्ही दोड़ पतंग।
खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।।
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