किस ऑफ लव – Kiss of Love

प्यार फैलाने का अनोखा तरीका ’किस आफ लव’ का आगाज हो चुका है। कोच्ची, कलकत्ता, नई दिल्ली के बाद देश  के अन्य शहरो मे फैल रहा प्यार के इजहार करने का अनोखा तरीका। ’किस आफ लव’ प्यार का इजहार है या विरोध का तरीका कुछ स्पष्ट नही हो रहा। पुलिस और आयोजक रोज एक दूसरे से भीड रहे। आयोजको का कहना है कि पुलिस इनको आए दिन परेषान करते है इसलिए वे अपना विरोध इस माध्यम से कर रहे है। कुछ लोग/समुदाय इसका घोर विरोध कर रहे है। सभ्यता और संस्कृति का हवाला दे रहे है। एक बात तो सही है कि –
प्यार को शालीनता से जताए
क्योकि हमारा प्यार सडको का मोहताज नही

प्यार को अश्लीलता में मत बदलो। रोड पर जब इस तरह के आयोजन होते है तो कई तरह के लोग/देश  आपको देखते है। आजादी का यह मतलब नही होता कि आप हमारी धरोहर, संस्कृति का मजाक बनाए। प्यार अगर रोड पर ही करना है तो उस गरीब को गले लगाओ जो सुबह से शाम तक रोड के किनारे अपना समान बेचता है। उस प्यार की अनुभूति शायद सबसे अच्छी होगी।


भारतीय संस्कृति में कामसूत्र है लेकिन इसका यह मतलब नही की आप सडक पर अश्लील हरकते करे। क्या कोई आपने माता-पिता के सामने एक दूसरे को चूमेगा। हम किसी के प्यार के खिलाफ नही लेकिन सडक पर यह किस आफ लव किस हद तक जायज है ?  जिसको जो करना है वह अपने घर के अन्दर बन्द कमरे मे करे।
 

जब इस पर हम लोगों ने बात करने की कोशिश की तो-
 
हिन्दु युवा वाहिनी, राजस्थान के सक्रिय सदस्य श्री सिद्धार्थ सिंह श्रीनेत कहते है कि – मैं संस्कृति के रक्षा के नाम पर या सहज मानवीय भावनाओं पर पांबदी के सख्त खिलाफ हु ’किस आफ लव’ तो एक विरोध करने का तरीका था जो आई.आई.टी बाम्बे आदि के नामी छात्रो द्वारा उग्र संगठनो और पुलिस के गुंडा़गर्दी के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट करने के लिये किया गया था। चिन्ता न करे भारतीय संस्कृति अमर है, कोई पश्चमी संस्कृति हमारा बाल भी बाका नही कर सकती।
सभी संगठनो को आर.एस.एस से सिख लेनी चाहिए अनुशासन का पालन करना चाहिए। आखिर कब तक लोग खुद को समाज व देश और धर्म का ठेकेदार बताकर आम जन को गुमराह करते रहेगे। हमे उन ठेकेदारो की जरूरत नहीं। यह व्यक्तिगत स्वंत्रता का हनन है कृप्या इसे स्वंछदता की संज्ञा न दे।
Blackstone Ventures  के पार्टनर श्री मनीष शर्मा का कहना है की यह तरीका पूरी तरह से गलत है अगर आप को अपनी बात रखनी है तो आपको इस तरीके को बदलना पड़ेगा। आप स्वतंत्र हो सकते है लेकिन स्वछंद नहीं । आप युवा पीढ़ी है देश को आप से उम्मीद रहती है लेकिन कुछ इस तरफ की नहीं । जैसा देश वैसा भेष अपनाना चाहिए । भारत मे पश्चिमी सभ्यता का प्रचार करने का अधिकार तुम्हें किसने दिया । 
 VMW Group  के डायेरेक्टर श्री योगेश पाण्डेय का कहना है कि – भारत देश की संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक माना जाता है, इसके साथ खिलवाड़ बर्दाष्त के बाहर है, आजादी के नाम पर इस तरह के अभियान के खिलाफ हुॅ माना की जमाना बदल रहा है किन्तु यह हमारी संस्कृति नही है। अगर चुमना ही है तो उसको चुमो जिनको पैदा होते है कि फैक दिया जाता है। अगर ये हालात देश के पढे लिखो का है तो देश की शिक्षा प्रणाली पर गंभीर चिंतन का  समय है  । शर्म नारी की इज्ज़त होती है इसे खत्म मत करो नहीं तो सोचो आने वाली पीढ़ी क्या करेगी …….?
गाजियाबाद के श्री शैलेन्द्र भारद्वाज कहते है कि ये तो बहुत ही भद्दा काम है और बेशरमी की हद है, ये संस्कृति के नाम पर भद्दा मजाक है।
 
वैशाली नगर जयपुर के यश गुप्ता कहते है कि – किसी भी देश के प्रगति मे युवाओ का विशेष योगदान होता है माना कि चुमा – चाटी सड़क पर नही करनी चाहिए। विदेश में ये सब कोई भारी मुद्दा नहीं है, यह समाजिक स्तर पर होता है तथा इससे सभी जागरूक है और अपना भला बुरा सब लोग जानते है। कुछ समय बाद वे लोग अपने भविष्य के निर्माण में लग जाते है किन्तु हमारे यहा आज का नौजवान अपने समय का सही उपयोग सही समय पर नहीं कर पाता है शायद इसलिये वे हमसे आगे है।
 
भाजपा पार्टी के सक्रिय सदस्य, शान्ति नगर सोडाला निवासी सुधीर दुबे का कहना है कि –  
गुलाब मुहब्बत का पैगाम नही होता,
चाद चांदनी का प्यार सरे आम नही होता,
प्यार होता है मन की निर्मल भावनाओं से,
वर्ना यू ही राधा-कृष्ण का नाम नहीं होता 

हम कहते है कि आप लोगों का प्रदर्शन अच्छी बात के लिये है लेकिन आप लोगो के प्रदर्शन का तरीका सरासर गलत है। क्योकि  

माना एक लड़का – लड़की का साथ बैठना प्यार नहीं होता
मगर हर मर्ज का इलाज तकरार नहीं होता।


आखिर हम किस दिशा में भाग रहे है? चुम्बन में कोई खराबी नही लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि हमारी सोच की जमीनी हकीकत और भविष्य क्या है? इंसान को हमेषा आने वाली पीढ़ी को अच्छा सीख देनी चाहिए। अपने ज्ञान, बुद्धिमता, कार्यकुषलता से प्यार को शालीनता से जताए क्योकि हमारा प्यार सड़को का मोहताज नही जो सड़क पर ’किस’ करके जताया जाए या फिर ऐसी अश्लील हरकत करके।

मधुलेश पाण्डेय निल्को 

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