पूनम मावस से समझौता करने वाली है।

चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के रिश्तेदारों सुन लो तुम,
इक दिन पूनम मावस से समझौता करने वाली है।

कुछ तारे तो इधर बंटे हैं कुछ तारे हैं बंटे उधर,
धरती अम्बर ताक रहे हैं जाएं तो हम जाएं किधर।
बादल दल भी नारों की तख्तियां लेकर घूम रहे,
अपना पानी खुद पियेंगे सूख रहें हैं यहां अधर।
नदी गाँव की चुल्लूभर पानी में मरने वाली है,
इक दिन पूनम मावस से समझौता करने वाली है।

सूरज ने जब आँख दिखाई तो रातें भी जली यहाँ,
चाँद के मद्धम उजियाले में इक पूनम है पली यहाँ।
अँधियारे मौका पाते ही रूप बदलते है रहते,
अपने दीपक होकर भी हर इक बाती है छली यहाँ।
सुबह यहां पर डरी-डरी खुद सन्ध्या धरने वाली है।
इक दिन पूनम मावस से समझौता करने वाली है।

नैतिकता दौलत के घर पर खुद बंधक है बनी हुई।
और दौलत मद में होकर अब पापों में है सनी हुई।
सत्ता और गरीबी में हरदम रहता है द्वंद यहां,
कौन है छोटी कौन बड़ी है दोनों में है ठनी हुई।
सुनो द्रोपदी स्वयं यहां पर चीर को हरने वाली है।
इक दिन पूनम मावस से समझौता करने वाली है।

✍🏻 नरेंद्रपाल जैन।
9785205694

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