भारतीयता की पहचान है साड़ी——————–एम. के. पाण्डेय "निल्को जी"

निल्को जी
साड़ी भारतीय औरत का मुख्य परिधान है। यह शायद विश्व की सबसे लंबी और पुराने परिधानों में से गिना जाता है। यह लगभग 5 से 6 यार्ड लम्बी बिना सिली हुए कपड़े का टुकड़ा होता है 
साड़ी पहनने के कई तरीक़े होते हैं जो भौगोलिक स्थिति और पारंपरिक मूल्यों और रुचियों पर निर्भर करता है। अलग-अलग शैली की साड़ियों में कांजीवरम साड़ी, बनारसी साड़ी, पटोला साड़ी और हकोबा मुख्य हैं 
साड़ी बांधने के कई तरीके
वैसे तो सबसे आम तरीका यही है कि साड़ी का एक हिस्सा कमर में लपेटा जाए और दूसरा हिस्सा कंधे पर समेटा जाए। पर देश के अलग–अलग हिस्से में अलग–अलग तरीके से साड़ी बांधी जाती है। साड़ी पर शोध करने वाले फ्रांस के विशेषज्ञ सी. बाउलैंगर ने साड़ी बांधने के अलग–अलग तरीकों को इस तरह नाम दिए हैं:

निवि-: यह नाम मूल रूप से आंध्र प्रदेश में साड़ी बांधने के तरीके को दिया गया है।

गुजराती : साड़ी का खुला सिरा दाएं कंधे पर लपेटा जाता है। एक किनारा पीछे से आगे की ओर रखा जाता है।

मराठी : महाराष्ट्र में जिस तरह साड़ी बांधी जाती है उसे काष्ठा भी कहते हैं। यह कुछ उसी तरह का है, जैसे पुरुष धोती बांधते हैं। साड़ी का बीच का हिस्सा समेट कर पीछे की ओर से कमर के बीच में बांधा जाता है। और दोनों किनारे दोनों पैरों की ओर लपेटे जाते हैं। इसके साथ एक लंबा कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शरीर का ऊपरी हिस्सा ढका जाता है।

मदिसारा स्टाइल : तमिलनाडु और केरल की ब्राrाण महिलाएं जिस स्टाइल में साड़ी पहनती है, उसे मदिसारा नाम दिया गया है।

कोदागु स्टाइल : यह स्टाइल कर्नाटक के कोदागु जिला की महिलाओं तक सीमित है। महिलाएं सामने के बजाय पीछे की ओर प्लीट बनाती हैं। खुला किनारा दाएं कंधे पर पीछे से आगे की ओर लाते हुए शरीर का ऊपरी हिस्सा ढका जाता है। साड़ी का बाकी हिस्सा पिन लगा कर टाइट कर दिया जाता है।

गोंड : मध्य भारत में इसी शैली में साड़ी बांधी जाती है। कमर में लपेटकर साड़ी पहले बाएं कंधे की ओर लाई जाती है और फिर बचे हुए भाग से बाकी शरीर ढका जाता है।

कहां की कौन सी साड़ी है मशहूर
बनारसी और शालू : उत्तर प्रदेश

पैठानी : महाराष्ट्र

बांधनी : गुजरात व महाराष्ट्र

कोटा डोरिया : राजस्थान

लुगाडे : महाराष्ट्र

पटोला : गुजरात

चंदेरी : मध्य प्रदेश

माहेश्वरी : मध्य प्रदेश

कोसा सिल्क : छत्तीसगढ़

कांचीपुरम, अरानी : तमिलनाडु

मंगलागिरी : आंध्र प्रदेश

इलकाल, मैसूर सिलक : कर्नाटक

तसर सिल्क : बिहार

राजशाही सिलक, ढाकाई बनारसी, तांगेल कॉटन : बांग्‍लादेश

मूंगा सिल्क : असम

तांत : शांतिपुर, पश्चिम बंगाल

मुर्शिदाबाद सिल्क, बालूचारी सिल्क : पश्चिम बंगाल

कोटकी, इक्कत : उड़ीसा

एम. के. पाण्डेय “निल्को जी”

2 comments

  • बेनामी

    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है

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  • बेनामी

    JANKARI HAI SARI KE BARE ME

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