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…वो कहर बरसाती है – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

वह पायल नहीं पहनती पांव में
 बस एक काले धागे से कहर बरसाती है
उसकी यही अदा तो ‘निल्को’
मुझे उसका दीवाना बनाती है
बहुत मजे से इठलाती है
 गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती है
माथे पर जब बिंदी लगाती है
तो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है
‘मधुलेश’ का ख्याल आए तो
वह भी कविता बनाती है
जीवन की गहन अनुभूतियों पर
लिखने का प्रयास कर रचना वो बनाती है
मौसम बेईमान हो जाए जो तपाक से
रसोई में जाकर पकोड़े वो बनाती है
बस कुछ ही यूं ही आए हैं बड़े दिनों बाद इस ब्लॉग पर
पढ़कर वह भी इसे सार्थक बनाती है
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एम केपाण्डेयनिल्को

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन

अभिव्यक्ति की आज़ादी
पर लगा कर बैन
आ ही रहा होगा
उनके दिल को चैन
बोलने पर उन्होंने
भले लगाई पाबन्दी है
पर ‘निल्को’ हम तो
लिखने के भी आदी है
इतनी आसानी से
नहीं छोड़ेगे ‘जानेमन’
क्यू की ये तो है
किसी का दीवानापन
जितना दूर जाना चाहोगी
पास चले आयेगे
तुम्हे दूर से ही चूमकर
घर को लौट आयेगे
सस्ती महँगी जब
बातें तुम करती हो
अनमोल का भी
मोल लगाती हो
पर कई बार तो
तुम भी ब्लाक करके
अपने मन का
भड़ास निकलती हो
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एम के पाण्डेय निल्को