हिन्दी कविता- मिटा क्यो नहीं देते

नाम दहेज का सब मिटा क्यो नहीं देते |
बेटी ही दहेज सब बता क्यो नहीं देते |
दुनिया बदल रही दस्तूर बदलना चाहिए |
दहेज लोभियो सीख सीखा क्यो नहीं देते |
बेटा है जरूरी जितना बेटियाँ भी जरूरी |
दूल्हे के बाजार बेटे बीठा क्यो नहीं देते |
बेटे से कम सहारा बुढ़ापा वो न होगी |
बेटियो के किस्से दिखा क्यो नहीं देते |
वो रहेगा बिदेश संग अपनी बीबी बच्चो |
अकेले मर गई माँ बता क्यो नहीं देते |
सुन माँ बाप परेशानी दौड़ी चली आती |
पास है बेटा अंजान सुना क्यो नहीं देते |
है अगर बेटा तो बेटा बनकर दिखाओ |
माता पिता सेवा पाँव दबा क्यो नहीं देते |
दुआ भी मिलेगी बदी और बरक्क्त भी |
बनके श्रवण जमाने दिखा क्यो नहीं देते |
अहमियत बेटी की बेटो से करो ज्यादा |
राजदुलारी मिठाई खिला क्यो नहीं देते |
बेटिया घर के चूल्हा चौको सीमित न रही |
कुल परिवार सम्मान बढ़ा क्यो नहीं देते |
बेटी के गुण शिक्षा दिक्षा दहेज समझ लो |
दहेज दानव लगा आग जला क्यो नहीं देते |

श्याम कुँवर भारती [राजभर]

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