Monthly Archives: February 2016

VMW Team – आरक्षण की मांग करे

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

पहले से हम बंटे हुए हैं,और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,मिलकर इक दूजे को खाएं हम,

देश मरे भूखा चाहे पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत,भारत माँ के बाल नोचने आओ जी,

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में भूल नही ये जाना है,

याद करो ज़मीन के हिस्सों पर जब हम टकराते थे,
गज़नी कासिम बाबर मौका पाते ही घुस आते थे

अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर,

हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है,

मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर पंडित बनिया सब के सब कर लो तैयारी जी,

जब पटेल के कुनबों की थाली खाली हो सकती है,
कई राजपूतों के घर भी कंगाली हो सकती है,

बनिए का बेटा रिक्शे की मज़दूरी कर सकता है,
और किसी वामन का बेटा भूखा भी मर सकता है,

आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो,

शर्म करो,हिन्दू बनते हो,नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में,ये ज्वालायें फूकेंगी,

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे गजनी की संतानो से,

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,
संविधान को छलनी कर के,गोबर इसमें भर डालो,

राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे,

Freedom 251 Smartphone: भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन

नोएडा स्थित रिंगिंग बेल्स भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन Freedom 251 लेकर आई है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन की कीमत महज 251 रूपए रखी गई है। हालांकि इतनी कम कीमत में स्मार्टफोन पेश करने को लेकर लोगों को इसके फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस को लेकर संशय है। क्योंकि महज 215 रूपए में एक स्मार्टफोन उपलब्ध करवाना किसी कंपनी के लिए आसान काम नहीं होता हैं।

इतनी कम कीमत के बावजूद इस स्मार्टफोन में शानदार फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस दिए गए हैं।

Bells के इस नए हैंडसेट की कीमत 3 से 4 हजार नहीं है और न ही 2 से 3 हजार रूपए के बीच है, बल्कि यह स्मार्टफोन इतना सस्ता है कि इसके सामने नोकिया और सैमसंग के फीचर फोन भी महंगे लगेंगे। इस स्मार्टफोन की कीमत महज 251 रूपए है। इस फोन फीचर्स और स्फेशिफिकेशंस के बारे में लॉन्चिंग के मौके पर ही बताया जाएगा।

रिंगिंग बेल्स फ्रीडम 251 की एडवांस बुकिंग्स 18 फरवरी से 21 फरवरी तक चालू है। बुक हुए स्मार्टफोन्स को 30 जून 2016 तक डिलीवर किया जाएगा।

 इस फोन को आप यहां क्लिक कर बुक करवा सकते हैं।

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तुम अफज़ल का गुण गाते हों

गज़नी का है तुम में खून भरा जो तुम अफज़ल का गुण गाते हों,
जिस देश में तुमने जनम लिया उसको दुश्मन बतलाते हो!
भाषा की कैसी आज़ादी जो तुम भारत माँ का अपमान करो,
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप जो तुम देश की इज़्ज़त नीलाम करो!
अफज़ल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलायेगा,
कोई इनके रहनुमाओं का मज़हब मुझको बतलायेगा!
अपनी माँ से जंग करके ये कैसी सत्ता पाओगे,
जिस देश के तुम गुण गाते हो, वहाँ बस काफिर कहलाओगे!
हम तो अफज़ल मारेंगे तुम अफज़ल फिर से पैदा कर लेना,
तुम जैसे नपुंसको पे भारी पड़ेगी ये भारत सेना!
तुम ललकारो और हम न आये ऐसे बुरे हालात नहीं
भारत को बर्बाद करो इतनी भी तुम्हारी औकात नहीं!
कलम पकड़ने वाले हाथों को बंदूक उठाना ना पड़ जाए,
अफज़ल के लिए लड़ने वाले कहीं हमारे हाथो न मर जाये!
भगत सिंह और आज़ाद की इस देश में कमी नहीं,
बस इक इंक़लाब होना चाहिए,
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज दबनी चाहिए!
ये देश तुम्हारा है ये देश हमारा है, हम सब इसका सम्मान करें,
जिस मिट्टी पे हैं जनम लिया उसपे हम अभिमान करें! जय हिंद ।

जिले की बेटी मंजुला दक्षिण एशियाई खेल में अपनी प्रतिभा दिखाएगी।

जिले की बेटी मंजुला दक्षिण एशियाई खेल स्पर्धा बुधवार को अपनी प्रतिभा दिखाएगी। उसे हैंडबाल प्रतियोगिता में भारत की ओर से खेलने का मौका मिला है।वह गुवाहाटी के खेल स्टेडियम में कड़े अभ्यास में जुटी है।

लार, संजाव की मंजुला ने टाउन हाल स्थित प्राथमिक स्कूल से प्राथमिक शिक्षा पास की। इंटर नोनापार स्थित मणिनाथ इंटर कॉलेज से और वर्तमान में वह गोरखपुर विश्व विद्यालय से स्नातक कर रही है।

विशुनपुर कला इंटर कॉलेज में शिक्षक पिता विनोद पाठक कहते हैं कि उसने 11 वर्ष पहले जनपद स्तरीय हैंडबाल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

जूनियर के बाद उसे सीनियर टीम में भी खेलने का मौका मिला। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य स्तरीय हैंडबाल प्रतियोगिता में अव्वल आने पर मंजुला को सम्मानित किया।

पूर्वोत्तर रेलवे सीनियर नेशनल टीम में भी वह खेल चुकी है।वहीं मंजुला पाठक ने बातचीत में बताया कि खेल के प्रति उसकी रूचि बचपन से रही है।

माहौल तब मिला जब 2010 में भारतीय खेल प्राधिकरण लखनऊ में दाखिला हुआ। कोच मुहम्मद आसिफ खान के निर्देशन में पांच वर्ष हैंडबाल खेला।

राज्य में कई जगह खेलने के बाद चयन खेल कोटे से रेलवे में हो गया। वर्तमान में गोरखपुर जंक्शन में टीसी के पद पर तैनात मंजुला के� रेलवे के कोच फुरकान अहमद के साथ गुवाहाटी स्टेडियम में अभ्यास कर रही है।

10 फरवरी से 16 फ़रवरी तक दक्षिण एशियाई टीम में भारत की ओर से खेलना है। इसमें पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल आदि देशों के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

मंजुला के चयन पर बाबा अवकाश प्राप्त शिक्षक नगनारायण पाठक, विनोद पाठक,� डॉ. जय प्रकाश पाठक, पत्रकार नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती, डॉ. मनोज कुमार पाठक, अमरेश पाण्डेय, ब्रजेश पाण्डेय, नीरज पाण्डेय, योगेश, मधुलेश, पवन कुमार पाठक, मनोज पाण्डेय, अरविन्द दूबे, परमात्मा दूबे, सुमंत दूबे आदि ने खुशी का का इजहार किया है।
अमर उजाला

भगवान श्री कृष्ण के जीवन सी जुड़ी 24 अनसुनी बातें

1. भगवान श्री कृष्ण के खड्ग का नाम ‘नंदक’, गदा
का नाम ‘कौमौदकी’ और शंख का नाम ‘पांचजन्य’ था जो गुलाबी रंग का था।

2. भगवान् श्री कॄष्ण के परमधामगमन के समय ना तो
उनका एक भी केश श्वेत था और ना ही उनके शरीर पर कोई झुर्री थीं।

3.भगवान् श्री कॄष्ण के धनुष का नाम शारंग व मुख्य
आयुध चक्र का नाम ‘ सुदर्शन’ था। वह लौकिक , दिव्यास्त्र व देवास्त्र तीनों रूपों में कार्य कर सकता था
उसकी बराबरी के विध्वंसक केवल दो अस्त्र और थे पाशुपतास्त्र ( शिव , कॄष्ण और अर्जुन के पास
थे) और प्रस्वपास्त्र ( शिव , वसुगण , भीष्म और
कॄष्ण के पास थे) ।

4. भगवान् श्री कॄष्ण की परदादी ‘मारिषा’ व सौतेली मां रोहिणी( बलराम की मां) ‘नाग’ जनजाति
की थीं.

5. भगवान श्री कॄष्ण से जेल में बदली गई यशोदापुत्री का नाम एकानंशा था, जो आज विंध्यवासिनी देवी के नाम से पूजी जातीं हैं।

6. भगवान् श्री कॄष्ण की प्रेमिका ‘राधा’ का वर्णन महाभारत, हरिवंशपुराण, विष्णुपुराण व भागवतपुराण में नहीं है। उनका उल्लेख बॄम्हवैवर्त पुराण, गीत गोविंद व प्रचलित जनश्रुतियों में रहा है।

7. जैन परंपरा के मुताबिक, भगवान श्री कॄष्ण के
चचेरे भाई तीर्थंकर नेमिनाथ थे जो हिंदू परंपरा में ‘घोर
अंगिरस’ के नाम से प्रसिद्ध हैं.

8. भगवान् श्री कॄष्ण अंतिम वर्षों को छोड़कर कभी भी द्वारिका में 6 महीने से अधिक नहीं रहे।

9. भगवान श्री कृष्ण ने अपनी औपचारिक शिक्षा उज्जैन के संदीपनी आश्रम में मात्र कुछ महीनों में पूरी कर ली थी।

10. ऐसा माना जाता है कि घोर अंगिरस अर्थात नेमिनाथ के यहाँ रहकर भी उन्होंने साधना की
थी.

11. प्रचलित अनुश्रुतियों के अनुसार, भगवान श्री
कॄष्ण ने मार्शल आर्ट का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था और डांडिया रास उसी का नॄत्य रूप है।

’12. कलारीपट्टु’ का प्रथम आचार्य कॄष्ण को माना
जाता है। इसी कारण ‘नारायणी सेना’ भारत की सबसे भयंकर प्रहारक सेना बन गई थी।

13. भगवान श्रीकृष्ण के रथ का नाम ‘जैत्र’ था और
उनके सारथी का नाम दारुक/ बाहुक था। उनके घोड़ों
(अश्वों) के नाम थे शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक।

14. भगवान श्री कृष्ण की त्वचा का रंग मेघश्यामल था और उनके शरीर से एक मादक गंध
स्रावित होती थी.

15. भगवान श्री कॄष्ण की मांसपेशियां मृदु परंतु युद्ध के समय विस्तॄत हो जातीं थीं, इसलिए सामन्यतः लड़कियों के समान दिखने वाला उनका लावण्यमय
शरीर युद्ध के समय अत्यंत कठोर दिखाई देने लगता था ठीक ऐसे ही लक्ष्ण कर्ण, द्रौपदी व कॄष्ण के शरीर में देखने को मिलते थे।

16. जनसामान्य में यह भ्रांति स्थापित है कि अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, परंतु वास्तव में कॄष्ण इस विधा में भी सर्वश्रेष्ठ थे और ऐसा सिद्ध हुआ मद्र राजकुमारी
लक्ष्मणा के स्वयंवर में जिसकी प्रतियोगिता द्रौपदी स्वयंवर के ही समान परंतु और कठिन थी।

17. यहां कर्ण व अर्जुन दोंनों असफल हो गये और तब श्री कॄष्ण ने लक्ष्यवेध कर लक्ष्मणा की इच्छा पूरी की, जो पहले से ही उन्हें अपना पति मान चुकीं
थीं।

18. भगवान् श्री युद्ध कृष्ण ने कई अभियान और
युद्धों का संचालन किया था, परंतु इनमे तीन सर्वाधिक
भयंकर थे। 1- महाभारत, 2- जरासंध और कालयवन के विरुद्ध, 3- नरकासुर के विरुद्ध

19. भगवान् श्री कृष्ण ने केवल 16 वर्ष की आयु में विश्वप्रसिद्ध चाणूर और मुष्टिक जैसे मल्लों का वध किया. मथुरा में दुष्ट रजक के सिर
को हथेली के प्रहार से काट दिया.

20. भगवान् श्री कॄष्ण ने असम में बाणासुर से युद्ध
के समय भगवान शिव से युद्ध के समय माहेश्वर ज्वर के विरुद्ध वैष्णव ज्वर का प्रयोग कर विश्व का प्रथम ‘जीवाणु युद्ध’ किया था।

21. भगवान् श्री कॄष्ण के जीवन का सबसे भयानक द्वंद युद्ध सुभुद्रा की प्रतिज्ञा के कारण अर्जुन के साथ हुआ था, जिसमें दोनों ने अपने अपने सबसे विनाशक शस्त्र क्रमशः सुदर्शन चक्र और पाशुपतास्त्र निकाल
लिए थे। बाद में देवताओं के हस्तक्षेप से दोंनों शांत हुए।

22. भगवान् श्री कृष्ण ने 2 नगरों की स्थापना की थी द्वारिका (पूर्व मे कुशावती) और पांडव पुत्रों के द्वारा इंद्रप्रस्थ ( पूर्व में खांडवप्रस्थ)।

23. भगवान् श्री कृष्ण ने कलारिपट्टू की नींव रखी जो बाद में बोधिधर्मन से होते हुए आधुनिक मार्शल आर्ट में विकसित हुई।

24. भगवान् श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता के रूप में आध्यात्मिकता की वैज्ञानिक व्याख्या दी, जो मानवता के लिए आशा का सबसे बडा संदेश थी, है और सदैव रहेगी.

प्रस्तुति
एम के पाण्डेय निल्को