अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा – 2014


महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के अनेक जन-पक्षीय संगठनों ने अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच और देश के 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इससे जुड़े तकरीबन 45 सदस्य-संगठनों व 100 से ज्यादा बिरादराना संगठनों द्वारा आयोजित की जा रही अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 में सक्रिय भागीदारी की घोषणा की।
इस यात्रा का मकसद है शिक्षा में बाजारीकरण और सांप्रदायीकरण व हर तरह के भेदभाव के विरुद्ध जनता के व्यापक हिस्सों को संगठित करना ताकि केजी से पीजी तक पूरी तरह मुफ्त और राज्य द्वारा वित्त-पोषित समान शिक्षा प्रणाली की स्थापना की जा सके जो समतामूलक, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, प्रबुद्ध और मानवीय भारत का निर्माण करने में सक्षम हो जिसका ख्वाब शहीद भगत सिंह व उनके क्रांतिकारी साथियों ने देखा था।


आयोजन समिति के सदस्य लोकेश मालती प्रकाश ने कहा कि अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा में:-

 (क) हम समानता के मूलभूत संवैधानिक उसूल का उल्लंघन करने वाली मौजूदा भेदभावपूर्ण बहुपरती शिक्षा प्रणाली का विरोध करेंगे और पूरी तरह से राज्य द्वारा वित्त-पोषित व बराबरी पर आधारित, 12वीं कक्षा तक समान पड़ोसी स्कूल व्यवस्था समेत, केजी से पीजी तक की समान शिक्षा प्रणाली के लिए संघर्ष करेंगे जिसमें बच्चों व युवाओं को उनकी सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आंचलिक, जातीय, भाषाई या लैंगिक पृष्ठभूमि और शारीरिक या मानसिक विकलांगता के आधार पर भेदभाव किये बगैर पूरी तरह से मुफ़्त और समान शिक्षा की गारंटी हो।

 (ख) हम सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़.डी.आइ.) समेत शिक्षा के किसी भी प्रकार के बाज़ारीकरण का विरोध करेंगे और हाशिए पर धकेले गए समूहों, यथा दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों खासतौर से इन समुदायों की महिलाओं के लिए व अन्य उत्पीड़ित समुदायों एवं समूहों जैसे खानाबदोश कबीलों, डी-नोटिफाइड जनजातियों, बंधुआ मजदूरों, विस्थापितों, सुदूर द्वीपों के निवासियों और रेगिस्तान, जंगलों व गांवों के निवासियों और ट्रांसजेंडरों के सामाजिक न्याय व समानता के अधिकार के लिए संघर्ष करेंगे।
(ग) हम शिक्षा के नव-उदारवादी एजेंडे का विरोध करेंगे जो वैश्विक पूंजी की जरूरत के मुताबिक शिक्षा के उद्देश्य को विकृत कर उसे गुलाम मानसिकता के कुशल कामगारों के उत्पादन तक सीमित कर देता है और इसकी जगह पर हम ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष करेंगे जिसका उद्देश्य समाज के मानवीय विकास के लिए हरेक व्यक्ति को प्रबुद्ध व सचेत बनाना होगा।
 (घ) हम भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्व व्यापार संगठन-गैट्स को दिए गए प्रस्तावों और हमारी उच्च शिक्षा को वैश्विक पूंजी का पिछलग्गू बनाने की कानूनी चालों का विरोध करेंगे और शिक्षा व सभी स्तरों पर ज्ञान के निर्माण व उस संबंध में नीति-निर्माण के लिए देश की संप्रभुता को बरकरार रखने के लिए संघर्ष करेंगे।
 (ङ) हम शिक्षा के सांप्रदायीकरण एवं दक्षिणपंथी संगठनों, खासतौर से संघ परिवार व उससे जुड़े संगठनों द्वारा शिक्षा में दकियानूसी, संकीर्ण और विभाजनकारी दुष्प्रचार का विरोध करेंगे और पाठ्यचर्या को वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष, आलोचनात्मक और लोकतांत्रिक नज़रिए से लैस करने के लिए व देश की बहुलता के सम्मान और धार्मिक, भाषाई व सांस्कृतिक समूहों के लोकतांत्रीकरण के लिए संघर्ष करेंगे ताकि वर्ग, जाति, जेंडर, भाषा, अंचल, और शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता पर आधारित गैर-बराबरी का खात्मा किया जा सके।

 (च) हम स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमलों का विरोध करेंगे और शिक्षा संस्थानों व कैम्पसों में किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की आज़ादी, आलोचनात्मक विचार, असहमति की अभिव्यक्ति व बहस की आज़ादी, और शांतिपूर्ण विरोध (सत्याग्रह) के अधिकार के पक्ष में संघर्ष करेंगे।
 (छ) बहुभाषीयता के संदर्भ में मातृभाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाए जाने के शिक्षाशास्त्रीय महत्व पर बल देते हुए, हम सभी सरकारी व निजी शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के माध्यम के रूप में अंगरेजी के वर्चस्व का विरोध करेंगे और एक बहु-भाषाई परिवेश में मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के तौर पर स्थापित करने के लिए संघर्ष करेंगे। साथ ही विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में, ज्ञान-उत्पादन में, विज्ञान के प्रसार और कामकाज में, सामाजिक विज्ञानों व मानविकी में, लेन-देन और व्यापार में भारतीय भाषाओं की मुख्य भूमिका के लिए संघर्ष करेंगे; और देश की भाषाओं में भारत और विश्व भर के सारे विषयों के बहु-आयामी अनुवाद के लिए प्रचार करेंगे।

All India Shiksha Sangharsh Yatra – 2014
‘All India Shiksha Sangharsh Yatra – 2014’ organised by AIFRTE
 is a call to resist commercialisation and communalisation of education in India.


प्रस्तुति द्वारा  एम के पाण्डेय ‘निल्को’
जयपुर, राजस्थान 

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