सोचा आज कह ही दूँ

जब भी किसी समस्या का समाधान हो जाता है तब तब सोशलमीडिया पर बहुत ही आपत्तिजनक टिपण्णीयां मिलती है वीर रस के कवियों के बारे में कही दुकान बंद हो गयी कही अब क्या बेचेंगे इत्यादि ,

मैं बताता हूँ आज आपको जो कविताएं किसी समस्या पर लिखी जाती है उस कवि का दिल बड़ा होता है जो जानता है कि मेरी रचना शहीद होगी फिर भी लिखता है जैसे माँ अपने बेटे को सरहद पर भेजती है । अरे आपको क्या पता उस कवि को कितनी अपार खुशी होती है जब उसकी रचना शहीद होती है वो भी बिना उफ़ किये, कविता लिखने का उद्देश्य सफ़ल हो गया और भला उसे क्या चाहिए , दूसरी बात रचना मरी है शहीद हुए है अगर आप कवि है या साहित्य को सम्मान देते है तो उस रचना को शहीद कहिये जो रचना अपने कर्तव्य पर टिकी रही और आखिर एक स्वर्णिम युग लाकर अपने परमधाम को चली गयी जिसके लिए वो इस पृथ्वी पर अवतरित हुई थी ।

और रही बात अब क्या बेचेंगे, देश मे जब तक साम्प्रदायिक दंगे , अश्लीलता , लोभ , पाप , अत्याचार , आदि होते रहेंगे तब तक हम अपनी रचनाएं शहीद होने के लिए लिखते रहेंगे।

धन्यवाद

अंकित चक्रवर्ती

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