शनि की अशुभ स्थिति से मुक्ति और बचाव

शनि की अशुभ स्थिति से मुक्ति और बचाव के लाल किताब पर आधारित कुछ टोटके प्रस्तुत हैं। इन टोटकों का प्रयोग निष्ठापूर्वक किया जाए तो अनुकूल फल की प्राप्ति हो सकती है।

शनि जब शुभ होगा तब मकान के स्वामी व निवासी को सुख मिलेगा। शनि के अशुभ होने पर मकान से संबंधित परेशानी होती है और गृहस्वामी, गृहस्वामिनी और संतान को कष्ट झेलना पड़ता है। किरायेदार द्वारा मकान पर कब्जा, फैक्ट्री या दुकान कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी, चोरी, या हानि पहुंचाना, न्यायालय द्वारा कुर्की, प्रशासन व महापालिका द्वारा अनेक प्रकार की आपत्तियां आदि समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

-शनि लग्नस्थ हो और मकान बनवाया जाए तो यह धन और परिवार के लिए अशुभ होगा। निर्धनता, कुर्की, पैतृक संपत्ति के नाश होने आदि की संभावना रहती है। व्यक्ति धोखेबाज, अशिक्षित, बेईमान, झगड़ालू, नेत्रहीन और अल्पायु हो सकता है। उसे संतान सुख की संभावना भी कम रहती है ।
उपाय:
1-मद्यपान व मांस का सेवन न करें।
2-वीरान जगह पर भूमि के नीचे सुरमा दबाएं।
3-बरगद के वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाकर गीली मिट्टी का तिलक लगाएं, विद्या में बाधा व रोग से मुक्ति मिलेगी।
4-धन वृद्धि के लिए बंदर पालें अथवा शनिवार को बंदर को खाना दें।
5-लोहे के तवे, चिमटे व अंगीठी का दान करें।
—शनि अगर दूसरे भाव में अशुभ हो तो मकान अपने आप बनेगा। परंतु आपत्ति हानिकारक होगी। यदि शनि दूसरे में और राहु 12वें में हो तो ससुराल में धन की कमी होती है। यदि गुरु 11वें में हो तो अपयश मिलेगा। यदि दूसरे भाव में शनि के साथ मंगल अशुभ हो तो जातक 28 से 39वें वर्ष तक रोगी रहेगा।
उपाय:
1-प्रत्येक शनिवार नंगे पांव मंदिर जाकर क्षमा याचना करें।
2-शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
3-काली या दोरंगी भैंस, कुत्ता व अन्य कोई जानवर न पालें।
4-अपने माथे पर कभी तेल न लगाएं।
5-गाय के दूध या दही का तिलक लगाएं।
—शनि जन्मकुंडली के तृतीय भाव में अशुभ स्थिति में हो तो धन का अभाव या हानि कराता है। जातक को नेत्र रोग होगा या दृष्टि कमजोर होगी रोमकूपों में रोएं अधिक हों तो जातक निर्धन, अयोग्य व अय्याश होगा। शनि तीसरे व चंद्र 10वें में हो तो अवैध ढंग से धनार्जन करने के बावजूद जातक धनहीन रहेगा और उसके घर का कुआ अथवा घर ही मौत का कारक बनेगा। तीसरे भाव स्थित शनि के शत्रु ग्रह साथ हों तो जातक समस्याओं व धनहानि से परेशान रहेगा। यदि सूर्य भाव 1, 3 या 5 में हो तो लड़का व शनि का अशुभफल मिलेगा।
उपाय:
1-फकीरों और पालतू व कुत्तों की सेवा करें, या तीन कुत्तों की सेवा करें तो मकान बनेगा।
2-घर में कुत्ता सदैव पालें अन्यथा शनि व केतु का अशुभ फल मिलेगा।
3-केतु का उपाय करने पर धन संपत्ति बढ़ेगी।
4-घर की दहलीज को लोहे की कीलों से कीलें।
5-नेत्रों की औषधि मुफ्त बांटने से दृष्टिदोष दूर होगा।
6-भवन के अंत में अंधेरी कोठरी बनाना धन संपत्ति के लिए शुभ होगा।
7-मांस या शराब का सेवन यदि आप नहीं करेगे तो दीर्घ आयु होगी।
—शनि जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में अशुभ हो तो माता, मामा, दादी, सास और नानी पर अशुभ प्रभाव पड़ेगा। अर्थात मकान की नींव खोदते ही ससुराल और ननिहाल पर अशुभ प्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा या जातक को अपने बनाए मकान का सुख प्राप्त नहीं होगा। ऐसे जातकों को प्लाॅट लेकर मकान नहीं बनवाना चाहिए। परस्त्री से संबंध बनाने पर शनि का अशुभ फल मिलता है। शनि चैथे व गुरु तीसरे में हो तो धोखे व लूटपाट से संपत्ति बढ़ेगी। मकानों के कारोबार से लाभ मिलेगा।
उपाय:
1-सांप को दूध पिलाएं।
2-कौओं को छत पर रोटी डालें।
3-भैंस पालें या उसे प्रिति दिन रोटी खिलायें।
4-मजदूर से अतिक्ति सेवा लेने का प्रयास न करे।
5-कुएं में कच्चा दूध डालें।
6-परस्त्री अथवा विधवा से संबंध रखें अन्यथा निर्धन और कंगाल हो जाएंगे।
7-बहते पानी में शराब बहाएं।
8-रोग से मुक्ति हेतु शनि की वस्तुओं का प्रयोग करें।
9-सांप को न मारें।
10-शराब न पीएं।
11-रात्रि में दूध न पीएं।
—शनि जन्मकुंडली के पंचम भाव में हो तो मकान बनवाने पर संतान को कष्ट होगा। संतान का बनाया मकान जातक को शुभ फल देगा। संतान को यदि मकान बनवाना पड़े तो जातक की 48 वर्ष की आयु के बाद ही बनवाएं। संतान के बनाए मकान में वहम न करें। शनि पांचवें भाव में हो और वर्ष कुंडली में जब भी सूर्य, चंद्र और मंगल 5 वें में आएंगे तब जातक का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। जातक के तन पर बाल अधिक हों तो वह चोर, धोखेबाज और दुर्भाग्यशाली होगा। कलम पर काबू होने पर भी निर्धन रहेगा। रोग, मुकदमे व झगड़ों से परेशान रहेगा। धन की हानि और संतान को कष्ट होगा साथ ही स्वास्थ्य खराब रहेगा और गुलामी करनी पड़ेगी।
उपाय:
1-पैतृक भवन की अंधेरी कोठरी में सूर्य की वस्तुएं गुड़, तांबा, भूरी भैंस, बंदर, मंगल की वस्तुएं सौंफ, खांड, शहद, लाल मूंगे, हथियार और चंद्र की वस्तुएं चावल, चांदी, दूध, कुएं, घोड़े आदि की व्यवस्था करें।
2-अपने भार के दशांश के तुल्य बादाम बहते पानी में बहाएं या धर्मस्थल में ले जाकर आधे बादाम घर में रखें, उन्हें खाएं नहीं।
3-संतान के जन्म लेने पर मीठा न बांटें, यदि बांटंे तो उसमें नमक लगा दें।
4-कुत्ता पालें।
—शनि जन्म कुंडली के षष्ठ भाव में अशुभ स्थिति में हो तो जातक अपनी आयु के 36 बल्कि 39 वर्ष बाद मकान बनाए तो शुभ होगा। 48 वर्ष की आयु के बाद बनाना लड़की के ससुराल के लिए अशुभ होगा। ऐसे जातकों को नुक्कड़ का मकान न तो बनवाना चाहिए और न ही खरीदना चाहिए। शनि की वस्तुएं (चमड़े व लोहे की वस्तुएं) घर पर लाना या सजाना अशुभ होगा। जिस वर्ष वर्ष कुंडली में भी छठे भाव में आए, उस वर्ष राज्यभय, दुख व अशुभ फल मिलेंगे। शराब व मांस का सेवन हानिकारक होगा। 28 से पूर्व विवाह करने पर 34 से 36 वर्ष के बीच माता व संतान शोक होगा तथा कष्ट बढ़ेंगे।
उपाय:
1-तेल में अपना मुंह देखकर सरसों के तेल का भरा बर्तन पानी के भीतर जमीन के नीचे दबाएं।
2-शनि संबंधी कार्य कृष्ण पक्ष में रात्रि में करें।
3-सांप की सेवा (दूध पिलाने) से संतान सुख मिलेगा।
4-नारियल या बादाम बहते पानी में प्रवाहित कराएं।
5-बुध का उपाय करें।
6-काला कुत्ता पालें या उसकी सेवा करें या उसे रोटी दें।

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आप अपने विचारो से अवगत अवश्य करायें।

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