खूब काटती चांदी यह तो हाथीवाली रानी है……….

खूब काटती चांदी यह तो हाथीवाली   रानी है……….
मोटी चमड़ी , मोटी दमड़ी मोट नोट के माला !
उनकर  लोगवा  उन्हें पेन्हावल , दूसरा के काहे दुखला !!
नोट पर टिकेट , नोट पर सत्ता ! नोट नहीं कट जाई पत्ता !!
नोट पर कुर्सी नोट पर बत्ती ! नोट नहीं त लत्ता-मुक्की !!
नोट के खोट न समझ बाबु ! नोट खातिर जन मराला !!
उनकर  लोगवा  उन्हें पेन्हावल , दूसरा के काहे दुखला !!
नोट के चंदा, नोट के धंधा ! नोट करावे कम भी गन्दा !!
नोट पर साधू, नोट पर संत ! नोट पर चोर-उचक्का लंठ !!
नोट  लक्ष्मी  के स्वरूप ह ! नोट के चहुओर  बा बोलबाला !! 
उनकर  लोगवा  उन्हें पेन्हावल , दूसरा के काहे दुखला !!

नर्वदेश्वर पाण्डेय ‘देहाती’

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