Monthly Archives: November 2012

प्रकाश पर्व "दीपावली" आपके जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ लेकर आये |

दीपावली के इस पावन अवसर पर आप सभी को और आपके समस्त पारिवारिकजनों को अपने और अपने Team की तरफ से दीपावली की ढेरों शुभकामनाये प्रेषित करता हूँ ! 
प्रेम से करना “गजानन-लक्ष्मी” आराधना।
आज होनी चाहिए “माँ शारदे” की साधना।।

अपने मन में इक दिया नन्हा जलाना ज्ञान का।
उर से सारा तम हटाना, आज सब अज्ञान का।।

आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!! 

प्रकाश पर्व “दीपावली” आपके जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ लेकर आये |  
जिस तरह “दीपक” की “एक लो” “अमावस्या” की अँधेरी रात में उजाला भर देती हे ,उसी प्रकार  आपके जीवन के सारे अँधेरे दूर हो जाये और आपके जीवन में “उजाला ही उजाला” हो |  
आप अपने क्षेत्र में उच्चतम उंचाइयो  पर पंहुचे |
 इसी कामना के साथ आपको “दीपावली” की “ढेरो शुभकामनाये” |

आप लोगो के सुझाव और शिकायत की प्रतीक्षा में …

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अपने हि देश मे हक के लिऐ संघर्ष करती एक भाषा कि दास्तान

जिसे बोलते है 22 करोङ हिन्दूस्तानी,जिसे चाहने वालो कि संख्या है अधिक,मारीशस जैसे राष्ट्र कि एक प्रमुख भाषा है यह,हाँलैँड मे भी बोली जाती है यह,अब त आप लोग समझ गईल होईब जा काहेँ से कि ऊ भाषा ह भोजपुरी,भोजपुरी के नाम पर कई उठापटक बैठके भी हुईँ हैँ पर केहु भी भोजपुरी के रक्षा के संकल्प लेने के बाद क्यो नही करता है जन आंदोलन,भारतिय सियासत मे प्रमुख भुमीका निभावे वाली इ भाषा अपने देश मे हक पावे के खातिर संघर्ष कर रही है । महाराष्ट्र,गुजरात,असम जैसे प्रदेशो मे उन भारतियोँ को खास कर निशाना बनाया जाता है जो उत्तर भारत के होँ,वो भी बिहार और उत्तर प्रदेश के,क्योँकी ये लोग भोजपुरी से प्रेम करते हैँ । भोजपुरी को चाहते है । आज तक ये भाषा संविधान कि आठवीँ अनसुची मे सामिल नही हो पाई है । इसके जिम्मेदार हम भोजपुरी भाषी ही हैँ हमारे नेता जो वोट मागने आते हैँ उन्होने भी इस दिशा मे कोई उल्लेखनिय कार्य नही किया है । हाँ इंटरनेट पर कुछ वेबसाईट और ब्लागोँ ने इसे आगे बढाने का कार्य जरूर किया है । अभी भी समय है भाईयोँ जाग जाओ अपने मातृ भाषा और राष्ट्र भाषा को आगे बढाओँ,पर किसी भी अन्य भाषा का निरादर मत करो ।
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दीपावली पर हम क्या-क्या कर सकते है ?

1. जिनकी याद में हम त्योंहार मना रहे हैं। उनके गुणों जैसे कर्तव्य पालन, पितृभक्ति, सत्य-अहिंसा आदि का पालन करे।
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2. अज्ञान के अंधकार को दूर भगाकर ज्ञान का प्रकाश फैलायें। व्रत-नियम धारण करें, दूसरों को प्रेरणा दें। 
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3. मंदिर में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करें। लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरणा दे।
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4. आज के दिन किसी भी जीव को न सताने, न मारने, न पीड़ा देने के साथ ही पशु-पक्षियों के प्रति उपकार भाव रखने का अभ्यास करना चाहिए तथा पूरे वर्ष के लिए ऐसा करने की भावना निभानी चाहिए।
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5. तड़क-भड़क, दिखावा, आडम्बर, प्रदर्शन से दूर रहें।
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6. पटाखें न चलायें। पटाखे चलाने में किसी से होड़ न करे।
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7. गरीबों, असहायों, बीमारों, की सेवा करें, उन्हें भोजन, वस्त्र, दवा आदि दान में दें।
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8. गरीब बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था करें, उन्हें कपड़े एवं पुस्तकें दें।
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9. दीन-हीन निर्धनों को व्यापार एवं शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाकर उन्हें स्वयं के पैरों पर खड़ा करने में सहायता करे।
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10. इस दिन कम से कम अपने आस-पड़ौस के पाँच लोगों को पटाखों की हानियों से परिचित करायें एवं पटाखा न फोड़ने के लिए प्रेरणा दें।
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11. प्रतिज्ञा करें कि हमारे किसी भी कार्य से जीवन रक्षक पर्यावरण प्रदूषित न हो।
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12. लौकिक दीपक के साथ-साथ अज्ञान-अंधकार मिटाते हुए अपने हृदय में ज्ञान का दीप जला कर पूर्ण ज्ञान प्राप्ति की भावना लायें।
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आओ ज्ञान का दिया जलायें, अंधकार को दूर भगाएँ।
1. देश का अरबों रूपया व्यर्थ बर्बाद होता हैं, जिससे गरीबी बढ़ती है।
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2. असावधानी के कारण घरों, दूकानों और कभी-कभी पूरे बाजार में आग लगने से अरबों रूपयों की सम्पत्ति स्वाहा हो जाती है। अनेक लोग जल जाते है।
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3. पटाखें से जलने के कारण शरीर जल जाता है।
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4. पटाखों की आवाज एवं बारूद के कारण आँख एवं कान खराब हो जाते है।
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5. अस्थमा के रोगी इन दिनों घर से बाहर नहीं निकल पाते है। उन्हें अकारण अवांछित कैद-जेल में रहने को मजबूर होना पड़ता है।
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6. आकाश में छोड़े जाने वाले पटाखों से अनेक पक्षी घायल हो जाते है या मारे जाते है
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7. पटाखों के धमाकों से मूक पशु-पक्षियों को असह्य मानसिक वेदना सहन करनी पड़ती है।
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8. अनन्त जीवों की हत्या होती है। पटाखों की आग से वे जीवित ही जल जाते है।
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9. हवा में प्राणघातक विषैला धुआँ फैलता हैं, जिससे श्वाँस लेना मुश्किल हो जाता है।
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10. घरों एवं अस्पतालों में बीमार व्यक्तियों/मरीजों को असीम वेदना सहन करनी पड़ती है।
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11. पटाखों पर देवी-देवताओं, महापुरूषों के चित्र बने होते है। पटाखा फटने के बाद इन चित्रों के टुकड़े हो जाते है, जो गंदगी के साथ पड़े रहते है और हमारे ही पैरों तले कुचले जाते है। एक ओर महापुरूषों के आदर-सम्मान की बातें, दूसरी ओर यह कृत्य कितना शोभास्पद है।
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12. चाइनीज पटाखों में हानिकारक केमिकल का प्रयोग होता है, जो बहुत ही नुकसानदायक होते है। हमें देशहित में भी विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए। फिर यह तो हमारे शरीर के लिए भी घातक है।

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अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा,………..

अटल बिहारी बाजपेयी जी 
Siddharth Hinduveer

अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा,………..

अत्याचारी ने आज पुनः ललकारा, 
अन्यायी का चलता है अमन दुधारा, 
आंखो के आगे सत्य मिटा जाता है, 
भारत माता का शीश कटा जाता है !
      (1)    क्या पुनः देश टुकड़ो में बंट जाएगा ? 
           क्या सबका शोणित पानी बन जाएगा?
    कब तक दानव की  माया  चलने  देंगे  ? कब तक  भस्मासुर  को  हम  छलने  देंगे ?
कब   तक   जम्मू  को  हम  जलने  देंगे ? 
                          कब  तक  जुल्मो  की  मदिरा ठलने देंगे ?
चुपचाप  सहेंगे  कब  तक  लाठी  गोली ?  कब  तक  खेलेंगे  दुश्मन  खून  से  होली ?
प्रह्लाद-परीक्षा  की  बेला  अब आई ; होलिका  बनी  देखो  अब्दुल्ला शाही……………….!!!
(2)   माँ बहनो का अपमान सहेंगे कब तक ?…………………..?
माँ बहनो का अपमान सहेंगे कब तक? भोले पांडव चुपचाप रहेंगे कब तक ?
आखिर सहने की भी सीमा होती है, सागर के उर मे भी ज्वाला सोती है,
मलयानिल कभी बवंडर बन ही जाता,भोले शिव का तीसरा नेत्र खुल जाता,
(3)  जिनको जन धन से मोह , प्राण से ममता…………..
जिनको जन धन से मोह ,प्राण से ममता ;
वे दूर रहे अब पांचजन्य है बजता,
जो दुमुख,युद्ध कायर है,
रणभेरी सुनकर कंपित जिनके अंतर है,
वे दूर रहे चूड़िया पहन कर बेठें,
बहनें थूकें माताएँ कान उमेठें,……
जो मानसिंह के बल से सम्मुख आयें ,
फिर एक बार घर मे ही आग लगाएँ,
पर अन्यायी की लंका अब न रहेगी,
आने वाली सन्तानें यूं न कहेंगी ,
पुत्रों के रहते कटा जननी का माथा ,
चुप रहे देखते अन्यायों की गाथा,……
(4)   अब शोणित से इतिहास नया लिखना है……….
अब शोणित से इतिहास नया लिखना है, बलिपथ पर निर्भय पाँव आज रखना है,
आओ खंडित भारत के वासी आओ,कश्मीर बुलाता त्याग उदासी आओ,
लो सुनो शहीदो की पुकार आती है, अत्याचारी की सत्ता ठर्राती………….;
लो सुनो शहीदो की पुकार आती है, अत्याचारी की सत्ता ठर्राती,
उजड़े सुहाग की लाली तुम्हें बुलाती , अधजली चिता मतवाली तुम्हें बुलाती,
अस्थियाँ शहीदो की देती आमंत्रण, बलिवेदी पर कर दों सर्वस्व समर्पण,
कारागारों की दीवारों का न्योता, कैसी दुर्बलता अब कैसा समझौता,
हाथो मे लेकर प्राण चलो मतवालों,सीने मे लेकर आग चलो प्रणवालों,
जो कदम बढ़ा अब पीछे नहीं हटेगा, बच्चा बच्चा हंस हंस कर मरे मिटेगा,
बरसो के बाद आज बलि का दिन आया,अन्याय-न्याय का चिर संघर्षण छाया,
फिर एक बार दिल्ली की किस्मत जागी, जनता जागी अपमानित अस्मत जागी,
देखो दिल्ली की कीर्ति न कम हो जाये, कण कण पर फिर बलि की छाया छा जाये…………… 
ये  बाजपेयी जी की पंक्तिया हमारे VMW Team के सिद्धार्थ हिंदुवीर की तरफ से …….
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CWG, 2G, कोयला और न जाने कितने जी…..जा……जी

 

एक बार की बात है,
वोट देते ही पड़ गई लात है|
थोड़े देर सकपकाने के बाद,
बोले निल्को भाई
वोट देने का क्या यही परिणाम है ?
मैंने कहा भाई,
तुम तो बहुत कमात हो
लेकिन मनमोहन सब खाए जात है
फिर वोट कांग्रेस को देकर
क्या संदेश देत जात हो ।
मैंने कहा सही है भाई,
लेकिन यह मौन का
क्या राज है ?
अरे जनाब,
CWG,2G, कोयला
और न जाने
कितने जी…..जा……जी
तो इनके पास है।
खाने के वक्त बोलना नहीं चाहिए,
और पचाने के लिए विपक्ष को
जगाना नहीं चाहिए ।
इतने मे ही भाई नीलेश आए,
और बोले की
ये नोट मेरे पास
आया था,
देखने मे सफ़ेद पर अंदर से
काला था,
आप की बात सुनकर
समझ आया यह तो कांग्रेस का
छापा था,
गलती से यह मेरे पास
आया था ।

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ईमानदारी को बनाएं हथियार

जानकारी और ज्ञान में वही फर्क है, जो आंख और प्रकाश में है। प्रकाश यानी दृष्टि। दृष्टि न हो तो आंख किस काम की और ज्ञान न हो तो जानकारियों का वजन भी मनुष्य की चाल को बिगाड़ देगा। इन बातों का असर हमारे दो अभियानों पर भी पड़ा। भ्रष्टाचार और अपराध, देश के ये दो कलंक बिंदिया बनकर चिपक गए। जब दुर्गुण ही शृंगार बन जाए, तब चेहरे को विकृत होना ही है। भ्रष्टाचार मिटेगा ईमानदारी से। हमारे पास ईमानदारी जानकारी की शक्ल में है, ज्ञान के रूप में नहीं। इसलिए ईमानदारी को समझदारी से जोडऩा होगा। एक गहरी समझ के साथ इसे शस्त्र बनाकर बेईमानों पर प्रहार करना होगा। लोगों ने ईमानदारी को ढाल बना लिया, अब हथियार बनाना होगा। इसी तरह अपराध के मुकाबले के लिए जिम्मेदारी को बहादुरी से जोडऩा होगा। कर्तव्यनिष्ठ लोग साहस दिखाने के मामले में रिजर्व हो जाते हैं। यह बिल्कुल ऐसा है कि हमारे पास जिम्मेदारी की आंख है, पर बहादुरी की दृष्टि नहीं। अंधे होकर आखिर कितनी लंबी यात्राएं कर पाएंगे। इसीलिए बेईमानों की जानकारी भी ईमानदारों के ज्ञान पर भारी पड़ जाती है और अपराधियों की दृष्टि जिम्मेदारों की आंख पर हावी हो जाती है। आध्यात्मिकता ही इस गड़बड़ाए तालमेल को ठीक कर पाएगी।

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