विद्युत उपकेन्द्र लार, है बहुत बेकार . भागलपूर फिडर का गाव हरखौली, रहता है अनहार

हरखौली गाँव 
जर्जर विद्युत उपकरण व पोल के बीच कर्मचारियों का संकट, कमोवेश सभी विद्युत उपकेन्द्रों की यही तस्वीर है। विद्युत उपकेन्द्र लार के द्वारा क्षेत्र के उपनगर सहित तकरीबन 300 गांवों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। यह जिम्मेदारी मात्र चार कर्मचारियों के कंधे पर है, जिनके द्वारा सुचारू रूप से कार्य सम्पादित न कर पाने के चलते लोकल फाल्ट की शिकायतों से उपभोक्ताओं को कई दिनों तक जूझना पड़ रहा है।
मालूम हो कि विद्युत उपकेन्द्र लार 1974 में स्थापित की गई।  लार उपकेन्द्र पर क्षेत्र के तकरीबन 300 गांवों को बिजली की आपूर्ति करने के लिए चार फीडर लगाए गए हैं, जिनमें टाउन फीडर, साउथ-ईस्ट फीडर, साउथ-वेस्ट फीडर व नार्थ फीडर शामिल हैं। यहां लगे दो ट्रांसफार्मरों की क्षमता 5-5 एमबीए की है। लिहाजा ये फीडर मात्र 262.5 एम्पीयर का लोड ही ले पाते हैं, जबकि इससे तकरीबन दोगुनी विद्युत खपत जारी है। लिहाजा ओवरलोड के चलते अधिकांश क्षण आपूर्ति प्रभावित रहती है। खास बात यह है कि यहां तैनात 3 लाइनमैन व 1 पेट्रोलमैन सहित चार कर्मचारियों की औसत उम्र 55 वर्ष है, जिनके द्वारा विद्युत पोल पर चढ़कर फाल्ट ठीक कर पाने को उम्र ही गवाही नहीं देती। ये सभी विद्युतकर्मी अपने प्राइवेट लाइनमैन के सहारे अपना काम निपटाते हैं। इन्हीं प्राईवेट लाइनमैनों में से किसी के विद्युत हादसे का शिकार हो जाने पर विभाग भी मदद देने के बजाय उनसे पल्ला झाड़ लेता है। यहां तैनात एसएसओ मिथिलेश वर्मा ने कहा कि विद्युत कर्मचारियों के अभाव में आपूर्ति आएदिन प्रभावित होती है। इसके अलावा ओवरलोड के अनुसार विद्युत उपकरण न बदले जाने से भी परेशानियां हो रही हैं।
 
रिपोर्ट – पवन पाठक
पत्रकार आज
लार (देवरिया)

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