Monthly Archives: September 2018

सरकार, छोड़िये ब्लैकमेल की राजनीति, जनता तो हिसाब मांगेगी।

लूला-लँगड़ा हो चुके विपक्ष से आप यह उम्मीद लगाकर बैठेंगे, कि सरकारी लूट का ए विरोध करेंगे तो इस मुग़ालते में मत रहिए। सरकार का विरोध करने के लिए किसी के पास कूबत नहीं है। थोड़ी कूबत राहुल ने दिखा दी तो आपने उसे मानसिक बीमार बता डाला। मुलायम सिंह यादव, मायावती बोलेंगे नहीं, क्योंकि आय से अधिक सम्पप्ति का मामला सरकार उछाल कर इन्हें अंदर कर सकती है। जब प्रेस कांफ्रेंस में नथुने बहुत जोर-जोर से फड़क रहे हों तो इसका मतलब यही होता है कि दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है। रविशंकर प्रसाद नथुने फड़काते हुए प्रेस काँफ्रेंस में आये। ठीक उसी तरह जैसे अमित शाह जी के लाडले जय शाह के बचाव में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आये थे।
वैसे दोनों मामलों में एक अंतर है। पीयूष गोयल देश के पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री बने थे जो किसी प्राइवेट सिटीजन पर लगे चार-बीसी के इल्जामों का बचाव करने आये हों। प्रसाद जी मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं, इस नाते उन्हे प्रधानमंत्री की ओर से बोलने का पूरा हक है। आप पूछ सकते हैं कि मामला रक्षा मंत्रालय का था, तो फिर निर्मला सीतारमन क्यों नही, नथुने तो उनके भी बराबर फड़कते हैं।
आपका पता होना चाहिए कि यह सर्जिकल स्ट्राइक वाली सरकार है। कब कहां से स्ट्राइक हो जाएगा पता नहीं। कृषि मामलों में गृह मंत्री, गृह संबंधित मामलों पर रक्षा मंत्री और रक्षा से जुड़े मामलों पर आईटी मंत्री। जैसे टोटल हॉकी के नये फॉरमेंट में कभी डिफेंडर आगे बढ़ जाता है और कभी फॉरवर्ड गोल बचाने के लिए पीछे चला आता है। पात्रा जी तो मैनेजर हैं ही।
रविशंकर प्रसाद बहुत तगड़े डिफेंडर हैं। वकालत में कोई सानी नहीं है। आंखे निकालकर चंगू-मंगुओं को डराना भी जानते हैं।
  हद देखिये,  रवि बाबू ने राफेल सौदे पर लगे अति गंभीर इल्जामों के जवाब में पहले पूरे नेहरू-गांधी खानदान की कुंडली बांची। मैं इंतज़ार कर रहा था कि वे कहेंगे कि हम लोगों ने मोहन जी के सामने शपथ ली है कि अगली सात पीढ़ियों तक इस घटिया खानदान में बेटे या बेटी का ब्याह नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं कहा। यह मास्टर स्ट्रोक आगे लिए बचा लिया।
देश इंतज़ार कर रहा था कि रवि बाबू राफेल विमान की कीमत निकालकर कांग्रेसियों के मुंह पर दे मारेंगे। पर कुछ न हुआ न होगा क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई

देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ? – अनुज शुक्ला

देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
खाक में मिल कर भी कहता है , अभी बिगड़ा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ।।
मैं तो तेरे मस्त निगाहों की मजे लेता हूँ
वरना साकी तेरे मयखाने में रखा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
जिनकी जनाज़ों को हसीनों ने दिए हो कांधे
वो तो बारात है बारात, जनाजा क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
अपनी तस्वीर लड़कपन की जवानी में न देख
चाँद के सामने, वो चाँद का टुकड़ा क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
ये इंसान, तेरे घरवाले, तेरे दोस्त, तेरे अहबाद
तुझको गंगा किनारे जला देगे, समझता क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
अपने होठों से मेरे हाथों को छूने दो न यार
एक दो घूंट से बोतल का बिगड़ता क्या है ?
खाक में मिल कर भी कहता है , अभी बिगड़ा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?

अनुज शुक्ला

क्या भारत धीरे-धीरे घुसपैठ से इस्लामी राष्ट्र में बदल जायेगा?

कुछ अटपटा लगा होगा पढ़ कर, पहली बार ऐसा कोई पोस्ट कर रहा हूँ । क्या है कि एक सर्वे किया , लोगो से यही सवाल पूछा तो उन्होंने कुछ इस अंदाज में जवाब दिया – 

राजस्थान विश्वविद्यालय, पी एच डी हिंदी साहित्य की सुमन विष्ट का कहना है कि – वर्तमान मे ये सबसे ज्वलंत प्रश्न है। मै TV मे समाचार देख रही थी कि किस प्रकार से बंग्लादेश देश निर्माण के पश्चात असम मे घुसपैठ द्वारा मुस्लिम आ्बादी मे 30प्रतिशत इजाफा हुआ है जो कि चिन्तन के साथ चिन्तनीय है | ये तो एक राज्य की स्थिति है.आगे अन्य राज्यों के आकड़े आना तो बाकी है।
मुस्लिम आबादी का बढ़ने मे घुसपैठ का बहुत बड़ा योगदान रहा है ये भी कटु सत्य है। अब आगे इसका क्या स्वरूप होगा? ये पूरी तरह से प्रशासनिक नितियों व सरकारी कार्यवाही पर ही निर्भर करेगा।
भूतपूर्व सैनिक पुष्पेंद्र जी का कहना है कि – ऐसा लगातार हुआ है | इस्लाम के अनुयायी आज भी देश से प्यार नही करते | वे इस देश में केवल अपना प्रभुत्व चाहते है | वे हिन्दुओ को देखना नही चाहते | पाकिस्तान इसकी सबसे बड़ी मिसाल है |
वही नवीन गौड़ कहते है कि – इसका सीधा साधा जवाब हैं “नही”
घुसपैठ से हो रहा था लेकिन अब मोदी जी की सरकार हैं और सरकार,सरकार में फर्क हैं. क्योकि जिस तरह से हर रोज कांग्रेस के काले राज को लेकर खुलासे हो रहे हैं उससे हर हिन्दू को जागना ही होगा और अपने धर्म के लिए सोचना ही होगा. हिन्दू धर्म इतना सुदृढ़ हैं की इसे ख़त्म करना इतना आसन नही हैं किसी भी गलत धारणा वाले धर्म के लिए.
एक और बात की हम धन्य हैं की हमें मोदी जी जैसे प्रधानमंत्री मिले जिन्होंने हमेशा देश की सुरक्षा को महत्व दिया. और उन लोगो में अब बौखलाहट हैं जो कांग्रेस सरकार के काले शासन के चलते अपने मंसूबो में कामयाब होते रहे लेकिन अब ऐसा नही हो रहा हैं.
आजकल उत्तरप्रदेश में जिस तरह से पिछली सरकारों में सरकारी विद्यालयों का किया जाने वाला इस्लामीकरण पकड़ में आ रहा हैं उसे देखकर यही लगता हैं की यदि 2014 में मोदी जी की सरकार नही बनी होती तो जो ये प्रश्न पूछा गया हैं वो हकीकत बन रहा होता. क्योकि ऐसा नही की ये कारनामे पिछली गैरबीजेपी सरकारों को पता नही थी, पता होने के बावजूद भी ऐसा होने दिया जा रहा था केवल और केवल वोट और राजसुख के लिए, लेकिन जनता जगी और मोदी और योगी को सता सौपी जिसके परिणाम सामने आ रहे हैं , धर्म परिवर्तन के लिए दी जा रहे अवैध फंडिंग बंद कर दी गई हैं. इस्लामिक राष्ट्र तो क्या कोई भी शैतानी सोच हिन्दू धर्म और हिंदुस्तान का बाल भी बांका नही कर सकती हैं. जय हिन्द
तरह तरह के लोग और उनकी अपनी अपनी राय । पर सवाल का सही जवाब तो सही समय आपने पर ही पता चलेगा , इसी के साथ नए सवालों के साथ फिर हाज़िर होऊंगा तब तक के लिए नमस्कार । 

आपका एम के पाण्डेय निल्को

Asian Games 2018 – एशियन गेम्स 2018 का समापन

इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में खेले गए 18वें एशियाई खेलों का रविवार को अंत हो गया। रंगारंग कार्यक्रम के साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और एशियाई ओलंपिक काउंसिल के अध्यक्ष शेख अहमद अल फहाद अल सबाह ने इसकी आधिकारिक तौर पर समापन की घोषणा की। 19वें एशियाई खेलों की मेजबानी चीन का हैंगजू शहर करेगा।

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने समापन समारोह में तिरंगा लेकर भारतीय दल का नेतृत्व किया। समारोह में इंडोनेशिया की आधुनिक संस्कृति की झलक के साथ.साथ बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के गानों को सिद्धार्थ सलाठिया ने गाकर भारतीय एथलीटों के साथ साथ जकार्ता को भी मदहोश कर दिया। उनके साथ इंडोनेशिया की सिंगर डेनाडा ने भी खूबसूरत प्रदर्शन किया।

18 अगस्त से 2 सितंबर तक खेले गए इन खेलों में 45 देशों के 11,300 एथलीट्स ने भाग लिया। इस दौरान 40 खेलों की 465 स्पर्धाओं का आयोजन हुआ। मेजबान इंडोनेशिया सहित 45 देशों ने हिस्‍सा लिया। भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 69 पदक जीते। इसमें 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 कांस्य पदक शामिल हैं। वह आठवें स्थान पर रहा।

यह एशियाई खेलों में भारत का अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, इसके पहले ने भारत साल 2010 में ग्वांगजू एशियाई खेलों में 65 पदक जीते थे। वहीं साल 1991 में भारत ने पहले एशियाई खेलों में 15 स्वर्ण पदक हासिल किए थे। भारत ने इस स्वर्णिम इतिहास की बराबरी कर ली।

इन खेलों में चीन ने 132 स्वर्ण, 92 रजत और 65 कांस्य पदक सहित कुल 289 पदक हासिल किए। चीन के बाद दूसरे स्थान पर जापान रहा। जापान ने 75 गोल्ड, 56 सिल्वर और 74 कांस्य पदक सहित कुल 205 पदक जीते। दक्षिण कोरिया 177 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसमें 49 स्वर्ण, 58 रजत और 70 कांस्य पदक जीते।