Monthly Archives: August 2011

जन लोकपाल बनाम सरकारी लोकपाल (जोकपाल)

मोहक पाठक
दोस्तों पहली बार लिखने का मौका मिला है वो भी अगर इस टीम के साथ होता तो शायद नहीं ही मिलाता , पहले तो मैं बता दू की मैं पीलीभीत का रहने वाला हु नाम हैमोहक पाठक
इस टीम के सभी लोगो का धन्यवाद देता हु की मुझे ये मौका दिया |
आज कल चारो तरफ बस लोकपाल का ही शोर है लेकिन सभी लोग जन लोकपाल और सरकारी लोकपाल (जोकपाल) से पूरी तरह परिचित नहीं है मै आप को इनसे परिचित करता हू| 
कुछ जागरूक नागरिकों द्वारा शुरू की गई एक पहल का नाम हैजन लोकपाल बिल‘. इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा. जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण और अरविन्द केजरीवाल द्वारा बनाया गया यह विधेयक लोगो के द्वारा वेबसाइट पर दी गयी प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी. कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पायेगा. इस बिल को शांति भूषण, जे. एम. लिंगदोह, किरण बेदी, अन्ना हजारे आदि का भारी समर्थन प्राप्त हुआ है.
इस बिल की मांग है कि भ्रष्टाचारियो के खिलाफ किसी भी मामले की जांच एक साल के भीतर पूरी की जाये. परिक्षण एक साल के अन्दर पूरा होगा और दो साल के अन्दर ही भ्रष्ट नेता आधिकारियो को सजा सुनाई जायेगी . इसी के साथ ही भ्रष्टाचारियो का अपराध सिद्ध होते ही उनसे सरकर को हुए घाटे की वसूली भी की जाये. यह बिल एक आम नागरिक के लिए मददगार जरूर साबित होगा, क्यूंकि यदि किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल बिल दोषी अफसर पर जुरमाना लगाएगा और वह जुरमाना शिकायत कर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा. इसी के साथ अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती है तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते है. आप किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते है जैसे कि सरकारी राशन में काला बाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, या फिर पंचायत निधि का दुरूपयोग.
लोकपाल के सदस्यों का चयन जजों, नागरिको और संवैधानिक संस्थायो द्वारा किया जायेगा. इसमें कोई भी नेता की कोई भागीदारी नहीं होगी. इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से, जनता की भागीदारी से होगी
.
सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सी बी आई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ऐन्टी करप्शन डिपार्ट्मन्ट) का लोकपाल में विलय कर दिया जायेगा. लोकपाल को किसी जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगें
.
इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दिसम्बर २०१० को भेजी गयी थी, जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. इस मुहीम के बारे में आप ज्यादा जानकारी के लिए http://www.indiaagainstcorruption.org पर जा सकते हैं. इस तरह की पहल से समाज में ना सिर्फ एक उम्दा सन्देश जाएगा बल्कि, एक आम नागरिक का समाज के नियमों पर विश्वास भी बढेगा. हर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है, और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना हर नागरिक का हक है.
 और ये है सरकारी जोकपाल  —— लोकपाल बिल में यह प्रावधान प्रस्तावित है कि संपत्ति घोषित नहीं कर पाने वाले बाबुओं को भ्रष्ट माना जाएगा. लोकसभा में पेश होने जा रहे लोकपाल विधेयक में यह प्रावधान प्रस्तावित किया गया है कि अगर कोई सरकारी कर्मी अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं कर पाता है या गुमराह कर देने वाली जानकारी देता है तो यह मान लिया जाएगा कि उसने भ्रष्ट तरीकों से संपत्ति जुटाई है.लोकपाल भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे नौकरशाहों के तबादले या निलंबन की भी सिफारिश कर सकेगा.लोकपाल केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, समूहया उसके समकक्ष के किसी अधिकारी, संसद द्वारा पारित कानून के तहत किसी निकाय, बोर्ड, निगम, प्राधिकरण, कंपनी, सोसाइटी, ट्रस्ट और स्वायत्त संस्था तथा केंद्र सरकार के आंशिक या पूर्ण वित्तीय नियंत्रण वाले किसी निकाय के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी या समूहके समकक्ष अफसर के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच कर सकेगा.विधेयक में प्रधानमंत्री को उनके पदमुक्त होने तक लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है. संसद के भीतर सांसदों का आचरण और उच्च न्यायपालिका भी दायरे में नहीं है. प्रस्तावित लोकपाल में एक अध्यक्ष और आठ अन्य सदस्य होंगे. इनमें से आधे न्यायपालिका से होंगे. लोकपाल के पास अपनी अभियोजन और जांच इकाई होगी.लोकपाल में गैरन्यायिक पृष्ठभूमि वाले उन्हीं सदस्यों को शामिल किया जाएगा जो पूर्ण रूप से ईमानदार और असाधारण क्षमता वाले होंगे तथा जिन्हें प्रशासन में भ्रष्टाचार निरोधी निगरानी की जिम्मेदारी वाले पदों पर काम करने का कम से कम 25 वर्ष का अनुभव होगा. विधेयक में प्रावधान किया गया है कि लोकपाल अपने अध्यक्ष या किसी सदस्य के खिलाफ शिकायतों की जांच नहीं करेगा. इस तरह की शिकायतें राष्ट्रपति या भारत के प्रधान न्यायाधीश के पास भेजी जाएगी. लोकपाल को भविष्य में अभियोजन चल सकने की संभावना वाले मामलों में आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-197 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून-1988 की धारा-19 के तहत मंजूरी प्राप्त करने की जरूरत नहीं होगी. लोकपाल को भ्रष्ट नौकरशाहों की भ्रष्ट तरीकों से जुटाई गई संपत्ति को जब्त करने के भी अधिकार होंगे. इसी के साथ विधेयक में प्रावधान किया गया है कि गलत शिकायतों पर शिकायतकर्ता के खिलाफ अभियोजन चलाया जा सकेगा और ऐसे मामलों में सजा का प्रावधान कम से कम दो वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष होगा.ऐसे मामलों में दंड भी 25,000 से दो लाख रुपए तक लगाने का प्रावधान किया गया है. नौकरशाह क्षतिपूर्ति पाने के भी अधिकारी होंगे. प्रस्तावित भ्रष्टाचार निरोधी निकाय जांच करने में केंद्र और राज्य सरकार की मदद भी ले सकेगा. विधेयक में प्रावधान है कि भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के सात वर्ष के भीतर उस पर जांच होनी जरूरी है. प्रधानमंत्री के मामले में यह सीमा अवधि उनके पदमुक्त होने के बाद लागू होगी. विधेयक में केंद्र में लोकपाल के साथ ही राज्यों में लोकायुक्त के गठन का प्रावधान नहीं किया गया है.लोकपाल को चलाने के लिये राशि की व्यवस्था भारत की संचित निधि के जरिये की जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि अगर लोकसभा में विधेयक पेश होने के बाद स्थायी समिति अगस्त अंत तक इस पर अपनी सिफारिशें भेज देती है तो इसे पारित कराने की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं.

स्काउट्स गाइड

स्काउट्स गाइड नीलेश पाण्डेय
भारत स्काउट्स गाइड झण्डा ऊंचा सदा रहेगा
ऊंचा सदा रहेगा झण्डा,ऊंचा सदा रहेगा
नीला रंग गगन सा विस्तृत भ्रात्र भाव फैलाता
त्रिदल कमल नित तीन प्रतिज्ञाओं की याद दिलाता
ओर चक्र कहता है प्रीतिपल आगे कदम बढ़ेया
ऊंचा सदा रहेगा झण्डा,ऊंचा सदा रहेगा
 
ठंडा ठंडा कोको  कोला
स्काउट गाइड का तोप का गोला
 
 
 दाल बाटी चूरमा 
हम भारत के सुरमा  

पत्थर की नाव

आपने लकड़ी की नाव देखी होगी और उसके बारे में सुना भी होगा लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक शिल्पकार ने पत्थर की ऐसी नाव बनाई है जो तैर भी सकती है. लगभग एक साल की मेहनत के बाद दीपक विश्वकर्मा ने ग्वालियर सेंड पत्थर की नाव बनाई है. दीपक की यह नाव है तो पत्थर की लेकिन तैरती ठीक लकड़ी की नाव जैसी है.
इस नाव में राम, लक्ष्मण, सीता सवार हैं तथा उसे केवट चला रहा है. पत्थर की नाव पानी पर कैसे तैरती है,  इस पर दीपक का कहना है कि रामायण में भगवान राम की सेना को रामेश्वर को पार करना था तो हनुमान की बानर सेना ने पत्थर पर सिर्फ राम का नाम लिख दिया था, फिर वह तैरने लगा था.  वह कहते हैं कि यह राम के नाम का प्रताप था कि पत्थर भी तैरने लगा था. दीपक के मुताबिक यह नाव दो फुट लम्बी तथा नौ इंच चौड़ी है. इसको बनाने में 70 हजार की लागत आई है.  वह कहते हैं कि नाव का संतुलन बनाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करना पड़ी. संतुलन बनाने के लिए तीन माह तक कड़ी मेहनत करने के बाद वह पूरी तरह पत्थर से बनी इस नाव को पानी पर तैराने में सफल रहे. दीपक द्वारा बनाई गई इस पत्थर की नाव का दिल्ली की प्रदर्शनी के लिए भी चयन हुआ है. इस बात को लेकर दीपक व उनका परिवार काफी उत्साहित है
सहारा समय

राहुल कोई भगवान राम नहीं है

 राहुल कोई भगवान्  राम नहीं है . लेकिन गोरखपुर में आये तो आमी के प्र्दुसन से त्रस्त लोगो ने उसी तरह गुहार लगाई  <उतराई नाहीं चाही, पनिए शुद्ध करा देईं>  मीडिया ने केवटराम सवाद का सहारा लिया और दाग दी भोजपुरी की हेडिंग से एक खबर . और बना दिया राहुल को हीरो .

एक अख़बार ने लिखा अयोध्या से जितनी दूर दक्षिण श्रृंगबेरपुर है लगभग उतनी ही दूरी पर पूरब दिशा मे बसा है गोरखपुर का कटका गांव। श्रृंगबेरपुर में भगवान श्रीराम ने केवट को सुई नदी पार कराने एवज में उतराई देने की कोशिश की थी। आज राहुल ने कटका में आमी नदी पार कराने के एवज में केवट को उतराई देनी चाही। राहुल के कटका दौरे में गांव के हर बड़े बुजुर्ग की जबान पर राम केवट संवाद बरबस चर्चा में गया था।दो नामों में अक्षर ने इस चर्चा को और भी आगे बढ़ा दिया। तब तो केवट ने कहा था
कहेउ कृपालु लेहु उतराई,केवट चरन गहे अकुलाई.

नाथ आजु मैं काह पावा,तिटे दोष, दुख, दारिद दावा।

आज कटका गांव के दो मल्लाहों ने सपने में नहीं सोचा था कि उनकी नाव पर राहुल गांधी बैठेंगे। बाढ़ के सीजन में नदी में तीन माह तक नाव चलाने वाले जीतू निषाद एवं रमेश निषाद ने जब राहुल गांधी को नदी के पार उतारा तो राहुल ने उतराई देनी चाही बस क्या था तपाक से जीतू ने कहा, साहब पइसा नाहीं चाही, आमी के पनिए शुद्ध करा देईं।
बतौर जीतू एवं रमेश अजीब संयोग था। जब राहुल गांधी का काफिला नदी के किनारे छताई पुल के पास पहुंचा तो वे सुर्ती मल रहे थे। जब वे उनके पास आये तो वे पहचान नहीं पाये कि यह लोग कौन हैं। नाव में पूछकर वे लोग बैठ गये नदी पार करने के दौरान जीतू से उसे परिवार के बारे में रीता बहुगुणा जोशी ने पूछा। जीतू ने उन्हें बताया कि उसके चार बेटे एवं दो बेटी हैं। बीस वर्ष से बाढ़ के वक्त नाव चलाने वाले जीतू के मन में एक व्यक्तिगत मुराद (बेटो को नौकरी) पूरी कर लेने की इच्छा हुई लेकिन उसने सामाजिक हित को महत्व दिया। वह कहता है कि मन में एक बार आया कि कि कह दे लेकिन आत्मा ने गवाही नहीं दी। जीतू कहता है कि नदी का पानी जब शुद्ध हो जाएगा तो कई लोगों के बेटे का जीवन संकट से बचेगा। रमेश निषाद कहता है कि उसकी जाति के पूर्वजों ने भगवान राम को नदी पार कराया था। वह अपने जीवन में इतने बड़ी हस्ती को पार कराकर काफी खुश है। सपने में भी उसने नहीं सोचा था कि ऐसा अवसर कभी उसके जीवन में आएगा। 

 दुसरे अख़बार ने लिखाहैण्ड पम्प ले के  पानी जहर उगालत बा .पानी पि के लरिका बीमार हो जाट हवे .

 एक  ने लिखा राहुल ने खरीदी  700 में तीन किलो प् कौ डी….

पढ़िए और इस राजनितिक ड्रामा पर अपनी प्रतिक्रिया भी दीजिये



रुद्रपुर है दूसरी काशी

देवरिया  जनपद मुख्यालय से लगभग बीस किमी दूर स्थित रुद्रपुर नगरी को काशी का दर्जा प्राप्त है। यहां भगवान शिव, दुग्धेश्वरनाथ के नाम से जाने जाते है। शिवलिंग जमीन के अंदर कितने गहरे तक है, इसकी थाह कोई नहीं लगा पाया। शिव पुराण व स्कंद पुराण के साथ ही चीनी यात्री ह्वेंनसांग ने भी बाबा की महिमा का बखान किया है।   उप ज्योतिर्लिंगों की स्थापना के संबंध में पद्म पुराण की निमन् पंक्तियां उल्लिखित हैं- खड़ग धारद दक्षिण तस्तीर्ण दुग्धेश्वरमिति ख्याति सर्वपाप:, प्राणाशकम यत्र स्नान च दानं च जप: पूजा तपस्या सर्वे मक्षयंता यान्ति दुग्धतीर्थ प्रभावत:। ईसा पूर्व 332 में रघु वंश से जुड़े महाराजा दीर्घवाह के वंशज राजा ब्रजभान रुद्रपुर आए थे। तब क्षेत्र :जंगल से आच्छादित था। सैनिक मचान बनाकर रहते थे। एक रात उन्होंने देखा कि एक गाय आकर खड़ी हो गई और उसके थन से स्वत: दूध निकल रहा है। राजा ने जिज्ञासा शांत करने के लिए उस स्थान की खुदाई कराई। उन्हे वहां एक शिव लिंग दिखा। उस स्थान की साफ सफाई कराकर वेदपाठी, विद्वान ब्राह्मणों द्वारा शिव लिंग का रुद्राभिषेक कराया गया। चूंकि गाय ने प्रथम बार लिंग का दूध से अभिषेक किया था, इसलिए पीठ का नाम दुग्धेश्वर नाथ रखा गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल दधीचि व गर्ग आदि ऋषि-मुनियों की तपस्थली भी है। देवारन्य की इस धरती को बार -बार नमन करने का जी करता है
हर हर महादेव !

Martin’s Window

Nilesh Pandey
Here’ and old story
it seems so funny!
There was a window
in Martin’s tummy!
Actually by mistake
Martin was shot.
Right in the stomach
it bled a lot!
The wound slowly healed
and was covered by skin.
But the hole was still there
You could peep right in!
Oh ! what a chance
for doctors to study.
What happens to the food
Inside the body!
The story seems odd
But it is really true.
The secret of Martin’s stomach
helped us all- me and you!
Nilesh Pandey
Kendriya Vidyalaya No.4,
 Jaipur


सही कर्मचारियों की पहचान

योगेश पाण्डेय

   bu fnukas baVjusV ij ,d fdLls dh /kwe gSA blds eqrkfcd ,d fdlku Fkk ftls ?kksMs ikyus dk ‘’kSkd FkkA mlds ikl lHkh uLy ds ?kksMs Fksa] flQZ ,d uLy dks NksMdjA ,d fnu mls irk pyk fd iMksalh ds ikl mlh uLy dk ,d ?kksMk gSA] ftldh mls ryk’k gSaA fygktk og yxkrkj vius iMksLkh dks ?kksMk cspus ds fy, mdlkrk jgk] tc rd fd mlus ?kksMk csp ugha fn;kA ,d eghus ckn og ?kksMk chekj iM x;kA fdlku us bykt ds fy, i’kq fpfdRld dks cqyk;kA mlus ?kksMs dh tkap djus ds ckn dgk] &vkidk dk ?kksMk ,d ok;jl dk f’kdkj gks x;k gSA mls rhu fnu rd ;g nok nsuh gksxhA ;fn rc Hkh lq/kkj ugh gksrk gS rks fQj gesa mls ekSr dh uhan lqykuk gksxkA ogha ikl eas [kMk ,d cdjk mudh ckrphr lqu jgk FkkA vxys fnu os vk;s vkSj ?kksMs dks nokbZ nsdj ogkW ls pys x,A blds ckn cdjk ?kksMs ds ikl tkdj cksyk] ^etcwr cuksa] nksLrA pyks mBks] vU;Fkk os rqwEgaS ekSr dh uhan lqyk nsaxaasA nqljs fnu mUgksus nksckjk ?kksMs dks nokbZ nhA cdjk nksckjk ?kksMs ds ikl x;k vkSj cksyk] de vkWu ;kj! mB tkvkas] vU;Fkk rqe ekjs tkvksxsA pykass eAS rqEgkjh enn dj nsrk gWwA ySVl xks! ,d nks rhu —–A blds ckotwn ?kksMk ugha mBkA rhljs fnu o ?kksMs dks nok nsus ds fy, vk,A ?kksMs dh gkykr eas lq/kkj u gksrs ns[k i’kq fpfdRld us dgk * nqHkkX;Z ls geas bls ekjuk gh gksxkA vU;Fkk ;g ok;kl QSydj nwljs ?kksMkas dks Hkh ladzfer dj nsxkA* muds tkus ds ckn cdjk fQj ?kksMs ds ikl vk;k vkSj cksyk] *lqukas nksLr] bc rqEgas djuk gh gksxkA* vHkh ugh arks dHkh ughaA mBkas] de vkWu! FkksMh fgEEkr djkas! mB tkvkas! gka&gka] /khjs&/khjas dksf’k’k djkas! D;k ckr gSAA cgqr vPNasA FkksMk vkSj rst! rqeus dj fn[kk;k] rqe okdbZ pSafi;u gksa!!!!!* rHkh vpkud mudk ekfyd okil vk x;kA tc mlus ?kksMs dks eSnku ij Hkkxrs gq, ns[kk rks og [kq’k gksdj tksj&tksj ls cksyus yxk] *peRdkj gks x;k! easjk ?kksMk Bhd gks x;kA bl [kq’kh eas nkor gksuh pkfg,A cdjs dks ekjdj mldk xks’r idkrsa gSA gekjs dk;ZLFkykas ij ,slk vDlj gksrk gSA dksbZ Hkh lgh ek;uaks easas ugh tkurk gS fd lQyrk dk Js; fdl deZpkjh dks tkrk gSa ;k fdlus t:jh izksRlkgu fn;k tkrk gSa A mijksDr xkFkk dks ns[k dj dh ldrs gS fd dqN ekeykas eas vkids fy, csgrj ;gh gksxk fd vki vius lkFkh deZpkjh dks izksRlkfgr djus ds fy, T;knk iz;kl u djasA dksbZ ;g Hkh dg ldrk gS fd ;g dkWikasjsV ãweu fjlkslZ dYpj ds iwjh rjg f[kykQ gSaAysfdu vki eq>s crkb;s] D;k og ?kksMk MkWDVj o ekfyd ds chp gks jgh ckrphr dks ugh lqu jgk FkkA og lqu jgk Fkk vkSj chekj gksus ds ckotwn mB [kMs gksus dk mRlkg vkSj iz;kl mldh vksj ls T;knk gksuk pkfg, FkkA ;fn FkksMk igys fnu gh mBdj nkSMusa yxrk rks ekfyd [kaq’kh eas u rks ikVhZ nsrk u gh cdjk ekjk tkrkA ekfyd blas vke ?kVuk dh rjg ysrkA  

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योगेश पाण्डेय
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