Monthly Archives: December 2014

लौट आओ हुआ सवेरा

 

लौट आओ, हुआ सवेरा ,
एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा |

बीत गया जो बीतना था
एक पुराने एहसास के साथ
समय आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
वो समय , जो गलत था
जिसको हमने नहीं समझा ,
एक गलतफहमी के साथ
नया साल आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
सारी भूमिकाएं पीछें छुट गयी
एक नए वादों के साथ
वो सारे दिन चले गए छोड़ हमें
एक नयी कहानी के साथ
समय आया एक नए हौसलों का
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
कर गया अंकित हमें
पुरे अंजर-पंजर के साथ
कैसे निकलू इस अंतःकरण से
इस गंभीर कल्पना के साथ
लौट आओ ,हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद|
लौट आओ ,हुआ सवेरा
 

-सौम्या पाण्डेय (बिट्टू)
 

ऐसे बुद्ध जिनका श्रम ही आनंद – डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय

अनुकरणीय: लोक सेवक की साहित्य साधना बनी चर्चा का विषय

ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर – गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर 1गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।स्टाल पर प्रदर्शित जिलाधिकारी डा.सुरेन्द्र कुमार द्वारा लिखी गई पुस्तकें। जागरण ।डा.सुरेन्द्र कुमार।ज्यातिष शब्द कोष, ज्योतिष पंचशील, आयुर्वेद पंचशती, श्लेष अलंकर सिद्धांत एंव प्रयोग, धर्म शास्त्रस्रसहस्रकम, उत्तर खोजते प्रश्न, र} विमर्श, उत्तर प्रदेश की नदियां एवं पहाड़, हिन्दु समाज के प्रचलित संस्कार, भारत की विदुषी महिलाएं, शंकर गीता, वास्तु शब्दार्णव (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अमृत जीवन (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अरिष्टयोग विमर्श,(उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) पूर्वाचल लोक भाषा कोश, अमेरिका का प्रशैक्षणिक यात्र-एक संस्मरण, सम्पादन-सूर्य विमर्श, संपादन-हिन्दुस्तानी त्रैमासिक लेख-अनुक्रमणिका, संपादन-संस्कृति पुरुष: पंडित विद्या निवास मिश्र, संपादन-सोहित्य-शेवधि, संपादन-इलाहाबाद साहित्यकार को कोष, संपादन-भारतीय मनीषा दर्शन, कौशाम्बी का स्वर्णिम इतिहास एवं वर्तमान, योग और अभ्यास।

हैरान कर दिया – अनुज शुक्ला

एक बार फिर उसने हैरान कर दिया
बात कर के परेशान कर दिया
बार बार हाल पूछ कर
मुझे ही बीमार कर दिया |
पूछता हूँ की – क्यों दरवाजा बंद
तो मेरा हाल बेहाल कर दिया
क्यों कमरे के शीशे तोड़ कर
अपने ही घर में मेहमान कर दिया |
किसी की ख़ामोशी को समझने के लिए
खुद को ही खामोश कर दिया
यही तो था मेरा गाँव खुशियों का
बता तूने क्यों मुझे गुमनाम कर दिया |
बता कौन आया था मिलने तुमसे
जिसने जीना हराम कर दिया
तुम्हारी गलिया नहाती थी मेरी रचनाओ से
आज क्यों तुमने वीरान कर दिया |
पता तो था की तुम मेरी नहीं
इसलिए मैंने तुम्हे अस्वीकार कर दिया
कुछ इस तरह मैंने अपनी जिन्दगी को  
शायद आसान कर दिया |
रोती रहेगी अब हर आँख
और हर चीज को उसने तार तार कर दिया
और चारों ओर एक खिन्न दृष्टि से देख कर
तुमने असफल इतिहास को त्याग कर दिया |
मैं तो आज भी गम का ज़हर पिया करता हूँ
यह कह कर उसने भी ‘अनुज’ का नाम कर दिया
इन रिश्तों की उलझनों में मैंने ख़ुद को कही खो दिया.
और इस तरह मैंने ज़िंदगी  को आसान कर लिया |

अनुज शुक्ला

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता

एम के पाण्डेय ‘निल्को’  

कुछ मेरे मित्र मेरे परिचय के बारे में ज्रिक कर रहे थे , उनकी शिकायत थी की कभी मैंने अपना परिचय ठीक से नहीं दिया | बताना चाहूगा की यह मेरी कमजोरी है की मैं अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता कई बार कोशिश की किन्तु सफल पूरी तरह से न हो सका , एक बार पुनः संक्षिप्त में कोशिश कर रहा हूँ ज़रा आप की बताइए कहा तक यह कोशिश सफल हुई | लेकिन इस बात का अफ़सोस है की कुछ लोग – 

हज़ारों ऐब ढूँढ़ते है वो निल्को में इस तरह,

अपने किरदारों में वो फरिश्तें हो जैसे …..!


और मैं हर बार यही कहता हूँ की –

जैसा भी हूँ अच्छा या बुरा अपने लिए हूँ 
मैं ख़ुद को नहीं देखता औरो की नज़र से ….!
वैसे 
ख़ामोशी भी  बहुत कुछ कहती है
कान लगाकर नहीं ,

दिल लगाकर सुनो ….

मै कोई बहुत बड़ा लेखक या कवि नहीं , बस यूं ही अपने मन के भावों को अपनी कलम के जरिये कागज़ पर उतार लेता हूँ जो कहीं कविताओं के रूप मे, कहीं लेखो के रूप मे अपनी जगह बना लेते है । मैं इस विश्व के जीवन मंच पर अदना सा किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा है। पढ़ाई लिखाई के हिसाब से बुद्धू डिब्बा (कम्प्युटर) से स्नातक हूँ और प्रबंधन से परास्नातक। कई मासिक पत्रिका और वैबसाइट पर स्वतंत्र लेखन में कविता, टिप्पणी, आलोचना आदि में विशेष रुचि है उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िला के हरखौली गाँव मे जन्म और राजस्थान मे पढ़ाई की और आगे गांवो के लिए कुछ सरकारी – गैर सरकारी , सामाजिक परियोजनाओ का संचालन करने का इरादा । अपनी रचनाओ के माध्यम से गांवो/लोगो में जागरुकता लाना चाहता हूं ऒर समाज के लोगों का ध्यान उनकी समस्याओं की ऒर खीचना चाहता हूं। ताकि उनको भी स्वतंत्र पहचान एवं उडान भरने के लिए खुला आसमान मिल सके। बस यही मेरे जीवन का लक्ष्य है । बस इतनी सी बातें है मेरे बारे में।


सादर 

एम के पाण्डेय ‘निल्को’ 

पेशावर – खून के नापाक ये धब्बे


खून के नापाक ये धब्बे ,

खुदा से कैसे छिपाओगे ?

मासूमो के कब्र पर चढ़कर

कौन सा जन्नत पाओगे ?

अल्लाह की भी रूह काप गई होगी

शांति दूतो के इस कृत्य से ?

कैसी होगी उस माँ की हालत

जिसके बच्चे ने कहा होगा –

माँ, मैं आज स्कूल नहीं जाऊंगा

पर माँ ने उसे डाट कर

जबरजस्ती स्कूल भेजा होगा |

आतंक के खिलाफ गर

पाकिस्तान ने आवाज़ उठाई होती

तो मासूमो की जान

आज यू न जाई होती |

अब स्कूल मदरसे भी डरे हुए है

किसी अनजान डर से सहमे हुए है

क्यों इंसानियत होती है हर बार शर्मशार ?

क्या इसका जवाब कोई देगा…..&%*#$@$……..?

किसी ने सच ही कहा है –

आज दिन में एक अजीब सा दर्द है मेरे मौला

ये तेरी दुनिया है , तो यहाँ इंसानियत क्यों मरी है …?

हिंदुस्तानी होना क्या होता है

ये तब पता चलता है जब गाढ़े वक़्त में

पाकिस्तान के लिए भी दुःख होता है

पेशावर में मासूम परिंदों के लहू से

भरे पंखों को पेशा बना डाला…

लगा ऐसा जैसा शैतान ने खुदा को

भी अपने जैसा बना डाला..


ईश्वर उन बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करे जिनका जीवन, जीवन बनने से पहले ही समाप्त कर दिया गया और प्रभु बाकी बचे बच्चों को साहस और हिम्मत दे कि वो इस ह्रदय विदारक घटना से खुद को उबार पाये। मासूम बच्चों की मौत का हमें बड़ा दुःख है और पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है मगर फिर भी हमें बच्चों की मौत का मजाक नहीं बनाना चाहिए, लेकिन ये बात #
जेहाद का समर्थन करने वाले मुसलमानों को समझनी चाहिए कि आज ये जेहादी बीमारी गैर- मुसलमानों से ज्यादा खुद मुसलमानों को ही निगल रही है, ये जेहाद सिर्फ और सिर्फ इंसानियत के खिलाफ है न की किसी समुदाय विशेष के खिलाफ।।

भगवान इस हादसे में मारे गए बच्चों की आत्मा को शांति दें।।

विलक्षण प्रतिभा – गजब की स्मरण शक्ति जयपुर के WONDER BOY मनन सूद की

Manan Sood
गूगलब्वॉय के नाम से प्रसिद्ध कौटिल्य पंडित के बाद अब जयपुर के मनन सूद भी अपने जवाबों से लोगों को चकित करने में लगा हैं. वह भी गूगल ब्वॉय की तरह विलक्षण स्मरण शक्ति की धनी हैं, किसी भी सवाल का जवाब सेकेंड़ों में देकर वह लोगों को दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर कर देता हैं चार साल का मनन सूद यूं तो आम बच्चों सा दिखता है, लेकिन उसकी खासियत तब सामने आती है, जब कठिन से कठिन सवालों का जवाब वह बिना देरी किए देने लगता है। एलकेजी में पढ़ रहे मनन को राजस्थान और देश के अलावा विश्व के मानचित्र में महारथ है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है 

विश्वभर की जानकारी रखने वाले कौटिल्य पंडित की प्रतिभा से तो कोई अनजान नहीं होगा, ठीक वैसे ही सिविल लाइन्स जयपुर के निवासी श्री आलोक सूद के चार वर्षीय मनन को भी पूरे वर्ल्ड के बारे में ज्ञान है वह एक बार जो पढ़ लेता है, उसे कभी नहीं भूलता | 
उसकी उम्र भले ही अभी छोटी है, मगर विश्व के देशों की भौगोलिक सीमाएं, क्षेत्रफल व अन्य तमाम जानकारियां उसे जुबानी याद हैं। आपने सवाल किया नहीं कि जवाब तुरंत हाजिर। मनन के पिता आलोक सूद बताते हैं कि उनका बच्चा इतिहास और भूगोल की अच्छी जानकारी रखता है. वह किसी भी विषय को रटके नहीं बल्कि अच्छी तरह समझता है और इस पर अपनी राय भी देता है. विश्व के कई धर्मों और परम्पराओं के बारे में इसे पता है इसके साथ साथ वह मार्शल आर्ट भी सीखता है |
मनन के जीवन से वास्तव में आजकल के माता-पिता को सीख लेनी चाहिए कि बच्चा एक कच्चे घड़े की तरह होता है। जैसा हम ढालना चाहते हैं वैसा ही ढल जाता है। हम अपनी व्यस्तता के कारण उनके लिए समय नहीं निकाल पाते और न ही उनके प्रश्नों के उत्तर देने के अहमियत को समझते हैं या फिर उनको डांट देते हैं तो इसीलिए बच्चे भी मां बाप से बात करने में कतराने लगते हैं और अपने मन में आने वाले सवालों को अपने तक ही सीमित रख लेते हैं। उनकी जिज्ञासा तभी बढ़ती है जब उन्हें अपने प्रश्नों का जवाब मिले। यही कारण है कि मनन का दिमाग इतना तेज चलता है क्योंकि उसके दिमाग को पूरी खुराक मिल जाती है बचपन से ही वह काफी उत्सुक स्वभाव का है और बहुत कल्पनाशील है। अपने पिता व दादाजी से सब तरह के प्रश्न पूछता है। अधिकतर माता-पिता अपनी व्यवस्तता एवं अज्ञानता के चलते उन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाते पर मनन के पिता और दादाजी जो शुरू से ही उसके सभी प्रश्नों के उत्तर देते रहे हैं और उनके अनुसार यदि उनको किसी प्रश्न का उत्तर मालूम नहीं होता तो भी इंटरनेट से ढूंढ़ कर वे उसे उत्तर देते हैं और तब तक उत्तर देते रहते हैं जब तक कि उसकी जिज्ञासा शांत नहीं हो जाती। इसी के फलस्वरूप मनन को सारे एटलस, सौरमंडल, देश, विदेश आभा बंसल, फ्यूचर पाॅइंट की राजधानी व राजनीति की बहुत जानकारी है। मनन के दादाजी श्री राकेश चंद्र सूद जो की एक वरिष्ठ मार्शल आर्ट प्रशिक्षक है मनन को पढ़ाते हैं और उसका एक दोस्त की तरह साथ देते हैं और उसके साथ बच्चा बनकर खेलते भी हैं। 

*******************
एम के पाण्डेय निल्को

मैं कौन हूँ ……TRIPURENDRA OJHA NISHAAN

कैसे मै कहूं मै कौन हूँ ,
बस यूँ समझ लो 
मिल जाय मुझे गंगा तो सागर हूँ 
वरना अविरल बहता पानी हूँ,
स्वीकार करे समाज तो एक अनमोल रिश्ता हूँ ,
वरना एक अधूरी कहानी हूँ ,
पा लूं मंजिल तो एक मिसाल हूँ,
हो जाऊ बर्बाद तो मशहूर जवानी हूँ,
बदगुमां हूँ , बदनाम हूँ , 
जवानी की हरकत पुरानी हूँ,
जो पूछते हो तो बताती हूँ ‘निशान’,
न पहचाना तो खैर,
पहचान गये तो इश्क रूहानी हूँ 
.पर 
कैसे कहूं मै कौन हूँ ………………..

                                   
 त्रिपुरेन्द्र ओझा ” निशान “

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद ………!

« Older Entries