ऐसे बुद्ध जिनका श्रम ही आनंद – डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय

अनुकरणीय: लोक सेवक की साहित्य साधना बनी चर्चा का विषय

ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर – गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर 1गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।स्टाल पर प्रदर्शित जिलाधिकारी डा.सुरेन्द्र कुमार द्वारा लिखी गई पुस्तकें। जागरण ।डा.सुरेन्द्र कुमार।ज्यातिष शब्द कोष, ज्योतिष पंचशील, आयुर्वेद पंचशती, श्लेष अलंकर सिद्धांत एंव प्रयोग, धर्म शास्त्रस्रसहस्रकम, उत्तर खोजते प्रश्न, र} विमर्श, उत्तर प्रदेश की नदियां एवं पहाड़, हिन्दु समाज के प्रचलित संस्कार, भारत की विदुषी महिलाएं, शंकर गीता, वास्तु शब्दार्णव (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अमृत जीवन (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अरिष्टयोग विमर्श,(उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) पूर्वाचल लोक भाषा कोश, अमेरिका का प्रशैक्षणिक यात्र-एक संस्मरण, सम्पादन-सूर्य विमर्श, संपादन-हिन्दुस्तानी त्रैमासिक लेख-अनुक्रमणिका, संपादन-संस्कृति पुरुष: पंडित विद्या निवास मिश्र, संपादन-सोहित्य-शेवधि, संपादन-इलाहाबाद साहित्यकार को कोष, संपादन-भारतीय मनीषा दर्शन, कौशाम्बी का स्वर्णिम इतिहास एवं वर्तमान, योग और अभ्यास।

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