नेट न्यूट्रेलिटी बिना शर्त अमल हो |

नेट न्यूट्रेलिटी के बारे में दूरसंचार विभाग की बहु-प्रतीक्षित रिपोर्ट पर मोबाइल इंटरनेट उपभोक्ताओं के नजरिए से गौर करें तो उसमें अच्छे और बुरे दोनों संकेत हैं। अच्छी बात तो यह है कि इसमें नेट न्यूट्रेलिटी का समर्थन किया गया है। लेकिन साथ ही ओवर टॉप (ओटीटी) कहे जाने वाले वाॅट्सएप, वाइबर, वीचैट, स्काइप जैसी सेवाओं पर मुफ्त ऑडियो/वीडियो कॉल की दी जा रही सेवाओं को विनियमित करने की जरूरत भी बताई गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाली समिति की राय है कि ओटीटी सेवाओं की वजह से मोबाइल सेवा देने वाली एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया जैसी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ये कंपनियां सरकार से मिले लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक फोन सेवा देती हैं, जबकि ओटीटी सेवाएं किसी ऐसी शर्त का पालन नहीं करतीं। बेशक कमेटी की यह राय अपनी जगह सही है। लेकिन मुद्दा है कि तकनीक की उन्नति के साथ विकसित होने वाली सुविधाओं को नियंत्रित या सीमित करने का प्रयास आखिर कितना वाजिब होगा? अगर इंटरनेट से जुड़ी किसी सेवा के साथ ऐसा किया जाता है, तो क्या उसके बाद भी यह मानने का आधार बचेगा कि नेट न्यूट्रेलिटी का समग्र रूप से पालन किया जा रहा है? नेट न्यूट्रेलिटी संबंधी बहस दो प्रवृत्तियों की वजह से उठी। ऐसा देखा गया कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां (आईएसपी) कुछ वेबसाइटों/एप्स के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कर रही हैं, जबकि दूसरों तक पहुंच वे रोक देती हैं अथवा उनकी रफ्तार को सुस्त कर देती हैं। माना गया कि वे ऐसा करके इंटरनेट सेवा-प्रदाता के रूप में अपेक्षित तटस्थता को भंग कर रही हैं। अमेरिका का संघीय दूरसंचार आयोग इसके विरुद्ध निर्णय दे चुका है। अपने देश में ये बहस कुछ महीने पहले भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा इस विषय पर लोगों की राय मांगने के साथ खड़ी हुई। तब लाखों लोगों ने ट्राई को भेजे पत्र में नेट न्यूट्रेलिटी का पक्ष लिया। एनडीए सरकार ने भी इस सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन अंतिम रुख घोषित करने से पहले वह ट्राई द्वारा बनाई गई समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही थी। अब जबकि यह रिपोर्ट गई है, सरकार से अपेक्षा रहेगी कि यथाशीघ्र वह अपनी राय बताए। बेशक उससे ऐसी नीति की आशा है, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों का संपूर्ण संरक्षण हो। निर्विवाद रूप से नेट न्यूट्रेलिटी के सिद्धांत को बिना शर्त और अविभाज्य रूप से लागू करके ही ऐसा किया जा सकता है। 

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