Monthly Archives: June 2011

राजमंदिर

राजमंदिर जो हर राजस्थानी के दिल में सपना बनकर धड़कता है और जिसकी चर्चा के बिना जयुपर यात्रा का वर्णन पूरा हो ही नहीं सकता! थार की एक पीढ़ी है जो राजमंदिर को देखने या राजमंदिर में फिल् देखने के सपने के साथ बड़ी हुई. एक पीढ़ी जिसकी कल्पनाओं में तरह तरह के राजमंदिर उकरते रहे हैं. हैरानी नहीं होगी कि किसी सर्वे में जयपुर के सबसे चर्चित और इच्छित गंतव् स्थलों में राजमंदिर सिनेमा सामने जाए. हो भी क्यों नहीं. 70 एमएम सिंगल स्क्रीन वाला राजमंदिर देश के उन चुनिंदा सिनेमाघरों में से हैं जो डीटी और मल्टीप्लेक् के मौजूदा दौर में भी शानो शौकत के साथ चल रहे हैं. बदलते जमाने की धूल राजमंदिर की दीवारों पर नहीं जम सकी है. भगवानदास रोड पर पांच बत्ती सर्किल के पास स्थित है राजमंदिर थियेटर या सिनेमाघर! राजमंदिर की शुरुआत हुई एक जून 1976 को चरस फिल् के साथ. इसके डिजाइन का श्रेय विख्यात वास्तुविद डब्ल्यू एम नमजोशी को जाता है. उन्होंने इस सिनेमाघर का भवनआर्ट माडर्नेतरीके में बनाने की योजना बनाई. इस भवन की आंतरिक साज सज्जा बाहरी रूप दोनों ही अनूठे हैं. भवन के सामने का हिस्सा पत्तियों या पुष् दल रूप में हैं. पोस्टर वाली लहर पर नौ सितारे या तारे बने हैं. ऊपर की दो दीवारी लहरों पर ‘The Showplace of the Nation – Experience the Excellence’ अंकित है. रात में जब इसका आमुख रोशनी में नहाया होता है तो उसकी शोभा देखते ही बनती है. भवन की आंतरिक साज सज्जा मनोहारी है. शायद देश के किसी भी सिनेमाघर में सबसे बड़ी लाबी.. और रोशनी व्यवस्था देख तो दर्शक दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं. प्लास्टर से बनी पत्तियों के पीछे से झांकती रोशनी जिसका रंग बदलता रहता है. बालकनी में जाने के लिए सीढियों के बजाए लंबा रैंप बना है. राजमंदिर भारत के सबसे चर्चित सिनेमाघर भवनों में से एक है और इसकी तुलना हालीवुड, केलिफोर्निया के ग्राउमैनस चाइनीज थियेटर से की जाती है. कहते हैं कि यह दुनिया का एक मात्र सिनेमाघर है जो पर्यटक केंद्र या टूरिस् प्लेस के रूप में पंजीबद्ध है 

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VMW Team

India’s New Invention

 

महा योगी देवरहा बाबा



देवरहा बाबा



 देवरिया का ही नहीं भारत का   कोनाकोना प्रख्यात संत योगीराज देवरहा बाबा का कर्जदार है।देवरिया जिला के मईल  के लोग खुद को इसलिए धन्य मानते हैं कि देवरहा बाबा ने इस धरती को अपनी तपोस्थली के लिए चुना और यहीं से गोसेवा मानव सेवा का संदेश दिया। बाबा के अनन्य भक्तो की संख्या लाखो में है . . कहते हैं, बाबा कालांतक योगी थे। बाबा के दरसन के लिए देशदुनिया के कोनेकोने से शर्धालू आते रहे है  . सलेमपुर तहसील मुख्यालय से 15 किमी दूर मईल कस्बे के समीप सरयू नदी के किनारे वह स्थान मौजूद है, जहां वर्ष में आठ महीने योगीराज  देवरहा बाबा तपस्या में लीन रहते थे। लकड़ी के चार खंभों पर टिका मचान ही उनका महल था। तो उन्हें कभी किसी ने भोजन करते देखा ही कपड़ा पहनते। दिन में चारपांच बार सरयू  में समाकर घंटों पानी में पड़े रहना उनकी दिनचर्या में शामिल था। जब किसी भक्त ने जिज्ञाशावश पूछा तो उन्होंने बस इतना कहामैं जल से ही उत्पन्न हुआ हूं। ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरयै परमात्मने, प्रणत: क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नम: से सरयू का किनारा गुंजायमान रहता था। बाबा का यह प्रिय मंत्र था।बाबा इसी मंत्र का जप करने का उपदेश देते थे   .  देवरहा बाबा कुछ दिन बनारस में रामनगर में गंगा के बीच, माघ में प्रयाग और फाल्गुन में मथुरा के अलावा कुछ समय हिमालय में एकांत वास करते थे। उन्हें कभी किसी ने गंतव्य पर जाते देखा और आते। उन्होंने कभी सवारी भी नहीं की, इसीलिए लोगों का विश्वास है कि बाबा पानी में चलते थे। 
बाबा ने तमाम हस्तियों को दिया था आशीर्वाद
बाबा ने तमाम जानीमानी हस्तियों को आशीर्वाद दिया था। इनमें प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद,सरदार बल्लभ भाई पटेल ,डाक्टर कर्ण सिंह , पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तम दास टंडन,संजय गाँधी , मेनका गाँधी ,बूटा सिंह  जैसी विभूतियों के नाम शामिल हैं। जार्ज पंचम का ब्रिटेन से आकर बाबा का आशीर्वाद लेना वाकई उनकी विश्वव्यापी ख्याति का पैमाना है। बात सन् 1911 की है। जब विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा तो जार्ज पंचम ने माहौल बदलने के लिए भारत को ब्रितानिया हुकूमत के पक्ष में करने को यात्रा की योजना बनाई। भारत यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने अपने भाई प्रिंस फिलिप से पूछा, क्या वास्तव में भारत के साधु संत महान होते हैं, तो उन्होंने कहा भारत पहुंचकर पहले देवरहा बाबा का आशीर्वाद जरूर ले लेना। तब जार्ज पंचम ने मईल आकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसका जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी किया है।
जब मै बाबा के दरसन करने गया बात 14 सितम्बर 1979 की है . उस दिन अपने इस्कूल स्वामी देवानंद डिग्री कोलेज मठ लार का क्लास छोर कर मै बाबा के दरसन को निकल गया . मईल अस्रम पर उतर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल जी डी तपासे आये थे . बाबा अपनी गुफा में थे . घंटो बीत गया . राज्यपाल जी डी तपासे हाथ जोरे खरे थे . अधिकारी पसीनेपसीने हो रहे थे .हमारे साथ कुछ्छ और नवजवानों ने गाना सुरु कियाकब होइहे दरसन तोहार ये देवाराहावा बाबा ….बाबा मंच पर पर दिखाई दिए . चारो ओर जयकार होने लगा . बाबा ने राज्यपाल की ओर देख कर कहाबोल भक्त क्या परेशानी है ? उन्होंने कहासुखा से जनता परेसान है . जलवृस्ती करा दीजिये . बाबा ने कहातुम नेता लोगो के पाप से सुखा परा है . चल तुम्हारी अर्जी भगवन के दरबार में भेज देता हु .आगे उनकी मर्ज़ी .राज्यपाल अपनी कार से गोरखपुर पहुचे होगे , हम अपने घर पहुचे ,मुसलाधार पानी गिरा .चारो ओर जल ही जल .मै बाबा का मुरीद हो गया . हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर बाबा के दरसन को जाता था .

मईल आश्रम पर जमीन का विवाद छिरा तो बाबा वृन्दावन चले गए 

मईल आश्रम पर जमीन का विवाद छिरा. दो गोल आमनेसामने हुवे . हत्यायो का दौर सुरु हुवा . बाबा दुखित हुए . सहज भाव से जाने कब मईल आश्रमत्याग    दिया बाबा वृन्दावन चले गए और वही  19 जून सन् 1990 की योगिनी एकादशी की पावन बेला में ब्रह्मालीन हुए, बाबा का पार्थिव शारीर तिन दिनों तक भक्तो के दर्शन के लिए रखा गया बाद में उने जमुना में जल समाधी दी गई |  

अजब प्रेम की गजब कहानी

 जिंदा है शिखा, पूजा की हुई थी हत्या गोरखपुर : जिस शिखा दुबे की मौत पर चार दिनों से महानगर में सनसनी मची थी, वह न केवल जिंदा है, बल्कि घर से भाग कर प्रेमी के साथ रहने के लिए सनसनीखेज हत्या की योजना में शामिल बड़ी साजिशकर्ता भी निकली। उसके घर वाले भी इस साजिश के शिकार हुए। जिस लाश को शिखा का समझा गया, वह सोनभद्र
की पूजा थी और उसे तीन हजार रुपये पर यहां लाया गया और गला घोटकर उसकी हत्या कर दी गई। उसे शिखा के कपड़े पहनाकर और रॉड से चेहरा बिगाड़कर नाले में फेंक दिया गया ताकि घरवाले उसे शिखा की लाश समझते रहें। सोमवार को शिखा, उसके प्रेमी दीपू यादव व दीपू के दोस्त सुग्रीव की गिरफ्तारी के बाद डीआइजी मुकेश शुक्ल ने पूरे मामले का सनसनीखेज खुलासा किया।
अप्रैल में ही कर ली थी दीपू व शिखा ने शादी :  डीआइजी ने बताया कि शिखा और दीपू आपस में प्रेम करते थे। दोनों ने अपने घर वालों को बिना बताए गत 18 अपै्रल को बुढि़या माई मंदिर में शादी भी कर ली थी। बाद में घर से भाग कर एक साथ रहने के लिए उन्होंने योजना तैयार की।
दीपू ने इस पूरे मामले की योजना एक माह पहले ही तैयार कर ली थी।
झांसे की साजिश, हत्या की योजना :  योजना के तहत उन्होंने शिखा की कद-काठी से मिलती-जुलती लड़की की तलाश शुरू की। गुरुवार को उन्हें ऐसी लड़की मिल गई। दीपू ने अपने मित्र सुग्रीव की मदद से सोनभद्र जिले के चोपन जिले से पूजा नाम की लड़की को तीन हजार रुपये रोज की दर से गोरखपुर चलने के लिए तैयार किया। पूजा को ट्रक में बिठा कर दोनों गुरुवार को गोरखपुर पहंुचे। फोन से उन्होंने इसकी जानकारी शिखा को दी। सूचना मिलने पर खरीदारी के बहाने वह घर से निकली। इस बीच जहां शव मिला, उससे थोड़ी दूर ट्रक खड़ा कर दीपू और सुग्रीव ने पूजा का गला घोंटा। बाद में फोन से उन्होंने शिखा को भी बुलाया, जहां शिखा ने अपने कपड़े शव को पहनाए और खुद खरीद कर लाए कपड़े पहने। इसके बाद दीपू और शिखा टेम्पो में बैठ कर कचहरी बस स्टेशन पहंुचे। वहां से दोनों बस पकड़ कर वाराणसी और बाद में सोनभद्र चले गए। इधर, सुग्रीव ने रॉड से प्रहार कर पूजा का चेहरा बिगाड़ा और उसके शव को नाले में फेंका।
सोनभद्र से मिला सुराग : डीआईजी ने बताया कि इस मामले का मुख्य आरोपी दीपू सोनभद्र में गिट्टी का काम करता है, इसलिए उसकी तलाश में पुलिस टीम को वहां भेजा गया। वहां से मिली जानकारी के आधार पर ही गोरखपुर से शिखा, उसके प्रेमी दीपू और सुग्रीव को गिरफ्तार किया गया।
लाश मिलते ही मचा था हल्ला : इंजीनियरिंग कालेज के निकट कमलेशपुरम कालोनी निवासी राम प्रकाश दुबे की बेटी शिखा गुजरे गुरुवार की शाम खरीदारी करने निकली थी, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटी। परिजनों की सूचना पर पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि दूसरे दिन शुक्रवार को सरयू नहर कालोनी में बिस्किट फैक्ट्री के पास नाले में युवती की लाश पाई गई। बाद में राम प्रकाश दुबे और उनके परिवार के अन्य लोगों ने कपड़े के आधार पर मृतका की पहचान शिखा के रूप में की।
हां, मैंने रची अपनी हत्या की साजिश : शिखा
पुलिस लाइन में डीआईजी की प्रेस वार्ता में शिखा ने कबूल किया कि खुद
उसने ही अपनी हत्या की साजिश रची। उसने सोचा था कि उसके माता-पिता उसे मरा मान कर कुछ आंसू बहा कर संतोष कर लेंगे। बकौल शिखा, उसने अपने प्रेमी दीपू से कहा कि उसकी कद काठी की लाश की व्यवस्था करो। उसने कहा था कि पांच हजार वह खुद देगी। उस लाश को अपने कपड़े पहनाएगी और घर के समीप फेंक कर सोनभद्र में रहेगी। प्रेमी दीपू ने अपने दोस्त, एक ट्रक चालक से बात की तो उसने सोनभद्र जिले के चौपन थाना अंतर्गत सलखन की एक युवती पूजा को तीन हजार रुपये में हायर कर लिया। दीपू ट्रक चालक के साथ पूजा को यहां ले आया और कुसम्ही जंगल में पूजा की हत्या की। इसके बाद पूजा की लाश ट्रक से लेकर दोनों सिंघडि़या के पास आ गए। बकौल शिखा, हमने ट्रक में ही अपनी सलवार-समीज,अंत:वस्त्र पूजा को पहनाया, यहां तक कि अपना हेयर बैंड भी उसे
लगा दिया। अपनी चप्पल पहनाई, ताकि जो भी देखे, यहां तक कि माता-पिता भी देखें तो वो पूजा को अपनी बेटी शिखा ही समझें। शिखा का कहना था कि हम इस योजना में सफल भी हो गए थे, पर हड़बड़ी में मोबाइल ऑफ करना भूल गए और पुलिस ने हमे दबोच लिया। शिखा का कहना था कि अगर कुछ दिन वह दीपू से अलग रही होती तो शायद पुलिस भी कभी इस राज से परदा नहीं उठा पाती। पर, हमारा दुर्भाग्य, जब दीपू पकड़ा गया, तब वह भी उसके साथ ही थी।

कहानी दैनिक जागरण , अमरउजाला रास्ट्रीय सहारा के गोरखपुर सस्करण ने प्रमुखता से छापा  

आने दो रे आने दो, उन्हें इस जीवन में आने दो

कैसी घोर विडंबना है ना जिस देवी को स्मरण कर मुझे पहचाना जाता है, उसे तो घर-घर सादर साग्रह बुलाया जाता है। और मैं उसी का स्वरूप, उसी का प्रतिरूप, मुझे इस खूबसूरत दुनिया में अपनी कच्ची कोमल आंखे खोलने से पहले ही कितनी कठोरता से कुचला जाता है। क्यों ? मैं एक भ्रूण हूं। अभी मेरा कोई अस्तित्व नहीं। मैं प्राकृतिक रूप से सृष्टि को आगे बढ़ाने का दायित्व लेकर अपनी मां की कोख में आई हूं। अब आप पहचान गए होंगे कि मैं सिर्फ भ्रूण नहीं बल्कि कन्या भ्रूण हूं। बालक भ्रूण होती तो गर्भ परीक्षण के बाद मुझे पहचाने जाने का स्वागत होता ‘जय श्री कृष्ण’ के पवित्र सांकेतिक शब्द के साथ । मगर मैं तो कन्या भ्रूण हूं ना, मेरे लिए भी कितना प्यारा पावन सांकेतिक शब्द है ‘जय माता दी’। पर नहीं मेरे लिए यह शब्द खुशियों की घंटियां नहीं बजाता, जयकारे का उल्लास नहीं देता क्योंकि इस ‘शब्द’ के पीछे ‘लाल’ खून की स्याही से लिखा एक ‘काला’ सच है जिससे लिखी जाती है मेरी मौत। खुद के अस्तित्व के मिटने से कहीं ज्यादा दुख, बल्कि ‘आश्चर्यमिश्रित दुख’ इस बात का है कि मेरी हत्या के लिए ‘जय माता दी’ जैसा ‍दिव्य उच्चारण करते हुए क्या नहीं कांपती होगी जुबान? एक बार भी याद नहीं आती होगी ‘मां’ के सच्चे दरबार की जहां पूरी धार्मिकता और आस्था के सैलाब के साथ दिल से निकलता है जय माता दी? वही जयकारा कैसे एक संकेत बन गया मेरी देह को नष्ट करने के अपवित्र संकल्प का। जिसने भी पहली बार मेरे आकार को तोड़ने और मेरी ही मां की कोख से मुझे बेघर करने के लिए यह प्रयोग किया होगा कितना नीच होगा ना वह? आह, मैं तो इस दुनिया में आई ही नहीं फिर दुनिया की ऐसी गालियां मेरे अंतर्मन से क्यों उठ रही है? मैं चिखती रहती हूं, तड़पती रहती हूं लेकिन कोई नहीं सुनता मेरी चित्कार। मुझे मांस का एक टुकड़ा समझ कर निर्ममता से निकाल दिया जाता है मेरी ही मां के गर्भ से। मां से क्या शिकायत करूं वह तो खुद बेबस सी पड़ी रहती है जब उसकी देह से मुझको उठाया जाता है। यही तो शिकायत है मेरी अपनी मां से। जब मुझे इस दुनिया में लाने का साहस ही नहीं तुममें तो क्यों बनती हो सृजन की भागीदार। तुम्हें भी तो तुम्हारी मां ने जन्मा होगा ना? तभी तो आज तुम मुझे कोख में ला सकी हो। सोचों, अगर उन्होंने भी ना आने दिया होता तुम्हें तब? तुम अपनी ही बच्ची के साथ ऐसा कैसे होने दे सकती हो? नौ दिन तक छोटी कन्याओं को पूजने वाली मां अपनी ही संतान को नौ माह नहीं रखती क्यों, क्योंकि वह कन्या भ्रूण है। नौ दिनों तक ‘स्त्री पूजा और सम्मान का ढोंग करने वालों’ अपनी आत्मा से पूछों कि देवी के नाम पर रचा यह संकेत क्या देवी ने नहीं सुना होगा? अगली बार जब किसी नन्ही आत्मा को पहचाने जाने के लिए तुम बोलो ‘जय माता दी’ तो मेरी कामना है कि तुम्हारी जुबान लड़खड़ा जाए, तुम यह पवित्र शब्द बोल ही ना पाओ, देवी मां करे, नवरात्रि में तुम्हारी हर पूजा व्यर्थ चली जाए… और आंकड़े यूं ही बढ़ते रहे तो तुम्हारे हर ‘पाप’ पर मेरे सौ-सौ ‘शाप’ लगे।

जाने किस-किस प्रतिभा को तुम
गर्भपात मे मार रहे हो
जिनका कोई दोष नहीं, तुम
उन पर धर तलवार रहे हो
बंद करो कुकृत्य – पाप यह,
नयी सृष्टि रच जाने दो
आने दो रे आने दो, उन्हें इस जीवन में आने दो
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ट्रस्ट का टर्नओवर करीब ११०० करोड़

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे बाबा रामदेव ने विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर रखा है। उनके सबसे करीबी विश्वासपात्र आचार्य बालकृष्ण ३४ कंपनियों के डायरेक्टर हैं। ये सभी कंपनियां केवल पांच साल, याने २००६ से २०११ के बीच अस्तित्व में आईं। सीबीआई और आयकर विभाग ने अब अपनी नजर इन कंपनियों पर डाली है। जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में बाबा के दो ट्रस्ट पतांजलि योगपीठ ट्रस्ट और दिव्य योग मंदिर को निशाने पर लिया गया है। ये ट्रस्ट उत्तराखंड के हरिद्वार में करीब १००० एकड़ जमीन पर बने हुए हैं। २००९-२०१० में इन दोनों ट्रस्ट का टर्नओवर करीब ११०० करोड़ आंका गया। और यदि इन सभी ३४ कंपनियों का टर्न ओवर आंका जाए, तो यह कई करोड़ रुपए होगा। बाबा के विश्वसनीय सलाहकार आचार्य बालकृष्ण इन सभी कंपनियों के डायरेक्टर हैं। पतंजलि आयुर्वेद, जो इन सभी कंपनियों में सबसे बड़ी मानी जाती है की वेबसाइट पर भी बालकृष्ण की जबर्दस्त तारीफ है। इसके अनुसार आचार्य बालकृष्ण को प्रबंधन, प्रशासन और इंजीनियरिंग क्षेत्र का काफी व्यापक अनुभव है औऱ विश्व के कई जाने माने लोग उनसे संपर्क कर, सीखने की कोशिश करते हैं। केंद्र सरकार के कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय में उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये कंपनियां दवाएं, कॉस्मेटिक्स, उर्जा आदि क्षेत्रों की हैं। यही नहीं आचार्य रियल इस्टेट में भी सक्रिय हैं। आटार्य बालकृष्ण की कंपनियों में पतांजलि आयुर्वेद लिमिटेड, दिव्य फार्मेसी योग, आरोग्य हर्बल, झारखंड मेगा फुड पार्क, दिव्य फार्मा और डायनामिक बिल्डकॉम शामिल हैं। आचार्य बालकृष्ण जिन दूसरी कंपनियों के डायरेक्टर हैं उनमें टीवी प्रोडक्शन और ब्राडकास्टिंग के क्षेत्र में वैदिक आस्था भजन ब्राडकास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और वैदिक ब्राडकॉस्टिंग लिमिटेड भी हैं। इनके अलावा बालकृष्ण पतांजलि आयुर्वेद लिमिटेड, पतांजलि बिस्किस्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, पतांजलि एरोमैटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, पतांजलि टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड, पतंजलि फ्लेक्सीपार्क प्राइवेट लिमिटेड, पतंजलि परिवहन प्राइवेट लिमिटेड और पतंजलि हाइ़ड्रोपोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड भी चला रहे हैं।

सलवार समीज मे पकडे गये स्वामी रामदेव

बाबा रामदेव का सत्याग्रह सरकार के अनुलोम – विलोम  के बाद जंग मे बदल गया . सरकार ने पल्तासन  मारा तो बाबा को गेरुआ  की जगह सलवार समीज (महिला ड्रेस ) पहन कर जान बचना पड़ा . रामलीला मैदान में सत्याग्रह पर बैठे बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर  शनिवार मध्य रात्रि के बाद पुलिस बल ने लाठीचार्ज किया और अश्रुगैस के गोले फोड़े। इलेक्ट्रानिक चैनलों ने समर्थकों पर रबर की गोलियां भी चलाये जाने की खबर दी। बाद में पुलिस ने उस मंच पर कब्जा कर लिया जिस पर बैठकर योगी रामदेव बैठे हुए थे। इसके बाद बाबा मंच से कुदकर फरार हो गये . बाद मे महिला टीम मे शरण  लेकर बाबा ने सलवार समीज पहन लिया . तभी पुलिस ने उन्हे गिरफ्तार कर लिया . उन्हे विमान से देहरादून लाया गया इसके बाद सड़क मार्ग से हरिद्वार उनके योग पीठ पर पहुचा दिया गया . हाई प्रोफाईल इस ड्रामे  मे भाजपा को एक बड़ा मुद्या मिल गया .बाबा रामदेव ने पुलिस से भी टकराव की स्थिति पैदा न करने की अपील की। प्रशासन ने रामलीला मैदान में तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इसी के साथ योग शिविर की इजाजत को भी प्रशासन ने रद कर दिया।

………और हार गई सरकार

अम्बरिश पाण्डेय
पिछले तीन दिनों से बाबा रामदेव और केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के बीच जो शह मात का खेल चल रहा था वह शनिवार की शाम को तब चरम पर पहुंच गया जब कपिल सिब्बल ने बाबा रामदेव के प्रतिनिधि आचार्य बालकृष्ण की एक चिट्ठी सार्वजनिक कर दी जिसमें आचार्य बालकृष्ण ने सत्याग्रह शुरू होने से पहले ही लिखित में यह आश्वासन दे दिया था कि वे सुबह अनशन शुरू करेंगे और दोपहर तक समाप्त होने की घोषणा कर देंगे. जब रामदेव ने दोपहर तक सत्याग्रह समाप्त होने की घोषणा नहीं की तो दोपहर बाद कपिल सिब्बल पीआईबी पहुंच गये और उन्होंने आचार्य बालकृष्ण की वह चिट्ठी सार्वजनिक कर दी जिसमें उन्होंने सत्याग्रह के शुरू होने से पहले ही खत्म होने का आश्वासन दे दिया था. बाबा नहीं मे तो सरकार ने उनके सत्याग्रह पर हमला ही बोल दिया केंद्र सरकार की यह ओछी हरकत पर हँसी आती हैं. VMW Team के अम्बरिश पाण्डेय की एक रिपोर्ट ……….
                     रामदेव के ऊपर इस चिट्ठी से बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि अगर   उन्होंने सरकार से समझौता कर लिया था तो फिर अनशन और सत्याग्रह के नाम पर पूरे देश को दिनभर बेवकूफ क्यों बनाते रहे? शाम को जब पत्रकारों ने उनसे यही सवाल पूछा तो रामदेव के पास कोई जवाब नहीं था और वे टाल मटोल करते रहे. हां, इस सवाल पर उनके सत्याग्रही जरूर उत्तेजित हो गये जो बाबा रामदेव के लिए दवाइयों का कारोबार करते हैं या फिर योग के कैंप करते हैं. इसके लिेए बाकायदा बाबा रामदेव के ट्रस्ट से उन्हें पैसा दिया जाता है और यहां की लगभग सारी जनता रामदेव के योग करने और सिखानेवाले ही आये हैं.जब कपिल सिब्बल ने आचार्य बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर दी तो बाबा रामदेव के होश उड़ गये. शाम को साढ़े पांच बजे उन्होंने मीडिया और उपस्थित सत्याग्रहियों से बात की थी और भरोसा दिलाया था कि जल्द ही वे कोई बड़ा ऐलान करनेवाले हैं. आठ बजे के करीब बाबा रामदेव दोबारा लौटे. तब तक कपिल सिब्बल बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर चुके थे. रामदेव दोबारा लौटे तो बौखलाए हुए थे. सफाई दे रहे थे. उन्होंने कहा किअगर देश में अस्थिरता और अशांति पैदा होती है तो उसके लिए कपिल सिब्बल जिम्मेदार होंगे.” निश्चित रूप से अब बाबा रामदेव अपना चेहरा बचाने की कोशिश में लग गये हैं. बातचीत के नाम पर सरकार ने उन्हें जिस तरह से घेर रखा था उसका नतीजा सामने गया है. सिब्बल ने रामदेव के साथ विश्वासघात किया है तो रामदेव ने सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ छल किया है. अब भले ही बाबा रामदेव कहें कि कपिल सिब्बल ने उनके साथ धोखा किया है. इसलिए अब वे उनके साथ आगे कोई वार्ता नहीं करेंगे लेकिन बाबा रामदेव ने भी सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ धोखा किया है. क्या अब भी उनकी बात कोई सुनेगा? अगर वे पहले ही सरकार से समझौता कर चुके थे तो फिर सत्याग्रह का नाटक क्यों किया? हालांकि बाबा रामदेव भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे लगवाकर अपनी लाज बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके सत्याग्रह की कलई खुल चुकी है जिसके दोबारा चढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है. लेकिन सरकार ने जो तरीका अपनाया वो भी गलत था अगर रामदेव ट्रेन की पटरी पर बैठते  उनकी बात आसानी  मान  गई होती  भ्रष्टाचार के कई आरोप झेल रही केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने जानबूझकर काले धन को लेकर तेजी दिखानी शुरू की है ताकि आम जनता के बीच यह संदेश दिया जा सके कि वह अपने स्तर पर काले धन पर रोक लगाने के प्रति गंभीर है। काले धन को लेकर सरकार के रवैये को विपक्षी दल लगातार कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इशारे पर बाबा रामदेव के खिलाफ आधी रात में फासीवादी कार्रवाई की गई। इसके खिलाफ रविवार शाम सात बजे से दिल्ली के राजघाट में पार्टी 24 घंटे का सत्याग्रह करेगी। पार्टी ने इस घटना के लिए प्रधानमंत्री और सोनिया से देश से माफी मांगने को कहा। सत्याग्रह में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अध्यक्ष नितिन गडकरी और लोकसभा राज्यसभा में विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली के अलावा राजनाथ सिंह आदि वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
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