………और हार गई सरकार

अम्बरिश पाण्डेय
पिछले तीन दिनों से बाबा रामदेव और केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के बीच जो शह मात का खेल चल रहा था वह शनिवार की शाम को तब चरम पर पहुंच गया जब कपिल सिब्बल ने बाबा रामदेव के प्रतिनिधि आचार्य बालकृष्ण की एक चिट्ठी सार्वजनिक कर दी जिसमें आचार्य बालकृष्ण ने सत्याग्रह शुरू होने से पहले ही लिखित में यह आश्वासन दे दिया था कि वे सुबह अनशन शुरू करेंगे और दोपहर तक समाप्त होने की घोषणा कर देंगे. जब रामदेव ने दोपहर तक सत्याग्रह समाप्त होने की घोषणा नहीं की तो दोपहर बाद कपिल सिब्बल पीआईबी पहुंच गये और उन्होंने आचार्य बालकृष्ण की वह चिट्ठी सार्वजनिक कर दी जिसमें उन्होंने सत्याग्रह के शुरू होने से पहले ही खत्म होने का आश्वासन दे दिया था. बाबा नहीं मे तो सरकार ने उनके सत्याग्रह पर हमला ही बोल दिया केंद्र सरकार की यह ओछी हरकत पर हँसी आती हैं. VMW Team के अम्बरिश पाण्डेय की एक रिपोर्ट ……….
                     रामदेव के ऊपर इस चिट्ठी से बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि अगर   उन्होंने सरकार से समझौता कर लिया था तो फिर अनशन और सत्याग्रह के नाम पर पूरे देश को दिनभर बेवकूफ क्यों बनाते रहे? शाम को जब पत्रकारों ने उनसे यही सवाल पूछा तो रामदेव के पास कोई जवाब नहीं था और वे टाल मटोल करते रहे. हां, इस सवाल पर उनके सत्याग्रही जरूर उत्तेजित हो गये जो बाबा रामदेव के लिए दवाइयों का कारोबार करते हैं या फिर योग के कैंप करते हैं. इसके लिेए बाकायदा बाबा रामदेव के ट्रस्ट से उन्हें पैसा दिया जाता है और यहां की लगभग सारी जनता रामदेव के योग करने और सिखानेवाले ही आये हैं.जब कपिल सिब्बल ने आचार्य बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर दी तो बाबा रामदेव के होश उड़ गये. शाम को साढ़े पांच बजे उन्होंने मीडिया और उपस्थित सत्याग्रहियों से बात की थी और भरोसा दिलाया था कि जल्द ही वे कोई बड़ा ऐलान करनेवाले हैं. आठ बजे के करीब बाबा रामदेव दोबारा लौटे. तब तक कपिल सिब्बल बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर चुके थे. रामदेव दोबारा लौटे तो बौखलाए हुए थे. सफाई दे रहे थे. उन्होंने कहा किअगर देश में अस्थिरता और अशांति पैदा होती है तो उसके लिए कपिल सिब्बल जिम्मेदार होंगे.” निश्चित रूप से अब बाबा रामदेव अपना चेहरा बचाने की कोशिश में लग गये हैं. बातचीत के नाम पर सरकार ने उन्हें जिस तरह से घेर रखा था उसका नतीजा सामने गया है. सिब्बल ने रामदेव के साथ विश्वासघात किया है तो रामदेव ने सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ छल किया है. अब भले ही बाबा रामदेव कहें कि कपिल सिब्बल ने उनके साथ धोखा किया है. इसलिए अब वे उनके साथ आगे कोई वार्ता नहीं करेंगे लेकिन बाबा रामदेव ने भी सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ धोखा किया है. क्या अब भी उनकी बात कोई सुनेगा? अगर वे पहले ही सरकार से समझौता कर चुके थे तो फिर सत्याग्रह का नाटक क्यों किया? हालांकि बाबा रामदेव भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे लगवाकर अपनी लाज बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके सत्याग्रह की कलई खुल चुकी है जिसके दोबारा चढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है. लेकिन सरकार ने जो तरीका अपनाया वो भी गलत था अगर रामदेव ट्रेन की पटरी पर बैठते  उनकी बात आसानी  मान  गई होती  भ्रष्टाचार के कई आरोप झेल रही केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने जानबूझकर काले धन को लेकर तेजी दिखानी शुरू की है ताकि आम जनता के बीच यह संदेश दिया जा सके कि वह अपने स्तर पर काले धन पर रोक लगाने के प्रति गंभीर है। काले धन को लेकर सरकार के रवैये को विपक्षी दल लगातार कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इशारे पर बाबा रामदेव के खिलाफ आधी रात में फासीवादी कार्रवाई की गई। इसके खिलाफ रविवार शाम सात बजे से दिल्ली के राजघाट में पार्टी 24 घंटे का सत्याग्रह करेगी। पार्टी ने इस घटना के लिए प्रधानमंत्री और सोनिया से देश से माफी मांगने को कहा। सत्याग्रह में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अध्यक्ष नितिन गडकरी और लोकसभा राज्यसभा में विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली के अलावा राजनाथ सिंह आदि वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
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