चीनी में भी मुस्लिम विखंडनवाद

भस्मासुर को संरक्षण दोगो, भस्मासुर पैदा करोगे तो उसका परिणाम भी तो भुगतोगे? कुएं दूसरे के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोदा जाता है। जिस पाकिस्तान आतंकवाद नाम के भस्मासुर को चीन ने संरक्षण दिया था-अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था उसी आतंकवादी हिंसा से आज चीन खुद दग्ध है। इस्लामिक आतंकवाद आज चीन की राष्ट्रीय एकता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। चीन में भी कश्मीर-चैचन्या की तरह विखंडन-सहांरक आतंकवादी प्रक्रियाएं बेकसूर लोगों को लहूलुहान कर रही है। चीन को अगर इस्लामिक हिंसा और इस्लामिक विखंडन की प्रक्रिया से मुक्ति पानी है तो फिर उसे विश्व व्यापी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ वैचारिक और अभियानी पथ पर चलना ही होगा, क्योंकि दुनिया भर के मुस्लिम आतंकवादी एक-दूसरे के पूरक हैं और सहयोगी भी है, सभी का लक्ष्य आतंकवादी हिंसा के बल पर दुनिया में इस्लाम का झंडा फहराना है और दुनिया में मुस्लिम मजहबी कानून लागू करवाना है।
दुनिया भर में जारी इस्लामिक आतंकवाद के मूल्यांकन पर यह तथ्य सामने आता है कि राजनीतिक-मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया पहले शुरू होती है और उसके बाद आतंकवाद की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कश्मीर से लेकर रूस के चैचन्या तक एक लंबी फेहरिस्त है जहां पर पहले राजनीतिक -मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया शुरू हुई और उसके बाद आतंकवाद की प्रक्रिया शुरू हुई। चीन के शिनजियांग में पहले राजनीतिक-मजहबी विखंडनवाद की प्रक्रिया चल रही थी और अब शिनजिंयाग आतंकवाद से लहूलुहान हो चुका है। कई मुस्लिम आतंकवादी हिंसा की घटनाओं मे तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गये हैं, कई सौ लोग घायल हो चुके हैं। मुस्लिम आतंकवादी हिंसा के दमन के लिए चीन को कड़े और प्रहारक सैनिक-पुलिस कार्रवाई का सहारा लेना पड़ा है। चीन का कहना है कि उसके यहां जो मुस्लिम हिंसा-आतंकवाद की जड़ है उसके लिए वैश्विक मुस्लिम आतंकवादी सरगनाएं और मजहबी संस्थाएं जिम्मेदार रही हैं। चीन ने खासतौर पर पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मुवमेंट, और तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी को जिम्मेदार मानता है। पाकिस्तान का तालिबान और अलकायदा की उपस्थिति भी शिनजियांग में है। पाकिस्तान के वजरिस्तान में पूर्वी तुर्किस्तान,इस्लामिक मुवमेंट और तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी के आतंकवादियों की टैनिंग सेंटर है। आतंकवादी शिनजिंयाग मे आतंकवाद का कहर बरपा कर पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, इस कारण चीन प्रहारक तौर पर मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ अभियान नहीं चला पाता है। 2003 में पाकिस्तान सेना के अभियान में पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मुवमेंट के सरगना हसन माहसूम की मौत हुई थी। हसन माहसूम के संबंध में कहा जाता है कि वह अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का भी निकटवर्ती था। हसन माहसूद की मौत के बाद आतंकवादी संगठनों षिनजियांग को और अधिक निशाना बनाया है। आतंकवादी संगठनों की समझ है कि चीन के कहने पर पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी तुर्कीस्तान इस्लामिक मुवमेंट के नेता हसन माहसूद को सैनिक अभियान में मार गिराया था। इसी कारण आतंकवादी संरगनाएं शिनजियांग में आतंकवादी हिंसा की आग झोंक रहे हैं।
शिनजियांग में तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी की बहुलता है। जिस देश में भी मुस्लिम आबादी की थोड़ी-बहुत भी उंची संख्या हो गयी, उस देश में अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग ही नहीं बल्कि इस्लामिक शासन लागू करने की मांग यानी विखंडन की राजनीतिक मजहबी-प्रकिया शुरू हो जाती है और फिर आतंकवादी हिंसा भी चरम पर पहुंच जाती है। कश्मीर में मुस्लिम बहुलता के कारण अलग देश की मांग हो रही है और इस निमित आतंकवादी राजनीतिक-मजहबी, विखंडन की हिंसा जारी है। रूस के चैचन्या में मुस्लिम आबादी बहुमत मे है वहां पर भी अलग मुस्लिम देश और मजहबी कानून को लागू करने के लिए आतंकवाद जारी है। म्यांमार के सिर्फ एक क्षेत्र में मुस्लिम आबादी वह बहुलता में नहीं है फिर भी वहां पर मुस्लिम आतंकवाद जारी है और मुस्लिम आतंकवाद से म्यांमार की बौद्ध संस्कृति लहू लुहान है। फिलीपींस में मुस्लिम आतंकवाद की जड़ में मुस्लिम देश की मांग है। नाईजीरिया में कड़े इस्लामिक कानून की मांग को लेकर बोको हरम ने मानवता को शर्मसार करने वाली हिंसा का खेल-खेल रहा है। बोको हरम ने 500 से अधिक ईसाई बच्चियों का अपहरण कर लिया जिनकी आयु आठ वर्ष से लेकर 14 वर्ष की थी। अपहरित ईसाई बच्चियो को बोको हरम ने अरब के षेखों और अफ्रीका धनाढंय वर्ग के लोगों को बेच कर जेहाद के लिए पैसे जुटाये हैं। अपहरित लड़कियो का पता लगाने में अमेरिकी खोजी विमान अभी तक अभियान पर है। इसी तरह चीन के शिगजियांग में तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी की बहुलता है। तुर्की मूल की मुस्लिम आबादी चीन से अलग होकर एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए जेहाद कर रही हैं। शिनजियांग मे चीनी प्रतीको के सर्वनाश का भी जेहाद चला है। दो साल पूर्व शिनजियांग में मुस्लिम आबादी और चीन के समर्थकों के बीच में बड़ी हिंसा हुई थी, दंगे की आग मे शिनजियांग कई दिनों तक जला था। उस दंगे की आग को चीन ने सैनिक-पुलिस कार्रवाई कर बुझा दिया था।
चीन भस्मासुर है। चीन के सिर पर मुस्लिम आतंकवाद और मुस्लिम हिंसा का जो खेल जारी है उसके लिए चीन खुद जिम्मेदार है। चीन का सैनिक और कूटनीतिक साझेदार पाकिस्तान है। चीन ने ही पाकिस्तान को आणविक शक्ति बनाया है। भारत को दबा कर रखने की नीयत से चीन ने पाकिस्तान के मुस्लिम आतंकवाद पर न केवल मुंह मोड़ी थी बल्कि पाकिस्तान के तरफदारी भी की थी। जब भी भारत द्वारा पाकिस्तान पर आतंकवाद का कारखाना चलाने का आरोप लगाया जाता था या फिर विश्व समुदाय द्वारा पाकिस्तान पर कड़े कार्रवाई करने की मांग उठती थी तब चीन पाकिस्तान के संरक्षक के तौर पर खड़ा हो जाता था। उसकी समझ यह थी कि पाकिस्तान भारत और विष्व के अन्य क्षेत्रों में आतंकवाद का आउटसोर्सिंग जरूर कर सकता है पर उसके यहां पाकिस्तान आतंकवाद की आउटसोर्सिंग नहीं कर सकता है। चीन के सामने समस्या यह है कि आतंकवादी संगठन बेलगाम हैं, अनियंत्रित है, पाकिस्तान का नियंत्रण या फिर लगाम आतंकवादी संगठनों के उपर नहीं रहा। आतंकवादी खुद पाकिस्तान के लिए खतरा बने हुए है। हमें यह भी देखना होगा कि आतंकवादी संगठनों का लक्ष्य क्या है? आतंकवादी संगठनो का लक्ष्य दुनिया में आतंकवादी हिंसा के बल पर इस्लामिक राज्य की स्थापना और अन्य सभी धर्मो का नेस्तनाबुद करना है। ऐसी प्रक्रिया का हल भी सतही तौर पर नहीं हो सकता है। चीन को इन तथ्यों पर गौर करने की जरूरत है कि पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व हो सकता है कि आतंकवाद विरोधी हो पर पाकिस्तान की सेना और आईएसआई पूरी तरह से अभी भी आतंकवाद का खेल-खेल रही हैं। जब तक पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का आतंकवादियों के नेटवर्किंग जारी रही तब तक चीन ही क्यों दुनिया के अंदर में आतंकवादी हिंसा कहर बरपाती रहेगी।
चीन अगर यह सोच रहा होगा कि वह शिनजिंयाग की मुस्लिम आबादी को थोड़ी बहुत राजनीतिक छुट और मजहबी अधिकार की छूट देकर वह मुस्लिम आतंकवादी हिंसा का समाधान कर लेगा तो यह उसकी खुषफहमी ही है। शिनजियांग की मुस्लिम आबादी को चीन ने कई सुविधाएं भी उपलब्ध करायी है, मजहबी अधिकारों की छूट दी है। एक नहीं बल्कि दो बच्चे पैदा करने की भी छूट दी है। मुस्लिम आबादी को छोटकर अन्य चीनी नागरिक सिर्फ एक ही बच्चे पैदा कर सकते हैं। अन्य चीनी नागरिक धर्म को मानने के अधिकार नहीं रखते हैं, अन्य चीनी नागरिकों को अपने धर्म प्रतीको की पूजा करने का अधिकार नहीं है। पर मुस्लिम आबादी मस्जिद जाकर नमाज पढ़ सकती हैं। सार्वजनिक तौर पर भी मुस्लिम आबादी अपने मजहबी त्यौहार मना सकती हैं। इन सभी राजनीतिक और मजहबी अधिकारों की छूट के बावजूद भी शिनजियांग में मुस्लिम अलगाव और मुस्लिम विखंडन की प्रकिया क्यों नहीं रूक रही है? इस पर चीन को विचार करने की जरूरत है।
सिर्फ सार्वजनिक सजा की सुनवायी करके दंड देने मात्र से मुस्लिम आतंकवाद या मुस्लिम विखंडन की प्रक्रिया बंद नहीं होगी। विष्वव्यापी मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ स्वार्थपरख कूटनीति जब तक जारी रहेगी तब तक मुस्लिम आतंकवाद और मुस्लिम विखंडन की प्रक्रिया जारी रहेगी। चीन को इस तथ्य को समझना होगा? 
विष्णुगुप्त

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