भूचाल आ जाए

हर एक दिल में काश ख्याल आ जाये
रंजिशें मिटाने को भूचाल आ जाये ,

हर बशर में नूर उस का फिर क्यों झगड़े
हर जुबां पे काश ये सवाल आ जाये ,

गुनाहों की दुनिया से वाबस्ता रहे
क्या मजाल चेहरे मलाल आ जाये

बुझे बुझे चेहरे दिखे मुफ़लिसों के
खुदा करे के उन पर जमाल आ जाये

सितारे तोड़ मैं बांट दूँ मुफ़लिसों में
‘राकेश’ हाथों में गर कमाल आ जाये ,
_*🎊🌷राकेश कुमार मिश्रा🌷🎊*_

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