महिला दिवस

आज महिला दिवस है देखा जाये तो हर दिन महिलाओ के बिना अधूरा है । सूरज उगने के साथ माँ की आरती के मीठे बोल या बहन की खट्टी सी झिड़की । बेटियो की ढेर सी बातें पत्नी के साथ सुबह की चाय  । वो खास लम्हा क्यू खास है? किसी न किसी रूप में उस लम्हे में शामिल महिलाओ की वजह से । सच ही जहाँ पर वो नहीं वो वहाँ मुमकिन हो ही नहीं सकता । वह जोड़ती है सर्जती है क्यू की जानती है की टूटना क्या होता है तभी तो उसका सृजन मानव आस्तित्व का आधार  है । तुम्हारी क्षेष्ठ कथाये तुम्हारे संघर्ष में निहित है । तुम्हारी सफलता के बीज अवरोधों में समाए है तुम्हारी सराहना पीडाओ से फूटेगी डटी रहो – क्योकि इस दुनिया ने कभी स्थायी तूफान नहीं देखा । विश्व महिला दिवस पर हर महिला को इस शुभेच्छा के साथ
तुम वही हो जिसका तुम्हे इंतज़ार था ।
असंख्य भावी सफलताओ की अग्रिम शुभकामनाये ।
सादर
योगेश पाण्डेय

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