राजस्थान….एक प्रदेश

 हमारे प्रिय पाठकगण  हम आप के लिए हर सफ्ताह के नए प्रदेश के बारे में जानकारी दे ने जा रहे है. अच्छा लगने पर अपना सुझाव जरुर मेल या कमेन्ट करे! इस बार का प्रदेश हैराजस्थान
एम.के.पाण्डेय “निल्को जी”

राजस्थान भारत गणराज्य का क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है। यहाँ की राजधानी जयपुर है।  इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में उत्तरप्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग कि.मी. (1,32,139 वर्ग मील) है।
आजादी से पहले यह क्षेत्र राजपूताना (राजपूतों का स्थान) कहलाता था। रणबांकुरे राजपूतों ने कई सदस्यों तक इस क्षेत्र पर राज्य किया।
राजस्थान का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से शुरू होता है। ईसा पूर्व 3000 से 1000 के बीच यहां की संस्कृति सिंधु घाटी सभ्यता जैसी थी। सातवीं शताब्दी में यहां चौहान राजपूतों का प्रभुत्व बढ़ने लगा और बारहवीं शताब्दी तक उन्होंने एक साम्राज्य स्थापित कर लिया था। चौहानों के बाद इस योद्धा जाति का नेतृत्व मेवाड़ के गहलोतों ने संभाला। मेवाड़ के अलावा जो अन्य रियासतें ऐतिहासिक दृष्टि से प्रमुख रहीं, वे हैं-मारवाड़, जयपुर, बूंदी, कोटा, भरतपुर और अलवर। अन्य सभी रियासतें इन्हीं रियासतों से बनीं। इन सभी रियासतों ने 1818 में अधीनस्थ गठबंधन की ब्रिटिश संधि स्वीकार कर ली जिसमें राजाओं के हितों की रक्षा की व्यवस्था थी, लेकिन इस संधि से आम जनता स्वाभाविक रूप से असंतुष्ट थी।
1857 के विद्रोह के बाद लोग स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए महात्मा गांधी के नेतृत्व में एकजुट हुए। सन 1935 में अंग्रेजी शासन वाले भारत में प्रांतीय स्वायत्तता लागू होने के बाद राजस्थान में नागरिक स्वतंत्रता तथा राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन और तेज हो गया। 1948 में इन बिखरी हुई रियासतों को एक करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 1956 में राज्य में पुनर्गठन कानून लागू होने तक जारी रही। सबसे पहले 1948 में मत्स्य संघ बना, जिसमें कुछ ही रियासतें शामिल हुईं। धीरे-धीरे बाकी रियासतें भी इसमें मिलती गईं। सन 1949 तक बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, और जैसलमेर जैसी मुख्य रियासतें इसमें शामिल हो चुकीं थीं और इसे बृहत्तर राजस्थान संयुक्त राज्य का नाम दिया गया। सन 1958 में अजमेर, आबू रोड तालुका और सुनेल टप्पा के भी शामिल हो जाने के बाद वर्तमान राजस्थान राज्य विधिवत अस्तित्व में आया।
राज्य की मुख्य फसलें हैं-चावल, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, गेहूं, तिलहन, दालें, कपास और तंबाकू। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में सब्जियों और संतरा तथा माल्टा जैसे नींबू प्रजाति के फलों के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। यहां की अन्य फसलें हैं-लाल मिर्च, सरसों, मेथी, जीरा और हींग।
राजस्थान सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ खनिजों के मामले में भी समृद्ध रहा है और अब वह देश के औद्योगिक परिदृश्य में भी तेजी से उभर रहा है। राज्य के प्रमुख केंद्रीय प्रतिष्ठानों में देबरी (उदयपुर) में जस्ता गलाने का संयंत्र, खेतड़ी (झुंझनूं) में तांबा परियोजना और कोटा में सूक्ष्म उपकरणों का कारखाना शामिल है।
मुख्य उद्योग हैं : वस्त्र, ऊनी कपड़े, चीनी, सीमेंट, कांच, सोडियम संयंत्र, आक्सीजन, वनस्पति रंग, कीटनाशक, जस्ता, उर्वरक, रेल के डिब्बे, बॉल बियरिंग, पानी व बिजली के मीटर, टेलीविजन सेट, सल्फ्यूरिक एसिड, सिंथेटिक धागे तथा तापरोधी ईंटें आदि। बहुमूल्य और कम मूल्य के रत्नों के अलावा कास्टिक सोडा, कैलशियम कार्बाइड, नाइलोन तथा टायर आदि सें संबंधित महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां हैं।
राज्य में जिंक कंसंट्रेट, पन्ना, गार्नेट, जिप्सम, खनिज चांदी, एस्बेस्टस, फैल्सपार तथा अभ्रक के प्रचुर भंडार हैं। राज्य में नमक, रॉक, फास्फेट, संगमरमर तथा लाल पत्थर भी काफी मात्रा में मिलता है। सीतापुर (जयपुर) में देश का पहला निर्यात संवर्द्धन पार्क बनाया गया है
जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, सवाई माधोपुर, कोटा और भरतपुर राज्य के प्रमुख रेलवे जंक्शन हैं।
दिल्ली और मुंबई से जयपुर, जोधपुर तथा उदयपुर के लिए नियमित विमान सेवाएं हैं।
राजस्थान मेलों और उत्सवों की धरती है। होली, दीपावली, विजयदशमी, क्रिसमस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय त्‍यौहारों के अलावा अनेक देवी-देवताओं, संतों और लोकनायकों तथा नायिककाओं के जन्मदिन मनाए जाते हैं। यहां के महत्वपूर्ण मेले हैं-तीज, गणगौर (जयपुर), अजमेर शरीफ और गलियाकोट के वार्षिक उर्स, बेनेश्वर (डूंगरपुर) का जनजातीय कुंभ, श्री महावीर जी (सवाई माधोपुर मेला), रामदेऊरा (जैसलमेर), जम्भेश्वर जी मेला (मुकाम-बीकानेर), कार्तिक पूर्णिमा और पशु मेला (पुष्कर अजमेर) और श्याम जी मेला (सीकर) आदि।
राज्य में पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं-जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, माउंट आबू, अलवर में सरिस्का बाघ विहार, भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी विहार, अजमेर, जैसलमेर, पाली, चित्तौड़गढ़ आदि।
इसी के साथ अगले हफ्ते एक नई प्रदेश के बारे में जानेगे तब तक के लिए नमस्कार !
जय हिंद !
मधुलेश पाण्डेय “निल्को जी”

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5 comments

  • बेनामी

    अच्छी चीज लगे रहो निल्को भाईइइइइ

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  • राजस्थान भारत वर्ष के पश्चिम भाग में अवस्थित है जो प्राचीन काल से विख्यात रहा है। तब इस प्रदेश में कई इकाईयाँ सम्मिलित थी जो अलग-अलग नाम से सम्बोधित की जाती थी। उदाहरण के लिए जयपुर राज्य का उत्तरी भाग मध्यदेश का हिस्सा था तो दक्षिणी भाग सपालदक्ष कहलाता था। अलवर राज्य का उत्तरी भाग कुरुदेश का हिस्सा था तो भरतपुर,धोलपुर,करौली राज्य शूरसेन देश में सम्मिलित थे। मेवाड़ जहाँ शिवि जनपद का हिस्सा था वहाँ डूंगरपुर-बांसवाड़ा वार्गट (वागड़) के नाम से जाने जाते थे। इसी प्रकार जैसलमेर राज्य के अधिकांश भाग वल्लदेश में सम्मिलित थे तो जोधपुर मरुदेश के नाम से जाना जाता था। बीकानेर राज्य तथा जोधपुर का उत्तरी भाग जांगल देश कहलाता था। इसी प्रकार प्रतापगढ़, झालावाड़ तथा टोंक का अधिकांस भाग मालवादेश के अधीन था। १२ वी शदी तक राजस्थान के अधिकान्श भाग पर गुर्जरो का राज्य रहा है । गुजरात तथा राजस्थान का अधिकान्श भाग गुर्जरत्रा (गुर्जरो से रक्षित देश) के नाम से जाना जाता था। गुर्जर प्रतिहारो ने ३०० सालो तक पुरे उत्तरी-भारत को अरब आक्रान्ताओ से बचाया था।बाद में जब राजपूत जाति के वीरों ने इस राज्य के विविध भागों पर अपना आधिपत्य जमा लिया तो उन भागों का नामकरण अपने-अपने वंश अथवा स्थान के अनुरुप कर दिया। ये राज्य उदयपुर,डूंगरपुर,बांसवाड़,प्रतापगढ़,जोधपुर,बीकानेर,किशनगढ़,( जालोर ) सिरोही,कोटा,बूंदी,जयपुर,अलवर,भरतपुर,करौली,झालावाड़, और टोंक थे। ब्रिटिशकाल मे राजस्थान राजपूताना नाम से जाना जाता था।राजपूत राजा महाराणा प्रताप अपनी बहादुरी के लिये जाने जाते है। इन राज्यों के नामों के साथ-साथ इनके कुछ भू-भागों को स्थानीय एवं भौगोलिक विशेषताओं के परिचायक नामों से भी पुकारा जाता है। ढ़ूंढ़ नदी के निकटवर्ती भू-भाग को ढ़ूंढ़ाड़ (जयपुर) कहते हैं। मेव तथा मेद जातियों के नाम से अलवर को मेवात तथा उदयपुर को मेवाड़ कहा जाता है। मरु भाग के अन्तर्गत रेगिस्तानी भाग को मारवाड़ भी कहते हैं। डूंगरपुर तथा उदयपुर के दक्षिणी भाग में प्राचीन ५६ गांवों के समूह को \”\”छप्पन नाम से जानते हैं। माही नदी के तटीय भू-भाग को कोयल तथा अजमेर के पास वाले कुछ पठारी भाग को ऊपरमाल की संज्ञा दी गई है।

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  • बेनामी

    RAJASTHAN VIRO KA STHAN HAI.

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  • बेनामी

    यह क्षेत्र राजपूताना (राजपूतों का स्थान) कहलाता था।

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  • बेनामी

    good

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