रेल बज़ट- दरियादिली नही दीदी की,यह दीदी की माया है

डॉ. आर. वी. चतुर्वेदी
  आज ममता बनर्जी  अपना रेलवे बजट पेश कर रही है, सुबह से ही मीडिया का फोकस रेलवे बजट पर था, न्यूज़ एंकर ग्राफिक्स की बनीं ट्रेनों में बैठकर एंकरिंग कर अपना मज़ाक उडवा रहे और संवाददाता रेलवे स्टेशनों में जा-जाकर लोगों से उनकी बजट पर राय ले रहे थे। न्यूज़ चैनलों में ममता उनकी दीदी बनकर छायीं रहीं रेल बज़ट पर VMW Team  के डॉ. आर. वी. चतुर्वेदी जी की एक रिपोर्ट…

    25 फरवरी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे दिल की धड़कने तेज हो रही हैं। सांसें अटकी हैं। डर लग रहा है कहीं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पटना जाने वाली उसी ट्रेन की सेकेंड क्लास टिकट खरीदने के लिए जेब से ज्यादा पैसे तो खर्च नहीं करने पड़ेंगे। घर जाने से पहले 10 बार सोचने की नौबत तो नहीं आएगी। बड़े भाई देवरिया  में रहते हैं। कहीं उनके बुलावे पर बहाना तो नहीं बनाना पड़ेगा। जी हां रेल बजट आने वाला है। एक साल से घर का बजट आर्थिक मंदी ने बिगाड़ा है। घर के कुछ बर्तन संभाल के इकठ्ठा किए तो महंगाई ने उसे तितर-बितर कर दिया। शहर में रहने वालों को गांव के अनाज का सहारा था। लेकिन डर है कि कहीं रेलवे का बजट बिगड़ गया तो गांव जाने का हालत भी नहीं रहेगी। लालू यादव का रेलवे बजट लंदन के मैनेजमेंट वालों को भी भाया। लेकिन ममता बनर्जी का पिछला रेल बज़ट कुछ खास नहीं रहा, एक अदद रेलमंत्री हिमाचल से होगा तो वहां भी रेल चलेगी वरना यूं लगता है कि रेलों की ज़रूरत केवल बिहार ओर बंगाल में ही पड़ती है…
ममता बनर्जी अपने हर भाषण में खुद को गरीबों का मसिहा बताते हुए कहती है  कि ‘उन्होंने अपने पुरे कार्यकाल में न ही रेल किराया बढाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला है और न ही घाटे का रेल बज़ट पेश किया़’.पर क्या रेलमंत्री लोगों को इस हद तक बेवकूफ समझते हैं कि आम जनता उनकी बातों का सही आकलन भी नहीं कर सकती?
उन्होंने लाभ का बज़ट पेश ज़रुर किया है पर भाड़े को पिछले दरबाजे से बढाकर.आज स्थिति यह है कि ट्रेनों की संख्या बढाने के बजाए, जनरल कोटे के सीट घटाकर तत्काल कोटे की सीट संख्या बढा दी गई है.ट्रेनों को सुपरफास्ट कर भाड़ा तो अधिक वसूला जा रहा है पर आज भी वे ट्रेनें सफ़र तय करने में उतना ही समय ले रही है जितना पहले लेती थी|

रेलवे की तरह नेता और बाबु का भी बज़ट भारी-भरकम होता है
तभी तो रेल मंत्रालय के लिए,मारा – मारी होता है।
 
डॉ. आर. वी. चतुर्वेदी
VMW Team (India’s New Invention)
+91-9044412246,45,27,23

3 comments

  • लालू प्रसाद या ममता बनर्जी को किसी ने आम आदमी पर 'मेहरबानी' दिखाने, धड़ल्ले से नई योजनाएं शुरू करने, अपने-अपने चुनावी क्षेत्रों में नई ट्रेनों की संख्या या फ्रीक्वेंसी बढ़ाने से जुड़े कदम उठाने से किसी ने रोका भी नहीं।

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  • बेनामी

    होटल शॉपिंग कांप्लेक्सों मे पैसें सभी उड़ाएँगे,धनवर्षा से मंत्रालय के गलियारें भर जाएँगे,

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  • क्षमा चाहता हूँ,थोड़ी देर से आया पर जैसा आपको पता ही है,भारतीय रेल बज़ट है तो भारतीय ट्रेनो के अनुरूप ही तो चलेगा

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